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भाजपा के भीतर का चक्रव्यूह: सोले को फॉर्म भरने दिया, प्रचार करने दिया, फिर घर बैठाया – 150 वोट पर खत्म कर दिया करियर ?

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  • फडणवीस की रणनीति पर सवाल: 15,032 अवैध वोट, कराले के 24,249 वोट बने किंगमेकर, 38 उम्मीदवारों में बंटा चुनाव, नागपुर ने मिटाया कांग्रेस का 0 वाला कलंक, कोहले की कुंडली में फिर विजय-योग नहीं

नागपुर, 29 अक्टूबर : नागपुर विभाग पदवीधर चुनाव सिर्फ कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं, बल्कि भाजपा बनाम भाजपा की अंदरूनी लड़ाई भी बन गया। सबसे चर्चित कहानी बनी अनिल सोले की।

फॉर्म से लेकर 150 वोट तक का खेल –

भाजपा के पुराने साथी, पूर्व महापौर और पूर्व विधान परिषद सदस्य अनिल सोले ने बगावत कर निर्दलीय फॉर्म भरा। आरोप है कि भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने जानबूझकर उन्हें रोका नहीं। फॉर्म भरने दिया, प्रचार-प्रसार शुरू करने दिया, नाम वापसी की अंतिम तारीख भी निकलने दी। जब सोले कानूनी तौर पर मैदान में फंस गए, तब फडणवीस खुद उनके घर जाकर बैठ गए और बैठा दिया।

नतीजा सामने है – 2,55,603 मतदाताओं वाले क्षेत्र में जहां 1,65,672 लोगों ने वोट डाला, 1,65,705 बैलेट पेपर गिने गए, वहां सोले को मात्र 150 वोट मिले। 84 टेबलों पर 41 घंटे चली मतगणना में यह आंकड़ा सोले के राजनीतिक करियर पर पूर्णविराम जैसा माना जा रहा है। कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि पार्टी ने ही अपने बागी का करियर निपटा दिया।

41 घंटे का सस्पेंस और कराले फैक्टर –

मंगलवार को कांग्रेस के एडवोकेट अभिजीत वंजारी आगे, बुधवार दोपहर भाजपा के सुधाकर कोहले ने 4,294 वोटों की बढ़त बनाई, फिर बुधवार रात 11 बजे अपक्ष नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी की दूसरी पसंद की गिनती शुरू होते ही खेल पलट गया।

आधिकारिक आंकड़ा – पहली पसंद में कोहले 60,924, वंजारी 56,630, कराले 24,249। कोटा 75,438 किसी को नहीं मिला। 15,032 वोट अवैध। एलिमिनेशन राउंड में कराले के वोट वंजारी को ट्रांसफर हुए और वंजारी 67,231 वोट लेकर विजयी घोषित हुए, कोहले 63,960 पर रह गए। प्रमाणपत्र विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने दिया।

यही कारण है कि गिनती में इतनी देरी हुई। महाराष्ट्र की अन्य 4 सीटों के नतीजे पहले आ गए, पर नागपुर में वरीयता प्रणाली के कारण 238 पोस्टल में से 34 अवैध, 204 वैध, 445 केंद्रों के वोट और दूसरी पसंद की गिनती में समय लगा।

अवैध वोटों का रहस्य और चाणक्य फेल ?

विनोद तिवारी का आरोप – 3000 से ज्यादा वोट इसलिए अवैध हुए क्योंकि कोहले के सामने सिर्फ “2” लिखा था, “1” किसी को दिया ही नहीं। कुल 15,000 से ज्यादा वोट अवैध – क्या यह सुनियोजित गेम था? भाजपा ने दोबारा जांच की मांग की, प्रशासन ने खारिज कर दिया। प्रशासन ने कहा – सभी प्रतिनिधियों को मतपत्र दिखाकर ही अवैध घोषित किया था।

“BJP का चक्रव्यूह, BJP के चाणक्य कहां हो गए फेल”। तिवारी पूछते हैं – पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, पूर्व विदर्भ के 24 जिलों के 12 लाख से ज्यादा पदवीधरों ने महायुति को नकारा, तो 78 हजार शिक्षकों वाली सीट पर पैठणी-पैसे से जीती 2 सीटों को जीत कैसे मानें ?

