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RSS के 100 साल पर कर्नाटक सरकार का सवाल – पंजीकृत हैं तो कागज दिखाओ

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  • गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने मोहन भागवत को लिखा पत्र – कहा, 60 हजार शाखा, लाखों की भीड़, पर कानूनी दर्जा क्या है?

बेंगलुरु / नागपुर :

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर कर्नाटक के गृह, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खरगे ने सरसंघचालक मोहन भागवत को बधाई के साथ-साथ कानूनी दर्जे पर 8 सवालों वाला पत्र लिखा है।

पत्र में क्या है? – दिनांक 13.06.2026

मंत्री ने अपने लेटरहेड (कमरा नं. 242-243, द्वितीय तल, डॉ. बी.आर. अंबेडकर वीधी, विकास सौधा, बेंगलुरु) पर लिखा है –

बधाई के साथ आंकड़ों का हवाला: अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार आरएसएस की कर्नाटक में 4,127 दैनिक शाखा, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडली हैं। पूरे देश में 19,61,158 प्रतिभागियों के साथ 2,194 समरसता बैठक, 562 रूट मार्च, 2.5 से 3 किमी तक 22,179 लोगों के साथ मार्च निकाले गए।

मुख्य आपत्ति: इतनी व्यापक संगठनात्मक उपस्थिति, खासकर जब नियमित सार्वजनिक लामबंदी, वर्दीधारी रूट मार्च और बड़े पैमाने पर सामाजिक संपर्क होता है, तो इसे निजी या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता। इससे कानूनी जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक व्यवस्था, अनुमति, फंडिंग के स्रोत और संविधान व कानूनों के अनुपालन पर वैध सवाल खड़े होते हैं।

8 बिंदुओं पर सार्वजनिक जानकारी मांगी:

  1. कानूनी दर्जा और संगठनात्मक ढांचा क्या है?
  2. पदाधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों का ब्योरा
  3. आय के स्रोत, दान और योगदान का ब्योरा
  4. खर्च और संपत्ति का ब्योरा
  5. क्या लागू कर कानून के अनुसार कर चुकाया जा रहा है?
  6. बिना औपचारिक पंजीकरण के किस कानूनी आधार पर गतिविधियां संचालित हो रही हैं?
  7. वह संवैधानिक और वैधानिक ढांचा जिसके तहत बिना जवाबदेही के संचालन का अधिकार दावा किया जाता है
  8. सार्वजनिक कार्यक्रम, रूट मार्च, जनसभा के लिए कानूनी अनुमति और अनुपालन तंत्र

पत्र का सार: एक संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संगठन, चाहे कितना भी बड़ा या प्रभावशाली हो, कानूनी जांच से ऊपर नहीं हो सकता। हर नागरिक, संगठन, संस्था को कानून का पालन करना चाहिए। भारत में, यहां तक कि एक साधारण करमचारी को भी सरकारी लाभ के लिए पंजीकृत होना पड़ता है। हर धार्मिक और सरकारी ट्रस्ट का ऑडिट होता है। चैरिटेबल संस्था, सोसायटी, कंपनी को अपना ढांचा, गतिविधि, वित्त और आय के स्रोत बताने होते हैं।

जो संगठन नियमित रूप से राष्ट्रवाद, अनुशासन और कर्तव्य का पाठ पढ़ाता है, उसे पारदर्शिता, अनुपालन और संविधान के प्रति सम्मान के मूल्यों को भी दिखाना चाहिए। आरएसएस साधारण भारतीयों से नियमों का पालन करने को कहता है, जबकि खुद को उन्हीं मानकों से छूट देता है। मजदूर, छोटी एसोसिएशन, धार्मिक संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, कंपनियों और व्यक्तियों की तरह आरएसएस को भी कानून का पालन कर मिसाल कायम करनी चाहिए।

इसलिए हम आरएसएस से आह्वान करते हैं कि वह अपने 100वें वर्ष को केवल जश्न के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक आत्मनिरीक्षण के अवसर के रूप में देखे। भारत को सबसे बड़ा तोहफा यही होगा कि वह खुद को पंजीकृत करे, अपनी गतिविधियों और वित्त का खुलासा करे, सभी लागू करों का भुगतान करे और भारतीय कानून के ढांचे के भीतर एक पारदर्शी और जवाबदेह संगठन के रूप में कार्य करे।

पत्र के अंत में प्रियांक खरगे ने लिखा है – हम औपचारिक जवाब और आपके अधिकृत पदाधिकारियों के साथ चर्चा के लिए प्रतिनियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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Business

नागपुर रेलवे स्टेशन की अंडरग्राउंड पार्किंग शुरू, 4 साल से लगा जाम खत्म

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  • 487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।

यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।

दो हिस्सों में पार्किंग –

  1. अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
  • टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
  • फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
  1. एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) :
    यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।

नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।

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सोलर डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपे ‘नागास्त्र-2’ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन के 21 यूनिट, 650 MM आर्मर भेदने में सक्षम

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  • 4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।

क्या है नागास्त्र-2 की ताकत –
यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।

  • रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
  • एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
  • तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
  • 80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट

सबसे बड़ी खूबी – ECCM –
नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।

कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।

2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

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3 साल में 2,242 आपसी सहमति तलाक मंजूर किए, 7,321 केस अभी भी पेंडिंग

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  • RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।

फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –

  • 2024 में 877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
  • 2025 में 849 मंजूर, 87 खारिज।
  • 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।

केसों का बोझ –
कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।

15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।

भरण-पोषण और कस्टडी –
भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।

स्टाफ की भारी कमी से दबाव –

RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।

  • स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
  • स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
  • जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
  • डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
  • शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
  • डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
  • प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली

कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।

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