- 160 साल पुरानी नागपुर सेंट्रल जेल की दीवारें वही, बंदी 25% ज्यादा – नई जेल, अतिरिक्त बैरक और स्टाफ की फाइलें धूल खा रहीं, 2025 में सरकार ने माना था 12 हजार अतिरिक्त बंदी – अब फाइल से जमीन पर आओ, बेफालतू जमा कैदियों को सशर्त रिहा करो
नागपुर :
जेल की दीवारें और बैरक वही हैं, लेकिन बंदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विदर्भ की जेलों से सामने आए RTI आंकड़े ने जेल व्यवस्था के सामने बढ़ती भीड़ की तस्वीर साफ कर दी है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं RTI एक्टिविस्ट अभय कोलारकर द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार अगस्त 2026 तक विदर्भ की मध्यवर्ती जेलों, सात जिला जेलों और आठ खुली महिला-पुरुष जेलों का कुल आंकड़ा चौंकाने वाला है।
विदर्भ में कुल 6,105 बंदियों की अधिकृत क्षमता वाली जेलों में 7,662 कैदी बंद हैं। यानी क्षमता से 1,556 अधिक। यह कुल क्षमता से करीब 25.5 प्रतिशत ज्यादा है।
विदर्भ की जेलों में कहां पर क्या स्थिति –
नागपुर सेंट्रल जेल में सबसे ज्यादा दबाव : 160 साल पुरानी नागपुर सेंट्रल जेल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 1,940 की क्षमता के मुकाबले यहां 2,836 बंदी यानी 896 अतिरिक्त। इनमें 2,733 पुरुष, 102 महिला और एक तृतीयपंथी बंदी शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों में न्यायाधीन बंदियों की संख्या सजायाफ्ता बंदियों से काफी अधिक है।
जेल को शहर से बाहर स्थानांतरित करने की योजना लंबे समय से चर्चा में है। 2025 में वाडधामना-चिचोली क्षेत्र में नई जेल के लिए 150 एकड़ जमीन और 2 हजार से अधिक बंदियों की क्षमता वाली परियोजना की जानकारी सामने आई थी। हालांकि 2026 की रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित स्थल के लिए अतिरिक्त 50 से 100 एकड़ जमीन की मांग और परियोजना के स्वरूप को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने में अड़चनें हैं। प्रस्तावित नई जेल की क्षमता करीब 4 हजार बंदियों तक रखने पर भी विचार किया गया है। लेकिन अभी तक यह सब कागजों तक ही सीमित है।
अमरावती मध्यवर्ती कारागृह में 1,234 बंदी : अमरावती मध्यवर्ती कारागृह की क्षमता 973 है, जबकि यहां 1,234 बंदी हैं। यानी 261 अतिरिक्त। इनमें 1,205 पुरुष, 28 महिलाएं और एक तृतीयपंथी बंदी शामिल है। यहां भी न्यायाधीन बंदियों की संख्या बड़ी है।
जिला जेलों में बंद कैदियों की संख्या :
अकोला में 447, भंडारा में 355, चंद्रपुर में 736, यवतमाल में 556, वर्धा में 325, बुलढाणा में 320 और वाशिम में 333 कैदी।
खुली जेल : मोरशी खुली जेल में 202, गड़चिरोली में 72, अमरावती में 65, नागपुर में 96, अकोला महिला जेल में 22, यवतमाल में 29 और वर्धा खुली जेल में 33 कैदी बंद हैं।
राज्यभर में भी सामने आ चुकी है तस्वीर :
मई 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने विधान परिषद में बताया था कि राज्य की जेलों की क्षमता 27,184 के मुकाबले 39,527 बंदी थे, यानी 12,343 अतिरिक्त बंदी। सरकार ने नई जेलों और अतिरिक्त बैरकों के जरिए क्षमता बढ़ाने की योजना बताई थी। इन परियोजनाओं से 17,110 अतिरिक्त बंदियों के लिए क्षमता बढ़ाने की जानकारी दी गई थी। नागपुर खंडपीठ ने भी जेलों में भीड़ और स्टाफ की कमी को लेकर सरकार से जानकारी मांगी थी। 2025 में अदालत के समक्ष राज्य में करीब 40 प्रतिशत स्टाफ कमी की बात सामने आई थी। अदालत ने यह भी चिंता जताई थी कि अत्यधिक भीड़ और कम स्टाफ से जेल प्रशासन पर दबाव बढ़ता है और बंदियों के आबेदनों व अन्य प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है।
अब फाइल से जमीन तक पहुंचने की जरूरत –
जेलों में बढ़ती संख्या के बीच समाधान केवल नई इमारत तक सीमित नहीं हो सकता। न्यायाधीन बंदियों के मामलों की समय पर सुनवाई, पात्र बंदियों को कानूनी सहायता, जमानत-पैरोल प्रक्रिया, अतिरिक्त स्टाफ और पुनर्वास कार्यक्रम भी उतने ही जरूरी हैं। सरकार ने गरीब बंदियों को जमानत या जुर्माना भरने में सहायता, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी योजनाओं की जानकारी दी है।
लेकिन RTI के आंकड़े अब एक स्पष्ट सवाल उठा रहे हैं – जब 6,105 की क्षमता में 7,661 बंदी हैं, तो नई जेल, अतिरिक्त बैरक और स्टाफ विस्तार की योजनाएं कागज से जमीन तक कब पहुंचेंगी?
हमारी मांग स्पष्ट है –
- वाडधामना-चिचोली की नई जेल अभी तक कागजों तक सीमित है, जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू हो।
- जेल में बेफालतू जमा, छोटे-मोटे अपराध और जमानत के इंतजार में बंद न्यायाधीन कैदियों को सशर्त मुक्त किया जाए, ताकि भीड़ का दबाव कम हो और सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, मुलाकात और सुधारात्मक कार्यक्रमों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।