दूसरी खबर – “नागपुर ने मिटाया कांग्रेस का 0 वाला कलंक”। PM मोदी ने 29 सीटों पर मतदान के बाद ट्वीट कर कांग्रेस पर 0 सीट का तंज किया था, पर नागपुर, बनारस, पटना में भाजपा हारी तो वह तंज उलटा पड़ गया। कांग्रेस में जश्न और भाजपा खेमे में मायूसी के बीच मानकापुर स्टेडियम के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में नारेबाजी हुई, पुलिस को रोकना पड़ा।

कोहले की कुंडली में विजय-योग क्यों नहीं ?

अखबार की दूसरी हेडलाइन – “कोहले की कुंडली में विजय-योग नहीं”। नगरसेवक से NIT का विश्वस्त, फिर 2014 में पहली बार विधायक, फिर उतार-चढ़ाव। 2019 में विधायक रहते विधानसभा टिकट नहीं, 2024 में पश्चिम नागपुर विधानसभा हारे, अब पदवीधर भी हारे। संगठन में जिलाध्यक्ष बनाया, मतदाता पंजीयन की जिम्मेदारी दी, पर जीत नहीं मिली। पार्टी और संघ के समर्थन के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं।

निष्कर्ष – सोले को 150 वोट पर समेट कर भाजपा ने एक बागी को तो ठिकाने लगाया, पर इस चक्रव्यूह में खुद का गढ़ भी गंवा दिया। कार्यकर्ता अब दबी जुबान में कह रहे हैं – “ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होती”।

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छुट्टियों के बोझ तले दबा प्रशासन: सरकारी कार्यसंस्कृति पर सवाल और अर्थव्यवस्था को नुकसान

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  • विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब जवाबदेही बढ़ेगी, काम टालने की मानसिकता खत्म होगी – नागपुर के सामाजिक चिंतक संजय अग्रवाल का विस्तृत विश्लेषण

नागपुर – भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और विकसित राष्ट्र कहलाने का सपना दिखाया जा रहा है। प्रतिभा है, युवा शक्ति है, उद्यमशीलता है, संसाधन हैं। पर सवाल है – क्या प्रशासनिक व्यवस्था आर्थिक क्षमता के अनुरूप काम कर रही है ?

एक तरफ किसान कर्ज, मौसम, बाजार झेलता है। मजदूर को रोज काम करना पड़ता है। निजी कर्मचारी को लक्ष्य पूरा करना होता है। व्यापारी को टिके रहने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। दूसरी तरफ सरकारी कार्यालयों में शिकायत आम है – काम समय पर नहीं, फाइलें लंबित, अधिकारी उपलब्ध नहीं, नागरिक को अपने ही काम के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं।

यह सिर्फ असुविधा नहीं, उत्पादकता, निवेश, रोजगार और विकास से जुड़ा मामला है। जनता के कर से वेतन पाने वाली व्यवस्था जनता के प्रति कितनी जिम्मेदार है, यही सवाल है। कर्मचारी को विश्राम, परिवार और वैधानिक छुट्टी का अधिकार है, पर अधिकार के साथ कर्तव्य भी है। वेतन, पद, सुविधा के साथ गुणवत्ता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।

  1. छुट्टियों की व्यवस्था –

भारत विविध धर्मों, पंथों का देश है। त्योहारों का सामाजिक महत्व है। पर अवकाश व्यवस्था पर विचार जरूरी है। केंद्र के सामान्य प्रशासनिक कार्यालयों में शनिवार-रविवार बंद – साल में 104 दिन। दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालयों के लिए 2026 में 17 राजपत्रित अवकाश घोषित हैं, पर कुछ शनि-रवि को पड़ते हैं तो दोहराव जोड़ना सही नहीं। राज्यों में सूची अलग।

असली चिंता छुट्टियों की संख्या नहीं, उपलब्ध कार्यदिवसों का उत्पादक उपयोग है। समय पर काम शुरू न हो, निर्णय में देरी हो, तो कार्यदिवस का महत्व घट जाता है। जनता के कर से वेतन पाने वाले को जनता के समय की कीमत समझनी चाहिए।

  1. जवाबदेही कहां है ?

