नागपुर के सुरेश भट्ट सभागृह में आज, 28 जून 2026 को प्रस्तुत किए गए महानगरपालिका के वार्षिक आर्थिक बजट पर चर्चा सत्र आरंभ हो चुका है। यह आयोजन नगर के विकास की दिशा तय करने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण अवसर माना जाता है। परंतु विडंबना यह है कि यह सत्र गंभीर विमर्श का मंच न बनकर केवल एक औपचारिक अनुष्ठान बनकर रह गया है।
सभागृह का दृश्य: गंभीरता से अधिक गपशप
सभागृह में नगर के सभी निर्वाचित पार्षद और वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित हैं। जिन पार्षदों को आर्थिक विषयों, बजट आवंटन और राजस्व प्रबंधन की थोड़ी-बहुत समझ है, वे अवश्य अपने तर्क रख रहे हैं। परंतु बहुसंख्यक ऐसे हैं जिन्हें बजट के तकनीकी पक्षों का ज्ञान नहीं। वे अनुभवी होने के नाम पर केवल अपने-अपने प्रभाग में नाली, सड़क और बगीचे की माँग की गुहार लगाते दिख रहे हैं।
सत्र के दौरान अधिकांश सदस्य पीछे की पंक्तियों में बैठकर आपसी वार्तालाप, घर-परिवार और राजनीतिक गपशप में व्यस्त हैं। जैसे ही भोजन अवकाश की घोषणा होगी, सभागृह में स्फूर्ति आ जाएगी। स्वादिष्ट व्यंजनों का आस्वाद लेने के बाद कई माननीय सदस्य सभागृह से ऐसे लुप्त हो जाएंगे जैसे बजट से उनका कोई सरोकार ही न हो।
पूर्व-निर्धारित पटकथा का मंचन
यह छह से सात घंटे का चर्चासत्र वास्तव में एक नाटक का मंचन मात्र है। 28 जून को प्रस्तुत बजट में क्या जोड़ा जाना है, क्या घटाया जाना है, कौन-सी योजनाएँ लानी हैं और किन पर कैंची चलानी है, यह सब पहले ही सत्तापक्ष के बंद कमरों में तय हो चुका है। सभागृह में होने वाली बहस केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की खानापूर्ति है। सदस्यों के सुझाव, आपत्तियाँ और तर्क केवल कार्यवाही के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएंगे।
लोकलुभावन आवरण, खोखला ढाँचा
सत्तापक्ष ने इस वर्ष 28 जून को प्रस्तुत बजट को पूरी तरह से लोकलुभावन घोषणाओं से सजाया है। जनता-जनार्दन को आकर्षित करने वाले बड़े-बड़े वादे किए गए हैं। परंतु जब बजट के मूल ढाँचे को देखा जाए तो गंभीर खामियाँ स्पष्ट दिखती हैं:
अंकेक्षण का अभाव: आय के साधनों का वास्तविक मूल्यांकन नहीं किया गया। बीते वर्षों में हुए खर्च का अंकेक्षण और पूर्ण हुए कार्यों की गुणवत्ता जाँच को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया है।
मानव संसाधन की उपेक्षा: महानगरपालिका में सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। सफाई, स्वास्थ्य, जलापूर्ति जैसे आवश्यक विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। परंतु नई भर्तियों और उन पर आने वाले खर्च का बजट में कहीं उल्लेख नहीं है।
अपनों पर कृपा: सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आय उत्पन्न करने वाले लगभग आधे दर्जन प्रमुख विभागों का प्रभार एक ही व्यक्ति को सौंप दिया गया है। जल विभाग, संपत्ति कर, अग्निशमन, नगर रचना, बाजार विभाग जैसे मालदार विभाग एक ही छत्रछाया में हैं।
ईमानदार पर बोझ, बकाएदार को अभयदान
आज नागपुर महानगरपालिका के विभिन्न विभागों पर नागरिकों का लगभग 1500 करोड़ रुपये बकाया है। इस विशाल राशि की वसूली के लिए 28 जून को पेश बजट में कोई कठोर नीति या कार्ययोजना नहीं है। इसके विपरीत, जो नागरिक नियमित रूप से जल कर और संपत्ति कर भर रहे हैं, उन पर नए करों का बोझ लादा जा रहा है।
और जो वर्षों से कर नहीं दे रहे, उन्हें मात्र छह साल का पुराना बकाया भरकर मुक्त होने का अवसर दिया जा रहा है। इतनी रियायत के बाद भी जो बकाया नहीं भर रहे, उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यह नीति ईमानदार करदाताओं के साथ अन्याय है।
जनता के सुझाव गए कूड़ेदान में
