सरकारी उद्देश्य — घर-घर जाकर मतदाता सूची को दुरुस्त करना
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शत प्रतिशत शुद्ध, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रत्येक बूथ स्तर पर बीएलओ की नियुक्ति की गई है।
बीएलओ का दायित्व है कि वह अपने निर्धारित क्षेत्र के प्रत्येक घर तक पहुंचे, मतदाताओं से प्रत्यक्ष संवाद करे और आवश्यक कागजात के साथ फॉर्म भरकर जानकारी संकलित करे। इसके बदले उन्हें सम्मानजनक मानदेय भी दिया जाना है, ताकि यह कार्य गंभीरता और जिम्मेदारी से हो सके।
जमीनी हकीकत — दावे और वास्तविकता में फर्क जिला प्रशासन और नगर निगम के शीर्ष अधिकारी सार्वजनिक मंचों पर दावा कर रहे हैं कि बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर शत प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति भिन्न दिखाई दे रही है।
मुख्य समस्याएं इस प्रकार हैं:
1. गलत पते और डेटा की विसंगति बीएलओ को जो प्रिंटेड फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं, उनमें कई मतदाताओं का पता गलत अंकित है। कोई मतदाता कहीं और रह रहा है, लेकिन उसका पता किसी अन्य स्थान या मतदान केंद्र का दर्ज है। ऐसी स्थिति में बीएलओ को संबंधित मतदाता तक पहुंचने में भारी कठिनाई हो रही है। परिणामस्वरूप एसआईआर का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
2. सीमित पहुंच और प्रशिक्षण का अभाव वर्तमान में कई जिलों में नियुक्त बीएलओ में शत प्रतिशत महिलाएं हैं। सामाजिक और पारिवारिक कारणों से उनके लिए हर घर तक पहुंचना और सभी मतदाताओं से मिलना व्यवहारिक रूप से कठिन हो रहा है। इसके अतिरिक्त, ऊर्जावान और इच्छुक कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण दिए बिना ही खानापूर्ति के तौर पर बीएलओ बना दिया गया है। इच्छा और अनिच्छा दोनों प्रकार के लोगों को इस कार्य में लगा देने से कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
3. कार्य पद्धति में लापरवाही मतदाता फॉर्म स्थायी स्याही के पेन से भरने के बजाय कई बीएलओ द्वारा पेंसिल से भरे जा रहे हैं। इसका सीधा अर्थ है कि यही काम दोबारा और तीसरी बार करना पड़ेगा। इस कारण प्रत्येक बीएलओ का औसत प्रदर्शन 50 से 60 प्रतिशत ही रहने की संभावना है।
संभावित परिणाम — मतदाताओं को होगी परेशानी* यदि अभी शत प्रतिशत सत्यापन नहीं होता है तो शेष बचे मतदाताओं को बाद में अपना नाम जुड़वाने या संशोधन कराने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय और तहसील के चक्कर लगाने पड़ेंगे। इसमें उनका समय और पैसा दोनों खर्च होगा। आज जब यह कार्य निशुल्क और घर बैठे हो सकता है, तब प्रशासन और मतदाता दोनों की उदासीनता के कारण यह अवसर हाथ से निकल रहा है।
निष्कर्ष — उद्देश्य खतरे में, श्रेय लेने की होड़ कुल मिलाकर एसआईआर का सकारात्मक उद्देश्य जिला प्रशासन की ढीली नीति और खानापूर्ति वाली कार्यशैली के कारण धोखे में पड़ता दिख रहा है। बाद में आंकड़ों के आधार पर जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को सम्मानित भी किया जा सकता है, लेकिन हकीकत यह है कि शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाएगा।
जागरूक नागरिकों, समाजसेवकों और पक्ष-निरपेक्ष बीएलओ के व्यक्तिगत प्रयासों से ही कुछ हद तक अद्यतन संभव हो पा रहा है। शेष मतदाता इस प्रक्रिया से वंचित रह जाने का खतरा है।
सुझाव
बीएलओ को सही और अद्यतन डेटा के साथ फॉर्म उपलब्ध कराए जाएं।
सभी बीएलओ को अनिवार्य और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए।
क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति के अनुसार पुरुष और महिला बीएलओ का संतुलित अनुपात रखा जाए।
