- विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस 2026 पर विशेषज्ञों का संदेश – कैल्शियम, विटामिन डी, व्यायाम और धूम्रपान से दूरी से ही मजबूत रहेंगी हड्डियां, डीईएक्सए जांच से समय पर हो पहचान
नागपुर,20 अक्टूबर :
हड्डियों की कमजोरी से जुड़ा रोग ऑस्टियोपोरोसिस एक साइलेंट डिजीज है। इसमें हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और अंदरूनी संरचना कमजोर पड़ जाती है। हड्डियां धीरे-धीरे बिना किसी लक्षण के कमजोर होती जाती हैं, जब तक कि कोई फ्रैक्चर न हो जाए। विशेषज्ञों के अनुसार यह रोग विशेष रूप से कमर, कूल्हे और कलाई को प्रभावित करता है, पर पूरे कंकाल तंत्र को कमजोर कर देता है। समय पर पहचान, उपचार और बचाव से इसके गंभीर परिणामों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
ऑस्टियोपोरोसिस क्या है और किसे खतरा है
डॉ. सीमा दांडे, संयुक्त सचिव, ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी ऑफ इंडिया और डॉ. शैलेश पिताले, कोषाध्यक्ष, ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी ऑफ इंडिया के अनुसार हड्डियां जीवित ऊतक हैं जो लगातार टूटती और बनती रहती हैं। उम्र बढ़ने पर जब टूटना बनने से अधिक हो जाता है तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। उम्र बढ़ना, रजोनिवृत्ति, कम कैल्शियम और विटामिन डी, शारीरिक निष्क्रियता, कम वजन और पारिवारिक इतिहास प्रमुख कारण हैं। एक मामूली गिरावट या झुकने जैसी साधारण क्रिया भी फ्रैक्चर का कारण बन सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस सभी उम्र के लोगों को हो सकता है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाएं और वृद्ध वयस्क अधिक जोखिम में होते हैं। रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन की कमी से हड्डियों की हानि तेज हो जाती है। अन्य कारणों में पारिवारिक इतिहास, कम शारीरिक सक्रियता, विटामिन डी की कमी, धूम्रपान, अधिक शराब, कुछ दवाएं और लंबे समय तक कॉर्टिकोस्टेरॉइड का सेवन शामिल है।
युवा भी नहीं हैं सुरक्षित
डॉ. चैतन्य शेंबेकर, आईवीएफ सलाहकार और लैप्रोस्कोपिक सर्जन, ओमेगा हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस केवल वृद्धों का रोग नहीं है। कम पोषण, हार्मोनल असंतुलन, खान-पान की गड़बड़ी, कुछ दीर्घकालिक रोग और लंबे समय तक स्टेरॉइड का उपयोग युवा लोगों में भी हड्डी के नुकसान का कारण बन सकता है। बचपन और किशोरावस्था हड्डियों के अधिकतम घनत्व के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। युवाओं में बार-बार फ्रैक्चर, अस्पष्टीकृत हड्डी दर्द या जोखिम कारकों की उपस्थिति पर चिकित्सा मूल्यांकन आवश्यक है।
महिला और पुरुष दोनों प्रभावित
डॉ. सीमा दांडे के अनुसार हड्डियों के स्वास्थ्य में हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका है। रजोनिवृत्ति के दौरान और बाद में एस्ट्रोजन की कमी से हड्डियों की हानि तेज हो जाती है। जिन महिलाओं को शीघ्र रजोनिवृत्ति, कम वजन, धूम्रपान या अपर्याप्त कैल्शियम का सामना करना पड़ता है, उन्हें अधिक जोखिम होता है। पुरुषों में भी यह रोग हो सकता है, हालांकि पैटर्न भिन्न है। पुरुष आमतौर पर अधिक हड्डी घनत्व प्राप्त करते हैं और कम दर से हड्डी खोते हैं, पर उनकी हानि उम्र के साथ बढ़ती जाती है। टेस्टोस्टेरोन की कमी, शराब, धूम्रपान और कॉर्टिकोस्टेरॉइड का सेवन पुरुषों में भी जोखिम बढ़ाता है।
डीईएक्सए स्कैन क्या है
