रोशन रियल एस्टेट प्रस्तुत करता है आवासीय, वाणिज्यिक और रिसॉर्ट भूमि का सबसे बड़ा संग्रह”
नागपुर शहर अब केवल संतरे और विदर्भ की राजधानी ही नहीं रहा, बल्कि यह मध्य भारत का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ निवेश और व्यापारिक केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में यदि आप सुरक्षित, लाभदायक और भविष्योन्मुखी संपत्ति की तलाश में हैं, तो रोशन रियल एस्टेट आपके लिए सबसे विश्वसनीय नाम है।
सन 1989 से स्थापित इस कंपनी को प्रॉपर्टी के क्षेत्र में 40 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। सिविल लाइन्स, नागपुर में स्थित यह कंपनी आज पूरे भारत में कॉरपोरेट रियल एस्टेट परामर्श सेवाएं प्रदान कर रही है।
1. आवासीय समितियों के लिए पुनर्विकास के द्वार खुले शहर के पुराने क्षेत्रों में स्थित अनेक आवासीय और व्यावसायिक समितियां अब जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। ऐसी कम से कम 10,000 वर्ग फुट क्षेत्र वाली समितियों को रोशन रियल एस्टेट पुनर्विकास का प्रस्ताव दे रहा है।
इसके अंतर्गत तीन प्रमुख विकल्प उपलब्ध हैं:
संयुक्त विकास: भूमि मालिक और डेवलपर मिलकर परियोजना बनाएंगे और राजस्व साझा करेंगे
संपूर्ण संपत्ति की प्रत्यक्ष खरीद: एकमुश्त भुगतान के आधार पर
सभी वर्तमान इकाइयों की खरीद
इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी कानूनी, वास्तु, परियोजना सलाह और दलाली संबंधी संपूर्ण सहायता देगी, जिससे समिति के सदस्यों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
2. शहर के प्रमुख स्थानों पर वाणिज्यिक एवं आवासीय भूखंड नागपुर के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित मार्गों पर कंपनी ने चुनिंदा भूखंड एकत्र किए हैं। ये भूखंड निवेश, दुकान, कार्यालय या आवासीय निर्माण के लिए उपयुक्त हैं।
वार्धा मुख्य मार्ग, साई मंदिर के समीप: 3,000 वर्ग फुट का भूखंड। यहां वाणिज्यिक या मिश्रित उपयोग की इमारत बनाई जा सकती है
सिविल लाइन्स: लगभग 40,000 वर्ग फुट का विशाल वाणिज्यिक भूखंड
काम्पटी मुख्य मार्ग, डी-मार्ट के समीप: लगभग 40,000 वर्ग फुट
हनुमान नगर, उत्तर दिशा: लगभग 7,000 वर्ग फुट का भूखंड
डब्ल्यूएचसी रोड: लगभग 7,500 वर्ग फुट
3. प्रकृति की गोद में रिसॉर्ट भूमि के अवसर यदि आप पर्यटन और आतिथ्य के क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं तो यह अवसर आपके लिए है। कंपनी के पास सभी आवश्यक अनुमतियों वाली भूमि उपलब्ध है।
सिलारी गेट, पेंच राष्ट्रीय उद्यान: 10 एकड़ भूमि। प्रवेश द्वार से केवल 700 मीटर की दूरी। यहां नेचर रिसॉर्ट या इको-टूरिज्म परियोजना बनाई जा सकती है
कान्हा: 28 एकड़ भूमि। इस क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत वृक्ष हैं। यह स्थान वन्यजीव रिसॉर्ट और उच्च स्तरीय आतिथ्य परियोजना के लिए आदर्श है
4. विकास भागीदारों के लिए आमंत्रण वर्धा मार्ग पर होटल ले मेरिडियन के पास 4 से 6 एकड़ की प्राइम येलो बेल्ट भूमि उपलब्ध है। कंपनी ऐसे निवेशकों और विकासकर्ताओं को आमंत्रित कर रही है जो यहां अस्पताल, होटल या बड़ी वाणिज्यिक परियोजना बनाना चाहते हैं।
कार्य की शर्तें आपसी सहमति से राजस्व साझेदारी या किराया साझेदारी के आधार पर तय की जाएंगी। संपत्ति की प्रत्यक्ष बिक्री पर अभी विचार नहीं किया जा रहा है।
5. प्रत्यक्ष खरीद के लिए भूमि की खोज कंपनी वर्धा मुख्य मार्ग पर रानी कोठी तक 5 से 20 एकड़ तक भूमि खरीदना चाहती है। भूमि के लिए आवश्यक शर्तें हैं: स्पष्ट स्वामित्व, सीधी सड़क से जुड़ाव और विकास की पूर्ण संभावना।