कार्य की मॉनिटरिंग केवल कागज पर नहीं, बल्कि फील्ड वेरिफिकेशन के माध्यम से हो।
सरकारी उद्देश्य तभी सफल होगा जब दावे के साथ-साथ धरातल पर भी 100 प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
“दीनदयाल थाली” से भूख मिटाना, “अनोखा बाजार” से सम्मान देना – नौ वर्षों से निरंतर मानवता की सेवा में जुटे श्रीविद्यानिधि अन्नपूर्णा सेवा फाउंडेशन
नागपुर, 21 अगस्त 2026:
नागपुर। “सेवा ही समाधान” और “मानुसकी का वसा जपणारे” के संकल्प के साथ पिछले नौ वर्षों से समाजसेवा में जुटे श्रीविद्यानिधि अन्नपूर्णा सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप जोशी ने अपनी सामाजिक पहलों से हजारों जरूरतमंदों के जीवन में उजाला भरा है। विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, फाउंडेशन द्वारा संचालित “दीनदयाल थाली” और “अनोखा बाजार” जैसी योजनाएं आज नागपुर की पहचान बन गई हैं।
भूखों के लिए “दीनदयाल थाली” फाउंडेशन की सबसे महत्वपूर्ण पहल “दीनदयाल थाली” है। इस योजना के तहत केवल 10 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शहर में कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए। पिछले नौ वर्षों से यह सेवा बिना किसी रुकावट के चल रही है। भोजनालयों में लंबी कतारें इस बात की गवाह हैं कि यह योजना कितनी आवश्यक है। उद्घाटन समारोहों में दीप प्रज्वलन और सम्मान समारोहों की तस्वीरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई हैं, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सम्मान के साथ मदद – “अनोखा बाजार” भूख के साथ-साथ सम्मान की आवश्यकता को समझते हुए फाउंडेशन ने “अनोखा बाजार” की शुरुआत की। यह कोई सामान्य बाजार नहीं, बल्कि “मानुसकी की देव-घेवाण” का केंद्र है। इसका सिद्धांत बहुत सरल है – “जिसके पास अधिक है वह दान करे, जिसे आवश्यकता है वह ले जाए”। यहां दानदाता कपड़े, पुस्तकें, घरेलू सामान, बर्तन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं जमा करते हैं। वहीं जरूरतमंद लोग बिना किसी भेदभाव के अपनी जरूरत की चीजें चुनकर ले जाते हैं। “अनोखा बाजार” का पहला द्रव्य हाल ही में संपन्न हुआ, जिसकी तस्वीरें भी प्रकाशित हुई हैं। इस पहल ने दान को भिक्षा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जोड़ा है।
आधार से लेकर स्वास्थ्य तक सहयोग संदीप जोशी की टीम केवल भोजन और वस्त्र तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, “जिन्होंने आधार कार्ड गंवाया, उनके साथ संदीप जोशी की सोबत” – इस अभियान के तहत गुम हुए दस्तावेज बनवाने में भी मदद की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य शिविर, शैक्षणिक सहायता और अन्य सामाजिक कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।
सामाजिक समर्थन और प्रेरणा विभिन्न समाचार पत्रों – लोकसत्ता, तरुण भारत, देशोन्नति, पुण्य नगरी आदि – ने संदीप जोशी के कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। “सेवा हेच समाधान” शीर्षक से छपी खबरों में उनके कार्यों को “मानुसकी जपणारी” पहल बताया गया है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि संदीप जोशी का नेतृत्व और “किसी को भूखा नहीं रहने देंगे” का विचार ही इन सभी पहलों की प्रेरणा है।
निष्कर्ष संदीप जोशी और उनकी टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठित प्रयासों से समाज की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव है। “दीनदयाल थाली” भूख मिटाती है तो “अनोखा बाजार” आत्मसम्मान बचाता है। नागपुर के नागरिकों ने भी इन पहलों को दिल से अपनाया है और दान एवं सहयोग के माध्यम से इस आंदोलन को आगे बढ़ाया है।
