नागपुर, 14 जून 2026 :पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की बड़ी हार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं। यहां उनकी मुलाकात कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से हुई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि इस बैठक में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय करने का प्रस्ताव दिया है।
इस खबर के सामने आते ही महाराष्ट्र की सियासत भी गरमा गई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रवक्ता संजय राऊत ने रोज की तरह सुबह मीडिया से बातचीत में बड़ा बयान दे दिया। राऊत ने कहा कि देश में भाजपा को टक्कर देने के लिए कांग्रेस का मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसलिए बीते सालों में कांग्रेस से अलग होकर बने सभी छोटे दलों को अब वापस कांग्रेस में मिल जाना चाहिए।
राऊत यहीं नहीं रुके। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार को भी सलाह दे डाली। राऊत बोले कि “जाणता राजा” के नाम से मशहूर शरद पवार को भी अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर देना चाहिए।
फडणवीस का तंज: ‘डूबते जहाज में कौन बैठेगा’
संजय राऊत के इस बयान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत पलटवार किया। फडणवीस ने कहा कि “कांग्रेस अब डूबता जहाज बन चुकी है। ऐसे में उस जहाज पर कौन सवार होना चाहेगा?” उन्होंने आगे कहा कि अगर ये सभी दल एक साथ आए भी तो इससे भाजपा का ही फायदा होगा, क्योंकि हमारी राजनीतिक जगह और बढ़ेगी।
फडणवीस के इस बयान के बाद राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
कांग्रेस का टूट-फूट का लंबा इतिहास
कांग्रेस का इतिहास देखें तो यह पार्टी कई बार टूटी और जुड़ी है। आजादी से पहले नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने कांग्रेस छोड़कर फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया था। विदर्भ के कद्दावर नेता जांबुवंतराव धोटे भी कभी फॉरवर्ड ब्लॉक से जुड़े थे और ‘शेर’ चुनाव चिन्ह पर लड़े थे। इकहत्तर के चुनाव में “वारे शेर आ गया शेर” का नारा खूब गूंजा था। मगर आज फॉरवर्ड ब्लॉक का नामोनिशान तक ढूंढना मुश्किल है।
उन्नीस सौ उनहत्तर में कांग्रेस के दो टुकड़े हुए थे – एक इंदिरा कांग्रेस और दूसरी संगठन कांग्रेस। संगठन कांग्रेस बाद में जनता पार्टी में मिल गई और आज जनता पार्टी खुद इतिहास बन चुकी है। फिर अठहत्तर में रेड्डी कांग्रेस बनी जो कुछ समय बाद इंदिरा कांग्रेस में समा गई।
शरद पवार ने भी पहले समाजवादी कांग्रेस बनाई और फिर उन्नीस सौ निन्यानवे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। शुरुआत में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा रखने वाली एनसीपी आज कुछ जिलों तक सिमट कर रह गई है। इसी तरह चौधरी चरण सिंह का लोकदल, ओडिशा का बीजू जनता दल, बंगाल की तृणमूल कांग्रेस, ये सब किसी न किसी समय कांग्रेस से ही अलग होकर बने दल हैं।
विलय से किसका भला, किसका नुकसान?
अब बड़ा सवाल यह है कि अगर ये सभी दल वापस कांग्रेस में चले जाएं तो क्या वाकई कांग्रेस मजबूत हो जाएगी?
पहली बात, ये दल कांग्रेस से अलग ही इसलिए हुए थे क्योंकि इन्हें कांग्रेस की नीति या नेतृत्व मंजूर नहीं था। इन दलों के पास जो वोटर है, उसमें एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो कांग्रेस को वोट नहीं देना चाहता था, तभी वह इन छोटे दलों के पास आया। अगर ये दल कांग्रेस में मिल गए तो यह वोटर कांग्रेस के पास लौटने के बजाय भ्रमित हो जाएगा। और जब उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा तो उसके भाजपा की तरफ जाने की संभावना बहुत बढ़ जाएगी।
दूसरी बात, कांग्रेस की मौजूदा हालत की सबसे बड़ी वजह पार्टी में चल रही घराणेशाही मानी जाती है। दिक्कत यह है कि छोटे दलों में भी परिवारवाद कम नहीं है। तृणमूल में ममता और उनका भतीजा, एनसीपी में पूरा पवार परिवार। ऐसे में सभी दलों के मिलने से एक ‘संगठित घराणेशाही’ ही बनेगी। आम कार्यकर्ता और मतदाता इसे कितना पसंद करेंगे, यह सोचने वाली बात है।
तीसरी बात, बीजद या तृणमूल जैसे कई दल प्रादेशिक अस्मिता के मुद्दे पर खड़े हुए हैं। उनके लिए अपना प्रदेश पहले है, देश बाद में। कांग्रेस एक राष्ट्रीय दल है। अगर ये क्षेत्रीय दल कांग्रेस में मिलते हैं तो उनकी क्षेत्रीय पहचान खत्म हो जाएगी और उनका अपना वोट बैंक भी टूट सकता है।
कांग्रेस के लिए आगे का रास्ता क्या?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिर्फ विलय कर लेने से कांग्रेस को पुराने दिन वापस नहीं मिल जाएंगे। इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस एक बार टूटकर भी मजबूत हुई थी, क्योंकि तब इंदिरा जी का कद बहुत बड़ा था और जनता में उनकी स्वीकार्यता थी। आज गांधी परिवार के पास वैसा जनाधार नहीं दिखता।
अगर कांग्रेस को सचमुच खड़ा होना है तो उसे पहले गांधी-नेहरू परिवार के वर्चस्व से बाहर निकलना होगा। पार्टी में नई लीडरशिप तैयार करनी होगी। हर कार्यकर्ता को यह भरोसा देना होगा कि वह अपनी मेहनत से सबसे ऊंचे पद तक पहुंच सकता है। नेताओं को अपने एयर कंडीशन दफ्तरों और ‘हस्तीदंती मनोरे’ से बाहर निकलकर गांव-गरीब के बीच जाना होगा। जनता के मुद्दों पर सड़क पर उतरना होगा।
फिलहाल किसे फायदा?
मौजूदा हालात देखकर लगता है कि छोटे दलों का कांग्रेस में विलय कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा नहीं होगा। इससे भाजपा को ही राजनीतिक लाभ मिल सकता है। क्योंकि कांग्रेस-विरोधी वोट एकजुट होकर सीधे भाजपा के पाले में जा सकता है।
जैसा देवेंद्र फडणवीस ने कहा है, इससे भाजपा की ‘स्पेस’ और बढ़ेगी। अब देखना यह है कि कांग्रेस विलय की राह चुनती है या अपने संगठन में बुनियादी बदलाव कर नया रास्ता बनाती है। फिलहाल तो संजय राऊत के एक बयान ने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –
2024 में877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
2025 में849 मंजूर, 87 खारिज।
1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।
केसों का बोझ – कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।
15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।
भरण-पोषण और कस्टडी – भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।
स्टाफ की भारी कमी से दबाव –
RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली
कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।