केवल कई आपराधिक मामले दर्ज होना निवारक नजरबंदी का आधार नहीं; सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होना आवश्यक : हाईकोर्ट
नागपुर, 15 अक्टूबर 2026: व्यक्तिगत स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने पुणे जिले के बारामती निवासी सुरेंद्र रवींद्र काजले के खिलाफ पारित निवारक नजरबंदी आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अनेक आपराधिक मामले दर्ज होना मात्र निवारक नजरबंदी का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता, जब तक उसकी कथित गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने का ठोस प्रमाण न हो।
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति राज डी. वाकोडे की खंडपीठ ने 12 अक्टूबर 2026 को आपराधिक रिट याचिका क्रमांक 520/2026 को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता के विरुद्ध पारित नजरबंदी आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही न्यायालय ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता किसी अन्य आपराधिक मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
याचिकाकर्ता सुरेंद्र काजले ने पुणे के जिलाधिकारी द्वारा महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1981 (एमपीडीए अधिनियम) के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि के लिए पारित निवारक नजरबंदी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मीर नगमान अली ने पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोक्ता एस. एस. जाचक उपस्थित हुए।
आठ आपराधिक मामलों के आधार पर की गई थी नजरबंदी
नजरबंदी आदेश मुख्यतः वर्ष 2013 से 2025 के बीच याचिकाकर्ता के विरुद्ध दर्ज आठ आपराधिक मामलों, उसके खिलाफ की गई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तथा दो गोपनीय गवाहों के बयानों पर आधारित था।
प्रशासन का तर्क था कि याचिकाकर्ता लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है तथा सामान्य कानूनी कार्रवाई उसकी गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर उसके विरुद्ध एमपीडीए अधिनियम के तहत निवारक नजरबंदी की कार्रवाई की गई थी।
व्यक्तिगत विवाद को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा नहीं माना जा सकता
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मीर नगमान अली ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि जिन घटनाओं के आधार पर नजरबंदी आदेश पारित किया गया, वे मुख्यतः व्यक्तियों के बीच उत्पन्न विवादों से संबंधित थीं। ऐसी घटनाओं को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी तर्क प्रस्तुत किया कि निवारक नजरबंदी एक असाधारण कानूनी उपाय है, जिसका प्रयोग केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। संबंधित प्राधिकारी यह स्थापित करने में विफल रहा कि याचिकाकर्ता की गतिविधियों से समाज में व्यापक भय, असुरक्षा अथवा सार्वजनिक शांति में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ था।
कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण अंतर
याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था (Law and Order) तथा सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं।
न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक आपराधिक घटना अथवा शांति भंग होने की स्थिति को सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान नहीं माना जा सकता।
खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए आरोप मुख्यतः व्यक्तिगत विवादों से संबंधित थे। नजरबंदी प्राधिकारी द्वारा प्रस्तुत सामग्री से यह प्रमाणित नहीं होता कि इन घटनाओं के कारण आम जनता में व्यापक भय या असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न हुआ अथवा समाज की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।
न्यायालय ने यह भी पाया कि दो गोपनीय गवाहों के बयान याचिकाकर्ता की गतिविधियों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
सामान्य आपराधिक कानून का विकल्प नहीं है निवारक नजरबंदी
हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के डॉ. राम मनोहर लोहिया बनाम बिहार राज्य तथा कुसो साह बनाम बिहार राज्य के महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रतिपादित सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि निवारक नजरबंदी एक असाधारण शक्ति है, जिसका उपयोग सामान्य आपराधिक न्याय प्रक्रिया के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने दोहराया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अनेक आपराधिक मामले लंबित होना अपने आप में निवारक नजरबंदी को उचित नहीं ठहराता। इसके लिए यह दर्शाना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था को वास्तविक अथवा संभावित खतरा उत्पन्न हो रहा है।
खंडपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से निपटने के लिए सामान्य आपराधिक न्याय प्रणाली पर्याप्त थी। ऐसी स्थिति में निवारक नजरबंदी जैसी असाधारण शक्ति का प्रयोग कानूनी रूप से उचित नहीं था।
नजरबंदी आदेश रद्द, तत्काल रिहाई के निर्देश
इन सभी पहलुओं पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने सुरेंद्र रवींद्र काजले के विरुद्ध पारित निवारक नजरबंदी आदेश को रद्द कर दिया तथा निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य आपराधिक प्रकरण में उनकी हिरासत आवश्यक नहीं है, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।
यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। साथ ही यह स्पष्ट करता है कि निवारक नजरबंदी की शक्तियों का प्रयोग कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं और आवश्यक शर्तों के अधीन ही किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी : अधिवक्ता मीर नगमान अली
सिलवासा फैक्ट्री पर छापा, 6.26 लाख का माल जब्त, एसपी हर्ष पोद्दार की टीम को कोर्ट ने बताया कौतुकास्पद, जिले में 662 हिस्ट्रीशीटरों की परेड, साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर सुरक्षा उपाय, अवैध शराब पर 15 केस
नागपुर ग्रामीण, 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) :
माननीय मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ ने प्रतिबंधित नायलॉन मांझे के उत्पादन और आपूर्ति के मूल स्रोत का पता लगाने पर नागपुर ग्रामीण पुलिस की खुलकर प्रशंसा की है। कोर्ट ने 23/10/2026 के आदेश में कहा कि पुलिस की जांच कौतुकास्पद है और अन्य जिलों को भी ऐसी कार्रवाई कर 29/10/2026 तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला – दिनांक 08/12/2025 को कलमेश्वर पुलिस स्टेशन अंतर्गत मौजा गोडखेरी में VR लॉजिस्टिक वेयरहाउस कंटेनर क्रमांक GJ-21-V-3238 से नायलॉन मांझा ले जाते आरोपी छविनाथ मोहन निषाद, उम्र 30, उत्तर प्रदेश को पकड़ा गया था। 9,200 नग नायलॉन मांझा प्लास्टिक चक्री कीमत 14,40,000 रुपये और कंटेनर कीमत 20,00,000 रुपये, कुल 34,40,000 रुपये का माल जब्त किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष ए. पोद्दार और अपर अधीक्षक अनिल मस्के के मार्गदर्शन में स्थानीय गुन्हे शाखा के निरीक्षक अंकुश माने और निरीक्षक स्नेहल राऊत की टीम ने गोपनीय जानकारी, तकनीकी पुरावे और बैंक लिंकेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
कलमेश्वर में दर्ज गुनाह के संबंध में दमन के औद्योगिक परिसर, डेमनी रोड दादरा और नगर हवेली के सिलवासा में मांझा निर्माता की फैक्ट्री पर छापा मारकर कुल 6 करोड़ 26 लाख 43 हजार 840 रुपये का प्रतिबंधित नायलॉन मांझा, उसे बनाने का कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई।
इसी जांच के लिए मुंबई हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) दाखिल हुई थी। कोर्ट में एसपी द्वारा दाखिल प्रतिज्ञापत्र पर यह प्रशंसा हुई।
अन्य बड़ी कार्रवाईयां –
1. साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर प्रतिबंधक उपाय – साबनेर शहर से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच मौजूद पेड़ से हादसे का खतरा था। विशेषकर रात में अंधेरा होने से या सामने से तेज रोशनी से चालक का ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका थी। एसपी हर्ष पोद्दार के निर्देश पर साबनेर पुलिस ने पेड़ के चारों ओर रिफ्लेक्टर और रेडियम पट्टी लगाई, ‘सावधान, काम शुरू है’ के सूचना फलक लगाए और वेग मर्यादित रखने की अपील की। PWD और वन विभाग से समन्वय कर पेड़ को स्थायी रूप से हटाने की कार्रवाई शुरू है।
2. घरफोड़ी के 2 गुनाह उजागर, 4.16 लाख का माल जब्त – स्थानीय गुन्हे शाखा ने दिनांक 23/10/2026 को आरोपी प्रवीण अशोक डेकाटे, उम्र 30, तिलक वार्ड मोहाड़ी, ता. मोहाड़ी, जि. भंडारा को गिरफ्तार किया। गोपनीय जानकारी मिली थी कि वह मीठा माधनी परिसर में चोरी के सोने के दागिने बेचने घूम रहा है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ में उसने मीठा परिसर में 12 दिन पहले और उमरेड में 1 महीने पहले घरफोड़ी करने की कबूली दी। पंचनामे में उसके पैंट की जेब से सोने के दागिने मिले, कुल 4,16,000 रुपये का माल जब्त। उसके खिलाफ मौदा अप.क्र. 693/2026 कलम 305(अ),331(3) और उमरेड अप.क्र. 934/2026 में केस दर्ज है।