6. विशिष्ट आवासीय संपत्तियां सुख-सुविधा और प्रतिष्ठा, दोनों चाहने वालों के लिए दो विशेष विकल्प:
रामदासपेठ: नागपुर के सबसे मांग वाले आवासीय क्षेत्र में 2,000 वर्ग फुट के भूखंड पर 3,000 वर्ग फुट में निर्मित पश्चिममुखी स्वतंत्र बंगला
ग्रीन पार्क सोसाइटी, सिविल लाइन्स: 1,100 वर्ग फुट का पूर्णतः सुसज्जित 3 बीएचके फ्लैट। यह तुरंत रहने योग्य है और इसे बिक्री या किराए दोनों पर लिया जा सकता है
7. आय प्रदान करने वाली वाणिज्यिक संपत्ति नागपुर के वाणिज्यिक और लॉजिस्टिक्स हब वाडी में 8,000 वर्ग फुट की सड़क से लगी हुई संपत्ति उपलब्ध है। इस भवन में 3 शोरूम और पहली मंजिल का निर्माण है। इससे प्रतिमाह लगभग 5.5 से 6 लाख रुपये तक की आय होने की संभावना है।
8. अन्य प्रमुख अवसर
कान्हन नदी तट: तार रोड और कान्हन नदी के पास 30 एकड़ का रिवरफ्रंट भूखंड। यह गेटेड समुदाय के समीप है और संयुक्त उपक्रम के लिए उपयुक्त है
प्रमुख शोरूम: नागपुर में 50 फुट के अग्रभाग वाली अत्यंत दृश्यमान जगह पर प्रीमियम शोरूम बिक्री हेतु उपलब्ध
अंतर्राष्ट्रीय खनन संपत्ति: भारत के बाहर तांबा और फॉस्फेट जैसी रणनीतिक वस्तुओं में निवेश का अवसर। यह उच्च संभावनाओं वाले वैश्विक खन उद्यमों में भागीदारी का मार्ग खोलता है
निष्कर्ष रोशन रियल एस्टेट केवल संपत्ति नहीं बेचता, बल्कि भविष्य बनाता है। 40 वर्षों की साख, पारदर्शिता और ग्राहक सेवा ही इस संस्था की पहचान है।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट ने किया कड़ा विरोध, कहा – हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए
नई दिल्ली :
स्वदेशी व्यापारी मंच और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भारत में अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक (स्पेसएक्स) द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान करने की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। दोनों संगठनों ने स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा है कि यह प्रवेश देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक और कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि स्टारलिंक के आने से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न होगा।
वैश्विक नेटवर्क और निगरानी में चुनौती
भरतिया ने बताया कि स्टारलिंक का नेटवर्क हजारों सैटेलाइट का वैश्विक जाल है, जो लेजर लिंक से जुड़े हैं। भारतीय यूजर का डेटा विदेशी ग्राउंड स्टेशनों से होकर जा सकता है और भारत के बाहर डिक्रिप्ट हो सकता है। ऐसी स्थिति में कानून सम्मत निगरानी, बॉर्डर क्षेत्रों में सुरक्षा (जमीन से 50 किमी और समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक) और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। 26/11 जैसे हमलों के बाद जब सैटेलाइट फोन का दुरुपयोग हुआ था, भारत ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं कर सकता।
डेटा संप्रभुता पर भी खतरा
भरतिया ने आगे कहा कि स्टारलिंक के कारण देश की डेटा संप्रभुता का भी खतरा है। इंटरनेट सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय डेटा है। अगर स्टारलिंक को अनुमति मिली तो हमारे किसानों, जवानों, व्यापारियों और नागरिकों का संवेदनशील डेटा एक विदेशी निजी कंपनी के नियंत्रण वाले सर्वर पर जाएगा। यह डेटा लोकलाइजेशन और आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत के खिलाफ है।
हमारे पास स्वदेशी तकनीक है