निजी में काम खराब तो मूल्यांकन और कार्रवाई। सरकारी में नागरिक को पता ही नहीं काम किसके पास अटका, जिम्मेदार कौन, शिकायत पर कार्रवाई होगी या नहीं।

एक वर्ग निष्ठा से काम करता है, पर जहां लापरवाही, कामचोरी है, वहां सख्त कार्रवाई जरूरी है। समय पर आना, उपस्थित रहना, फाइल बढ़ाना एहसान नहीं, बुनियादी जिम्मेदारी है। फिर भी प्रमाणपत्र के लिए हफ्तों इंतजार, पेंशन के लिए बुजुर्ग के चक्कर, किसान को सहायता के लिए चक्कर – तो सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकारी नौकरी सेवा का दायित्व है, सिर्फ वेतन-सुरक्षा का साधन नहीं। कर्मचारी संगठनों को भी अधिकारों के साथ कार्यक्षमता, अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी पर जोर देना चाहिए। अच्छे काम पर प्रोत्साहन और लापरवाही पर जवाबदेही, दोनों हों।

  1. आर्थिक नुकसान के प्रमाणित आंकड़े –

क) शिकायतों का पहाड़ – CPGRAMS पर 2021 से फरवरी 2026 तक 1,11,89,384 शिकायतें। 2025 में ही 22,78,256। 2025 में केंद्रीय मंत्रालयों में औसत निस्तारण 15 दिन, 82.1% शिकायतें 21 दिन में निपटीं। निस्तारण अच्छी बात है, पर बेहतर होता लापरवाही पहले ही सुधरती ताकि शिकायत की नौबत कम आती।

ख) अनुपस्थिति की कीमत – NBER में 2014 के अध्ययन में भारत में सरकारी शिक्षकों की अनधिकृत अनुपस्थिति की वेतन लागत लगभग 1.5 अरब डॉलर प्रतिवर्ष आंकी गई। यह 2026 का नुकसान नहीं, उस समय के आंकड़ों पर आधारित है। शोध में मिला कि निरीक्षण बढ़ने से अनुपस्थिति घटी। यह सिर्फ वेतन की बर्बादी नहीं, बच्चों की पढ़ाई, पाठ्यक्रम और गरीब बच्चों के अवसर पर असर है। सबक – सरकारी निष्क्रियता की कीमत खजाना ही नहीं, नागरिक भी चुकाता है।

ग) GDP पर गणितीय उदाहरण – PRS की अप्रैल 2026 समीक्षा में 2025-26 के लिए नाममात्र GDP लगभग ₹345 लाख करोड़ अनुमानित। इस पर –
0.1% उत्पादकता का मतलब ₹34,500 करोड़
0.5% का मतलब ₹1,72,500 करोड़
1% का मतलब ₹3,45,000 करोड़
यह वास्तविक नुकसान का दावा नहीं, बल्कि बड़ी अर्थव्यवस्था में छोटी उत्पादकता वृद्धि के महत्व को समझाने का उदाहरण है। सरकार को देरी, लंबित अनुमति, बाधाओं की आर्थिक लागत पर व्यवस्थित अध्ययन कराना चाहिए।

  1. छुट्टी से खतरनाक मानसिकता –

छुट्टी लेना अपराध नहीं। खतरनाक है छुट्टी के नाम पर काम ठप होना, पहले फाइल रोकना, खुलने के बाद भी निपटारा न करना। एक दिन जाओ तो अधिकारी नहीं, अगले दिन कर्मचारी नहीं, फिर दस्तावेज की कमी, हफ्तों लटकना। दिहाड़ी मजदूर की कमाई गई, छोटे व्यापारी का कारोबार अटका, किसान की बुआई अटकी। क्या व्यवस्था नुकसान की जिम्मेदारी लेती है? लापरवाह से पूछा जाता है क्यों देरी? पीड़ित को समाधान मिलता है? जवाब कागजी नियम से नहीं, कार्रवाई से मिलना चाहिए।

  1. चुनाव, हड़ताल, बंदी –

चुनाव, आपदा, कानून-व्यवस्था, आंदोलन का असर पड़ता है। चुनाव लोकतंत्र के लिए अनिवार्य, आपदा में राहत प्राथमिक। पर इनके बहाने नागरिक सेवाएं अनिश्चितकाल तक बाधित न हों। वैकल्पिक स्टाफ, जरूरी सेवाओं की निरंतरता, हड़ताल में भी जीवन-आजीविका से जुड़ी सेवाएं चालू रखने की योजना हो। जीवन, आजीविका, अधिकार से जुड़ी सेवाओं को प्राथमिकता मिले।

  1. 8 सख्त सुधार कदम –
  2. बायोमेट्रिक उपस्थिति + परिणाम समीक्षा – विश्वसनीय हाजिरी के साथ काम के नतीजों की जांच।
  3. हर काम की समयसीमा – नागरिक सेवाओं के लिए स्पष्ट टाइमलाइन, देरी पर कारण, लापरवाही पर कार्रवाई।
  4. काम पर मूल्यांकन – वार्षिक मूल्यांकन सिर्फ वरिष्ठ की राय नहीं, गुणवत्ता, लंबित, समयबद्ध निपटान और नागरिक प्रतिक्रिया पर।
  5. लापरवाही पर दंड – बार-बार अनुपस्थिति, फाइल रोकना, भ्रष्टाचार पर निष्पक्ष जांच, नियमानुसार कार्रवाई, पक्ष रखने का मौका देकर।
  6. अच्छे काम को इनाम – कम समय में गुणवत्तापूर्ण काम, समस्या समाधान पर सम्मान।
  7. डिजिटल व्यवस्था – आवेदन, भुगतान, फाइल स्टेटस ऑनलाइन, अधिकारी न होने पर दूसरे अधिकृत को ट्रांसफर।
  8. छुट्टियों की समीक्षा – सार्वजनिक और वैकल्पिक अवकाशों की समीक्षा, रोटेशन से जरूरी सेवाएं चालू, वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना निरंतरता।
  9. जवाबदेही सार्वजनिक – हर विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में प्राप्त, निस्तारित, लंबित, देरी के कारण सार्वजनिक।

उद्देश्य कर्मचारी को शत्रु मानना नहीं, व्यवस्था को जनता के प्रति जिम्मेदार बनाना है।

निष्कर्ष –

भारत को विकसित बनना है तो प्रशासन में सुधार जरूरी है। किसान, मजदूर, व्यापारी, निजी कर्मचारी जवाबदेह हैं, सरकारी व्यवस्था से भी वही अपेक्षा हो। सरकारी कर्मचारी रीढ़ हैं, आलोचना अपमान के लिए नहीं, कमियों को उजागर करने के लिए है। ईमानदार को दोषी ठहराना भी गलत है, पर्याप्त स्टाफ, संसाधन, प्रशिक्षण के बिना बेहतर परिणाम नहीं। सुधार की जिम्मेदारी सरकार, नेतृत्व और कर्मचारी सबकी।

पर सिद्धांत पर समझौता नहीं – सार्वजनिक धन से चलने वाली व्यवस्था को सार्वजनिक हित में परिणाम देने ही होंगे। अधिकार के लिए आवाज तो नागरिक अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता भी। समय पर वेतन चाहिए तो सेवा भी समय पर। नौकरी की सुरक्षा चाहिए तो जिम्मेदारी भी।

देश को छुट्टियों से नहीं, कामचोरी से नुकसान होता है। छुट्टी अधिकार है, लापरवाही किसी का अधिकार नहीं। विकसित भारत तभी बनेगा जब उपस्थिति के साथ उत्पादकता, पद के साथ जिम्मेदारी और वेतन के साथ जवाबदेही अनिवार्य होगी।

  • संजय अग्रवाल, सामाजिक चिंतक, नागपुर
    -स्रोत – प्रेस सूचना ब्यूरो, NBER, PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च CPGRAMS

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नागपुर पदवीधर में सस्पेंस: वंजारी की वापसी, कराले की दूसरी पसंद से पलटा खेल, 41 घंटे बाद भी परिणाम पर संशय

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  • कोहले को 4294 वोटों की बढ़त के बाद कराले के 24,249 वोट बने किंगमेकर, 15,032 वोट अवैध, कोटा 75,438 कोई पार नहीं कर पाया, मामला चुनाव आयोग जाएगा

नागपुर, 29 अक्टूबर – नागपुर विभाग पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र 2026 का चुनाव सबसे रोमांचक हो गया। मंगलवार को कांग्रेस के अभिजीत वंजारी आगे थे, बुधवार दोपहर भाजपा के सुधाकर कोहले ने बढ़त ली, और बुधवार रात वंजारी ने जोरदार कमबैक किया। अंतिम नतीजा गुरुवार सुबह आने की उम्मीद है।

