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CHEMOTHERAPY की दवाओं की किल्लत से जूझते अस्पताल

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  • मरीजों की जान पर बन आई

नागपुर : युद्ध और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब सीधे अस्पतालों के वार्डों में दिखने लगा है। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो सबसे जरूरी कीमोथेरेपी दवाएं – सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन – की भारी किल्लत से नागपुर समेत देशभर के सरकारी अस्पताल जूझ रहे हैं। आलम यह है कि रोजाना 15 से 20 कैंसर मरीजों को बिना इलाज लौटाया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला

ये दोनों प्लेटिनम-बेस्ड एंटी-कैंसर इंजेक्शन 60% कैंसर इलाज की रीढ़ माने जाते हैं। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा हैं। लेकिन पिछले 21 दिनों से इन दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म है।

AIIMS नागपुर, शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) और इंदिरा गांधी शासकीय मेडिकल कॉलेज (IGGMCH) जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में हालात सबसे खराब हैं।

डॉक्टरों की चेतावनी: “देरी मतलब कैंसर का बढ़ना”

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुशील मंधानिया ने बताया, “युद्ध शुरू होने से पहले ही हमें अंदेशा था कि इन जरूरी दवाओं पर असर पड़ेगा। बिना इन दवाओं के हम कीमोथेरेपी नहीं दे सकते। अगर कीमो का साइकिल छूटा, तो मरीज की सेहत पर सीधा असर पड़ता है। कितने दिन ये समस्या रहेगी, पता नहीं।”

दूसरे डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर कीमो नहीं दी गई तो कैंसर कोशिकाएं तेजी से फिर सक्रिय हो सकती हैं। कई मामलों में ट्यूमर बढ़ सकता है, दर्द तेज हो सकता है और मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। कीमो में देरी सिर्फ इलाज टालना नहीं है, बल्कि बीमारी को अगले स्टेज में धकेलना है।

किल्लत की असली वजह: युद्ध + प्राइस कंट्रोल

एक वरिष्ठ डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समस्या की जड़ दो चीजें हैं:

  • आयात ठप: इन दवाओं को बनाने का कच्चा माल दूसरे देशों से आता है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव की वजह से शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं। समुद्री ट्रांसपोर्ट का जोखिम बढ़ा है, कंटेनर नहीं मिल रहे और कस्टम क्लियरेंस में देरी हो रही है। इससे भारतीय फार्मा कंपनियों का प्रोडक्शन साइकिल टूट गया है।
  • दाम का पेंच: सरकार ने फार्मा कंपनियों से दवा के दाम न बढ़ाने को कहा है। मान लीजिए एक दवा की कीमत 300 रुपये है, लेकिन युद्ध के कारण उत्पादन लागत बढ़कर 300 से ज्यादा हो गई। ऐसे में कंपनियां घाटे में 300 रुपये पर दवा नहीं बेच सकतीं। नतीजा, कच्चा माल देने वाले देशों ने सप्लाई रोक दी।

आगे का खतरा

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 के बाद से ही भारत की जरूरी दवाओं के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता पर सवाल उठ रहे थे। अगर वैश्विक संघर्ष लंबा चला तो आने वाले महीनों में दूसरी जीवनरक्षक दवाओं की भी किल्लत हो सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि अब मरीजों में दवा न मिलने का डर बीमारी से भी ज्यादा है। इलाज का हर साइकिल 7, 14 या 21 दिन पर तय होता है। एक भी साइकिल छूटना मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचा सकता है।

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वर्धमान नगर में न्यूएरा हॉस्पिटल के 300 बेड वाले अस्पताल का उद्घाटन 23 अक्टूबर को

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  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे उद्घाटन, भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और एआई आधारित जांच सुविधाएं उपलब्ध

नागपुर, 21 अक्टूबर 2026 :

