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अनदेखा, अनसुना, अनकहा: एंडोमेट्रियोसिस का वह दर्द जिसे ‘सामान्य’ कहकर टाल दिया जाता है

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नागपुर: पीढ़ियों से मासिक धर्म के असहनीय दर्द को ‘औरत होने की कीमत’ बताकर खारिज किया जाता रहा है। स्कूल में पेट पकड़कर बैठी लड़की से लेकर ऑफिस और घर की दोहरी जिम्मेदारी निभाती महिला तक, सबको यही सिखाया गया: सह लो। लेकिन यही चुप्पी कई बार एंडोमेट्रियोसिस जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है, जिसका निदान होने में बरसों लग जाते हैं।

शहर की एक युवती की आपबीती इस सच्चाई को बेनकाब करती है। 14 साल की उम्र, साल 2013, जब पहली बार तेज दर्द उठा तो परिवार ने ‘सामान्य है’ कहकर टाल दिया। अगले कुछ सालों में नागपुर के कई डॉक्टरों और स्त्री रोग विशेषज्ञों को दिखाया। स्कैन हुए, पीसीओएस का शक जताया गया, खान-पान बदलने को कहा गया। दर्द लौट आता था। युवती बताती है, “सबसे बुरा ये था कि किसी ने मेरा दर्द समझा ही नहीं। घरवालों को लगा मैं बढ़ा-चढ़ाकर बता रही हूँ। किशोर उम्र में ही मुझे पता था कि अंदर कुछ गलत है, पर कोई सुनने को तैयार नहीं था।”

2017 में महीनों की जिद के बाद पुणे की एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से निदान मिला: एंडोमेट्रियोसिस। डॉक्टर ने न सिर्फ काउंसलिंग की, बल्कि माँ और दादी को भी बीमारी समझाई। लेकिन पुणे में इलाज महंगा पड़ने लगा तो नागपुर के एक विशेषज्ञ को रेफर किया गया। यहाँ दी गई दवा से हॉट फ्लैश, बेचैनी, मतली और जोड़ों का दर्द शुरू हो गया। डॉक्टर से पूछा तो माता-पिता नाराज हुए कि “इतने डॉक्टर देख लिए, अब और क्या?”

कॉलेज के दौरान इंटर्नशिप करते हुए युवती ने नागपुर की ही एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ से दूसरी राय ली। “नए डॉक्टर ने दवा देखते ही पूछा कि मैं ये क्यों ले रही हूँ। तब पता चला कि उससे कृत्रिम मेनोपॉज जैसे लक्षण हो रहे थे। मुझे ठगा हुआ लगा।”

बाद में काम के सिलसिले में विदेश जाने पर उसे समग्र इलाज मिला। डाइट, काउंसलिंग और लंबी अवधि की देखभाल के साथ वह कहती है, “अब लगता है कि मेरा शरीर फिर से मेरा है।”

विशेषज्ञ क्या कहते हैं
केतकर मैटरनिटी हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. साधना पटवर्धन बताती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की परत जैसे ऊतक गर्भाशय के बाहर अंडाशय, आंत, मूत्राशय तक फैल जाते हैं। सटीक कारण पता नहीं, पर रेट्रोग्रेड मेंस्ट्रुएशन, आनुवंशिकी और हार्मोनल बदलाव वजह हो सकते हैं। लक्षण: तेज माहवारी दर्द, संभोग में दर्द, थकान, सूजन और गर्भधारण में दिक्कत।

लंदन की प्रजनन विशेषज्ञ और नागपुर की मूल निवासी डॉ. अश्लेषा पटवर्धन कहती हैं, “दुखद है कि एंडोमेट्रियोसिस को सिर्फ ‘माँ बन पाओगी या नहीं’ के चश्मे से देखा जाता है। पुराना दर्द, मानसिक तनाव और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर को नजरअंदाज किया जाता है। गर्भावस्था इसका इलाज नहीं है, भले ही कुछ समय लक्षण कम हों।”

डॉ. पटवर्धन जोर देती हैं कि कुछ हार्मोनल इलाज कृत्रिम मेनोपॉज लाते हैं जिसके साइड इफेक्ट गंभीर होते हैं। डॉक्टर का फर्ज है कि मरीज को हर विकल्प समझाए और फैसले में शामिल करे।

रास्ता क्या है

  1. दर्द को सामान्य न मानें: लगातार तेज दर्द अलार्म है।
  2. विशेषज्ञ चुनें: एंडोमेट्रियोसिस का अनुभव रखने वाले स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें।
  3. दूसरी राय जरूरी: अगर डॉक्टर आपकी बात नहीं सुन रहा, तो तुरंत दूसरा डॉक्टर देखें।
  4. प्रजनन से आगे सोचें: महिला का समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

