BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला
नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।
इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।
फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –
01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।
02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।
03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।
04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।
रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।
अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।
नागपुर में 5वीं सप्तर्षि पुरस्कार श्रृंखला 2026 में 7 विभूतियों का सम्मान, पद्मश्री भालचंद्र नेमाड़े, थलाप्पिल प्रदीप और IIT मद्रास के वी. कामकोटि समेत वैज्ञानिक, साहित्यकार और उद्यमी पुरस्कृत, हिंदू रिसर्च फाउंडेशन का आयोजन
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वराखेड़ी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव प्रगति का साधन बना रहना चाहिए, वह मानवीय मूल्यों पर हावी नहीं होना चाहिए। AI का उपयोग भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों द्वारा निर्देशित होना चाहिए। तकनीक के उपयोग में आत्म-संयम जरूरी है और ‘भारतीय प्रज्ञा’ ही राष्ट्र की प्रगति को मजबूत कर सकती है।
प्रो. वराखेड़ी रविवार को पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, IT पार्क स्थित कवि कुलगुरु कालिदास ऑडिटोरियम में आयोजित 5वीं सप्तर्षि पुरस्कार श्रृंखला 2026 के पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिंदू रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किया गया था।
संस्था के संस्थापक एवं प्रबंध ट्रस्टी डॉ. टी.एस. भाल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी और कहा कि प्राचीन ज्ञान आम लोगों तक पहुंचना चाहिए और अतीत को केवल महिमामंडित नहीं, बल्कि प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। मंच पर IIM-नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराय मेत्री, इम्मवर्सAI के सह-संस्थापक आर. रामकृष्णन, प्रतिभा नेमाड़े और सुरेश कोटे भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गीता कृष्णन जी. पिल्लई, यूनिट हेड, डेटा एंड इनोवेशन डिवीजन, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन रिसर्च सेंटर, जामनगर ने की। जीवदया फाउंडेशन, सूरत के किशोरभाई शाह अतिथि सम्माननीय थे।
7 पुरस्कार विजेता सम्मानित –
1. महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार : पद्मश्री भालचंद्र वनाजी नेमाड़े को साहित्य के लिए। प्रसिद्ध मराठी उपन्यासकार ‘कोसला’ और ‘हिंदू: जगण्याची समृद्ध अडगळ’ के लेखक ने कहा कि अतीत को भविष्य को सूचित करना चाहिए और हिंदू धर्म की विविधता को पहचानना चाहिए। उन्होंने भारतीय साहित्य में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया।
2. नागार्जुन पुरस्कार : पद्मश्री प्रो. थलाप्पिल प्रदीप, IIT मद्रास में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर को। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी परिस्थितियां फिर से बनानी होंगी जो मौलिक वैज्ञानिक सोच को पोषित करें और बच्चों की जिज्ञासा को देश का सबसे बड़ा वैज्ञानिक खजाना बताया।
