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Crime

दुष्कर्म मामले में एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग

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  • नौकरी और कारोबार में मदद का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप; पीड़िता दलित, आरोपी चंदन वांगानी पर मामला दर्ज

नागपुर, 12 अगस्त 2026 :

नागपुर के हुडकेश्वर क्षेत्र में नौकरी और सोलर व्यवसाय में मदद का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म के मामले में अब अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग उठी है।

पीड़िता ने मंगलवार को डिजिटल मीडिया पत्रकार परिषद में अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि आरोपी चंदन मोहनदास वांगानी, उम्र 57 वर्ष, से उसकी पहचान सोलर कारोबार के सिलसिले में हुई थी। आरोपी ने एक कंपनी में काम दिलाने और व्यवसाय में सहयोग का भरोसा दिया था।

शिकायत के अनुसार 8 जनवरी 2025 को आरोपी ने ग्राहक से मिलवाने की बात कहकर पीड़िता को तुकडोजी पुतला क्षेत्र में बुलाया। इसके बाद उसे वाहन से दूसरी जगह ले जाया गया। पीड़िता का आरोप है कि पेय पदार्थ देने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और अर्धबेहोशी की हालत में आरोपी उसे होटल ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया।

पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद आरोपी ने संदेश भेजकर करियर में मदद का आश्वासन दिया। शिकायत में कंपनी से जुड़े करीब 2.5 लाख रुपये के काम का भी उल्लेख है। पीड़िता दलित समुदाय से है, इसलिए उसने मामले में एट्रोसिटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ने की मांग की है।

हुडकेश्वर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2) के तहत अपराध दर्ज किया है।

पत्रकार परिषद में पीड़िता के साथ रिपाई नेता यशवंत तेलंग और राकांपा के योगेश ठाकरे भी मौजूद थे। तेलंग ने बताया कि इस मामले की शिकायत महिला आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, मानवाधिकार आयोग के साथ-साथ मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय को भी भेजी जाएगी।

अब पुलिस जांच में एट्रोसिटी एक्ट की धाराएं जोड़ी जाती हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर है।

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पड़ोसी की कार की RC से लिंक हुआ मोबाइल नंबर, लाड़की बहीण योजना का लाभ रुका

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  • 41 वर्षीय महिला लाभार्थी सूची से बाहर – प्रशासनिक जांच में दिखा चारपहिया वाहन का मालिक, पड़ोस की 70 वर्षीय महिला ने 2018 में खरीदी थी अल्टो कार – नांदगांव खंडेश्वर पुलिस ने दर्ज किया केस

अमरावती/नांदगांव खंडेश्वर,18 सितंबर 2026 :

राज्य सरकार की मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहीण योजना का लाभ ले रही नांदगांव खंडेश्वर की 41 वर्षीय महिला को अचानक लाभार्थी सूची से हटा दिया गया। प्रशासनिक जांच में कारण सामने आया कि महिला का मोबाइल नंबर पड़ोसी की कार के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से लिंक था, जिसके चलते वेरिफिकेशन सिस्टम में वह चारपहिया वाहन की मालिक दिखी।

योजना के पात्रता नियमों के अनुसार, चारपहिया वाहन रखने वाले परिवार इस लाभ के लिए पात्र नहीं हैं। इसलिए सिस्टम ने उसे अपात्र घोषित कर लाभ बंद कर दिया।

कैसे हुआ खुलासा –

महिला ने देखा कि योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता अचानक बंद हो गई है। पूछताछ करने पर पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उसके नाम पर एक चारपहिया वाहन रजिस्टर्ड दिख रहा है।

आगे जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के घर के बगल में रहने वाली 70 वर्षीय महिला ने 2018 में एक अल्टो कार खरीदी थी। उसी कार की RC में शिकायतकर्ता महिला का मोबाइल नंबर लिंक पाया गया।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसकी बिना सहमति के उसका मोबाइल नंबर वाहन रिकॉर्ड में डाल दिया गया। चूंकि सरकारी वेरिफिकेशन प्रक्रिया ने वाहन को उसका मान लिया, इसलिए उसे योजना के लाभ से वंचित होना पड़ा, जबकि उसके पास कोई चारपहिया वाहन है ही नहीं।

पुलिस जांच शुरू –

इसके बाद महिला ने पुलिस से संपर्क कर अपने मोबाइल नंबर के कथित दुरुपयोग और लाभ बहाल करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई। घटना के बाद नांदगांव खंडेश्वर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है कि आखिर किसने महिला का नंबर वाहन रिकॉर्ड से लिंक किया।

नांदगांव खंडेश्वर पुलिस स्टेशन ऑफिसर आनंद पिदुरकर ने कहा, “हम जांच कर रहे हैं कि नंबर किसने दिया, क्यों दर्ज किया गया और इसके पीछे मकसद क्या था।”

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वर्धा में बनेगी 1000 कैदियों की आधुनिक जेल, पुरानी जेल की 15.5 एकड़ जमीन बनेगी सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट

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  • MSIDC ने बनाया मास्टर प्लान – ब्रिटिश काल की 1845 की जेल को शहर से बाहर शिफ्ट करने की तैयारी, इन्जापुर मौजे में 119 एकड़ जमीन चिन्हित

नागपुर,11 सितंबर : महाराष्ट्र राज्य पायाभूत सुविधा विकास महामंडल (MSIDC) वर्धा में एक अत्याधुनिक आधुनिक जेल बनाने की योजना पर विचार कर रहा है।

द हितवाद में प्रकाशित खबर के अनुसार, वर्तमान वर्धा सेंट्रल जेल 15.5 एकड़ में फैली है और इसका निर्माण 1845 में अंग्रेजों ने करवाया था। इमारत की हालत अब अच्छी नहीं है। सरकार जेल की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उसकी मौजूदा प्राइम लोकेशन वाली जमीन का व्यावसायिक उपयोग करना चाहती है।