फाउंडेशन का संदेश स्पष्ट है – समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए हर व्यक्ति को आगे आना होगा, क्योंकि सच्ची सेवा ही मानवता की सबसे बड़ी पूजा है।
नवरात्रि का उत्सव आते ही संपूर्ण महाराष्ट्र और गुजरात में गरबा की धूम मच जाती है। ढोल की थाप, चनिया-चोली की घुंघराहट और सामूहिक नृत्य की ऊर्जा हर किसी को अपने साथ बहा ले जाती है। इसी परंपरा को जीवंत रखने के लिए नागपुर में रासलीला गरबा समूह द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
रासलीला गरबा समूह क्या है? रासलीला गरबा समूह केवल एक नृत्य कक्षा नहीं है, यह हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। समूह का मूल मंत्र है – “गरबा केवल नृत्य नहीं, यह हमारी पहचान है”। इसी भावना के साथ “रासलीला गरबा एक्सप्रेस” के माध्यम से सभी आयु वर्ग के लोगों को परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। समूह का उद्देश्य है परंपरा की लय के साथ नृत्य करना और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना।
प्रशिक्षण की विशेषताएं यदि आपने अभी तक प्रवेश नहीं लिया है, तो यह आपके लिए अंतिम अवसर हो सकता है। रासलीला गरबा समूह में आपको निम्न सुविधाएं प्राप्त होंगी:
1. विशेषज्ञ प्रशिक्षक अनुभवी और कुशल प्रशिक्षकों द्वारा बुनियादी स्तर से लेकर व्यावसायिक स्तर तक गरबा सिखाया जाएगा।
2. सभी आयु वर्ग के लिए समूह बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, सभी के लिए अलग-अलग समूह बनाए गए हैं, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपनी गति से सीख सके।
3. क्रमबद्ध शिक्षण पद्धति स्टेप बाय स्टेप विधि से सिखाया जाता है। आरंभिक ताल से लेकर जटिल स्टेप्स तक, प्रत्येक चरण को सरलता से समझाया जाएगा।
4. उत्सव में प्रस्तुति का अवसर प्रशिक्षण के पश्चात नवरात्रि के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में प्रतिभागियों को मंच पर प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया जाएगा।
5. आनंद, स्वास्थ्य और परंपरा का संगम गरबा केवल मनोरंजन नहीं है। यह शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक आनंद और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम भी है।
स्थान और संपर्क यह कार्यक्रम नागपुर में “गरबा स्टेशन नागपुर” के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। स्थान सीमित हैं, इसलिए शीघ्र पंजीकरण आवश्यक है।
संपर्क सूत्र: 899009681, 9370572885 स्थान: नागपुर
अंतिम चेतावनी पोस्टर में स्पष्ट रूप से कहा गया है – “कल यह मत कहना कि काश पंजीकरण कर लिया होता”। सीटें सीमित हैं और प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र समाप्त होने वाली है। यदि आप इस नवरात्रि को परंपरा के रंग में रंगना चाहते हैं, तो अभी पंजीकरण कराएं।
गरबा हमारी जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। रासलीला गरबा समूह के साथ इस वर्ष न केवल नृत्य सीखिए, बल्कि अपनी संस्कृति को भी अनुभव कीजिए।
अधिक जानकारी के लिए @rass_lila_garba_group से जुड़ सकते हैं।
तो देर किस बात की? आज ही पंजीकरण कीजिए और “रासलीला गरबा एक्सप्रेस” का हिस्सा बनिए।
5200 आवेदन मिलने पर अंतरिम सचिव नियुक्त होगा, धार्मिक समिति और पुजारी प्रशिक्षण संस्थान बनाने का निर्णय
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ के चयन को एक माह के लिए स्थगित कर दिया। ट्रस्ट को इस पद के लिए कुल 5200 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आवेदनों की अधिक संख्या के कारण चयन समिति ने अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया।
