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VHP सुप्रीमो आलोक कुमार के शुभ हाथों ‘सुराज्य अभियान’ वेबपेज का लोकार्पण

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फोंडा (गोवा) : देश में प्रशासनिक त्रुटियों, भ्रष्टाचार और सामान्य नागरिकों पर होने वाले अन्याय को दूर कर वास्तविक ‘सुराज्य’ स्थापित करने के उद्देश्य से हिंदू जनजागृति समिति द्वारा प्रारंभ किया गया ‘सुराज्य अभियान’ अब डिजिटल माध्यम से और अधिक व्यापक हो रहा है। इस अभियान का परिचय देशभर में पहुंचे तथा राष्ट्रप्रेमी नागरिक इसमें सक्रिय रूप से सहभागी बनें, इस उद्देश्य से तैयार किए गए नए वेबपेज का लोकार्पण विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता आलोक कुमार के करकमलों से संपन्न हुआ।

वेबपेज की प्रमुख विशेषताएं एवं नागरिकों को होने वाले लाभ :

1. शिकायत निवारण (Report an Issue) : यदि किसी नागरिक को भ्रष्टाचार या प्रशासनिक विलंब का सामना करना पड़ता है, तो वह इस वेबपेज पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। इन समस्याओं के विरुद्ध संवैधानिक मार्ग से लड़ने हेतु विशेषज्ञों द्वारा कानूनी मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

2. प्रत्यक्ष जनसहभाग : चल रहे विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों (Ongoing Campaigns) में नागरिक घर बैठे सहभागी बन सकते हैं। स्थानीय समस्याओं के विरुद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया कैसे प्रारंभ करें, इसका मार्गदर्शन यहां उपलब्ध है।

3. जानकारी का भंडार : अभियान की अब तक की उपलब्धियां, महत्वपूर्ण न्यायालयीन लड़ाइयां तथा आगामी उपक्रमों की विस्तृत जानकारी इस वेबपेज पर उपलब्ध है, जो नागरिकों में कर्तव्यबोध जागृत करेगी।

4. समन्वयकों से संपर्क : वेबसाइट पर आवेदन भरते ही समिति के समन्वयक संबंधित व्यक्ति से संपर्क करेंगे, जिससे ‘सुराज्य’ स्थापना के कार्य में सामान्य नागरिक संगठित रूप से जुड़ सकेंगे।

देश के प्रत्येक जागरूक नागरिक से अपील की गई है कि वे इस डिजिटल मंच का लाभ उठाकर अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु तथा पारदर्शी प्रशासन की स्थापना के लिए इस अभियान से जुड़ें। इस अभियान से जुड़ने के लिए नागरिक hindujagruti.org/surajya-abhiyan इस लिंक पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Business

सोलर डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपे ‘नागास्त्र-2’ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन के 21 यूनिट, 650 MM आर्मर भेदने में सक्षम

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  • 4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।

क्या है नागास्त्र-2 की ताकत –
यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।

  • रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
  • एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
  • तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
  • 80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट

सबसे बड़ी खूबी – ECCM –
नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।

कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।

2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

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राज ठाकरे और संजय राउत के दिवास्वप्न – ‘कुछ महीनों में देश में प्रधानमंत्री ही नहीं होगा’ जैसा दावा कितना हास्यास्पद?

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  • स्पष्ट और बेबाक – संविधान में PM पद कभी खाली नहीं रह सकता, मोदी-विरोध में बेबुनियाद बयानबाजी और विदेशी शक्तियों की साजिश का विश्लेषण

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उबाठा) के स्वघोषित विश्व प्रवक्ता संजय राउत के दो बयान इन दिनों चर्चा में हैं। अलग-अलग लगने वाले इन बयानों का ध्वनित अर्थ एक ही है – मोदी-द्वेष से उपजी गैर-जिम्मेदार भविष्यवाणी।

राज ठाकरे का दावा –
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज ठाकरे ने कहा कि अगले दो-तीन महीनों में देश में ऐसी स्थिति आएगी कि प्रधानमंत्री ही नहीं होगा। राज ठाकरे की राजनीति हमेशा ‘तळ्यात-मळ्यात’ वाली रही है। कभी वे खुद को शरद पवार के कुनबे में छोड़ देते हैं, कभी मोदी से नजदीकी दिखती है। वर्षों झगड़ने के बाद अब सगे चचेरे भाई से हाथ मिला रहे हैं, कभी कांग्रेस के साथ समझौता तो कभी अभिजीत दीपके को सिर पर बिठाकर नाचना। कुल मिलाकर स्थिर भूमिका के अभाव वाले नेता।

उन्होंने यह भविष्यवाणी किस आधार पर की? क्या संविधान पढ़ा? प्रथा-परंपरा देखी?

