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अवैध शराब परिवहन पर कार्रवाई, 86,500 रुपये का माल जब्त

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पारशिवनी पुलिस ने महाराष्ट्र दारूबंदी अधिनियम के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध शराब का परिवहन कर रहे एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से देशी और विदेशी शराब के साथ मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। जब्त माल की कुल कीमत 86,500 रुपये आंकी गई है।

क्या हुआ
पुलिस को मिली सूचना के आधार पर 27 जुलाई 2026 को पारशिवनी पुलिस ने कार्रवाई की। इस दौरान मेहंदी गांव निवासी 37 वर्षीय मोहन श्यामराव बेहुणे को शराब का अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 462/2026 दर्ज कर महाराष्ट्र दारूबंदी अधिनियम की धारा 65 (अ)(ई) के तहत मामला दर्ज किया है।

क्या जब्त हुआ
कार्रवाई में निम्न सामान बरामद किया गया:

  • देशी शराब: 45 प्लास्टिक निप, 180 एमएल प्रत्येक, ब्रांड ‘भिंगरी’। अनुमानित कीमत 4,500 रुपये
  • विदेशी शराब: 10 कांच की निप, 180 एमएल प्रत्येक, ‘सह्याद्रि गोल्ड प्रीमियम व्हिस्की’। अनुमानित कीमत 2,000 रुपये
  • मोटरसाइकिल: हीरो पैशन, क्रमांक MH-40-CU-1305। अनुमानित कीमत 80,000 रुपये

पुलिस ने सभी नमूनों को सीलबंद कर रासायनिक जांच के लिए भेज दिया है। पंचनामा तैयार कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस टीम
यह कार्रवाई पुलिस निरीक्षक किशोर शेरकी के मार्गदर्शन में की गई। टीम में पुलिस उप निरीक्षक विशाल डोणेकर, पुलिस हवलदार संदीप नागोसे, पुलिस नायक वीरेंद्र नरड, पुलिस अमलदार सूरज मोहेकर, पुलिस सिपाही पृथ्वीराज चौहान और अशोक निस्ताने शामिल थे।

पुलिस निरीक्षक किशोर शेरकी ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

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विदर्भ की जेलों में कैदियों का सैलाब – 6,105 की क्षमता में 7,661 बंदी, 1,556 ज्यादा ठूंस-ठूंस कर भरे, नागपुर सेंट्रल में सबसे ज्यादा 896 अतिरिक्त कैदी

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  • 160 साल पुरानी नागपुर सेंट्रल जेल की दीवारें वही, बंदी 25% ज्यादा – नई जेल, अतिरिक्त बैरक और स्टाफ की फाइलें धूल खा रहीं, 2025 में सरकार ने माना था 12 हजार अतिरिक्त बंदी – अब फाइल से जमीन पर आओ, बेफालतू जमा कैदियों को सशर्त रिहा करो

नागपुर :

जेल की दीवारें और बैरक वही हैं, लेकिन बंदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विदर्भ की जेलों से सामने आए RTI आंकड़े ने जेल व्यवस्था के सामने बढ़ती भीड़ की तस्वीर साफ कर दी है।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं RTI एक्टिविस्ट अभय कोलारकर द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार अगस्त 2026 तक विदर्भ की मध्यवर्ती जेलों, सात जिला जेलों और आठ खुली महिला-पुरुष जेलों का कुल आंकड़ा चौंकाने वाला है।

विदर्भ में कुल 6,105 बंदियों की अधिकृत क्षमता वाली जेलों में 7,662 कैदी बंद हैं। यानी क्षमता से 1,556 अधिक। यह कुल क्षमता से करीब 25.5 प्रतिशत ज्यादा है।

विदर्भ की जेलों में कहां पर क्या स्थिति –

नागपुर सेंट्रल जेल में सबसे ज्यादा दबाव : 160 साल पुरानी नागपुर सेंट्रल जेल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 1,940 की क्षमता के मुकाबले यहां 2,836 बंदी यानी 896 अतिरिक्त। इनमें 2,733 पुरुष, 102 महिला और एक तृतीयपंथी बंदी शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों में न्यायाधीन बंदियों की संख्या सजायाफ्ता बंदियों से काफी अधिक है।

जेल को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में है। 2025 में वाडधामना-चिचोली क्षेत्र में नई जेल के लिए 150 एकड़ जमीन और 2 हजार से अधिक बंदियों की क्षमता वाली परियोजना की जानकारी सामने आई थी। हालांकि 2026 की रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित स्थल के लिए अतिरिक्त 50 से 100 एकड़ जमीन की मांग और परियोजना के स्वरूप को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चनें हैं। प्रस्तावित नई जेल की क्षमता करीब 4 हजार बंदियों तक रखने पर भी विचार किया गया है। लेकिन अभी तक यह सब कागजों तक ही सीमित है।