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के वर्धमान नगर, नागपुर स्थित 300 बेड वाले मुख्य अस्पताल का उद्घाटन 23 अक्टूबर 2026 को माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों होगा। मध्य भारत में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अस्पताल में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं और आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने अपनी योजनाओं की जानकारी दी। इसके तहत आधुनिक चिकित्सा तकनीक, बेहतर जांच सुविधाएं, रोबोट की मदद से की जाने वाली सर्जरी और विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह नया अस्पताल नागपुर और पूरे विदर्भ के लोगों को आधुनिक तकनीक की मदद से बेहतर और मरीजों की जरूरतों के अनुसार इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। इससे मरीजों को विशेष इलाज के लिए विदर्भ से बाहर जाने की जरूरत कम हो जाएगी।

भारत के पहले सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट के साथ रोबोटिक सर्जरी

वर्धमान नगर स्थित न्यूएरा हॉस्पिटल की एक प्रमुख विशेषता यहां उपलब्ध आधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं हैं। इसमें सिंगल-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी, दोनों सुविधाएं शामिल होंगी।

सिंगल-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी कम चीरा लगाकर ऑपरेशन करने की एक आधुनिक तकनीक है। इस पद्धति में कुछ विशेष प्रकार की सर्जरी के लिए शरीर में केवल एक जगह से उपकरण डालकर शल्यक्रिया की जा सकती है। न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने इस तकनीक को एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

इस तकनीक की मदद से कुछ विशेष सर्जरी में अधिक सटीकता से इलाज करने, शरीर के अंदरूनी हिस्सों को बेहतर तरीके से देखने और ऑपरेशन के दौरान उपकरणों पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज के फायदे, ठीक होने में लगने वाला समय और यह तकनीक मरीज के लिए उपयुक्त है या नहीं, यह मरीज की स्थिति, सर्जरी के प्रकार और डॉक्टर की जांच पर निर्भर करेगा।

आधुनिक जांच सुविधाएं

वर्धमान नगर स्थित अस्पताल में बीमारियों की सटीक पहचान, इलाज के बारे में सही निर्णय और समय पर उपचार शुरू करने के लिए आधुनिक जांच तकनीक उपलब्ध होगी।

  • पूरी तरह डिजिटल और एआई तकनीक पर आधारित 3T एमआरआई
  • पूरी तरह डिजिटल और एआई तकनीक पर आधारित 256 स्लाइस सीटी स्कैन
  • होलॉजिक 3डी मैमोग्राफी

इन सभी आधुनिक जांच सुविधाओं से बीमारियों की जल्द पहचान, मरीज की स्थिति की विस्तार से जांच और सही इलाज की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

एआई आधारित क्रिटिकल केयर और ऑपरेशन थिएटर निगरानी

इस अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर और गहन चिकित्सा विभाग (आईसीयू) में एआई तकनीक की मदद से 24 घंटे मरीजों की निगरानी की सुविधा भी होगी। इससे मरीजों की स्थिति और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। ये तकनीकें डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के अनुभव व फैसलों में सहायता करेंगी, न कि उनकी जगह लेंगी।

रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास

इस अस्पताल में रोबोटिक फिजियोथेरेपी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मरीजों को ठीक होने और दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से उपचार मिल सकेगा। विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में मरीज की जरूरत के अनुसार तैयार उपचार योजना के साथ यह तकनीक कुछ मरीजों को ठीक होने में मदद कर सकती है।

डॉक्टरों ने क्या कहा

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और को-फाउंडर डॉ. आनंद संचेती ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों के माध्यम से मरीजों की बीमारी की पहचान, इलाज और ठीक होने की प्रक्रिया में वास्तव में सुधार लाने वाली आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। वर्धमान नगर स्थित अस्पताल में हम आधुनिक रोबोटिक सर्जरी, बेहतर जांच सुविधाएं और तकनीक की मदद से मरीजों की निगरानी की व्यवस्था एक ही जगह पर उपलब्ध करा रहे हैं।”

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर और को-फाउंडर तथा न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा, “वर्धमान नगर स्थित अस्पताल में सिंगल-पोर्ट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू होना, इस क्षेत्र के मरीजों के लिए सर्जरी की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