डॉ. आशुतोष आप्टे, संयुक्त कोषाध्यक्ष, ऑस्टियोपोरोसिस सोसायटी ऑफ इंडिया के अनुसार डीईएक्सए का पूरा नाम ड्यूल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्शन है। यह एक त्वरित, गैर-आक्रामक परीक्षण है जो हड्डियों के खनिज घनत्व को मापता है, आमतौर पर कूल्हे और रीढ़ पर। यह लो डोज एक्स-रे का उपयोग करता है और आमतौर पर दर्दरहित होता है। जांच में 10 से 20 मिनट लगते हैं। पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाएं और 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष, जिन्होंने फ्रैक्चर झेला हो, को डॉक्टर से परामर्श के बाद जांच करानी चाहिए। 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं, 70 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों, किसी भी उम्र में फ्रैक्चर होने वालों, कम वजन, धूम्रपान और लंबे समय तक स्टेरॉइड का उपयोग करने वालों के लिए यह जांच महत्वपूर्ण है।
ऑस्टियोपोरोसिस बनाम ऑस्टियोपेनिया
डॉ. सोहेल खान, ऑर्थोपेडिक और स्पाइन सर्जन, गंगाकेयर हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार ऑस्टियोपेनिया सामान्य से कम हड्डी घनत्व को दर्शाता है, लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस जितना कम नहीं। यह अक्सर हड्डियों के नुकसान का प्रारंभिक चरण माना जाता है, जो हमेशा ऑस्टियोपोरोसिस में नहीं बदलता। फ्रैक्चर का जोखिम केवल डीईएक्सए रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि उम्र, पिछले फ्रैक्चर, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान, विटामिन डी और कैल्शियम के सेवन पर निर्भर करता है।
कैल्शियम और विटामिन डी ही आधार
डॉ. देवाशीष बरिक, एमएस, डीएनबी, एफएएमईआर, ऑर्थो, इंटीग्रा स्पेशियलिटी क्लिनिक, नागपुर के अनुसार कैल्शियम हड्डियों का मुख्य खनिज घटक है। यह हड्डियों को ताकत और संरचना देता है। विटामिन डी आंतों को कैल्शियम अवशोषित करने और हड्डियों के खनिजीकरण में मदद करता है। दूध, दही, पनीर, रागी, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल और मछली कैल्शियम के स्रोत हैं। विटामिन डी धूप, वसायुक्त मछली और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों से मिलता है। शाकाहारी आहार भी पर्याप्त हो सकता है यदि दूध, दही, रागी, तिल और हरी सब्जियों का नियमित सेवन हो। केवल खाद्य पदार्थों से ही विटामिन डी की आवश्यकता पूरी नहीं हो सकती, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें धूप कम मिलती है।
डॉ. प्रतीक कावडे, एमबीबीएस, एमएस, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, कावडे हॉस्पिटल, वाणी के अनुसार अकेले कैल्शियम और विटामिन डी की खुराक ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं है। विटामिन डी की पर्याप्तता के लिए धूप के संपर्क में रहना, फोर्टिफाइड आहार और पूरक आवश्यक हो सकते हैं। केवल सख्त शाकाहारी आहार पर्याप्त नहीं है, उसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों से पूरक करना आवश्यक है। उपचार निर्णयों में दवाओं, जीवनशैली और समग्र जोखिम का भी विचार किया जाता है।
धूम्रपान और चाय-कॉफी का प्रभाव
डॉ. अशोक कादू, एमएस, एमसीएच, ऑर्थो, न्यू डेल्टा हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार धूम्रपान हड्डियों के चयापचय पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और हड्डियों की मरम्मत की क्षमता को कम करता है। धूम्रपान करने वालों में फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है। धूम्रपान छोड़ना हड्डियों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. सचिन घाटगे, आईएमए अध्यक्ष, नागपुर के अनुसार चाय या कॉफी का सेवन सीधे हड्डियों के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन अधिक कैफीन से कैल्शियम की हानि बढ़ सकती है। दिन में कई कप चाय या कॉफी पीने वालों को अपने कैल्शियम का सेवन पर्याप्त रखना चाहिए।