हमारे देश में संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री का पद कभी रिक्त नहीं रखा जा सकता। यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा दे दे या निधन हो जाए और नया मुख्यमंत्री न बन सके तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है। महापौर, नगराध्यक्ष, जिला परिषद अध्यक्ष या सरपंच न हो तो प्रशासक नियुक्त हो सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री न हो तो राष्ट्रपति शासन लगाकर राष्ट्रपति शासन चलाएंगे, ऐसी व्यवस्था ही नहीं है।

इसीलिए किसी कारण प्रधानमंत्री इस्तीफा भी दे दे तो नया प्रधानमंत्री आने तक उसे कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम करना ही पड़ता है। राष्ट्रपति वैसी सूचना देते हैं। यदि पद पर रहते प्रधानमंत्री का निधन हो जाए तो नए कार्यवाहक प्रधानमंत्री की शपथ होने तक आधिकारिक तौर पर निधन की घोषणा भी नहीं की जाती।

मेरी याद के अनुसार 1964 में पंडित नेहरू के निधन पर गुलजारीलाल नंदा को कार्यवाहक PM की शपथ दिलाने के बाद ही निधन की घोषणा हुई थी। यही लालबहादुर शास्त्री के निधन पर भी हुआ। इंदिरा गांधी की गोली मारकर हत्या सुबह करीब 10 बजे हुई थी, एम्स ले जाते-ले जाते उनका निधन हो गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल से राजीव गांधी के दिल्ली लौटकर कार्यवाहक PM की शपथ लेने तक सिर्फ “गोली लगी, एम्स में भर्ती” यही खबर रेडियो-टीवी पर चलती रही।

1979 में चौधरी चरण सिंह ने संसद भंग की थी, फिर भी राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें नई सरकार तक कार्यवाहक रहने को कहा। यही चंद्रशेखर (1991), इंद्रकुमार गुजराल (1997) और अटल बिहारी वाजपेयी (1999) के मामले में हुआ। इसलिए “देश में प्रधानमंत्री ही नहीं होगा” यह दावा हास्यास्पद है। मान लो अगले चार महीने में गड़बड़ी हुई और मोदी को इस्तीफा देना भी पड़ा, तब भी नए PM तक उन्हें ही कार्यवाहक रहना पड़ेगा। यह संवैधानिक प्रावधान है। राज ठाकरे मन में आए वैसा बोल देते हैं, अक्सर बिना आधार के।

संजय राउत का भाकित –
शिवसेना के दशहरा मेले में संजय राउत ने कहा कि अगले 3-4 महीने में देश में भारी गड़बड़ी होगी, नरेंद्र मोदी PM नहीं रहेंगे, सत्ता परिवर्तन होगा। अभिजीत दीपके के पहले आंदोलन के बाद से ही विपक्ष को सत्ता परिवर्तन के दिवास्वप्न दिखने लगे हैं।

वास्तव में मोदी और सहयोगी पिछले 12 साल से शासन चला रहे हैं, कई अच्छे काम किए हैं, इसलिए आम आदमी कहीं न कहीं उनके साथ दिखता है। 2024 में भाजपा को झटका लगा, 303 से 240 पर आ गई। तब विपक्ष सरकार बनाएगा क्या, भाजपा ने कुछ समय इंतजार किया, लेकिन विपक्ष की आपसी खींचतान देखकर कई छोटे दलों ने मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के साथ ही रहने का फैसला किया। आज धीरे-धीरे भाजपा का समर्थन फिर बढ़ रहा है। कुछ दलों में टूट से सांसद भाजपा में आए हैं। अप्रैल 2026 में दो-तिहाई बहुमत के अभाव में खारिज हुआ महिला आरक्षण विधेयक अब फिर पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने की हलचल है।

