2005 से 2026 तक का सफर: बिजली वितरण से लेकर हरित ऊर्जा क्रांति तक, महाराष्ट्र के विकास की अखंड ऊर्जा वाहिनी बना महावितरण
नागपुर: महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, महावितरण, आज अपने 21वें स्थापना दिवस का गौरवपूर्ण उत्सव मना रही है। वर्ष 2005 में महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल के पुनर्गठन से अस्तित्व में आई यह कंपनी आज सिर्फ बिजली वितरित करने वाली संस्था नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सामाजिक, औद्योगिक और कृषि विकास की रीढ़ बन चुकी है। दो दशकों का यह सफर खट्टे-मीठे अनुभवों से भरा रहा, लेकिन हर चुनौती को अवसर में बदलकर महावितरण ने राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत की है।
तकनीक से बदली तस्वीर, बना आधुनिक वितरण तंत्र
महावितरण का सफर केवल तार और खंभों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक तकनीकी क्रांति का साक्षी बना। शुरुआती दौर में जर्जर लाइनों और बार-बार ठप होती बिजली से जूझने वाले महाराष्ट्र में आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
ऑटोमेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग: खराबी का तुरंत पता लगाने के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों का इस्तेमाल शुरू किया गया।
स्मार्ट मीटरिंग क्रांति : बिलिंग में पारदर्शिता और उपभोक्ता सुविधा के लिए स्मार्ट मीटरों का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे का विस्तार : हजारों नए उपकेंद्रों और ट्रांसफॉर्मरों की स्थापना से वितरण क्षमता कई गुना बढ़ी है।
किसानों के लिए वरदान: मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0
महाराष्ट्र की कृषि को दिन में बिजली देना सबसे बड़ी चुनौती थी। महावितरण ने ‘मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0’ से इस चुनौती को सुनहरे अवसर में बदल दिया। हजारों कृषि फीडरों के सौर ऊर्जीकरण से आज लाखों किसानों को दिन में निर्बाध बिजली मिल रही है। इससे सिंचाई आसान हुई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिली है।
सामाजिक सरोकारों में भी अव्वल
महावितरण ने कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को कागजों से निकालकर जमीन पर उतारा है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल: सीधी भर्ती में 33% महिला आरक्षण देने वाली यह देश की पहली बिजली कंपनी है। आज हजारों महिला कर्मचारी तकनीकी पदों पर कार्यरत हैं।
अनुकंपा नियुक्ति: कर्तव्य के दौरान दिवंगत कर्मचारियों के 8 हजार से अधिक आश्रितों को नौकरी देकर कंपनी ने परिवारों को संबल दिया है।
उद्योगों को मिली ऊर्जा, महाराष्ट्र बना निवेश का हब
24×7 गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर महावितरण ने महाराष्ट्र को ‘देश का पावरहाउस’ बनाने में अहम भूमिका निभाई। उद्योगों की उत्पादकता बढ़ने से रोजगार के नए अवसर सृजित हुए और राज्य की जीडीपी को सीधा लाभ मिला।
भविष्य का रोडमैप: हरित ऊर्जा और शून्य दुर्घटना
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री लोकेश चंद्र के नेतृत्व में महावितरण अब हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 2030 तक 38 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा सहित कुल 45 हजार मेगावाट बिजली क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। ‘शून्य दुर्घटना महावितरण’ अभियान के तहत कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीमती मेघना बोर्डीकर के मार्गदर्शन तथा अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला और सीएमडी श्री लोकेश चंद्र के नेतृत्व में महावितरण ने साबित किया है कि स्पष्ट लक्ष्य और कठिन परिश्रम से हर चुनौती प्रगति की सीढ़ी बन जाती है।
21वां स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आधुनिक, डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल महावितरण के निर्माण का नया संकल्प है। आने वाला कल और भी उज्ज्वल होगा, यह हर महाराष्ट्रवासी का विश्वास है।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –
2024 में877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
2025 में849 मंजूर, 87 खारिज।
1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।
केसों का बोझ – कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।
15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।
भरण-पोषण और कस्टडी – भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।
स्टाफ की भारी कमी से दबाव –
RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली
कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।