3. आर्यभट्ट पुरस्कार : पद्मश्री प्रो. वी. कामकोटि वीज्हीनाथन, निदेशक IIT मद्रास और शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के निर्माता को। उन्होंने पीतल से ‘राम यंत्र’ बनाने की प्राचीन शिल्प कौशल की सटीकता का उदाहरण दिया और गांवों में कम से कम दो परिवारों को बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करने का आह्वान किया।
4. आचार्य कणाद पुरस्कार :प्रो. संजय जनराव धोबले, भौतिकी विभाग, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय को। सड़क सुरक्षा और किसानों को वन्यजीवों से बचाने की तकनीक सहित सामाजिक लाभ वाले अनुसंधान के लिए।
5. विश्वकर्मा पुरस्कार :डॉ. अनिल रामजी सुतार, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नागपुर के स्वामी विवेकानंद पुतले से जुड़े मूर्तिकार को।
6. आचार्य भारद्वाज पुरस्कार :सुयश सिंह, सह-संस्थापक और CEO, गैलेक्सआई स्पेस सॉल्यूशंस को। उन्होंने युवाओं से उद्यमिता अपनाने, अंतरिक्ष तकनीक के अवसरों और भारत के विजन 2047 को हासिल करने के लिए रणनीति के महत्व पर जोर दिया।
7. आचार्य सुश्रुत पुरस्कार :डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, प्रो-चांसलर, दत्ता मेघे उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए। डॉ. पिल्लई ने कहा कि जानकारी प्रचुर है लेकिन उसे सार्थक ज्ञान में बदलना चुनौती है। AI प्राचीन ज्ञान को आधुनिक साधनों से जोड़ सकता है, लेकिन विवेक लोगों से ही आएगा।
आर. रामकृष्णन ने भारतीय ज्ञान परंपराओं पर आधारित दुनिया के पहले स्क्रिप्ट लैंग्वेज मॉडल को विकसित करने पर बात की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिता तिलवे और डॉ. रिचा सुगंध ने किया, आभार हर्षा देशमुख ने माना।
भरोसेमंद एआई के लिए दोनों अनिवार्य, गवर्नेंस देता है दिशा और सिक्योरिटी देता है सुरक्षा
नई दिल्ली :
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आज हर क्षेत्र में पहुंच चुकी है। लेकिन जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दो बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं – एआई को नियंत्रित कैसे किया जाए और एआई को सुरक्षित कैसे रखा जाए? इन्हीं दो स्तंभों को एआई गवर्नेंस और एआई सिक्योरिटी कहा जाता है।
संक्षेप में कहें तो गवर्नेंस नियम बनाता है, सिक्योरिटी सिस्टम की रक्षा करती है। भरोसेमंद एआई को दोनों की जरूरत है।
1. एआई गवर्नेंस : नियम तय करता है
एआई गवर्नेंस का अर्थ है एआई के जिम्मेदार, नैतिक और कानूनी उपयोग के लिए नियम, नीतियां और ढांचा बनाना। इसके 8 प्रमुख पहलू हैं –
1. नियामक अनुपालन : एआई कानूनों और मानकों का पालन करना। 2. नीतिगत ढांचा : एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए नियम बनाना। 3. नैतिक सिद्धांत : वे मूल्य जो एआई के निर्णयों का मार्गदर्शन करते हैं। 4. पारदर्शिता : यह समझाना कि मॉडल कैसे निर्णय लेता है। 5. निष्पक्षता और पूर्वाग्रह : मॉडल में अनुचित पूर्वाग्रह की जांच करना। 6. मानव निगरानी : मनुष्य को निर्णय प्रक्रिया में बनाए रखना। 7. मॉडल दस्तावेजीकरण : डेटा, डिजाइन और सीमाओं का रिकॉर्ड रखना। 8. स्पष्ट जवाबदेही : यह तय करना कि एआई के परिणामों का स्वामी कौन है।
गवर्नेंस एआई को एक दिशा-सूचक यंत्र देता है, ताकि वह सही दिशा में काम करे।
2. एआई सिक्योरिटी : सिस्टम की रक्षा करती है
एआई सिक्योरिटी का काम है एआई सिस्टम को हमलों, छेड़छाड़ और चोरी से बचाना। इसके भी 8 प्रमुख पहलू हैं –
