भूमि घोटाले के प्रमाण सरकार के पास ही उपलब्ध हैं, फिर मंदिर प्रशासन किसे बचा रहा है? – मंदिर महासंघ
धाराशिव : महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, निजाम सरकार ने श्री तुलजाभवानी मंदिर संस्थान को 1668.14 हेक्टेयर (अर्थात 4,122.07 एकड़) भूमि दी थी। लेकिन इस बात की जानकारी तुलजापुर मंदिर संस्थान को न होना, प्रशासन की लचर और गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा उदाहरण है। मंदिर प्रशासन खुद के पास केवल 400 एकड़ भूमि होने का दावा करके अपनी घोर अक्षमता पर पर्दा डाल रहा है। “400 एकड़ का आंकड़ा आगे करके मंदिर प्रशासन आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रहा है?” यह सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के कानूनी सलाहकार और तुलजापुर मंदिर घोटाले के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी ने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि मंदिर की भूमि वापस पाने और करोड़ों भक्तों की आस्था की रक्षा के लिए वे अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
वे धाराशिव में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित कर रहे थे। इस प्रेसवार्ता में मंदिर महासंघ के सोलापुर-धाराशिव जिला संगठक श्री विनोद रसाल, हिंदू जनजागृति समिति के श्री अरविंद पानसरे, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति के जिला संयोजक एडवोकेट सतीश गाजुल और सनातन संस्था के श्री हीरालाल तिवारी उपस्थित थे।
एडवोकेट (पू.) सुरेश कुलकर्णी ने आगे कहा, "जब हमने हिंदू जनजागृति समिति की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में जनहित याचिका (क्र. 21/2018) दायर की थी, तब हमने राजस्व व वन विभाग, गृह विभाग, विधि व न्याय विभाग, जिलाधिकारी और श्री तुलजापुर देवस्थान ट्रस्ट—इन पांच लोगों को पक्षकार बनाया था। उसी समय धाराशिव के जिलाधिकारी ने तुलजापुर भूमि घोटाले की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। उसमें विधि व न्याय विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव एम.एन. गिलानी (जो बाद में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने) का 1668.14 हेक्टेयर भूमि घोटाले से संबंधित पत्र भी संलग्न था। तब पक्षकार होने के बावजूद तुलजापुर मंदिर प्रशासन ने आपत्ति जताकर न्यायालय में हलफनामा (Affidavit) क्यों नहीं दायर किया?"
मंदिर की जमीनों में घोटाला हुआ है, यह केवल मंदिर महासंघ नहीं कह रहा है, बल्कि राज्य सरकार ने स्वयं इसे आधिकारिक दस्तावेजों में स्वीकार किया है। इन दस्तावेजों पर विधि व न्याय विभाग के प्रधान सचिव और मंत्री के हस्ताक्षर हैं। न्यायालय में प्रतिवादी होने के बावजूद मंदिर प्रशासन को इसकी जानकारी कैसे नहीं है? जनता को मंदिर प्रशासन से इसका जवाब मांगना चाहिए।
श्री तुलजाभवानी मंदिर की 4,122.07 एकड़ भूमि घोटाले का विवरण:
तुलजाभवानी ट्रस्ट के नाम पर 1374.87 हेक्टेयर (लगभग 3,397 एकड़) भूमि का मालिकाना हक होने के बावजूद, इसका प्रत्यक्ष कब्जा चार मठों के निजी व्यक्तियों के पास है और प्रशासन के पास इसका कोई कानूनी स्पष्टीकरण नहीं है। असल में, यह भूमि उस समय मठों को मंदिर की विभिन्न सेवाएं करने के लिए ‘सनद’ के रूप में दी गई थी। लेकिन आज उन जमीनों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है।
जगदंबा ट्रस्ट के नाम पर मौजूद 163.12 हेक्टेयर (लगभग 403 एकड़) भूमि को तत्कालीन उप-जिलाधिकारी ने मंदिर ट्रस्ट को अंधेरे में रखकर गैरकानूनी तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया।
देवस्थान की जमीन पर ‘काश्तकारी कानून’ (कुळ कायदा) लागू नहीं होता, इसके बावजूद 25.51 हेक्टेयर भूमि में से 3.04 एकड़ भूमि को ‘संरक्षित काश्तकार’ घोषित कर बिक्री पत्र (दिनांक 21.07.1981) के माध्यम से बेच दिया गया।
एक हेड क्लर्क (अव्वल कारकून) ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर गैरकानूनी तरीके से 105.64 हेक्टेयर (लगभग 261 एकड़) भूमि 73 व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी।
अपसिंगा (तालुका तुलजापुर) में गट क्रमांक 357/3 और 357/4 की जमीन 15 अक्टूबर 1975 और 1979 की अवैध फेरफार प्रविष्टियां दिखाकर हस्तांतरित कर दी गई। वहीं उफला (जिला धाराशिव) में गट क्रमांक 107 की 64 हेक्टेयर (158 एकड़) भूमि को अवैध रूप से हड़प लिया गया।
प्रशासन का खिलवाड़ और करोड़ों भक्तों से विश्वासघात: हैरानी की बात यह है कि जमीन घोटालों में शामिल संबंधित क्लर्क और अन्य कनिष्ठ कर्मचारियों को कार्रवाई के नाम पर नौकरी से निकाल दिया गया था; लेकिन कुछ समय बाद उन्हें वापस सरकारी सेवा में ले लिया गया। अगर प्रशासन का काम ऐसा ही है, तो हड़पी गई हजारों एकड़ जमीन मंदिर को वापस कैसे मिलेगी? क्या बिना बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप के एक क्लर्क मंदिर की 261 एकड़ जमीन दूसरों को दे सकता है? यह पूरी मिलीभगत करोड़ों भक्तों के साथ खुला विश्वासघात है।
ऐसा ही एक मामला 'पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान प्रबंधन समिति' के संबंध में भी सामने आया था, जहां देवस्थान के स्वामित्व वाली 25,000 एकड़ भूमि में से लगभग 8,000 एकड़ भूमि का आधिकारिक रिकॉर्ड ही गायब कर दिया गया है। पंढरपुर देवस्थान के पास भी 1,200 एकड़ जमीन होने के बावजूद मंदिर को उससे एक रुपये की भी आय नहीं हो रही थी। अंततः हिंदू जनजागृति समिति और हिंदू विधिज्ञ परिषद ने कानूनी लड़ाई लड़कर वह 1,200 एकड़ जमीन वापस मंदिर को दिलाई।
तुलजापुर मामले में भी मंदिर की भूमि हड़पने वालों और दानपेटी लूटने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट तक गए हैं। जब तक यह पूरी 4,122.07 एकड़ भूमि अतिक्रमण मुक्त होकर मंदिर के पूर्ण नियंत्रण में नहीं आ जाती, तब तक हमारी यह कानूनी लड़ाई इसी तरह जारी रहेगी!
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –
2024 में877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
2025 में849 मंजूर, 87 खारिज।
1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।
केसों का बोझ – कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।
15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।
भरण-पोषण और कस्टडी – भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।
स्टाफ की भारी कमी से दबाव –
RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली
कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।