क्या हुआ मतगणना में –

  • मानकापुर इंडोर स्टेडियम में मंगलवार सुबह 8 बजे 84 टेबलों पर 1,65,705 बैलेट पेपर की गिनती शुरू हुई। 445 मतदान केंद्रों से वोट आए, 238 पोस्टल में से 34 अवैध, 204 वैध।
  • पहली पसंद के दो राउंड के बाद भी किसी को 75,438 का कोटा नहीं मिला। आधिकारिक आंकड़े – कोहले 60,924, वंजारी 56,630, अपक्ष नितेश कराले उर्फ कराले गुरुजी 24,249 वोट। अवैध वोट 15,032।
  • पहला राउंड 8 घंटे, दूसरा राउंड 81,909 वोटों का, बुधवार सुबह तक चला। उसके बाद एलिमिनेशन राउंड शुरू हुआ। बुधवार रात 11 बजे कराले की दूसरी पसंद की गिनती शुरू हुई। तभी कयास लगे कि कराले के वोट वंजारी को जाकर कोहले की 4,294 वोटों की बढ़त तोड़ देंगे।

कराले के वोट ही चाबी : न वंजारी न कोहले कोटा तक पहुंचे, इसलिए कराले के 24 हजार वोट निर्णायक बन गए। बड़ी संख्या में उनकी दूसरी पसंद वंजारी को गई, जिससे कांग्रेस खेमे में मतगणना केंद्र के बाहर जश्न शुरू हो गया।

इतनी देर क्यों ? अधिकारी के अनुसार वरीयता मतदान प्रणाली के कारण देरी हुई। उम्मीदवार कोटे तक नहीं पहुंचे और कराले को बड़ी संख्या मिली, इसलिए एक-एक उम्मीदवार को एलिमिनेट कर उसके वोट अगली पसंद को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया लंबी हो गई। जबकि महाराष्ट्र की अन्य 4 विधान परिषद सीटों के नतीजे पहले आ चुके हैं।

भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने : नतीजे से पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न शुरू कर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की, भाजपा ने जवाबी नारे लगाए। मानकापुर स्टेडियम के बाहर माहौल गरमा गया, पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा।

अब मामला चुनाव आयोग को : चूंकि किसी ने निर्धारित कोटा हासिल नहीं किया, इसलिए नियमानुसार स्थानीय निर्वाचन तंत्र को चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी। आमतौर पर ऐसे में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला विजेता माना जाता है, पर अंतिम फैसला ECI का होगा।

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नागपुर पदवीधर में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी विजयी, 41 घंटे चली मतगणना के बाद प्रमाणपत्र मिला

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  • वंजारी को 67,231 वोट, भाजपा के सुधाकर कोहले को 63,960, कोटा 75,438 पूरा न होने पर दूसरी पसंद से फैसला, 15,032 वोट अवैध

नागपुर, 29 अक्टूबर – नागपुर विभाग विधान परिषद पदवीधर मतदारसंघ में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत दर्ज की। चुनाव निर्णय अधिकारी और विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने उन्हें विजय प्रमाणपत्र प्रदान किया।

41 घंटे चली मतगणना : मानकापुर स्थित विभागीय क्रीडा संकुल में मंगलवार 27 अक्टूबर सुबह 8 बजे 84 टेबल पर मतगणना शुरू हुई थी। 41 घंटे से ज्यादा चली इस प्रक्रिया में चुनाव निरीक्षक डॉ. हर्षदीप कांबले, सभी जिलों के सहायक निर्णय अधिकारी और जिलाधिकारी मौजूद रहे।

कोटा पूरा नहीं, दूसरी पसंद से फैसला – पहली पसंद के दो राउंड में किसी को जीत के लिए जरूरी 75,438 वोटों का कोटा नहीं मिला। इसलिए दूसरी पसंद की बाद फेरी करनी पड़ी। पहली पसंद में कुल 1,65,906 वोटों में से 15,032 अवैध ठहरे और 1,50,874 वैध रहे।

दूसरी पसंद की बाद फेरी में भी कोटा पूरा नहीं हुआ, इसलिए पहली और दूसरी पसंद मिलाकर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले अभिजीत वंजारी को विजयी घोषित किया गया।

  • अभिजीत वंजारी (कांग्रेस) – 67,231 वोट
  • सुधाकर कोहले (भाजपा) – 63,960 वोट

चुनाव का कार्यक्रम – भारत निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को कार्यक्रम घोषित किया था। 29 सितंबर को अधिसूचना, 23 अक्टूबर को सुबह 8 से शाम 4 बजे तक मतदान हुआ था। 27 अक्टूबर से मतगणना शुरू होकर 41 घंटे बाद पूरी हुई। आयोग ने पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक पूरी करने का कार्यक्रम तय किया है।

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