हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने पर उदयपुर में राष्ट्र चेतना का विराट संगम
उदयपुर,17 जून 2026 :हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर गांधी ग्राउंड में प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वाधान में आयोजित ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत का इतिहास पराधीनता का नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध निरंतर चले संघर्ष, प्रतिरोध और आत्मगौरव का इतिहास है। हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं का युद्ध नहीं था, बल्कि राष्ट्रचेतना और स्वाभिमान की रक्षा के लिए संपूर्ण समाज द्वारा लड़ा गया महासंग्राम था।
हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती समारोह में उन्होंने कहा कि युद्ध के उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों, समकालीन स्रोतों और स्वयं मुगल इतिहासकारों के वर्णनों से स्पष्ट होता है कि युद्ध के विभिन्न चरणों में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा। यदि युद्ध के बाद भी शत्रु भय और असुरक्षा की स्थिति में रहा, तो वास्तविक विजय किसकी थी, इसका निर्णय इतिहास स्वयं करता है।उन्होंने युद्ध के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की सेना के पहले ही आक्रमण ने मुगल सेना को दूर तक पीछे हटने के लिए विवश कर दिया था। चेतक के अद्भुत पराक्रम, प्रताप की युद्धनीति और सैनिकों के आत्मबल ने सीमित संसाधनों के बावजूद विशाल साम्राज्य की सैन्य शक्ति को चुनौती दी। महाराणा प्रताप की सेना में केवल राजवंश या योद्धा वर्ग नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज खड़ा था। जाति, पंथ, क्षेत्र और सामाजिक भेदों से ऊपर उठकर समाज राष्ट्ररक्षा के लिए एकजुट हुआ था।
सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत का समाज कभी भी स्वेच्छा से पराधीनता स्वीकार करने वाला समाज नहीं रहा। जब-जब विदेशी आक्रांताओं ने इस भूमि पर अधिकार करने का प्रयास किया, तब-तब प्रतिरोध की अग्नि प्रज्ज्वलित हुई। उन्होंने बप्पा रावल, ललितादित्य, महाराणा प्रताप और अन्य वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आत्मा को पराजित करना किसी भी आक्रांता के लिए संभव नहीं हो सका।
उन्होंने कहा कि इतिहास को कई बार सत्ता के निकट रहने वालों ने अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया, जिसके कारण अनेक राष्ट्रीय नायकों के योगदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। हल्दीघाटी के युद्ध के संदर्भ में भी तथ्यों की पुनर्समीक्षा आवश्यक है। जिस महाराणा प्रताप की जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है, वही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि राष्ट्र अपने वास्तविक नायकों को कभी नहीं भूलता।
दुनिया में कहीं अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप का स्मरण आज भी जन-जन करता है। इतिहास का यह लोकनिर्णय स्वयं बताता है कि विजय किसकी हुई थी।”
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को ‘हिंदुआ सूरज’ यूं ही नहीं कहा गया। उन्होंने अपने धर्म, संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनका जीवन सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा आदर्श स्थापित किया जो आज भी राष्ट्र जीवन को प्रेरणा देता है।
सरसंघचालक ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी एकता, समरसता और आत्मविश्वास में निहित है। केवल संकट के समय ही नहीं, बल्कि सामान्य परिस्थितियों में भी समाज को संगठित और जागृत रहना होगा। स्वाभिमान और ‘स्व’ का भाव जब तक जीवित रहेगा, तब तक भारत हर चुनौती का सामना करते हुए विजय की नई गाथाएं रचता रहेगा। सभी नागरिक महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रोत्थान, समाज संगठन और विश्वकल्याण का संकल्प लें। भारत का उत्थान ही विश्व के कल्याण का मार्ग है और इसी दिशा में कार्य करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
हल्दीघाटी विजय का गौरव इतिहास की भ्रांतियों का करेगा अंत – श्रीजी श्याम शरणसमारोह में विशिष्ट अतिथि निम्बार्काचार्य श्रीजी श्याम शरण देवाचार्य जी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का महापर्व है। वर्षों से इतिहास के संबंध में फैलाई गई भ्रांतियों का निराकरण अब समाज के सामने हो रहा है और महाराणा प्रताप के वास्तविक गौरव को पुनः स्थापित किया जा रहा है।
मेवाड़ की भूमि शौर्य और भक्ति दोनों की पावन धरा है। एक ओर इस भूमि ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जैसे राष्ट्रनायक को जन्म दिया, वहीं दूसरी ओर भक्तिमती मीराबाई जैसी महान कृष्णभक्त को भी दुनिया को दिया। जब मातृभूमि और सनातन संस्कृति पर संकट आया, तब महाराणा प्रताप ने भगवान श्रीराम के “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” के आदर्श को आत्मसात करते हुए अपना सर्वस्व राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।