विपक्ष किसी तरह मौजूदा सरकार को गिराना चाहता है। यह सिर्फ इच्छा नहीं, इसके पीछे विदेशी शक्तियों का साथ होने के पुख्ता सबूत मिलने की जानकारी है। पिछले 12 साल में मोदी नेतृत्व में देश की जो प्रगति हुई, वह बाहर के विकसित देशों को पच नहीं रही। इसलिए देश में अशांति फैलाकर सरकार गिराने के प्रयास हैं। अशांति फैलाने के लिए ही ऐसे आंदोलनों को स्पॉन्सर किया जाता है। नहीं तो विदेश में पढ़ाई छोड़कर अभिजीत दीपके को विशेष विमान से भारत लाना और आंदोलन का ढांचा खड़ा करने में मदद करना, इसका क्या अर्थ निकाला जाए? अभी मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर भी आंदोलन भड़काया जा रहा है, पर उसमें आम आदमी कितना है, यह जांचना जरूरी है। आम आदमी को पहले रोजी-रोटी की चिंता है, वह ऐसे आंदोलन में कभी नहीं आएगा।

आज संजय राउत की बात को कोई गंभीरता से लेता है, ऐसा किसी को नहीं लगता। वे रोज सुबह मीडिया को बुलाकर अलग-अलग फोकनाड (शेखी) हांकते हैं। कुछ मराठी चैनलों को छोड़कर कोई गंभीरता से नहीं लेता। मराठी न्यूज चैनल पर उनका बोलना दिखता है तो आम आदमी टाइमपास के तौर पर देखता है। उनकी ज्यादातर कहानियां कपोल-कल्पित और सिर्फ मनोरंजक होती हैं, तथ्य कम।

आज विपक्ष ने कुछ आंदोलन खड़े करने की कोशिश जरूर की, हिंसा भड़काने के इरादे के संकेत भी मिले, लेकिन हिंसा अभी तक नहीं हुई और मोदी सरकार होने भी नहीं देगी, ऐसा आज का चित्र है। ऐसी स्थिति में अगले चार महीने में सरकार गिरने के क्या कारण होंगे, यह राउत को तथ्यों के साथ स्पष्ट करना चाहिए, हवाई बातों से नहीं। नहीं तो आम आदमी इसे “सुबह का भोंगा” समझकर अनदेखा कर देगा, जैसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें “सुबह 9 बजे का भोंगा” कहते हैं।

कुल मिलाकर अगले कुछ महीनों में देश में अराजकता और सत्ता परिवर्तन होगा और कुछ महीने PM ही नहीं रहेगा, ऐसा चित्र आज तो नहीं दिखता। राज ठाकरे और संजय राउत को दिवास्वप्न आते हैं, यह मानसिक बीमारी भी हो सकती है। हो तो इलाज कराएं।

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सिंहस्थ कुंभ के ध्वजारोहण के लिए राज्यपाल को निमंत्रण, 31 अक्टूबर को राष्ट्रपति के करकमलों से होगा शुभारंभ

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  • कुंभ मेला प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन ने लोकभवन में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से की भेंट, तैयारियों का दिया ब्यौरा

मुंबई, 23 अक्टूबर :

महाराष्ट्र के जल संसाधन एवं आपदा प्रबंधन मंत्री तथा सिंहस्थ कुंभ मेला प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन ने आज महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से लोकभवन में शिष्टाचार भेंट की।

इस दौरान उन्होंने राज्यपाल को 31 अक्टूबर को नासिक-त्र्यंबकेश्वर में भारत की राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह में सहभागी होने का औपचारिक निमंत्रण दिया।

इस अवसर पर मंत्री महाजन ने राज्यपाल को मेले की व्यापक तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नासिक और त्र्यंबकेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक तीर्थस्थलों में शामिल हैं तथा सिंहस्थ कुंभ मेला महाराष्ट्र की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक गौरव का प्रतीक है। यह महापर्व देशभर से आने वाले संत-महात्माओं, अखाड़ों, साधु-संतों एवं करोड़ों श्रद्धालुओं को आस्था और अध्यात्म के साझा मंच पर एकत्रित करेगा।

महाजन ने बताया कि राज्य सरकार इस आयोजन को भव्य, दिव्य, सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धालु-केंद्रित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आधारभूत सुविधाओं के विकास, यातायात एवं सुरक्षा प्रबंधन, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार तथा प्रशासनिक समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने 2015 के सिंहस्थ कुंभ मेले के सफल आयोजन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व अनुभवों का उपयोग आगामी मेले की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए किया जा रहा है।

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