बजट निर्माण से पूर्व स्थायी समिति के सभापति ने बड़े उत्साह से नागरिकों से सुझाव माँगे थे। सैकड़ों जागरूक नागरिकों ने जनहित के सुझाव भेजे। परंतु उनमें से कितने सुझाव 28 जून को प्रस्तुत बजट में शामिल किए गए, इसका कोई सार्वजनिक विवरण नहीं दिया गया।
यदि पारदर्शिता बरती जाती और बताया जाता कि किस नागरिक का कौन-सा सुझाव स्वीकार हुआ, तो जनता में विश्वास बढ़ता। भविष्य में और बेहतर सुझाव मिलते। लेकिन सत्तापक्ष को जनहित नहीं, केवल दल-हित चाहिए। उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन ठेकेदारों को काम दिया गया है, उनसे निर्धारित हिस्सा दल के खजाने तक पहुँच जाए।
अंतिम निर्णय: सभापति नहीं, सलाहकार का
कुल मिलाकर यह पूरा चर्चासत्र निरर्थक है। अंतिम निर्णय न तो सभागृह में होगा, न ही सभापति के विवेक से। सब कुछ मनपा के उस सलाहकार की इच्छा से होगा, जिसका दबदबा वर्षों से कायम है। उसी के इशारे पर फाइलें चलती हैं और निर्णय होते हैं।
जब तक यह अदृश्य शक्ति पर्दे के पीछे से सूत्र संचालित करती रहेगी, तब तक कोई भी स्थायी समिति और 28 जून को पेश हुआ यह बजट नगर के लिए नया इतिहास नहीं रच सकता। यह बजट भी पुरानी लीक पर ही चलेगा, जहाँ विकास के नाम पर केवल घोषणाएँ होंगी और वास्तविक लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहेगा।
नागपुर की जनता को समझना होगा कि सभागृह में चल रहा यह वार्षिक नाटक उनके भविष्य से खिलवाड़ है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक बजट केवल कागज़ों का पुलिंदा बना रहेगा।
कुल 2.55 लाख में से 1.65 लाख ने किया मतदान, पुरुष 69% – महिला 59%, पहले 65% का अनुमान था, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुलकर्णी ने जारी किया आंकड़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुए मतदान की अंतिम टक्केवारी जारी हो गई है। सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा अपर आयुक्त (सा.प्र.) नागपुर विभाग, प्रदीप कुलकर्णी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 64.82 प्रतिशत मतदान हुआ है।
कुल 2,55,603 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,65,672 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत महिलाओं से अधिक रहा।
जिलावार फाइनल आंकड़ा – जिला कुल मतदाता मतदान प्रतिशत नागपुर 1,44,466 87,187 60.35% – सबसे कम भंडारा 21,349 14,319 67.07% गोंदिया 22,176 15,810 71.29% वर्धा 21,742 14,861 68.35% चंद्रपुर 32,262 23,568 73.05% – सबसे ज्यादा गड़चिरोली 13,608 9,927 72.95% कुल2,55,6031,65,67264.82% जेंडर वाइज विश्लेषण –
पुरुष मतदाता : 1,47,280 में से 1,01,672 ने किया मतदान – 69.03%
महिला मतदाता : 1,08,301 में से 63,999 ने किया मतदान – 59.09%
अन्य : 22 में से 1 – 4.55%
पहले अनौपचारिक तौर पर 65% मतदान का अनुमान लगाया जा रहा था, जो फाइनल आंकड़े में 64.82% पर आकर स्थिर हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य 50-55% के औसत से काफी अधिक है।
सबसे कम मतदान नागपुर जिले में 60.35% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05% दर्ज किया गया। गोंदिया 71.29% और गड़चिरोली 72.95% के साथ दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे।
अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां इस बढ़े हुए मतदान का असर भाजपा-कांग्रेस दोनों के भाग्य पर तय होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।
2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।
अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
प्रबंधन का बयान प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है। निदेशकडॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे। निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।
न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।