श्रीजी श्याम शरण जी ने कहा कि राष्ट्रभक्ति की यही चेतना समय-समय पर विभिन्न रूपों में प्रकट होती रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” की भावना के साथ मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित है। उन्होंने समाज से जाति, वर्ग और संकीर्णताओं से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देती है।
हल्दीघाटी विजय का सत्य जन-जन तक पहुंचाना होगा – डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि हल्दीघाटी युद्ध के वास्तविक इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया जाए और उन भ्रांतियों का निराकरण किया जाए जो वर्षों से समाज में प्रचारित की जाती रही हैं। इस वर्ष महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष पूर्ण होने का दुर्लभ संयोग बना है, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप ने मुगल सेना को परास्त कर स्वाधीनता, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया था
उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच संघर्ष नहीं था, बल्कि विदेशी साम्राज्यवादी शक्तियों के विरुद्ध भारतीय अस्मिता की रक्षा का महान अभियान था। मेवाड़ ने कभी भी विदेशी सत्ता के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया और अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखा। समाज के सभी वर्ग अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर हल्दीघाटी विजय के ऐतिहासिक सत्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं।
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में प्रशासन, मीडिया, सामाजिक संगठनों एवं हजारों कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रचेतना के नवजागरण का ऐतिहासिक अभियान बताया।
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने सभी का स्वागत करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति व समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केन्द्र का परिचय दिया। प्रताप गौरव केंद्र में श्रव्य दृश्य प्रदर्शनी से महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध में हार होने के विमर्श को तोड़ा गया है और महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध में विजय होने के विमर्श को स्थापित किया गया है। हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु: शती समारोह के तहत वर्ष भर हुए आयोजनों की जानकारी भी दी।राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में मेवाड़-वागड़ के कई संत-महंतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ। मेवाड़ राजपरिवार के महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ भी उपस्थित रहे।
कुल 2.55 लाख में से 1.65 लाख ने किया मतदान, पुरुष 69% – महिला 59%, पहले 65% का अनुमान था, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुलकर्णी ने जारी किया आंकड़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुए मतदान की अंतिम टक्केवारी जारी हो गई है। सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा अपर आयुक्त (सा.प्र.) नागपुर विभाग, प्रदीप कुलकर्णी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 64.82 प्रतिशत मतदान हुआ है।
कुल 2,55,603 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,65,672 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत महिलाओं से अधिक रहा।
जिलावार फाइनल आंकड़ा – जिला कुल मतदाता मतदान प्रतिशत नागपुर 1,44,466 87,187 60.35% – सबसे कम भंडारा 21,349 14,319 67.07% गोंदिया 22,176 15,810 71.29% वर्धा 21,742 14,861 68.35% चंद्रपुर 32,262 23,568 73.05% – सबसे ज्यादा गड़चिरोली 13,608 9,927 72.95% कुल2,55,6031,65,67264.82% जेंडर वाइज विश्लेषण –
पुरुष मतदाता : 1,47,280 में से 1,01,672 ने किया मतदान – 69.03%
महिला मतदाता : 1,08,301 में से 63,999 ने किया मतदान – 59.09%
अन्य : 22 में से 1 – 4.55%
पहले अनौपचारिक तौर पर 65% मतदान का अनुमान लगाया जा रहा था, जो फाइनल आंकड़े में 64.82% पर आकर स्थिर हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य 50-55% के औसत से काफी अधिक है।
सबसे कम मतदान नागपुर जिले में 60.35% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05% दर्ज किया गया। गोंदिया 71.29% और गड़चिरोली 72.95% के साथ दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे।
अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां इस बढ़े हुए मतदान का असर भाजपा-कांग्रेस दोनों के भाग्य पर तय होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।
2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।
अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
प्रबंधन का बयान प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है। निदेशकडॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे। निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।
न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।