डॉ. अश्लेषा कहती हैं, “मरीजों को सुना जाना, समझा जाना और सम्मान मिलना चाहिए। जल्दी निदान, सही जानकारी और खुली बातचीत से ही इस अदृश्य बोझ को हल्का किया जा सकता है।”

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न्यूएरा हॉस्पिटल्स का वर्धमान नगर में 300 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल शुरू

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  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।

2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।

अत्याधुनिक सुविधाएं
अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

प्रबंधन का बयान
प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है।
निदेशक डॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे।
निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।

अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।

न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

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वर्धमान नगर में न्यूएरा हॉस्पिटल के 300 बेड वाले अस्पताल का उद्घाटन 23 अक्टूबर को

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  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे उद्घाटन, भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और एआई आधारित जांच सुविधाएं उपलब्ध

नागपुर, 21 अक्टूबर 2026 :

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के वर्धमान नगर, नागपुर स्थित 300 बेड वाले मुख्य अस्पताल का उद्घाटन 23 अक्टूबर 2026 को माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों होगा। मध्य भारत में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

अस्पताल में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं और आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने अपनी योजनाओं की जानकारी दी। इसके तहत आधुनिक चिकित्सा तकनीक, बेहतर जांच सुविधाएं, रोबोट की मदद से की जाने वाली सर्जरी और विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह नया अस्पताल नागपुर और पूरे विदर्भ के लोगों को आधुनिक तकनीक की मदद से बेहतर और मरीजों की जरूरतों के अनुसार इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। इससे मरीजों को विशेष इलाज के लिए विदर्भ से बाहर जाने की जरूरत कम हो जाएगी।

भारत के पहले सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट के साथ रोबोटिक सर्जरी

वर्धमान नगर स्थित न्यूएरा हॉस्पिटल की एक प्रमुख विशेषता यहां उपलब्ध आधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं हैं। इसमें सिंगल-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी, दोनों सुविधाएं शामिल होंगी।

सिंगल-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी कम चीरा लगाकर ऑपरेशन करने की एक आधुनिक तकनीक है। इस पद्धति में कुछ विशेष प्रकार की सर्जरी के लिए शरीर में केवल एक जगह से उपकरण डालकर शल्यक्रिया की जा सकती है। न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने इस तकनीक को एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

इस तकनीक की मदद से कुछ विशेष सर्जरी में अधिक सटीकता से इलाज करने, शरीर के अंदरूनी हिस्सों को बेहतर तरीके से देखने और ऑपरेशन के दौरान उपकरणों पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इलाज के फायदे, ठीक होने में लगने वाला समय और यह तकनीक मरीज के लिए उपयुक्त है या नहीं, यह मरीज की स्थिति, सर्जरी के प्रकार और डॉक्टर की जांच पर निर्भर करेगा।

आधुनिक जांच सुविधाएं

वर्धमान नगर स्थित अस्पताल में बीमारियों की सटीक पहचान, इलाज के बारे में सही निर्णय और समय पर उपचार शुरू करने के लिए आधुनिक जांच तकनीक उपलब्ध होगी।

  • पूरी तरह डिजिटल और एआई तकनीक पर आधारित 3T एमआरआई
  • पूरी तरह डिजिटल और एआई तकनीक पर आधारित 256 स्लाइस सीटी स्कैन
  • होलॉजिक 3डी मैमोग्राफी

इन सभी आधुनिक जांच सुविधाओं से बीमारियों की जल्द पहचान, मरीज की स्थिति की विस्तार से जांच और सही इलाज की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

एआई आधारित क्रिटिकल केयर और ऑपरेशन थिएटर निगरानी

इस अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर और गहन चिकित्सा विभाग (आईसीयू) में एआई तकनीक की मदद से 24 घंटे मरीजों की निगरानी की सुविधा भी होगी। इससे मरीजों की स्थिति और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। ये तकनीकें डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों के अनुभव व फैसलों में सहायता करेंगी, न कि उनकी जगह लेंगी।

रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास

इस अस्पताल में रोबोटिक फिजियोथेरेपी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मरीजों को ठीक होने और दोबारा सामान्य जीवन शुरू करने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से उपचार मिल सकेगा। विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में मरीज की जरूरत के अनुसार तैयार उपचार योजना के साथ यह तकनीक कुछ मरीजों को ठीक होने में मदद कर सकती है।