डायरेक्टर और को-फाउंडर तथा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निधीश मिश्रा ने कहा, “आधुनिक 256-स्लाइस सीटी स्कैन तकनीक की मदद से कम समय में सीटी स्कैन किया जा सकता है। साथ ही, हृदय को खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं की एंजियोग्राफी की तस्वीरें लगभग 21 सेकंड में प्राप्त की जा सकती हैं। इससे कुछ मरीजों में बिना थिएटर में डाले हृदय की धमनियों में बीमारी की जांच करने में मदद मिल सकती है।”

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के बारे में

न्यूएरा हॉस्पिटल्स एक मल्टी-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवा समूह है, जो मरीजों को आधुनिक तकनीक की मदद से उनकी जरूरतों के अनुसार और मेडिकल प्रमाणों पर आधारित इलाज उपलब्ध कराने पर ध्यान देता है। इस समूह के अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा केंद्र नागपुर के लकड़गंज, छत्रपति चौक, रामदासपेठ और वर्धमान नगर, नवी मुंबई के वाशी तथा तलेगांव में हैं।

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कैशलेस चिकित्सा SOP में बड़ी खामियां, AIACE ने कोल इंडिया अध्यक्ष को लिखा पत्र

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  • आपातकालीन इलाज में पूर्व अनुमति की शर्त जीवन के लिए खतरा, अस्पताल निर्देशिका और ओपीडी प्रारूप गायब, 18 अक्टूबर को बिलासपुर से भेजा गया विस्तृत सुझाव पत्र

बिलासपुर / कोलकाता, 20 अक्टूबर :

ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ कोल एग्जीक्यूटिव्स (एआईएसीई) ने कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा कैशलेस चिकित्सा उपचार के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार की मांग की है। संघ के प्रधान महासचिव पी. के. सिंह राठौर ने 18 अक्टूबर 2026 को कोल इंडिया के अध्यक्ष को पत्र क्रमांक एआईएसीई/सेंट्रल/2026/102 भेजकर एसओपी के मसौदे में रह गई खामियों को अंतिम रूप देने से पहले दूर करने का आग्रह किया है।

पहल की सराहना, लेकिन खामियों पर चिंता

पत्र में कोल इंडिया मुख्यालय के चिकित्सा विभाग द्वारा कार्यालय आदेश क्रमांक सीआईएल/सी-5बी/मेड/2026/347 दिनांक 15 अक्टूबर 2026 के माध्यम से कैशलेस चिकित्सा उपचार को सरल बनाने के लिए एसओपी लागू करने की पहल की सराहना की गई है। संघ ने कहा है कि यह केंद्रीकृत संरचना सहायक कंपनियों के स्तर पर लंबे समय से चले आ रहे प्रशासनिक अवरोधों को दूर करती है।

लेकिन मसौदे की परिचालन क्षमता के विश्लेषण में एआईएसीई ने संरचनात्मक कमियां, प्रक्रियागत चूक और टंकण संबंधी विसंगतियां पाई हैं, जिनके कारण यदि उन्हें अनसुलझा छोड़ दिया गया तो लाभार्थियों को गंभीर कष्ट होगा।

नौ प्रमुख खामियां चिह्नांकित

1. अनुलग्नक-ए गायब : दस्तावेज में अधिकृत अस्पतालों और उनके आधिकारिक ईमेल आईडी की सूची के लिए बार-बार अनुलग्नक-ए का उल्लेख है, लेकिन यह सूची फाइल में पूरी तरह से अनुपस्थित है। इसके बिना सहायक कंपनियां कानूनी रूप से संचार नहीं कर सकतीं।

2. अनुलग्नक-डी में ओपीडी प्रारूप नहीं : दस्तावेज में इन-पेशेंट विभाग (आईपीडी) रेफरल के लिए टेम्पलेट हैं (अनुलग्नक बी और सी) लेकिन आवर्ती कैशलेस ओपीडी क्लिनिक के लिए मानकीकृत आवेदन पत्र, रेफरल आदेश या ट्रैकिंग प्रारूप पूरी तरह से नहीं हैं।