अमरावती मध्यवर्ती कारागृह में 1,234 बंदी : अमरावती मध्यवर्ती कारागृह की क्षमता 973 है, जबकि यहां 1,234 बंदी हैं। यानी 261 अतिरिक्त। इनमें 1,205 पुरुष, 28 महिलाएं और एक तृतीयपंथी बंदी शामिल है। यहां भी न्यायाधीन बंदियों की संख्या बड़ी है।

जिला जेलों में बंद कैदियों की संख्या :
अकोला में 447, भंडारा में 355, चंद्रपुर में 736, यवतमाल में 556, वर्धा में 325, बुलढाणा में 320 और वाशिम में 333 कैदी।

खुली जेल : मोरशी खुली जेल में 202, गड़चिरोली में 72, अमरावती में 65, नागपुर में 96, अकोला महिला जेल में 22, यवतमाल में 29 और वर्धा खुली जेल में 33 कैदी बंद हैं।

राज्यभर में भी सामने आ चुकी है तस्वीर :
मई 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने विधान परिषद में बताया था कि राज्य की जेलों की क्षमता 27,184 के मुकाबले 39,527 बंदी थे, यानी 12,343 अतिरिक्त बंदी। सरकार ने नई जेलों और अतिरिक्त बैरकों के जरिए क्षमता बढ़ाने की योजना बताई थी। इन परियोजनाओं से 17,110 अतिरिक्त बंदियों के लिए क्षमता बढ़ाने की जानकारी दी गई थी। नागपुर खंडपीठ ने भी जेलों में भीड़ और स्टाफ की कमी को लेकर सरकार से जानकारी मांगी थी। 2025 में अदालत के समक्ष राज्य में करीब 40 प्रतिशत स्टाफ कमी की बात सामने आई थी। अदालत ने यह भी चिंता जताई थी कि अत्यधिक भीड़ और कम स्टाफ से जेल प्रशासन पर दबाव बढ़ता है और बंदियों के आबेदनों व अन्य प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है।

अब फाइल से जमीन तक पहुंचने की जरूरत –

जेलों में बढ़ती संख्या के बीच समाधान केवल नई इमारत तक सीमित नहीं हो सकता। न्यायाधीन बंदियों के मामलों की समय पर सुनवाई, पात्र बंदियों को कानूनी सहायता, जमानत-पैरोल प्रक्रिया, अतिरिक्त स्टाफ और पुनर्वास कार्यक्रम भी उतने ही जरूरी हैं। सरकार ने गरीब बंदियों को जमानत या जुर्माना भरने में सहायता, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी योजनाओं की जानकारी दी है।

लेकिन RTI के आंकड़े अब एक स्पष्ट सवाल उठा रहे हैं – जब 6,105 की क्षमता में 7,661 बंदी हैं, तो नई जेल, अतिरिक्त बैरक और स्टाफ विस्तार की योजनाएं कागज से जमीन तक कब पहुंचेंगी?

हमारी मांग स्पष्ट है –

  1. वाडधामना-चिचोली की नई जेल अभी तक कागजों तक सीमित है, जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू हो।
  2. जेल में बेफालतू जमा, छोटे-मोटे अपराध और जमानत के इंतजार में बंद न्यायाधीन कैदियों को सशर्त मुक्त किया जाए, ताकि भीड़ का दबाव कम हो और सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, मुलाकात और सुधारात्मक कार्यक्रमों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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₹50 हजार रिश्वत केस: सचिन कातूरे 3 दिन ACB कस्टडी में, RTO के बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसेगा?

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नागपुर :

नागपुर ग्रामीण RTO से जुड़े ₹50 हजार रिश्वत कांड में एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। रिश्वत लेते पकड़े गए आरोपी सचिन पुरुषोत्तम कातूरे को कोर्ट ने 3 दिन के पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है।

अब ACB की नजर किस पर है

  1. कातूरे से पूछताछ: अगले 3 दिन ACB यह पता लगाएगी कि ₹50 हजार किस काम के लिए मांगे गए थे, किसके इशारे पर लिए गए थे और कातूरे के RTO के कौन-कौन से अधिकारी और ट्रांसपोर्टरों से संबंध थे।
  2. डिजिटल सबूत: मोबाइल, कॉल डिटेल, चैट, बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले जाएंगे। इससे साफ होगा कि कातूरे सिर्फ बिचौलिया था या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट चल रहा था।
  3. कलसी और सोलंकर कनेक्शन: इस मामले में कलसी और सोलंकर के नाम भी सामने आए हैं। पहले भी इन अधिकारियों पर ओवरलोडिंग वाहनों से वसूली के आरोप लगे थे, जिसे उन्होंने नकारा था। अब जांच में देखेंगे कि कातूरे का इनसे कोई सीधा संपर्क या लेन-देन था या नहीं।