3. खाने के अयोग्य सुपारी की 40 टन खेप जब्त – वडोदा पुलिस की कार्रवाई – वडोदा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि वडोदा हद के महालगाव-लिंगगाव के नवकार वेयरहाउस में बिना परवाना मानव सेवन के अयोग्य सुपारी चार वाहनों से लाई जा रही है। पुलिस ने जाल बिछाकर चारों वाहनों की तलाशी में करीब 40 टन सुपारी जब्त की। चारों वाहन सीज कर अन्न व औषध प्रशासन विभाग को पत्र व्यवहार किया गया है। विभाग की जांच के बाद आगे कार्रवाई होगी।
4. अवैध शराब पर 15 गुनाह – एसपी के मार्गदर्शन में 23/10/2026 को जिले भर में अवैध शराब निर्माण, बिक्री और सेवन पर कार्रवाई कर कुल 15 गुनाह दर्ज किए। खापा में 4, कळंब में 1, साबनेर में 2, उमरेड, रामटेक, बोरी, नरखेड, जलालखेड़ा में 1-1 और भिवापुर में 2 गुनाह। कार्रवाई में 32,230 मिली देशी दारू, 360 मिली विदेशी दारू, 24 लीटर मोहफूल दारू कुल 8,060 रुपये का माल जब्त कर मौके पर पंचनामा कर नष्ट किया गया।
5. अस्तित्व छुपाकर घूमने वाले पर गुनाह – अरोली पुलिस ने 23/10/2026 को पेट्रोलिंग के दौरान आरोपी तुषार उर्फ नांदूजी तुलसीदास वानखेडे, 30 वर्ष, संताजी नगर कन्हान, ता. पारशिवनी को मौजा रोंगली बार में अपना अस्तित्व छुपाकर सूर्यास्त के बाद संदिग्ध रूप से घूमते पकड़ा। नाम-पता पूछने पर उड़वा-जवाब देने पर धारा 122 महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत गुनाह दर्ज किया।
6. 662 रिकॉर्डेड अपराधियों की परेड – जिले के सभी 24 पुलिस थानों में शरीर और संपत्ति के विरुद्ध अपराध, महिला-बाल अत्याचार, अवैध शराब, जुआ आदि के 662 रेकॉर्डवरील आरोपियों की परेड ली गई। इसमें नागपुर उपविभाग में 68, उमरेड में 124, साबनेर में 136, कन्हान में 69, रामटेक में 119, काटोल में 127 आरोपियों को बुलाकर चेक किया गया और हिदायत दी गई।
कुल 2.55 लाख में से 1.65 लाख ने किया मतदान, पुरुष 69% – महिला 59%, पहले 65% का अनुमान था, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुलकर्णी ने जारी किया आंकड़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुए मतदान की अंतिम टक्केवारी जारी हो गई है। सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा अपर आयुक्त (सा.प्र.) नागपुर विभाग, प्रदीप कुलकर्णी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 64.82 प्रतिशत मतदान हुआ है।
कुल 2,55,603 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,65,672 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत महिलाओं से अधिक रहा।
जिलावार फाइनल आंकड़ा – जिला कुल मतदाता मतदान प्रतिशत नागपुर 1,44,466 87,187 60.35% – सबसे कम भंडारा 21,349 14,319 67.07% गोंदिया 22,176 15,810 71.29% वर्धा 21,742 14,861 68.35% चंद्रपुर 32,262 23,568 73.05% – सबसे ज्यादा गड़चिरोली 13,608 9,927 72.95% कुल2,55,6031,65,67264.82% जेंडर वाइज विश्लेषण –
पुरुष मतदाता : 1,47,280 में से 1,01,672 ने किया मतदान – 69.03%
महिला मतदाता : 1,08,301 में से 63,999 ने किया मतदान – 59.09%
अन्य : 22 में से 1 – 4.55%
पहले अनौपचारिक तौर पर 65% मतदान का अनुमान लगाया जा रहा था, जो फाइनल आंकड़े में 64.82% पर आकर स्थिर हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य 50-55% के औसत से काफी अधिक है।
सबसे कम मतदान नागपुर जिले में 60.35% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05% दर्ज किया गया। गोंदिया 71.29% और गड़चिरोली 72.95% के साथ दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे।
अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां इस बढ़े हुए मतदान का असर भाजपा-कांग्रेस दोनों के भाग्य पर तय होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।
2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।
अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
प्रबंधन का बयान प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है। निदेशकडॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे। निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।
न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।