नागपुर : श्री अग्रसेन मंडल, नागपुर की महाराजा श्री अग्रसेन जन्मोत्सव स्वागत समिति की ओर से अग्रसेन चौक स्थित महाराजा श्री अग्रसेन जी की नवीन प्रतिमा का भव्य अनावरण श्री अग्रसेन मंडल अध्यक्ष शिव किशन अग्रवाल, सचिव रामानंद अग्रवाल, डी सी पी (क्राइम) दीपक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष अनंतकुमार अग्रवाल व अन्य के हाथों हुआ। साथ ही गाँधीबाग भवन में ध्वजारोहण किया गया। इस के साथ महाराजा श्री अग्रसेन जन्मोत्सव का आगाज धूमधाम से ढोल- नगाड़े बजाकर किया गया। उनके जयघोष से परिसर गुंजायमान हो उठा। प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प वर्षा की गई। फूलों की आतिशबाजी की गई।सर्वप्रथम भवन में महाराजा श्री अग्रसेन व माता माधवी के चित्र पर माल्यार्पण हुआ। महिलाओं ने प्रतिमा के समक्ष आरती की। तोरण पताकाओं से श्री अग्रसेन चौक को सजाया गया।इस अवसर पर मुख्य रूप से महोत्सव के स्वागताध्यक्ष पवन अग्रवाल, स्वागत मंत्री आशीष अग्रवाल, महिला संयोजिका सुनीता डालमिया तथा युवा संयोजक विकास लोहिया, कार्यक्रम संयोजक अर्पित अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, उपाध्यक्ष द्वय अनिल अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, सहमंत्री संजय पचेरीवाला, उपमंत्री अभय अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, कैलाश जोगानी, एड. गुलाब पचेरीवाला, संदीप किसान अग्रवाल, पवन भालोटिया, शरद जाजोदिया, अशोक कानहोरिया, वेणुगोपाल अग्रवाल, अजय अग्रवाल, कैलाश लिलाड़िया, सुनील चौधरी, सीए विजय अग्रवाल, संजय अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, हजारीलाल अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, गिरधारीलाल अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, मनीष मेहाड़िया, निर्माण मेहाड़िया, ब्रिदेश अग्रवाल, एड. भारतभूषण मेहाड़िया, सीमा अग्रवाल, अंजू अग्रवाल, कविता अग्रवाल, शकुंतला अग्रवालसहित समाज बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।बॉक्स11 सिलाई मशीन का हुआ वितरणश्री अग्रसेन महिला मंडल ‘सुरभि’ की ओर से निराधार व जरूरतमंद 11 महिलाओं को सिलाई मशीन का वितरण किया गया। इसकी संयोजिका कमला गोयल, यमुना अग्रवाल, रीना गर्ग, पूनम अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल थीं।बॉक्स’कृष्णा-द मैनेजमेंट गुरु’ ने दिया जीवन प्रबंधन का संदेशसंस्कृतिक कार्यक्रम ‘कृष्णा-द मैनेजमेंट गुरु’ का सुंदर आयोजन कविवर्य सुरेश भट्ट सभागृह, रेशमबाग में किया गया। इस नाटिका मेंसंदेश दिया गया कि राम अर्थात धीर गंभीरता का प्रतीक और कृष्ण को हम जानते हैं नटखट माखन चोर ,रास रचैया के रूप में। किंतु हम भूल जाते हैं कि कृष्ण ने संपूर्ण मानवता को राजनीति व कूटनीति के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाई। आज भी भगवान कृष्ण के जैसा मैनेजमेंट गुरु इस धरती पर अवतरित नहीं हुआ है। जिन्होंने बिना अस्त्र उठाए महाभारत के युद्ध में पांडवों को विजय दिला दी। जब भी जीवन में भ्रम या संशय हो कृष्ण को याद करें, आपको अपने हर प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा। क्योंकि, हजारों वर्षों के पश्चात आज भी कृष्ण की शिक्षा व संदेश प्रासंगिक है।श्री कृष्ण की शरण में जाने वाला अपने हर कष्ट, दुःख, संशय पर विजय पा जाता है। इसके प्रायोजक शिव किशन अग्रवाल, इसका उद्घाटक ओमप्रकाश अग्रवाल, अरुण अग्रवाल(मुग़लसराय वाले), मुख्य अतिथि अनिता अग्रवाल, कविता अग्रवाल(सनविजय) थे। सफलतार्थ लेखिका व निर्देशिका मीना सुरेका, संयोजिका उषा अग्रवाल, संध्या अग्रवाल,अनुसूया अग्रवाल, प्रीति अग्रवाल सहित अन्य ने अथक प्रयास किया।बॉक्स9 अक्टूबर को श्री अग्रसेन भवन, गांधीबाग में फूलों एवं ताजे पत्तों से श्रीकृष्ण जी की पोशाक सजाने, डिस्पोजेबल चीजों से क्रिएटिविटी, फ्रूट से केक बनाना, शुभ लाभ के कटआउट सजाना, एआई — मानव के लिए वरदान या अभिशाप?, मिरर आर्ट का उपयोग करके सेंटरपीस बनाने, थाली नहीं कहानी सजाने तथा जेन-झेड की सकारात्मक एवं नकारात्मक सोच पर आपका दृष्टिकोण जैसे कार्यक्रम होंगे. ट्रेजर हंट तथा श्री अग्रसेन क्रिकेट लीग का आयोजन होगा.शाम 7.30 बजे देशपांडे सभागृह में विराट हास्य कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसमें उत्तर प्रदेश के अखिलेश द्विवेदी एवं अंकिता शुक्ला, मुंबई के जूनियर जॉनी लीवर, इंदौर के मिथुन मिथलेश, राजस्थान की सुमित्रा सरल तथा मध्यप्रदेश के सुनील समैया हास्य रचनाएं प्रस्तुत करेंगे.कार्यक्रम के उद्घाटक निलेश आरसी. अग्रवाल तथा मुख्य अतिथि डॉ. निलेश अग्रवाल एवं कमल किशोर अग्रवाल हैं.
BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला
नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।
इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।
फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –
01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।
02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।
03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।
04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।
रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।
अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।
मौदा तहसील में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न, अरोली में 70.54%, खात में 76.70% वोटिंग
कोदामंडी – 26 October
विधान परिषद के पदवीधर मतदारसंघ के लिए हुए चुनाव की मतगणना कल मंगलवार 27 अक्टूबर को होंगी।
इससे पहले 23 अक्टूबर को हुए मतदान में मौदा तहसील में शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से वोटिंग हुई। अरोली स्थित बूथ क्रमांक 43 पर 370 में से 261 मतदाताओं ने मतदान किया। अरोली में 70.54%, खात में 76.70%, मौदा के दो मतदान केंद्रों पर क्रमशः 78.98% और 72.37% मतदान दर्ज किया गया। मौदा तहसील में कुल 1910 पदवीधर मतदाता हैं।
तहसील में पदवीधर मतदाताओं के बढ़-चढ़कर मतदान करने से उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह चरम पर है।
अरोली में महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहळे के समर्थन में लगाए गए बूथ पर महायुति के कई नेताओं ने भेंट दी। इनमें राज्यमंत्री आशीष जयसवाल, पूर्व विधायक टेकचंद सावरकर, भाजपा तहसील मौदा मंडल अध्यक्ष भगवान बावनकुळे, चाचेर मंडल अध्यक्ष रवी चव्हाण, शिवसेना तालुकाध्यक्ष प्रशांत भुरे, मौदा नगरपंचायत नगराध्यक्ष प्रसन्ना (राजा) तिडके,भाजयुमो जिल्हा उपाध्यक्ष संजू वाघमारे, पंचायत समिति के पूर्व उपसभापति खेमराज चाफले,पंढरी कडू, अरोली सर्कल के भाजपा नेता सदानंद निमकर, विष्णू देशमुख, रोशन उमप, कैलास समरीत, कोदामेंढी उपसरपंच गोपाल गिरमेकर सहित महायुति के अनेक पदाधिकारियों का समावेश था।
डॉ. भांडे समिति की सिफारिश के बावजूद आरक्षण से वंचित होने का आरोप, 27 अक्टूबर से उपोषण और श्रृंखला उपोषण शुरू करने की घोषणा, विशेष जीआर निकालने की मांग
नागपुर, 26 अक्टूबर :
महाराष्ट्र के धोबी (परीट) समाज को आरक्षण संबंधी सुविधाएं देने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से नागपुर के संविधान चौक में उपोषण और साखळी उपोषण शुरू करने का ऐलान किया गया है। समाज की प्रमुख मांग है कि जब तक अनुसूचित जाति की सूची में समावेश नहीं होता, तब तक राज्य सरकार विशेष बाब के तौर पर SC को मिलने वाली सभी आरक्षण सुविधाएं धोबी समाज को भी दे।
मांग : राज्य शासन द्वारा गठित डॉ. भांडे समिति की सिफारिश क्रमांक 3 के अनुसार महाराष्ट्र में धोबी, परीट जाति का अनुसूचित जाति में समावेश नहीं होता, तब तक अनु. जाति को मिलने वाली सभी आरक्षण की सुविधाएं खास बाब के तौर पर राज्य शासन तुरंत जीआर निकालकर दे।
आंदोलनकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र शासन ने 5 सितंबर 2001 को पूर्व मंत्री डॉ. डी.एम. भांडे की अध्यक्षता में अभ्यास समिति बनाई थी। समिति ने धोबी समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कर धोबी के साथ ही परीट, वरठी, रजक, वढ्ढी, मडवळ, मडलेवार और धोबा जैसी तत्सम जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की थी। साथ ही समावेश होने तक विशेष तरतूद के तहत समान सुविधा देने की भी सिफारिश की थी।
समाज का दावा है कि महाराष्ट्र राज्य निर्माण से पहले भंडारा और बुलढाणा जिलों में धोबी समाज को SC की सुविधाएं मिलती थीं, जो 1 मई 1960 को राज्य बनने के बाद बंद कर दी गईं। समाज की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय में कोई मूलभूत बदलाव नहीं होने के बावजूद सुविधाएं बंद हुईं। 1976 में SC-ST के लिए क्षेत्रीय बंधन हटने के बाद भी धोबी समाज का मुद्दा लंबित रहा।
समाज ने मांग की है कि मराठा और धनगर समाज के लिए लागू समकक्ष सुविधाओं की तर्ज पर धोबी-परीट समाज के लिए भी स्वतंत्र शासन निर्णय (जीआर) निकाला जाए।
ऐतिहासिक दस्तावेजों और भांडे समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन तुरंत निर्णय ले, ताकि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान अवसर मिल सके।
नेतृत्व : समिति प्रमुख आशिषभाऊ कदम, समिति अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्के, कार्याध्यक्ष राजेंद्र खैरनार, सुधीर खैरनार, मुरलीधर शिंदे, संतोष सवतीरकर, राहुल वरणकर।