3. आपातकालीन इलाज में खामी : धारा 5.1(4) कहती है कि कैशलेस देखभाल केवल सीआईएल मुख्यालय द्वारा ईमेल से अनुमोदन भेजे जाने के बाद ही शुरू होती है। दस्तावेज में जीवन-धमकी वाले मामलों के लिए कोई पूर्वव्यापी या आपातकालीन अनुमोदन खंड नहीं है, जहां प्रशासनिक ईमेल की प्रतीक्षा किए बिना रोगी को तुरंत भर्ती करने की आवश्यकता होती है।

4. लागत वृद्धि का कोई प्रोटोकॉल नहीं : धारा 5.2.2(2) और अनुलग्नक सी में स्वीकृत राशि की अनिवार्य सीमा की आवश्यकता है, लेकिन यदि आईपीडी रोगी को अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताओं का सामना करना पड़े तो अस्पताल को टॉप-अप या वृद्धि का अनुरोध करने के लिए कोई चरण-दर-चरण तंत्र, समय सीमा या आवश्यक कागजी कार्रवाई नहीं दी गई है।

5. बहिष्करण सूची अस्पष्ट : धारा 6 में कहा गया है कि गैर-चिकित्सीय वस्तुओं का भुगतान रोगी को स्वयं करना होगा। लेकिन इन वस्तुओं को परिभाषित नहीं किया गया है, जिससे दैनिक उपभोग्य सामग्रियों जैसे दस्ताने, ऊतक और प्रशासनिक शुल्कों के संबंध में डिस्चार्ज के समय बिलिंग विवाद पैदा होते हैं।

6. टर्नअराउंड समय की कोई सीमा नहीं : एसओपी में संचार चैनल तो निर्धारित हैं लेकिन सीआईएल मुख्यालय द्वारा अनुमोदन ईमेल जारी करने के लिए अधिकतम प्रसंस्करण विंडो (उदाहरण के लिए 24 या 48 घंटे) लागू नहीं की गई है, जिससे जरूरी नैदानिक देखभाल में देरी का खतरा है।

7. शिकायत और अपील का कोई ढांचा नहीं : यदि कोई पैनल अस्पताल कैशलेस प्रवेश से मना करता है या समझौता ज्ञापन की शर्तों के विरुद्ध अग्रिम जमा की मांग करता है तो लाभार्थियों के लिए तत्काल शिकायत दर्ज करने के लिए कोई समर्पित चैनल या संरचनात्मक पदानुक्रम परिभाषित नहीं है।

8. दीर्घकालिक ओपीडी सुविधा का अभाव : कैंसर और क्रोनिक किडनी रोग जैसे गंभीर रोगों के लिए दीर्घकालिक कैशलेस ओपीडी सुविधाओं के लिए कोई समर्पित ढांचा नहीं है। सीपीआरएमएस योजना के तहत कमजोर वरिष्ठ नागरिक प्रत्येक कीमोथेरेपी, पीईटी/सीटी, एमआरआई या डायलिसिस सत्र के लिए नया भौतिक या डिजिटल रेफरल प्राप्त नहीं कर सकते। इस पर विचार करना आवश्यक है।

9. आपातकालीन भर्ती के लिए कोई पूर्वव्यापी मार्ग नहीं : मसौदा सख्त अग्रिम इलेक्ट्रॉनिक प्राधिकरण लागू करता है लेकिन आपातकालीन जीवन-धमकी वाली भर्तियों को किसी पूर्वव्यापी अनुमोदन के बिना छोड़ देता है।

सुधार के बाद ही एसओपी को अंतिम रूप देने की मांग

एआईएसीई ने आग्रह किया है कि चिकित्सा विभाग को ढांचे को अंतिम रूप देने से पहले इन सुधारों को अपनाने के निर्देश दिए जाएं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सीआईएल के कार्यरत और सेवानिवृत्त परिवार के सदस्यों का कल्याण ग्रेट प्लेस टू वर्क महारत्न उद्यम के मानक के अनुरूप हो।

संघ ने चिकित्सा समन्वय और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपने मनोनीत सलाहकारों के माध्यम से सीआईएल प्रबंधन को सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की है। साथ ही अनुरोध किया है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए योजनाओं के निर्माण और एसओपी के सफल क्रियान्वयन के दौरान एआईएसीई के प्रतिनिधियों को आधिकारिक रूप से शामिल किया जाए।