डॉक्टरों ने क्या कहा

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और को-फाउंडर डॉ. आनंद संचेती ने कहा, “स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों के माध्यम से मरीजों की बीमारी की पहचान, इलाज और ठीक होने की प्रक्रिया में वास्तव में सुधार लाने वाली आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। वर्धमान नगर स्थित अस्पताल में हम आधुनिक रोबोटिक सर्जरी, बेहतर जांच सुविधाएं और तकनीक की मदद से मरीजों की निगरानी की व्यवस्था एक ही जगह पर उपलब्ध करा रहे हैं।”

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के डायरेक्टर और को-फाउंडर तथा न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा, “वर्धमान नगर स्थित अस्पताल में सिंगल-पोर्ट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू होना, इस क्षेत्र के मरीजों के लिए सर्जरी की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

डायरेक्टर और को-फाउंडर तथा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निधीश मिश्रा ने कहा, “आधुनिक 256-स्लाइस सीटी स्कैन तकनीक की मदद से कम समय में सीटी स्कैन किया जा सकता है। साथ ही, हृदय को खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं की एंजियोग्राफी की तस्वीरें लगभग 21 सेकंड में प्राप्त की जा सकती हैं। इससे कुछ मरीजों में बिना थिएटर में डाले हृदय की धमनियों में बीमारी की जांच करने में मदद मिल सकती है।”

न्यूएरा हॉस्पिटल्स के बारे में

न्यूएरा हॉस्पिटल्स एक मल्टी-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवा समूह है, जो मरीजों को आधुनिक तकनीक की मदद से उनकी जरूरतों के अनुसार और मेडिकल प्रमाणों पर आधारित इलाज उपलब्ध कराने पर ध्यान देता है। इस समूह के अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा केंद्र नागपुर के लकड़गंज, छत्रपति चौक, रामदासपेठ और वर्धमान नगर, नवी मुंबई के वाशी तथा तलेगांव में हैं।

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कैशलेस चिकित्सा SOP में बड़ी खामियां, AIACE ने कोल इंडिया अध्यक्ष को लिखा पत्र

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  • आपातकालीन इलाज में पूर्व अनुमति की शर्त जीवन के लिए खतरा, अस्पताल निर्देशिका और ओपीडी प्रारूप गायब, 18 अक्टूबर को बिलासपुर से भेजा गया विस्तृत सुझाव पत्र

बिलासपुर / कोलकाता, 20 अक्टूबर :

ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ कोल एग्जीक्यूटिव्स (एआईएसीई) ने कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा कैशलेस चिकित्सा उपचार के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार की मांग की है। संघ के प्रधान महासचिव पी. के. सिंह राठौर ने 18 अक्टूबर 2026 को कोल इंडिया के अध्यक्ष को पत्र क्रमांक एआईएसीई/सेंट्रल/2026/102 भेजकर एसओपी के मसौदे में रह गई खामियों को अंतिम रूप देने से पहले दूर करने का आग्रह किया है।

पहल की सराहना, लेकिन खामियों पर चिंता

पत्र में कोल इंडिया मुख्यालय के चिकित्सा विभाग द्वारा कार्यालय आदेश क्रमांक सीआईएल/सी-5बी/मेड/2026/347 दिनांक 15 अक्टूबर 2026 के माध्यम से कैशलेस चिकित्सा उपचार को सरल बनाने के लिए एसओपी लागू करने की पहल की सराहना की गई है। संघ ने कहा है कि यह केंद्रीकृत संरचना सहायक कंपनियों के स्तर पर लंबे समय से चले आ रहे प्रशासनिक अवरोधों को दूर करती है।

लेकिन मसौदे की परिचालन क्षमता के विश्लेषण में एआईएसीई ने संरचनात्मक कमियां, प्रक्रियागत चूक और टंकण संबंधी विसंगतियां पाई हैं, जिनके कारण यदि उन्हें अनसुलझा छोड़ दिया गया तो लाभार्थियों को गंभीर कष्ट होगा।

नौ प्रमुख खामियां चिह्नांकित

1. अनुलग्नक-ए गायब : दस्तावेज में अधिकृत अस्पतालों और उनके आधिकारिक ईमेल आईडी की सूची के लिए बार-बार अनुलग्नक-ए का उल्लेख है, लेकिन यह सूची फाइल में पूरी तरह से अनुपस्थित है। इसके बिना सहायक कंपनियां कानूनी रूप से संचार नहीं कर सकतीं।

2. अनुलग्नक-डी में ओपीडी प्रारूप नहीं : दस्तावेज में इन-पेशेंट विभाग (आईपीडी) रेफरल के लिए टेम्पलेट हैं (अनुलग्नक बी और सी) लेकिन आवर्ती कैशलेस ओपीडी क्लिनिक के लिए मानकीकृत आवेदन पत्र, रेफरल आदेश या ट्रैकिंग प्रारूप पूरी तरह से नहीं हैं।

