- नवरात्रि से दिवाली 2026 तक नागपुर-विदर्भ में 15,000-20,000 करोड़ की आर्थिक गतिविधियों का अनुमान, बालकृष्ण भरतीया ने कहा – परंपरा ही व्यापार की ताकत है
नागपुर :
नवरात्रि से दशहरा, धनतेरस, दीपावली और उसके बाद के विवाह समारोहों तक का समय वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मौसमों में से एक है। नागपुर और संपूर्ण विदर्भ में इस अवधि के दौरान उपभोक्ता खर्च, खुदरा बिक्री, परिवहन, खाद्य पदार्थ, कपड़े, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू वस्तुएँ, पर्यटन तथा अस्थायी रोजगार में वृद्धि होती है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए हमारे पारंपरिक उत्सव अहम भूमिका निभाते हैं, ऐसा कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतीया ने कहा। वे टीम कैट नागपुर द्वारा आयोजित आर्थिक गतिविधियों के संबंध में एक गोष्ठी में बोल रहे थे।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स और स्थानीय व्यापारिक संगठनों के लिए यह पारंपरिक खुदरा व्यापारियों, छोटे निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, फेरीवालों, कारीगरों और सेवा प्रदाताओं के आर्थिक योगदान का आकलन करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।
नागपुर और विदर्भ का अनुमानित व्यापार
भरतीया ने बताया कि त्योहारों के दौरान अनुमानित कुल व्यापार नागपुर शहर एवं आसपास के व्यापारिक क्षेत्र में लगभग ₹4,000-5,000 करोड़ होने की संभावना है। उसी तरह संपूर्ण विदर्भ क्षेत्र – 11 जिले, जिसमें नागपुर भी शामिल है – में एक आकलन के मुताबिक ₹15,000-22,000 करोड़ होने की संभावना है।
यह नवरात्रि से दीपावली तक वस्तुओं की बिक्री तथा संबंधित सेवाओं के संभावित सकल कारोबार के प्रारंभिक अनुमान हैं। विदर्भ के आंकड़े में नागपुर शामिल है, इसे अलग से जोड़ना नहीं चाहिए।
इन अनुमानों के पीछे कुछ आधार हैं। अक्टूबर 2025 की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में नागपुर के दीपावली व्यापार का अनुमान लगभग ₹3,000-4,000 करोड़ बताया गया था। एक अन्य रिपोर्ट में धनतेरस 2025 के दिन नागपुर में ₹1,000 करोड़ से अधिक के व्यापार का अनुमान प्रकाशित हुआ था। ये रिपोर्ट किए गए अनुमान हैं, ऑडिट किए हुए आंकड़े नहीं। CAIT ने वर्ष 2025 में नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में लगभग ₹5.40 लाख करोड़ के खुदरा वस्तु व्यापार और ₹65,000 करोड़ के सेवा कारोबार की सूचना दी थी।
इस आधार पर 2026 के लिए दिए गए आंकड़े योजना बनाने हेतु अनुमानित सीमाएं हैं, पुष्ट बाजार पूर्वानुमान नहीं। इन्हें स्थानीय व्यापारिक संगठनों और बाजार सर्वेक्षणों से सत्यापित करना आवश्यक होगा।
क्षेत्रवार व्यापार का अनुमान
बालकृष्ण भरतीया ने कहा कि नागपुर में क्षेत्रवार अनुमानित व्यापार निम्नलिखित विवरण द्वारा नागपुर में ₹4,000-5,000 करोड़ के संभावित त्योहारी वस्तु कारोबार के आधार पर तैयार किया गया एक प्रारंभिक अनुमान है। यह वास्तविक क्षेत्रवार बिक्री के आंकड़ों पर आधारित नहीं है।
व्यापार का क्षेत्र अनुमानित कारोबार
सोना, चाँदी, आभूषण एवं बुलियन ₹700-1,000 करोड़
कपड़े, साड़ियाँ, जूते एवं फैशन ₹600-800 करोड़
इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल एवं घरेलू उपकरण ₹450-650 करोड़
मोटर वाहन, दोपहिया वाहन एवं सहायक वस्तुएँ ₹450-650 करोड़
किराना, मिठाई, सूखे मेवे एवं खाद्य पदार्थ ₹400-550 करोड़
घरेलू सजावट, बर्तन एवं फर्नीचर ₹300-400 करोड़
बिजली के सामान, रोशनी, दीये एवं सजावटी वस्तुएँ ₹250-350 करोड़
उपहार, खिलौने, कॉस्मेटिक्स एवं अन्य खुदरा वस्तुएँ ₹350-450 करोड़
कुल सांकेतिक वस्तु कारोबार ₹3,500-4,850 करोड़
नागपुर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों – सीताबर्डी, इतवारी, महल, गांधीबाग, धरमपेठ और सदर – में इस दौरान अच्छी व्यावसायिक गतिविधियाँ होने की संभावना है। पिछले त्योहारी सीजन में भी इन बाजारों में भारी भीड़, आभूषण और कपड़ों की मजबूत बिक्री और रोशनी-सजावट के सामानों की बढ़ी मांग देखी गई थी।
रोजगार और आय पर प्रभाव
बालकृष्ण भरतीया ने आगे कहा कि कितने लोगों को रोजगार एवं आय मिल सकती है, उसका भी अनुमान इस प्रकार है। केवल कुल कारोबार के आधार पर रोजगार का सटीक अनुमान लगाना उचित नहीं है। बिक्री का प्रत्येक रुपया मजदूरी या स्थानीय आय के बराबर नहीं होता।
CAIT तथा अन्य व्यापारिक संगठनों के सर्वेक्षण के अनुसार लाभान्वित होने वाले वर्ग इस प्रकार हैं:
-खुदरा एवं थोक व्यापारी बिक्री और माल के कारोबार में वृद्धि
-फेरीवाले एवं ठेला व्यवसायी मौसमी कमाई एवं स्वरोजगार
-लघु निर्माता एवं कारीगर उत्पादन के अतिरिक्त ऑर्डर
-परिवहन एवं डिलीवरी कर्मचारी माल ढुलाई एवं डिलीवरी से आय
-खाद्य व्यवसाय एवं कैटरर्स अधिक ऑर्डर एवं अस्थायी नियुक्तियाँ
-महिला एवं घरेलू उद्यमी खाद्य पदार्थ, कपड़े, हस्तशिल्प एवं उपहारों की बिक्री
-कर्मचारी एवं अस्थायी श्रमिक वेतन, अतिरिक्त काम एवं मौसमी रोजगार
-किसान एवं ग्रामीण व्यापारी कृषि आय से समर्थित उपभोक्ता खर्च
सर्वेक्षण में केवल काम करने वाले लोगों की संख्या नहीं, बल्कि इस अवधि में उत्पन्न अतिरिक्त आय भी दर्ज की जाएगी।
बैठक में उपस्थित गणमान्य
बैठक में प्रमुखता से गोपाल अग्रवाल चेयरमैन, किशोर धाराशिवकर संरक्षक, राजकुमार गुप्ता प्रेसिडेंट, विनोद गुप्ता सचिव, पूजा झाम महिला संयोजक, आरती बादल कार्यालय सचिव, अश्विनी गुप्ता, गोविंद पटेल, संतोष गुप्ता, राजू जैन, दीपा पचौरी आदि उपस्थित थे।