पत्र की प्रतियां भारत सरकार के कोयला सचिव, कोयला और खान मंत्री, नई दिल्ली तथा एससीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई हैं, जिसमें सीआईएल की तर्ज पर ठोस एसओपी तैयार करने का अनुरोध किया गया है।

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ऑस्टियोपोरोसिस : हड्डियों का साइलेंट रोग, जागरूकता ही बचाव है

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  • विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस 2026 पर विशेषज्ञों का संदेश – कैल्शियम, विटामिन डी, व्यायाम और धूम्रपान से दूरी से ही मजबूत रहेंगी हड्डियां, डीईएक्सए जांच से समय पर हो पहचान

नागपुर,20 अक्टूबर :

हड्डियों की कमजोरी से जुड़ा रोग ऑस्टियोपोरोसिस एक साइलेंट डिजीज है। इसमें हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और अंदरूनी संरचना कमजोर पड़ जाती है। हड्डियां धीरे-धीरे बिना किसी लक्षण के कमजोर होती जाती हैं, जब तक कि कोई फ्रैक्चर न हो जाए। विशेषज्ञों के अनुसार यह रोग विशेष रूप से कमर, कूल्हे और कलाई को प्रभावित करता है, पर पूरे कंकाल तंत्र को कमजोर कर देता है। समय पर पहचान, उपचार और बचाव से इसके गंभीर परिणामों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है और किसे खतरा है

डॉ. सीमा दांडे, संयुक्त सचिव, ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी ऑफ इंडिया और डॉ. शैलेश पिताले, कोषाध्यक्ष, ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी ऑफ इंडिया के अनुसार हड्डियां जीवित ऊतक हैं जो लगातार टूटती और बनती रहती हैं। उम्र बढ़ने पर जब टूटना बनने से अधिक हो जाता है तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। उम्र बढ़ना, रजोनिवृत्ति, कम कैल्शियम और विटामिन डी, शारीरिक निष्क्रियता, कम वजन और पारिवारिक इतिहास प्रमुख कारण हैं। एक मामूली गिरावट या झुकने जैसी साधारण क्रिया भी फ्रैक्चर का कारण बन सकती है।

ऑस्टियोपोरोसिस सभी उम्र के लोगों को हो सकता है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाएं और वृद्ध वयस्क अधिक जोखिम में होते हैं। रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन की कमी से हड्डियों की हानि तेज हो जाती है। अन्य कारणों में पारिवारिक इतिहास, कम शारीरिक सक्रियता, विटामिन डी की कमी, धूम्रपान, अधिक शराब, कुछ दवाएं और लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड का सेवन शामिल है।

युवा भी नहीं हैं सुरक्षित

डॉ. चैतन्य शेंबेकर, आईवीएफ सलाहकार और लैप्रोस्कोपिक सर्जन, ओमेगा हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस केवल वृद्धों का रोग नहीं है। कम पोषण, हार्मोनल असंतुलन, खान-पान की गड़बड़ी, कुछ दीर्घकालिक रोग और लंबे समय तक स्टेरॉइड का उपयोग युवा लोगों में भी हड्डी के नुकसान का कारण बन सकता है। बचपन और किशोरावस्था हड्डियों के अधिकतम घनत्व के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। युवाओं में बार-बार फ्रैक्चर, अस्पष्टीकृत हड्डी दर्द या जोखिम कारकों की उपस्थिति पर चिकित्सा मूल्यांकन आवश्यक है।

महिला और पुरुष दोनों प्रभावित

डॉ. सीमा दांडे के अनुसार हड्डियों के स्वास्थ्य में हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका है। रजोनिवृत्ति के दौरान और बाद में एस्ट्रोजन की कमी से हड्डियों की हानि तेज हो जाती है। जिन महिलाओं को शीघ्र रजोनिवृत्ति, कम वजन, धूम्रपान या अपर्याप्त कैल्शियम का सामना करना पड़ता है, उन्हें अधिक जोखिम होता है। पुरुषों में भी यह रोग हो सकता है, हालांकि पैटर्न भिन्न है। पुरुष आमतौर पर अधिक हड्डी घनत्व प्राप्त करते हैं और कम दर से हड्डी खोते हैं, पर उनकी हानि उम्र के साथ बढ़ती जाती है। टेस्टोस्टेरोन की कमी, शराब, धूम्रपान और कॉर्टिकोस्टेरॉइड का सेवन पुरुषों में भी जोखिम बढ़ाता है।