स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट का मानना है कि भारत के पास अपनी क्षमता है। इसरो, एनएसआईएल, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती एयरटेल समर्थित वनवेब जैसी भारतीय कंपनियां सैटेलाइट संचार सेवा देने के लिए तैयार हैं। जब हमारे पास स्वदेशी तकनीक मौजूद है, तो अपनी रणनीतिक डिजिटल बुनियाद एक अमेरिकी कंपनी को क्यों सौंपें? भरतिया ने प्रश्न किया।
सरकार के समक्ष तीन सुझाव
विषय को आगे ले जाते हुए बालकृष्ण भरतिया ने भारत सरकार के समक्ष अपने सुझाव दिए –
क) स्टारलिंक को अंतिम व्यावसायिक और स्पेक्ट्रम आवंटन की अनुमति न दी जाए। ख) मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के तहत भारतीय सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता और बढ़ावा दिया जाए। ग) किसी भी सैटेलाइट ऑपरेटर के लिए 100% ग्राउंड उपकरण भारत में बनाना और सारा डेटा भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य किया जाए।
भरतिया ने अंत में सभी देशभक्त नागरिकों, उद्योग संगठनों और मीडिया से स्वदेशी तकनीक का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा – भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए।
ROC फाइलिंग की समय-सीमा को आयकर ऑडिट के अनुरूप करने की मांग, छोटी कंपनियों को ऑडिट से छूट का विरोध
नागपुर :
आईसीएआई की कॉर्पोरेट लॉज कमेटी द्वारा आयोजित तथा आईसीए नागपुर शाखा (डब्ल्यूआईआरसी) के आतिथ्य में आयोजित पूर्ण-दिवसीय कॉर्पोरेट लॉज सेमिनार के दौरान नागपुर के कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) दीपक परसोया और आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य एवं कॉर्पोरेट लॉज कमेटी के अध्यक्ष सीए पीयूष छाजेड़ के बीच कॉर्पोरेट अनुपालन, नियामक सुधारों तथा चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
आरओसी फाइलिंग की समय-सीमा को आयकर ऑडिट के अनुरूप करने की आवश्यकता
चर्चा के दौरान कंपनी अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक फाइलिंग की समय-सीमाओं को आयकर ऑडिट की समय-सीमाओं के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह कहा गया कि दोनों अनुपालन व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से कंपनियों एवं पेशेवरों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां कम होंगी, कार्यों की पुनरावृत्ति से बचा जा सकेगा तथा व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्तावित कंपनी संशोधन विधेयक पर आईसीएआई की चिंताएं
सीए पीयूष छाजेड़ ने उपस्थित सदस्यों को बताया कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे गए प्रस्तावित कंपनी संशोधन विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा पेशेवर कदाचार के लिए आपराधिक दायित्व तथा अवैतनिक जुर्माने की वसूली भू-राजस्व के बकाया के रूप में किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि आईसीएआई एक महत्वपूर्ण हितधारक होने के नाते संयुक्त संसदीय समिति द्वारा आमंत्रित किया गया था, ताकि वह प्रस्तावित संशोधनों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत कर सके।
आईसीएआई ने प्रस्तावित वसूली व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश व्यवसाय करने में सुगमता बढ़ाने और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसे कठोर प्रावधानों पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। संस्थान ने आयकर एवं जीएसटी सहित विभिन्न कानूनों के अंतर्गत जुर्माने की वसूली की व्यवस्था में एकरूपता तथा आनुपातिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