व्यायाम से मजबूत होंगी हड्डियां
डॉ. अशोक कादू के अनुसार शारीरिक गतिविधि हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना और नृत्य हड्डियों के निर्माण में मदद करते हैं। संतुलन और प्रतिरोध प्रशिक्षण मांसपेशियों को मजबूत करता है और गिरने के जोखिम को कम करता है। नियमित व्यायाम विशेष रूप से वृद्धों के लिए लाभकारी है।
अकेले पैदल चलना पर्याप्त नहीं
डॉ. राजसी केन सेनगुप्ता, प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष, स्त्रीरोग विभाग, दत्ता मेघे मेडिकल कॉलेज व शालिनीताई मेघे मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल, नागपुर के अनुसार पैदल चलना हृदय स्वास्थ्य और गतिशीलता को सहारा देता है, पर यह अकेले ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसमें चलना, प्रतिरोध प्रशिक्षण, संतुलन अभ्यास और समुचित आहार शामिल हो।
प्रारंभिक चेतावनी संकेत
डॉ. राजसी केन सेनगुप्ता के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस अक्सर तब तक चुपचाप रहता है जब तक फ्रैक्चर न हो जाए। कमर में अचानक तेज दर्द, ऊंचाई में कमी, झुकाव या कूबड़, और मामूली चोट पर फ्रैक्चर – ये सभी प्रमुख लक्षण हैं। बिना किसी स्पष्ट कारण के कशेरुका फ्रैक्चर हो सकता है। लगातार पीठ दर्द, ऊंचाई में कमी और कूबड़ विकसित होने पर चिकित्सक से तुरंत परामर्श लेना चाहिए।
क्या ऑस्टियोपोरोसिस को उल्टा किया जा सकता है
डॉ. समीर छेपुरवार, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, श्री गजानन हॉस्पिटल, चंद्रपुर के अनुसार ऑस्टियोपोरोसिस का प्रभावी उपचार संभव है और कुछ रोगी हड्डी घनत्व में सुधार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह से सामान्य स्थिति में लाना संभव नहीं है। जीवनशैली में बदलाव, उचित दवाएं और संतुलित आहार सभी फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में योगदान करते हैं। यह रोग जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, विशेष रूप से फ्रैक्चर होने के बाद दर्द और गतिशीलता में कमी होती है। कूल्हे या रीढ़ के फ्रैक्चर के बाद कुछ व्यक्तियों को पुनर्वास और सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
घर पर गिरने और फ्रैक्चर से बचाव
डॉ. सचिन घाटगे के अनुसार घर पर गिरना हड्डियों के फ्रैक्चर का मुख्य कारण है। सीढ़ियों, गलियारों और बाथरूम में रेलिंग लगाएं, फिसलन रहित फर्श और बाथरूम में ग्रैब बार लगाएं। घर में अच्छे प्रकाश का प्रबंध करें, उचित फुटवियर पहनें, नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं और दवाओं की समीक्षा करें। हड्डियों की मजबूती के लिए व्यायाम और संतुलन प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। घर के खतरों की पहचान कर उन्हें दूर करें।
बचाव के उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव संभव है। बचपन से ही मजबूत हड्डियों का निर्माण करें। पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन लें। नियमित वजन उठाने वाले व्यायाम करें। धूम्रपान से बचें, शराब का सेवन सीमित करें। गिरने के जोखिम को कम करने के लिए घर को सुरक्षित बनाएं और संतुलन सुधारने के लिए अभ्यास करें। उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों को डॉक्टर से परामर्श कर समय पर जांच और उपचार लेना चाहिए।