डीईएक्सए स्कैन क्या है

डॉ. आशुतोष आप्टे, संयुक्त कोषाध्यक्ष, ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी ऑफ इंडिया के अनुसार डीईएक्सए का पूरा नाम ड्यूल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्शन है। यह एक त्वरित, गैर-आक्रामक परीक्षण है जो हड्डियों के खनिज घनत्व को मापता है, आमतौर पर कूल्हे और रीढ़ पर। यह लो डोज एक्स-रे का उपयोग करता है और आमतौर पर दर्दरहित होता है। जांच में 10 से 20 मिनट लगते हैं। पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाएं और 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष, जिन्होंने फ्रैक्चर झेला हो, को डॉक्टर से परामर्श के बाद जांच करानी चाहिए। 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं, 70 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों, किसी भी उम्र में फ्रैक्चर होने वालों, कम वजन, धूम्रपान और लंबे समय तक स्टेरॉइड का उपयोग करने वालों के लिए यह जांच महत्वपूर्ण है।

ऑस्टियोपोरोसिस बनाम ऑस्टियोपेनिया

डॉ. सोहेल खान, ऑर्थोपेडिक और स्पाइन सर्जन, गंगाकेयर हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार ऑस्टियोपेनिया सामान्य से कम हड्डी घनत्व को दर्शाता है, लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस जितना कम नहीं। यह अक्सर हड्डियों के नुकसान का प्रारंभिक चरण माना जाता है, जो हमेशा ऑस्टियोपोरोसिस में नहीं बदलता। फ्रैक्चर का जोखिम केवल डीईएक्सए रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि उम्र, पिछले फ्रैक्चर, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान, विटामिन डी और कैल्शियम के सेवन पर निर्भर करता है।

कैल्शियम और विटामिन डी ही आधार

डॉ. देवाशीष बरिक, एमएस, डीएनबी, एफएएमईआर, ऑर्थो, इंटीग्रा स्पेशियलिटी क्लिनिक, नागपुर के अनुसार कैल्शियम हड्डियों का मुख्य खनिज घटक है। यह हड्डियों को ताकत और संरचना देता है। विटामिन डी आंतों को कैल्शियम अवशोषित करने और हड्डियों के खनिजीकरण में मदद करता है। दूध, दही, पनीर, रागी, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल और मछली कैल्शियम के स्रोत हैं। विटामिन डी धूप, वसायुक्त मछली और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों से मिलता है। शाकाहारी आहार भी पर्याप्त हो सकता है यदि दूध, दही, रागी, तिल और हरी सब्जियों का नियमित सेवन हो। केवल खाद्य पदार्थों से ही विटामिन डी की आवश्यकता पूरी नहीं हो सकती, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें धूप कम मिलती है।

डॉ. प्रतीक कावडे, एमबीबीएस, एमएस, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, कावडे हॉस्पिटल, वाणी के अनुसार अकेले कैल्शियम और विटामिन डी की खुराक ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं है। विटामिन डी की पर्याप्तता के लिए धूप के संपर्क में रहना, फोर्टिफाइड आहार और पूरक आवश्यक हो सकते हैं। केवल सख्त शाकाहारी आहार पर्याप्त नहीं है, उसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों से पूरक करना आवश्यक है। उपचार निर्णयों में दवाओं, जीवनशैली और समग्र जोखिम का भी विचार किया जाता है।

धूम्रपान और चाय-कॉफी का प्रभाव

डॉ. अशोक कादू, एमएस, एमसीएच, ऑर्थो, न्यू डेल्टा हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार धूम्रपान हड्डियों के चयापचय पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और हड्डियों की मरम्मत की क्षमता को कम करता है। धूम्रपान करने वालों में फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है। धूम्रपान छोड़ना हड्डियों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. सचिन घाटगे, आईएमए अध्यक्ष, नागपुर के अनुसार चाय या कॉफी का सेवन सीधे हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अधिक कैफीन से कैल्शियम की हानि बढ़ सकती है। दिन में कई कप चाय या कॉफी पीने वालों को अपने कैल्शियम का सेवन पर्याप्त रखना चाहिए।

व्यायाम से मजबूत होंगी हड्डियां

डॉ. अशोक कादू के अनुसार शारीरिक गतिविधि हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना और नृत्य हड्डियों के निर्माण में मदद करते हैं। संतुलन और प्रतिरोध प्रशिक्षण मांसपेशियों को मजबूत करता है और गिरने के जोखिम को कम करता है। नियमित व्यायाम विशेष रूप से वृद्धों के लिए लाभकारी है।

अकेले पैदल चलना पर्याप्त नहीं

डॉ. राजसी केन सेनगुप्ता, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, स्त्रीरोग विभाग, दत्ता मेघे मेडिकल कॉलेज व शालिनीताई मेघे मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार पैदल चलना हृदय स्वास्थ्य और गतिशीलता को सहारा देता है, पर यह अकेले ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसमें चलना, प्रतिरोध प्रशिक्षण, संतुलन अभ्यास और समुचित आहार शामिल हो।

प्रारंभिक चेतावनी संकेत

डॉ. राजसी केन सेनगुप्ता के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस अक्सर तब तक चुपचाप रहता है जब तक फ्रैक्चर न हो जाए। कमर में अचानक तेज दर्द, ऊंचाई में कमी, झुकाव या कूबड़, और मामूली चोट पर फ्रैक्चर – ये सभी प्रमुख लक्षण हैं। बिना किसी स्पष्ट कारण के कशेरुका फ्रैक्चर हो सकता है। लगातार पीठ दर्द, ऊंचाई में कमी और कूबड़ विकसित होने पर चिकित्सक से तुरंत परामर्श लेना चाहिए।

क्या ऑस्टियोपोरोसिस को उल्टा किया जा सकता है

डॉ. समीर छेपुरवार, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, श्री गजानन हॉस्पिटल, चंद्रपुर के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस का प्रभावी उपचार संभव है और कुछ रोगी हड्डी घनत्व में सुधार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह से सामान्य स्थिति में लाना संभव नहीं है। जीवनशैली में बदलाव, उचित दवाएं और संतुलित आहार सभी फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में योगदान करते हैं। यह रोग जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, विशेष रूप से फ्रैक्चर होने के बाद दर्द और गतिशीलता में कमी होती है। कूल्हे या रीढ़ के फ्रैक्चर के बाद कुछ व्यक्तियों को पुनर्वास और सहायता की आवश्यकता हो सकती है।

घर पर गिरने और फ्रैक्चर से बचाव

डॉ. सचिन घाटगे के अनुसार घर पर गिरना हड्डियों के फ्रैक्चर का मुख्य कारण है। सीढ़ियों, गलियारों और बाथरूम में रेलिंग लगाएं, फिसलन रहित फर्श और बाथरूम में ग्रैब बार लगाएं। घर में अच्छे प्रकाश का प्रबंध करें, उचित फुटवियर पहनें, नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं और दवाओं की समीक्षा करें। हड्डियों की मजबूती के लिए व्यायाम और संतुलन प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। घर के खतरों की पहचान कर उन्हें दूर करें।

बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव संभव है। बचपन से ही मजबूत हड्डियों का निर्माण करें। पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन लें। नियमित वजन उठाने वाले व्यायाम करें। धूम्रपान से बचें, शराब का सेवन सीमित करें। गिरने के जोखिम को कम करने के लिए घर को सुरक्षित बनाएं और संतुलन सुधारने के लिए अभ्यास करें। उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को डॉक्टर से परामर्श कर समय पर जांच और उपचार लेना चाहिए।

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