छोटी कंपनियों को वैधानिक ऑडिट से छूट देने के प्रस्ताव पर चिंता
चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण विषय निर्धारित टर्नओवर सीमा से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को अनिवार्य वैधानिक ऑडिट से छूट देने का प्रस्ताव था।
सीए छाजेड़ ने बताया कि आईसीएआई ने संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत की थीं, विशेष रूप से कंपनियों की सीमित देयता संरचना को ध्यान में रखते हुए। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाली कंपनियां कुल कंपनियों का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा हैं। ऐसी संस्थाओं को वैधानिक ऑडिट से छूट देने से कॉर्पोरेट संरचना के दुरुपयोग तथा मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों की संभावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आईसीएआई ने इस बात पर जोर दिया कि वैधानिक ऑडिट वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही तथा हितधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वतंत्र निदेशकों के लिए आईसीएआई द्वारा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
सीए छाजेड़ ने यह भी घोषणा की कि आईसीएआई अपने सदस्यों को कंपनी के बोर्ड में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से स्वतंत्र निदेशकों के लिए एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है।
यह पाठ्यक्रम स्वतंत्र निदेशक की भूमिका, जिम्मेदारियों, वैधानिक दायित्वों तथा इस पद से जुड़े संभावित जोखिमों पर केंद्रित होगा। इस पहल से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए नए पेशेवर अवसर सृजित होने के साथ-साथ कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस चर्चा ने इस बात को रेखांकित किया कि कॉर्पोरेट कानूनों को व्यावहारिक, पारदर्शी तथा व्यावसायिक विकास के अनुकूल बनाए रखने के लिए नियामकों, पेशेवर संस्थानों एवं नीति-निर्माताओं के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है, ताकि जवाबदेही से समझौता किए बिना व्यवसाय के विकास को प्रोत्साहन दिया जा सके।
इस कार्यक्रम में आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य एवं कॉर्पोरेट लॉज कमेटी के अध्यक्ष सीए पीयूष छाजेड़, नागपुर के कंपनी रजिस्ट्रार दीपक परसोया, आईसीएआई नागपुर शाखा (डब्ल्यूआईआरसी) की अध्यक्ष सीए स्वरूपा एस. वजलवार, सचिव सीए तृप्ति भट्टड़, निवर्तमान अध्यक्ष सीए दिनेश राठी, प्रबंध समिति के सदस्य सीए आशीष अग्रवाल एवं सीए प्रणवकुमार लिमजे, सीए ओ. एस. बागड़िया तथा पूर्व अध्यक्ष सीए संजय एम. अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
तकनीकी सत्रों में प्रख्यात वक्ताओं सीए रंगनाटकी रंगाचारी (रमा), सीए टिमल पी. मारू तथा सीए पराग वेद ने कॉर्पोरेट कानूनों के अंतर्गत लेखांकन एवं ऑडिटिंग के उभरते मुद्दों, धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग, ऑडिट निष्कर्षों के निर्माण तथा शेयरों के मूल्यांकन पर अपने विचार एवं विशेषज्ञता साझा की।
इन सत्रों की अध्यक्षता सीए नितिन अल्शी तथा सीए संदीप धोडपकर ने की। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रमुख सदस्यों में सीए श्वेता गनेरीवाला, सीए राजीव दुग्गल, सीएस अमित राजकोटिया, सीए अनूप जायसवाल, सीए मनीष मंधाना तथा पेशे से जुड़े अनेक अन्य सदस्य शामिल थे।
कार्यक्रम का समन्वय आईसीएआई नागपुर शाखा (डब्ल्यूआईआरसी) के उपाध्यक्ष सीए दीपक जेठवानी ने किया।