1. खतरा पहचान : हमलों को घटित होते ही पहचानना। 2. रेड टीमिंग : कमियों को खोजने के लिए मॉडल पर हमला करना। 3. कमजोरी पैचिंग : हमले से पहले खामियों को ठीक करना। 4. प्रॉम्प्ट इंजेक्शन रक्षा : दुर्भावनापूर्ण छिपे निर्देशों को रोकना। 5. डेटा पॉइजनिंग रक्षा : प्रशिक्षण डेटा को छेड़छाड़ से बचाना। 6. सुरक्षित बुनियादी ढांचा : सर्वर, एपीआई और पाइपलाइन को मजबूत करना। 7. मॉडल सुरक्षा : मॉडल की चोरी और लीक को रोकना। 8. एन्क्रिप्शन : डेटा को जासूसी नजरों से बंद रखना।
सिक्योरिटी एआई को सुरक्षित रखती है, ताकि उस पर भरोसा किया जा सके।
3. साझा जिम्मेदारी : दोनों के बीच का सेतु
गवर्नेंस और सिक्योरिटी के बीच कई क्षेत्र साझा हैं, जो दोनों को जोड़ते हैं –
जोखिम प्रबंधन : एआई जोखिमों को खोजना और कम करना।
डेटा संरक्षण : संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखना।
एक्सेस नियंत्रण : यह सीमित करना कि मॉडल का उपयोग कौन कर सकता है।
निरंतर निगरानी : समय के साथ मॉडल के व्यवहार को ट्रैक करना।
घटना प्रतिक्रिया : एआई के विफल होने पर योजना बनाना।
ऑडिट ट्रेल : हर निर्णय और बदलाव को लॉग करना।
टीम प्रशिक्षण : कर्मचारियों को सुरक्षित एआई उपयोग सिखाना।
भरोसेमंद एआई : स्थायी उपयोगकर्ता विश्वास अर्जित करना।
निष्कर्ष
गवर्नेंस के बिना एआई अनियंत्रित और गैर-जिम्मेदार हो सकता है। सिक्योरिटी के बिना एआई असुरक्षित और हमलों के प्रति संवेदनशील हो सकता है। इसलिए भविष्य का एआई तभी विश्वसनीय होगा, जब नियम और सुरक्षा दोनों साथ-साथ चलेंगे।
CEO अभिषेक दामानी सिखाएंगे AI के मूल सिद्धांत, प्रभावी प्रॉम्प्ट बनाना और वास्तविक व्यवसाय में उपयोग के गुर
नागपुर :
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग एक महत्वपूर्ण कौशल बनकर उभरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्न्यूएआई बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा LEARN AI FUNDAMENTALS WITH PROMPT ENGINEERING विषय पर एक लाइव वेबिनार आयोजित किया जा रहा है। इस वेबिनार में सिखाया जाएगा कि AI विचारों को प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की शक्ति का उपयोग करके व्यावहारिक व्यावसायिक समाधानों में कैसे बदला जाए।
कब और कौन देगा मार्गदर्शन
यह लाइव वेबिनार शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को अपराह्न 04.00 बजे से 06.00 बजे तक (IST) आयोजित होगा।
वक्ता के रूप में अभिषेक दामानी, सीईओ एवं फाउंडर, वर्न्यूएआई बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेडउपस्थित रहेंगे। वे प्रतिभागियों को एआई के मूलभूत सिद्धांतों से लेकर व्यवसाय में उसके प्रत्यक्ष प्रयोग तक की जानकारी देंगे।
वेबिनार में क्या सीखने को मिलेगा
इस वेबिनार के चार प्रमुख लाभ बताए गए हैं –
समझें – प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की मुख्य अवधारणाओं को समझें।
अन्वेषण करें –वास्तविक दुनिया के व्यावसायिक उपयोग के मामलों और उदाहरणों का अन्वेषण करें।
सीखें – बेहतर परिणामों के लिए प्रभावी प्रॉम्प्ट कैसे बनाएं, यह सीखें।
किनके लिए उपयुक्त – यह वेबिनार उद्यमियों, व्यवसाय मालिकों, पेशेवरों और प्रबंधकों के लिए उपयुक्त है।
वेबिनार में रिपोर्ट लिखना, डेटा का विश्लेषण करना, सारांश बनाना और योजना तैयार करना जैसे AI के व्यावहारिक उपयोगों को भी दर्शाया जाएगा।
पंजीकरण आवश्यक
वेबिनार में सीटें सीमित हैं। इच्छुक प्रतिभागी पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर या REGISTER NOW के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं।