Connect with us

Article

कंक्रीट की तपिश में झुलसता नागपुर, हरियाली ही अंतिम उम्मीद

Published

on

2026 की गर्मी ने विदर्भ का पारा ही नहीं, लोगों का सब्र भी तोड़ दिया है। अप्रैल से शुरू हुई यह आग बरसाती गर्मी अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर चुकी है। नागपुर, चंद्रपुर, वर्धा से लेकर गढ़चिरौली तक हालात एक जैसे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ मौसम का मिजाज है या हमने खुद अपने शहर को तंदूर बना दिया है?

सीमेंट का जाल, पेड़ों का कत्ल

स्थानीय निवासी निशंक RK ने ‘TOPWIRE’ में लिखा है कि बचपन से नागपुर में रहते हुए ऐसी असहनीय गर्मी कभी महसूस नहीं की। वजह साफ है। हर गली मोहल्ले में सीमेंट की सड़कें, पेवर ब्लॉक और विकास के नाम पर पेड़ों की बेरहम कटाई। सीमेंट दिनभर सूरज की गर्मी सोखता है और रात में भट्ठी की तरह उसे उगलता है। नतीजा यह कि रात में भी घरों की दीवारें तपती रहती हैं।

उनकी मांग है कि आवासीय कॉलोनियों की भीतरी सड़कों का कंक्रीटीकरण तुरंत रोका जाए। पुरानी तारकोल की सड़कें और मिट्टी के कच्चे फुटपाथ ही बेहतर थे। वे बारिश का पानी जमीन में उतारते थे और तापमान काबू में रखते थे। साथ ही कॉलोनियों में आंधी से गिरे पेड़ों की जगह तुरंत 3 से 4 फीट ऊँचे देशी पौधे लगाए जाएं ताकि उनके बचने की गारंटी हो।

बाग उजड़ रहे, झीलें दम तोड़ रही

तस्नीम RK ने याद दिलाया कि गर्मी सिर्फ नागपुर की समस्या नहीं, पूरे देश की है। लेकिन नागपुर के पास समाधान भी हैं। शहर को प्रकृति ने कई तालाबे दी हैं। मगर वे जलकुंभी से पटी पड़ी हैं। अगर झीलों को साफ कर पानी की सतह खुली छोड़ी जाए तो वाष्पीकरण से तापमान गिरेगा।

NMC ने चौराहों पर हरे नेट तो लगा दिए, पर डिवाइडर के पौधे और सार्वजनिक बाग पानी के बिना सूख रहे हैं। बड़े पेड़ ऊपर से हरे दिखते हैं पर उनके नीचे की झाड़ियां दम तोड़ चुकी हैं।

आगे का रास्ता

दोनों लेखकों की राय एक है: ग्रीन नेट लगाना खानापूर्ति है। असली इलाज हरियाली बढ़ाना है।

मुख्य सुझाव:

  • सीमेंट पर रोक: कॉलोनियों में नई सीमेंट सड़क न बने।
  • देशी पेड़ लगाओ: बरगद, नीम, पीपल जैसे पेड़ जो कम पानी में भी छांव देते हैं।
  • तालाब बचा: जलकुंभी हटाकर तालाबों को जिंदा करो।
  • ट्रैफिक कंट्रोल: चुनिंदा इलाकों में पेट्रोल डीजल गाड़ियों पर रोक से ‘वेस्ट हीट’ कम होगी।

अगर अब भी नहीं चेते तो प्रकृति अपना हिसाब खुद करेगी। जैसा मृणाल RK ने लिखा है, “Together we should and We can!” यानी मिलकर ही हम इस आग से लड़ सकते हैं।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Article

सेवा को समर्पित जीवन: संदीप जोशी की पहलों से बदल रही नागपुर की तस्वीर

Published

on

  • “दीनदयाल थाली” से भूख मिटाना, “अनोखा बाजार” से सम्मान देना – नौ वर्षों से निरंतर मानवता की सेवा में जुटे श्रीविद्यानिधि अन्नपूर्णा सेवा फाउंडेशन

नागपुर, 21 अगस्त 2026:

नागपुर। “सेवा ही समाधान” और “मानुसकी का वसा जपणारे” के संकल्प के साथ पिछले नौ वर्षों से समाजसेवा में जुटे श्रीविद्यानिधि अन्नपूर्णा सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप जोशी ने अपनी सामाजिक पहलों से हजारों जरूरतमंदों के जीवन में उजाला भरा है। विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, फाउंडेशन द्वारा संचालित “दीनदयाल थाली” और “अनोखा बाजार” जैसी योजनाएं आज नागपुर की पहचान बन गई हैं।

भूखों के लिए “दीनदयाल थाली”
फाउंडेशन की सबसे महत्वपूर्ण पहल “दीनदयाल थाली” है। इस योजना के तहत केवल 10 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।
पिछले नौ वर्षों से यह सेवा बिना किसी रुकावट के चल रही है। भोजनालयों में लंबी कतारें इस बात की गवाह हैं कि यह योजना कितनी आवश्यक है। उद्घाटन समारोहों में दीप प्रज्वलन और सम्मान समारोहों की तस्वीरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई हैं, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सम्मान के साथ मदद – “अनोखा बाजार”
भूख के साथ-साथ सम्मान की आवश्यकता को समझते हुए फाउंडेशन ने “अनोखा बाजार” की शुरुआत की। यह कोई सामान्य बाजार नहीं, बल्कि “मानुसकी की देव-घेवाण” का केंद्र है।
इसका सिद्धांत बहुत सरल है – “जिसके पास अधिक है वह दान करे, जिसे आवश्यकता है वह ले जाए”। यहां दानदाता कपड़े, पुस्तकें, घरेलू सामान, बर्तन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं जमा करते हैं। वहीं जरूरतमंद लोग बिना किसी भेदभाव के अपनी जरूरत की चीजें चुनकर ले जाते हैं।
“अनोखा बाजार” का पहला द्रव्य हाल ही में संपन्न हुआ, जिसकी तस्वीरें भी प्रकाशित हुई हैं। इस पहल ने दान को भिक्षा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जोड़ा है।

आधार से लेकर स्वास्थ्य तक सहयोग
संदीप जोशी की टीम केवल भोजन और वस्त्र तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, “जिन्होंने आधार कार्ड गंवाया, उनके साथ संदीप जोशी की सोबत” – इस अभियान के तहत गुम हुए दस्तावेज बनवाने में भी मदद की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य शिविर, शैक्षणिक सहायता और अन्य सामाजिक कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।

सामाजिक समर्थन और प्रेरणा
विभिन्न समाचार पत्रों – लोकसत्ता, तरुण भारत, देशोन्नति, पुण्य नगरी आदि – ने संदीप जोशी के कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। “सेवा हेच समाधान” शीर्षक से छपी खबरों में उनके कार्यों को “मानुसकी जपणारी” पहल बताया गया है।
फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि संदीप जोशी का नेतृत्व और “किसी को भूखा नहीं रहने देंगे” का विचार ही इन सभी पहलों की प्रेरणा है।

निष्कर्ष
संदीप जोशी और उनकी टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठित प्रयासों से समाज की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है। “दीनदयाल थाली” भूख मिटाती है तो “अनोखा बाजार” आत्मसम्मान बचाता है। नागपुर के नागरिकों ने भी इन पहलों को दिल से अपनाया है और दान एवं सहयोग के माध्यम से इस आंदोलन को आगे बढ़ाया है।

फाउंडेशन का संदेश स्पष्ट है – समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा, क्योंकि सच्ची सेवा ही मानवता की सबसे बड़ी पूजा है।

Continue Reading

Article

रासलीला गरबा समूह नागपुर में प्रवेश के अंतिम अवसर

Published

on

  • परंपरा की लय के साथ जुड़िए

नवरात्रि का उत्सव आते ही संपूर्ण महाराष्ट्र और गुजरात में गरबा की धूम मच जाती है। ढोल की थाप, चनिया-चोली की घुंघराहट और सामूहिक नृत्य की ऊर्जा हर किसी को अपने साथ बहा ले जाती है। इसी परंपरा को जीवंत रखने के लिए नागपुर में रासलीला गरबा समूह द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

रासलीला गरबा समूह क्या है?
रासलीला गरबा समूह केवल एक नृत्य कक्षा नहीं है, यह हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। समूह का मूल मंत्र है – “गरबा केवल नृत्य नहीं, यह हमारी पहचान है”। इसी भावना के साथ “रासलीला गरबा एक्सप्रेस” के माध्यम से सभी आयु वर्ग के लोगों को परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। समूह का उद्देश्य है परंपरा की लय के साथ नृत्य करना और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना।

प्रशिक्षण की विशेषताएं
यदि आपने अभी तक प्रवेश नहीं लिया है, तो यह आपके लिए अंतिम अवसर हो सकता है। रासलीला गरबा समूह में आपको निम्न सुविधाएं प्राप्त होंगी:

1. विशेषज्ञ प्रशिक्षक
अनुभवी और कुशल प्रशिक्षकों द्वारा बुनियादी स्तर से लेकर व्यावसायिक स्तर तक गरबा सिखाया जाएगा।

2. सभी आयु वर्ग के लिए समूह
बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, सभी के लिए अलग-अलग समूह बनाए गए हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपनी गति से सीख सके।

3. क्रमबद्ध शिक्षण पद्धति
स्टेप बाय स्टेप विधि से सिखाया जाता है। आरंभिक ताल से लेकर जटिल स्टेप्स तक, प्रत्येक चरण को सरलता से समझाया जाएगा।

4. उत्सव में प्रस्तुति का अवसर
प्रशिक्षण के पश्चात नवरात्रि के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में प्रतिभागियों को मंच पर प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया जाएगा।

5. आनंद, स्वास्थ्य और परंपरा का संगम
गरबा केवल मनोरंजन नहीं है। यह शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक आनंद और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम भी है।

स्थान और संपर्क
यह कार्यक्रम नागपुर में “गरबा स्टेशन नागपुर” के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। स्थान सीमित हैं, इसलिए शीघ्र पंजीकरण आवश्यक है।

संपर्क सूत्र: 899009681, 9370572885
स्थान
: नागपुर

अंतिम चेतावनी
पोस्टर में स्पष्ट रूप से कहा गया है – “कल यह मत कहना कि काश पंजीकरण कर लिया होता”। सीटें सीमित हैं और प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र समाप्त होने वाली है। यदि आप इस नवरात्रि को परंपरा के रंग में रंगना चाहते हैं, तो अभी पंजीकरण कराएं।

गरबा हमारी जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। रासलीला गरबा समूह के साथ इस वर्ष न केवल नृत्य सीखिए, बल्कि अपनी संस्कृति को भी अनुभव कीजिए।

अधिक जानकारी के लिए @rass_lila_garba_group से जुड़ सकते हैं।

तो देर किस बात की? आज ही पंजीकरण कीजिए और “रासलीला गरबा एक्सप्रेस” का हिस्सा बनिए।

Continue Reading

Article

राम मंदिर ट्रस्ट ने सीईओ चयन एक माह टाला

Published

on

  • 5200 आवेदन मिलने पर अंतरिम सचिव नियुक्त होगा, धार्मिक समिति और पुजारी प्रशिक्षण संस्थान बनाने का निर्णय

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ के चयन को एक माह के लिए स्थगित कर दिया। ट्रस्ट को इस पद के लिए कुल 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों की अधिक संख्या के कारण चयन समिति ने अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया।

ट्रस्ट की बैठक में बढ़ते प्रशासनिक कार्यों को देखते हुए अंतरिम सचिव की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया। ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी दी।

तीन रिक्त पदों पर अभी निर्णय नहीं
बोर्ड की बैठक में ट्रस्ट के तीन रिक्त न्यासी पदों को भरने पर कोई निर्णय नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार अब इस विषय पर अगली बैठक 2 सितंबर को होगी। बैठक में श्रावण माह में श्रद्धालुओं की अपेक्षित बढ़ोतरी, रिक्त न्यासी पदों को भरने की प्रगति तथा कई प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों की समीक्षा भी की गई।

धार्मिक और प्रशिक्षण संबंधी बड़े निर्णय
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि ट्रस्ट ने राम मंदिर के सभी धार्मिक कार्यों की निगरानी के लिए एक स्थायी धार्मिक समिति गठित करने का फैसला किया है। इस समिति में नौ संत शामिल होंगे, जिनमें पांच अयोध्या के और चार बाहर के होंगे।

इसके साथ ही पुजारियों के प्रशिक्षण के लिए एक स्थायी प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। इस संस्थान से प्रशिक्षित पुजारियों को राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।

दान में अनियमितता और सुरक्षा पर चर्चा
बैठक में श्रद्धालुओं की चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितता की जांच कर रही विशेष जांच दल यानी एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हो सकी, क्योंकि रिपोर्ट अभी ट्रस्ट को प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि न्यासियों ने मंदिर दान में गबन से संबंधित याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही और निर्देशों का संज्ञान लिया।

कृष्ण मोहन ने बताया कि मंदिर के सीसीटीवी नेटवर्क और दान गिनती कक्ष में लगे कैमरों सहित सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। सभी सुरक्षा अधिकारियों को निगरानी प्रणाली तक पहुंच प्राप्त है, इस पर संतोष व्यक्त किया गया।

दान की गिनती के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन पर भी चर्चा हुई। अनियमितता सामने आने के बाद बैंक की प्रतिक्रिया पर सदस्यों ने निराशा जताई। बोर्ड ने वित्त समिति को बैंक से संबंधों और मानक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।

ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक के टकसाल के साथ सोने-चांदी के चढ़ावे की मात्रा और शुद्धता जांचने की व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रहेगी।

जनसंपर्क और श्रद्धालुओं की संख्या
जनता तक नियमित जानकारी पहुंचाने के लिए ट्रस्ट एक आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करेगा। तीन रिक्त न्यासी पदों के संबंध में कृष्ण मोहन ने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने में कुछ और सप्ताह लग सकते हैं।

हाल में श्रद्धालुओं की संख्या घटने के दावे को कृष्ण मोहन ने “निराधार और भ्रामक” बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, यह करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाता है।

न्यासियों ने अयोध्या, देश-विदेश के श्रद्धालुओं, संत समाज और अवध की जनता के “निरंतर समर्थन और विश्वास” के लिए आभार भी व्यक्त किया।

पृष्ठभूमि
यह बैठक मंदिर में दान के गबन के आरोपों के बीच हुई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों से 20.39 लाख रुपये नकद के अलावा सोना, चांदी, विदेशी मुद्रा और ‘रामराज्य कोष’ लिखा दान पात्र भी बरामद किया है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है। national

Continue Reading
Advertisement

Weather data unavailable.

Trending