MSIDC के कार्यकारी अभियंता नरेश बोरकर ने बताया कि – “MSIDC दो उद्देश्यों को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है, एक वर्धा सेंट्रल जेल की मौजूदा साइट का व्यावसायिक दोहन करना और दूसरा आधुनिक सुविधाओं के साथ 1000 कैदियों की क्षमता वाली नई विशाल जेल का निर्माण करना।” फिलहाल यह योजना प्रारंभिक स्तर पर है।

नई जेल कहां बनेगी?
MSIDC के दस्तावेजों के अनुसार, वर्धा शहर से सटे मौजा इन्जापुर में लगभग 119 एकड़ सरकारी जमीन को नई जेल के लिए चिन्हित किया गया है। यह जगह लगभग 62,700 वर्ग मीटर है और शहर व क्षेत्र से अच्छी कनेक्टिविटी रखती है। नई जेल 1000 कैदियों को रखने में सक्षम होगी।

पुरानी जेल की जमीन पर क्या बनेगा?
राज्य सरकार की योजना मौजूदा 15.5 एकड़ जेल की जमीन को सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD) के रूप में पुनर्विकसित करने की है। MSIDC ने इसके लिए शहरी नियोजकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

यह प्रोजेक्ट मध्य भारत की सबसे बड़ी शहरी पुनरुत्थान परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसका उद्देश्य इस कम उपयोग वाली सरकारी जमीन को एक जीवंत, आर्थिक रूप से उत्पादक और पर्यावरण के अनुकूल शहरी केंद्र में बदलना है।

MSIDC इस परियोजना को PoP या BOT आधार पर विकसित करना चाहता है और इसके लिए एक कंसल्टेंट नियुक्त करने जा रहा है जो मौजूदा जमीन का अध्ययन कर लैंडस्केप डिजाइन सहित विकास योजना सुझाएगा।

डेवलपर को इस प्रोजेक्ट में बेसिक FSI 4.0 + 1.1 + प्रीमियम 0.5 + TDR 0.90 + सहायक FSI 1.50 का लाभ दिया जाएगा।

यह नया CBD हेल्थकेयर, बिजनेस, इनोवेशन, आवासीय समुदाय, आतिथ्य, संस्कृति और मनोरंजन को एकीकृत करेगा। यहां विश्व स्तरीय अस्पताल, वेलनेस सुविधाएं, पैदल यात्रियों के लिए जगह, मौजूदा पेड़ों, झीलों और विरासत संपत्तियों का संरक्षण किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्धा को भारत के भौगोलिक केंद्र के रूप में हेल्थकेयर और बिजनेस का क्षेत्रीय केंद्र बनाना है।

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घुकसी में 27.5 टन प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली जब्त,4 आरोपियों पर प्रकरण दर्ज

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  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों की अवहेलना कर किया जा रहा था अवैध पालन; मत्स्य विभाग ने छापामार कार्रवाई में मछली नष्ट की

पारशिवनी, 11 जून 2026: प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली के अवैध पालन और संवर्धन के विरुद्ध मत्स्य विभाग ने पारशिवनी तहसील के घुकसी गांव में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने छापा मारकर लगभग 27.5 टन थाई मांगूर मछली जब्त की और वैज्ञानिक पद्धति से नष्ट कर दी। इस मामले में चार आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला*

मत्स्य व्यवसाय विकास अधिकारी एवं सहायक आयुक्त कार्यालय, नागपुर के अधिकारी प्रशांत जू वैद्य की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। मामला मौजा घुकसी शिवार स्थित सर्वे क्रमांक 48, क्षेत्रफल 2.31 हेक्टेयर के मत्स्य तालाब से जुड़ा है।

विभागीय दल ने 9 जून 2026 की शाम 4 बजे से 10 जून 2026 की शाम 5 बजे तक तालाब पर छापामार कार्रवाई की। जांच में तालाब में भारी मात्रा में प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली का संवर्धन किया जाना पाया गया।

आरोपी कौन*

इस प्रकरण में चार लोगों को आरोपी बनाया गया है:

1. अजय उत्तमचंद मावरानी

2. असदुल्लाह खान रहमत खान

3. जफर इकबाल अब्दुल सत्तार कुरैशी

4. तोहसिक खान

पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।

थाई मांगूर पर क्यों है प्रतिबंध

थाई मांगूर का वैज्ञानिक नाम _क्लेरियास गैरिपिनस_ है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, नई दिल्ली तथा केंद्र सरकार ने इसके प्रजनन, पालन-पोषण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।

मत्स्य विभाग के अनुसार यह प्रजाति अत्यंत मांसाहारी होती है और स्थानीय देशी मछलियों को खाकर जलाशयों की जैव विविधता नष्ट कर देती है। साथ ही यह दूषित पानी में भी जीवित रह सकती है और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी जाती है। इसी कारण इसके पालन को पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

कैसे हुई कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने तालाब से लगभग 27.5 टन प्रतिबंधित मछली जब्त की। मौके पर पंचनामा तैयार कर पूरी मछली को गड्ढे में दबाकर वैज्ञानिक पद्धति से नष्ट किया गया ताकि इसका पुनः उपयोग या बिक्री न हो सके।

विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिले में प्रतिबंधित प्रजातियों के पालन की सूचना पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। भविष्य में भी ऐसी अवैध गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

नागरिकों से भी अपील की गई है कि थाई मांगूर के पालन या बिक्री की जानकारी मिलने पर तुरंत मत्स्य विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें।

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