ओवरलोडिंग वसूली का नेटवर्क?
नागपुर में ओवरलोडिंग गाड़ियों से अवैध वसूली के आरोप पहले भी उठते रहे हैं। ACB अब यह खंगाल रही है कि कातूरे किन ट्रांसपोर्टरों के संपर्क में था और किस अधिकारी का नाम लेकर पैसे मांगे जाते थे।

आगे क्या होगा
अगर कातूरे की पूछताछ और मिले सबूतों से कोई ठोस कड़ी मिलती है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई सिर्फ कातूरे तक रुकेगी या RTO के पूरे कथित नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।

फिलहाल ACB की 3 दिन की कस्टडी में मिले जवाबों पर ही पूरे मामले की दिशा तय होगी।

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महाराष्ट्र साइबर कार्यालय को मिला राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र का दर्जा

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  • केंद्र की पहल के अनुरूप साइबर अपराध की रोकथाम और जांच व्यवस्था होगी सुदृढ़, सात विशेष प्रभागों से संचालित होगा नया तंत्र

मुंबई, 24 जुलाई :
महाराष्ट्र शासन ने राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जांच को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र साइबर कार्यालय को आधिकारिक रूप से ‘राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (एस4सी) के रूप में अधिसूचित किया है। यह निर्णय केंद्र सरकार की उस पहल के अनुरूप लिया गया है जिसके अंतर्गत सभी राज्यों में साइबर अपराध समन्वय केंद्रों की स्थापना की जानी है।

गृह मंत्रालय के निर्देशों पर लिया गया निर्णय
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने वर्ष 2018 में स्थापित ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) के अनुरूप सभी राज्यों को एस4सी गठित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में महाराष्ट्र के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में महाराष्ट्र साइबर सुरक्षा परियोजना की विद्यमान तकनीकी अवसंरचना, संस्थागत ढांचा और परिचालन क्षमता को ध्यान में रखा गया। इसके पश्चात महाराष्ट्र साइबर के अपर पुलिस महानिदेशक ने राज्य सरकार से महाराष्ट्र साइबर कार्यालय को एस4सी के रूप में अधिसूचित करने का अनुरोध किया, जिसे शासकीय संकल्प के माध्यम से अब मंजूरी दे दी गई है।

सात विशेष प्रभागों के माध्यम से होगा कार्य
नवगठित राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्र सात प्रमुख प्रभागों के माध्यम से कार्य करेगा। इनमें शामिल हैं:

  • साइबर अन्वेषण प्रभाग – नोडल साइबर पुलिस थाने के रूप में कार्य करेगा
  • राज्य डिजिटल अन्वेषण सहायता केंद्र (एस-डिस्क) – प्रौद्योगिकी आधारित जांच में सहयोग देगा
  • राज्य साइबर अपराध प्रशिक्षण केंद्र – उत्कृष्टता केंद्र के रूप में प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा
  • साइबर जनसंपर्क, अनुसंधान एवं नवाचार इकाई – उत्कृष्टता केंद्र के रूप में काम करेगी
  • प्रशासन प्रभाग – प्रशासनिक कार्यों का निर्वहन करेगा
  • साइबर खतरा एवं सोशल मीडिया निगरानी प्रभाग – प्रौद्योगिकी आधारित जांच को आगे बढ़ाएगा
  • आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रभाग – इसके अंतर्गत 1930 साइबर हेल्पलाइन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, राज्य साइबर धोखाधड़ी न्यूनीकरण केंद्र (महा-ग्रिड), महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध ऑनलाइन अपराध प्रकोष्ठ (सीपीडब्ल्यूसी/ओसीडब्ल्यूसी ट्रेस), साइबर सुरक्षा प्रभाग – सर्ट-एमएच और सुरक्षा संचालन केंद्र (एसओसी) कार्यरत रहेंगे।

जांच और समन्वय में आएगी तेजी
शासन का मानना है कि एस4सी की स्थापना से राज्य की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ेगा। इससे साइबर अपराधों की जांच प्रक्रिया में सुधार होगा, साइबर खतरों की निगरानी सुदृढ़ होगी तथा साइबर धोखाधड़ी एवं ऑनलाइन अपराधों पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी।

अधिकारियों के अनुसार नया केंद्र महाराष्ट्र में डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए एकीकृत मंच उपलब्ध कराएगा, जिससे आम नागरिकों को त्वरित सहायता मिल सकेगी।

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