गो-संवर्धन गोरस भंडार पर एफडीए की कार्रवाई और जन-आरोग्य का प्रश्न
वर्धा – महात्मा गांधी, आचार्य विनोबा भावे और जमनालाल बजाज द्वारा 1931 में स्थापित, गांधीवादी सिद्धांतों की प्रतीक ‘गो-संवर्धन गोरस भंडार’ पर अन्न व औषध प्रशासन की धड़पकड़ कार्रवाई ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। मगनवाडी, वर्धा स्थित इस ऐतिहासिक संस्था को अस्वच्छ एवं असुरक्षित वातावरण में उत्पादन करने के आरोप में सील कर दिया गया है। प्रशासन द्वारा लगभग 25.86 लाख रुपये मूल्य का उत्पाद भंडार जब्त किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
अन्न व औषध प्रशासन के निरीक्षण में उत्पादन परिसर अत्यंत अस्वच्छ, दुर्गंधयुक्त और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया। कई उत्पादों पर अन्न सुरक्षा नियमों के अंतर्गत अनिवार्य जानकारी, उत्पादन तिथि एवं बैच क्रमांक अंकित नहीं थे। गाय का दूध, घी, छाछ तथा मावा के नमूने सरकारी प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजे गए हैं। यह पहली घटना नहीं है, पूर्व में भी संस्था दंडात्मक कार्रवाई का सामना कर चुकी है।
विश्वास की नींव पर चोट
गोरस भंडार’ मात्र एक सहकारी संस्था नहीं, अपितु 93 वर्ष पुरानी एक विचारधारा है। 1961 में ‘वर्धा तहसील गो-दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ’ के रूप में पुनर्गठित इस संस्था का उद्देश्य गो-संवर्धन, शुद्ध दुग्ध का वितरण और कृषकों का आर्थिक सशक्तिकरण था। इसके ‘गोरसपाक’ और शुद्ध गौ-घृत की ख्याति महाराष्ट्र भर में है। लाखों उपभोक्ताओं और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास इस संस्था से जुड़ा है। ऐसे में यदि नाम और इतिहास के पीछे स्वच्छता के मानदंडों की उपेक्षा हो रही है, तो यह अत्यंत चिंताजनक है।
दोहरे मापदंड का आरोप, जनता में रोष
वर्धा जैसे गांधीवादी जिले में इस कार्रवाई को लेकर नागरिकों में तीव्र नाराजगी है। जनता का प्रश्न है कि जब शहर और जिले में अनेक स्थानों पर अस्वच्छता, निम्न गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानें, होटल और ठेले निर्बाध रूप से संचालित हैं, तो उन पर नियमित एवं कठोर कार्रवाई क्यों नहीं होती? केवल प्रतिष्ठित संस्थाओं पर अचानक धावा बोलने से ‘चयनात्मक कार्रवाई’ और ‘दोहरे मापदंड’ की भावना बलवती हो रही है।
जन-आरोग्य सर्वोपरि, परन्तु न्याय भी आवश्यक
अन्न सुरक्षा और जन-आरोग्य हेतु नियमों का अनुपालन नितांत आवश्यक है। इस दृष्टि से एफडीए की कार्रवाई स्वागतयोग्य है। किन्तु न्याय का तकाजा है कि यह कार्रवाई सर्वसमावेशी, पारदर्शी एवं निष्पक्ष हो। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। किसी एक को लक्षित करके नहीं, अपितु सम्पूर्ण जिले के समस्त व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एकसमान मापदंड लागू होने चाहिए। वर्धा की गांधीवादी परंपरा का सम्मान तभी होगा जब प्रशासन न्यायपूर्ण हो।
500 किसानों पर आजीविका का संकट
इस अचानक बंदी का दूसरा पक्ष अत्यंत पीड़ादायक है। संस्था से जुड़े लगभग 500 से 525 दुग्ध उत्पादक किसानों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। दूध एक नाशवान पदार्थ है। संस्था बंद होने से उनकी दैनिक दुग्ध बिक्री ठप हो गई है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हो रही है। प्रश्न यह है कि जन-आरोग्य की रक्षा करते समय इन अन्नदाताओं के हितों की रक्षा कौन करेगा?
शुद्धता और संवेदना का संतुलन
गो-संवर्धन गोरस भंडार की घटना एक चेतावनी है। यह दर्शाती है कि ‘नाम’ और ‘इतिहास’ स्वच्छता का प्रमाणपत्र नहीं हो सकते। गांधीजी ने स्वयं ‘स्वच्छता’ को ‘स्वतंत्रता’ से अधिक महत्वपूर्ण बताया था। अतः संस्थाओं को भी आत्मावलोकन कर मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
साथ ही, प्रशासन का दायित्व है कि वह केवल ‘दंड’ तक सीमित न रहे। उसे ‘सुधार’ का मार्ग भी दिखाना होगा। किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, संस्थाओं के लिए समयबद्ध सुधार योजना और पूरे जिले में बिना भेदभाव के निरंतर निगरानी – यही गांधीवादी प्रशासन का वास्तविक स्वरूप होगा। जन-आरोग्य से समझौता नहीं हो सकता, परन्तु न्याय और संवेदना से भी मुँह नहीं मोड़ा जा सकता।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –
2024 में877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
2025 में849 मंजूर, 87 खारिज।
1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।
केसों का बोझ – कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।
15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।
भरण-पोषण और कस्टडी – भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।
स्टाफ की भारी कमी से दबाव –
RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली
कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।