अवैध कंक्रीटीकरण और लापरवाही के लिए ‘सदोष मनुष्यवध’ का मामला दर्ज करने की मांग
मुंबई : बरसात के मौसम में पेड़ों के बार-बार गिरने की घटनाएं केवल प्राकृतिक आपदा नहीं हैं। ‘सुराज्य अभियान’ ने कहा है कि यह अवैध कंक्रीटीकरण, वृक्षों की छंटाई में लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के उल्लंघन से उत्पन्न मानव-जनित आपदा है।
मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक अभिषेक मुरुकटे ने राज्य में बढ़ती पेड़ गिरने की घटनाओं पर प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न उठाए। इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के प्रवक्ता सतीश कोचरेकर भी उपस्थित थे।
हर वर्ष दोहराई जाती है लापरवाही श्री मुरुकटे ने कहा कि प्रत्येक वर्ष बरसात में सैकड़ों पेड़ गिरते हैं। इससे सड़कें बंद होती हैं, वाहनों को नुकसान होता है, नागरिक घायल होते हैं और कई निर्दोष लोगों की जान जाती है। लेकिन हर बार कारण “भारी वर्षा” या “तेज हवा” बताकर मामला समाप्त कर दिया जाता है।
यह जांच नहीं की जाती कि पेड़ भीतर से कमजोर क्यों हुए, उनकी जड़ों को पर्याप्त हवा-पानी मिला या नहीं और उनकी संरचनात्मक जांच हुई या नहीं।
‘सुराज्य अभियान’ ने विश्व पृथ्वी दिवस पर मुंबई, पुणे, कोल्हापुर, सातारा, सांगली और सोलापुर में पत्रकार वार्ता कर यह मुद्दा उठाया था। मुंबई, पुणे, नाशिक, नागपुर और जलगांव में जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को ज्ञापन देकर तुरंत ‘डी-कंक्रीटीकरण’ अभियान चलाने की मांग भी की गई थी।
ज्ञापन में कहा गया था कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाना महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम, 1975 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। यदि कंक्रीटीकरण के कारण पेड़ गिरने से जन-धन की हानि होती है तो संबंधित विभाग के कार्यकारी अभियंताओं और ठेकेदारों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए। लेकिन इन चेतावनियों की अनदेखी की गई।
आंकड़े डराने वाले हाल की घटनाओं ने समस्या की गंभीरता बढ़ा दी है।
30 जून: चेंबूर में स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मृत्यु।
10 मई: खार के लिंकिंग रोड पर रिक्शे पर पेड़ गिरने से 15 वर्षीय आरिका श्रीवास्तव की मृत्यु।
सांताक्रूज (पश्चिम) : रहेजा कॉलेज के पास पेड़ गिरने से 8 लोग घायल।
चर्चगेट और मरीन लाइन्स: बड़े बरगद के पेड़ उखड़कर गिरे।
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्षा काल में मुंबई में कुल 91 पेड़ों और बड़ी शाखाओंके गिरने की घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें 13 शहर क्षेत्र में, 22 पूर्वी उपनगरों में और 56 पश्चिमी उपनगरों में हुईं।
उच्च न्यायालय की निगरानी में हुए संयुक्त सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 65 प्रतिशत सड़क किनारे के पेड़ कंक्रीट में फंसे हैं। मुंबई उच्च न्यायालय ने 3,691 पेड़ों के सीमेंट के घेरे में होने पर गंभीर नाराजगी भी व्यक्त की है।
‘सांस रोकने वाले कौन’ श्री मुरुकटे ने कहा, “जब पेड़ गिरता है तो हम केवल परिणाम देखते हैं, लेकिन उसकी जड़ें पहले ही दम घुटने से कमजोर हो चुकी होती हैं। समस्या वर्षा की नहीं है, समस्या यह है कि पेड़ों की जड़ों की सांस कौन रोक रहा है।”
उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं में केवल भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 के तहत लापरवाही का मामला दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। धारा 105 के अंतर्गत ‘सदोष मनुष्यवध’ का मामला दर्ज कर अधिकारियों और ठेकेदारों को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाए।
सुराज्य अभियान की प्रमुख मांगें
राज्यभर में सभी पेड़ों की जड़ों की तत्काल संरचनात्मक जांच कराई जाए।
प्रत्येक बड़े पेड़ के गिरने के बाद मूल कारणों की वैज्ञानिक जांच अनिवार्य की जाए।
अवैध कंक्रीटीकरण करने वाले दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 26 के तहत आपराधिक कार्रवाई हो।
सभी पेड़ों के चारों ओर कम से कम 1 मीटर खुली मिट्टी रखने संबंधी एनजीटी के आदेश का तुरंत पालन कराया जाए।
पूरे राज्य में विशेष ‘डी-कंक्रीटीकरण’ अभियान चलाकर उसकी कार्यवाही रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
पिछले तीन वर्षों में हुए वृक्षारोपण और वृक्ष प्रत्यारोपण का स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट कर रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
श्री मुरुकटे ने चेतावनी दी, “एक ओर वृक्ष संरक्षण के बड़े-बड़े बोर्ड लगाए जाते हैं और दूसरी ओर उन्हीं पेड़ों की जड़ों को सीमेंट के नीचे दबा दिया जाता है। यह दोहरा रवैया अब बंद होना चाहिए। यह केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन से जुड़ा अत्यंत गंभीर मुद्दा है।”
यदि इस पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो अभियान न्यायालयीन संघर्ष, अवमानना याचिका और जनजागरण आंदोलन के माध्यम से आगे कठोर कदम उठाएगा।
कुल 2.55 लाख में से 1.65 लाख ने किया मतदान, पुरुष 69% – महिला 59%, पहले 65% का अनुमान था, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुलकर्णी ने जारी किया आंकड़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुए मतदान की अंतिम टक्केवारी जारी हो गई है। सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा अपर आयुक्त (सा.प्र.) नागपुर विभाग, प्रदीप कुलकर्णी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 64.82 प्रतिशत मतदान हुआ है।
कुल 2,55,603 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,65,672 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत महिलाओं से अधिक रहा।
जिलावार फाइनल आंकड़ा – जिला कुल मतदाता मतदान प्रतिशत नागपुर 1,44,466 87,187 60.35% – सबसे कम भंडारा 21,349 14,319 67.07% गोंदिया 22,176 15,810 71.29% वर्धा 21,742 14,861 68.35% चंद्रपुर 32,262 23,568 73.05% – सबसे ज्यादा गड़चिरोली 13,608 9,927 72.95% कुल2,55,6031,65,67264.82% जेंडर वाइज विश्लेषण –
पुरुष मतदाता : 1,47,280 में से 1,01,672 ने किया मतदान – 69.03%
महिला मतदाता : 1,08,301 में से 63,999 ने किया मतदान – 59.09%
अन्य : 22 में से 1 – 4.55%
पहले अनौपचारिक तौर पर 65% मतदान का अनुमान लगाया जा रहा था, जो फाइनल आंकड़े में 64.82% पर आकर स्थिर हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य 50-55% के औसत से काफी अधिक है।
सबसे कम मतदान नागपुर जिले में 60.35% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05% दर्ज किया गया। गोंदिया 71.29% और गड़चिरोली 72.95% के साथ दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे।
अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां इस बढ़े हुए मतदान का असर भाजपा-कांग्रेस दोनों के भाग्य पर तय होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।
2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।
अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
प्रबंधन का बयान प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है। निदेशकडॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे। निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।
न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।