ट्रस्ट की बैठक में बढ़ते प्रशासनिक कार्यों को देखते हुए अंतरिम सचिव की नियुक्ति का भी निर्णय लिया गया। ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी दी।
तीन रिक्त पदों पर अभी निर्णय नहीं बोर्ड की बैठक में ट्रस्ट के तीन रिक्त न्यासी पदों को भरने पर कोई निर्णय नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार अब इस विषय पर अगली बैठक 2 सितंबर को होगी। बैठक में श्रावण माह में श्रद्धालुओं की अपेक्षित बढ़ोतरी, रिक्त न्यासी पदों को भरने की प्रगति तथा कई प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों की समीक्षा भी की गई।
धार्मिक और प्रशिक्षण संबंधी बड़े निर्णय कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि ट्रस्ट ने राम मंदिर के सभी धार्मिक कार्यों की निगरानी के लिए एक स्थायी धार्मिक समिति गठित करने का फैसला किया है। इस समिति में नौ संत शामिल होंगे, जिनमें पांच अयोध्या के और चार बाहर के होंगे।
इसके साथ ही पुजारियों के प्रशिक्षण के लिए एक स्थायी प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। इस संस्थान से प्रशिक्षित पुजारियों को राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रमाणित किया जाएगा।
दान में अनियमितता और सुरक्षा पर चर्चा बैठक में श्रद्धालुओं की चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितता की जांच कर रही विशेष जांच दल यानी एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर चर्चा नहीं हो सकी, क्योंकि रिपोर्ट अभी ट्रस्ट को प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि न्यासियों ने मंदिर दान में गबन से संबंधित याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही और निर्देशों का संज्ञान लिया।
कृष्ण मोहन ने बताया कि मंदिर के सीसीटीवी नेटवर्क और दान गिनती कक्ष में लगे कैमरों सहित सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। सभी सुरक्षा अधिकारियों को निगरानी प्रणाली तक पहुंच प्राप्त है, इस पर संतोष व्यक्त किया गया।
दान की गिनती के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन पर भी चर्चा हुई। अनियमितता सामने आने के बाद बैंक की प्रतिक्रिया पर सदस्यों ने निराशा जताई। बोर्ड ने वित्त समिति को बैंक से संबंधों और मानक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा कर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक के टकसाल के साथ सोने-चांदी के चढ़ावे की मात्रा और शुद्धता जांचने की व्यवस्था निर्बाध रूप से जारी रहेगी।
जनसंपर्क और श्रद्धालुओं की संख्या जनता तक नियमित जानकारी पहुंचाने के लिए ट्रस्ट एक आधिकारिक प्रवक्ता नियुक्त करेगा। तीन रिक्त न्यासी पदों के संबंध में कृष्ण मोहन ने कहा कि प्रक्रिया पूरी होने में कुछ और सप्ताह लग सकते हैं।
हाल में श्रद्धालुओं की संख्या घटने के दावे को कृष्ण मोहन ने “निराधार और भ्रामक” बताया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, यह करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाता है।
न्यासियों ने अयोध्या, देश-विदेश के श्रद्धालुओं, संत समाज और अवध की जनता के “निरंतर समर्थन और विश्वास” के लिए आभार भी व्यक्त किया।
पृष्ठभूमि यह बैठक मंदिर में दान के गबन के आरोपों के बीच हुई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था। 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई और आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों से 20.39 लाख रुपये नकद के अलावा सोना, चांदी, विदेशी मुद्रा और ‘रामराज्य कोष’ लिखा दान पात्र भी बरामद किया है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है। national