3. आपातकालीन इलाज में खामी : धारा 5.1(4) कहती है कि कैशलेस देखभाल केवल सीआईएल मुख्यालय द्वारा ईमेल से अनुमोदन भेजे जाने के बाद ही शुरू होती है। दस्तावेज में जीवन-धमकी वाले मामलों के लिए कोई पूर्वव्यापी या आपातकालीन अनुमोदन खंड नहीं है, जहां प्रशासनिक ईमेल की प्रतीक्षा किए बिना रोगी को तुरंत भर्ती करने की आवश्यकता होती है।

4. लागत वृद्धि का कोई प्रोटोकॉल नहीं : धारा 5.2.2(2) और अनुलग्नक सी में स्वीकृत राशि की अनिवार्य सीमा की आवश्यकता है, लेकिन यदि आईपीडी रोगी को अप्रत्याशित चिकित्सा जटिलताओं का सामना करना पड़े तो अस्पताल को टॉप-अप या वृद्धि का अनुरोध करने के लिए कोई चरण-दर-चरण तंत्र, समय सीमा या आवश्यक कागजी कार्रवाई नहीं दी गई है।

5. बहिष्करण सूची अस्पष्ट : धारा 6 में कहा गया है कि गैर-चिकित्सीय वस्तुओं का भुगतान रोगी को स्वयं करना होगा। लेकिन इन वस्तुओं को परिभाषित नहीं किया गया है, जिससे दैनिक उपभोग्य सामग्रियों जैसे दस्ताने, ऊतक और प्रशासनिक शुल्कों के संबंध में डिस्चार्ज के समय बिलिंग विवाद पैदा होते हैं।

6. टर्नअराउंड समय की कोई सीमा नहीं : एसओपी में संचार चैनल तो निर्धारित हैं लेकिन सीआईएल मुख्यालय द्वारा अनुमोदन ईमेल जारी करने के लिए अधिकतम प्रसंस्करण विंडो (उदाहरण के लिए 24 या 48 घंटे) लागू नहीं की गई है, जिससे जरूरी नैदानिक देखभाल में देरी का खतरा है।

7. शिकायत और अपील का कोई ढांचा नहीं : यदि कोई पैनल अस्पताल कैशलेस प्रवेश से मना करता है या समझौता ज्ञापन की शर्तों के विरुद्ध अग्रिम जमा की मांग करता है तो लाभार्थियों के लिए तत्काल शिकायत दर्ज करने के लिए कोई समर्पित चैनल या संरचनात्मक पदानुक्रम परिभाषित नहीं है।

8. दीर्घकालिक ओपीडी सुविधा का अभाव : कैंसर और क्रोनिक किडनी रोग जैसे गंभीर रोगों के लिए दीर्घकालिक कैशलेस ओपीडी सुविधाओं के लिए कोई समर्पित ढांचा नहीं है। सीपीआरएमएस योजना के तहत कमजोर वरिष्ठ नागरिक प्रत्येक कीमोथेरेपी, पीईटी/सीटी, एमआरआई या डायलिसिस सत्र के लिए नया भौतिक या डिजिटल रेफरल प्राप्त नहीं कर सकते। इस पर विचार करना आवश्यक है।

9. आपातकालीन भर्ती के लिए कोई पूर्वव्यापी मार्ग नहीं : मसौदा सख्त अग्रिम इलेक्ट्रॉनिक प्राधिकरण लागू करता है लेकिन आपातकालीन जीवन-धमकी वाली भर्तियों को किसी पूर्वव्यापी अनुमोदन के बिना छोड़ देता है।

सुधार के बाद ही एसओपी को अंतिम रूप देने की मांग

एआईएसीई ने आग्रह किया है कि चिकित्सा विभाग को ढांचे को अंतिम रूप देने से पहले इन सुधारों को अपनाने के निर्देश दिए जाएं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सीआईएल के कार्यरत और सेवानिवृत्त परिवार के सदस्यों का कल्याण ग्रेट प्लेस टू वर्क महारत्न उद्यम के मानक के अनुरूप हो।

संघ ने चिकित्सा समन्वय और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपने मनोनीत सलाहकारों के माध्यम से सीआईएल प्रबंधन को सहयोग देने की इच्छा व्यक्त की है। साथ ही अनुरोध किया है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए योजनाओं के निर्माण और एसओपी के सफल क्रियान्वयन के दौरान एआईएसीई के प्रतिनिधियों को आधिकारिक रूप से शामिल किया जाए।

पत्र की प्रतियां भारत सरकार के कोयला सचिव, कोयला और खान मंत्री, नई दिल्ली तथा एससीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई हैं, जिसमें सीआईएल की तर्ज पर ठोस एसओपी तैयार करने का अनुरोध किया गया है।

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