नागपुर में जिला स्तरीय पानी किल्लत समिति की बैठक में निर्देश – जलसंधारण, कुओं का पुनर्भरण, नालों का गहरीकरण, वनराई बंधारे और चारा उपलब्धता पर फोकस, पुरानी कुओं को रिचार्ज करने का प्लान, VBG रामजी योजना से रोजगार, कामठी मॉडल पर सभी नगर परिषदों में काम
नागपुर, 31 अक्टूबर – जिले में संभावित पानी टंचाई से निपटने के लिए सभी यंत्रणाओं ने अभी से नियोजनबद्ध और प्राथमिकता के आधार पर काम हाथ में लेना चाहिए। पानी सप्लाई योजनाओं के साथ जलसंधारण के लंबित काम आगामी बारिश से पहले पूरे किए जाएं। कामों में जो खामियां हैं उनकी तुरंत जांच कर उन्हें पूरा किया जाए। जल स्रोतों में उपलब्ध पानी के भंडार का सही नियोजन कर जरूरी उपाय तुरंत लागू किए जाएं, ऐसे निर्देश राज्य के राजस्व मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए।
जिला नियोजन भवन में आयोजित जिला स्तरीय पानी टंचाई समिति की बैठक में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर वित्त राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल, सांसद मायाताई इवनाते, विधायक समीर मेघे, आशीष देशमुख, संजय मेश्राम, चरणसिंह ठाकुर, जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनायक महामुनी तथा विभिन्न विभागों के प्रमुख उपस्थित थे।
सिर्फ पीने का पानी नहीं, पशुओं के पानी और चारे का भी नियोजन जरूरी –
पालकमंत्री ने कहा कि संभावित पानी टंचाई की पृष्ठभूमि में सिर्फ पीने के पानी का ही नहीं, बल्कि पशुधन के लिए जरूरी पानी और चारे का भी नियोजन करना जरूरी है। पशुसंवर्धन के लिए निधि उपलब्ध करा दी गई है, फरवरी-मार्च तक जिले में पर्याप्त चारा उपलब्ध होगा, इस दृष्टि से अभी से काम शुरू किया जाए। जलसंवर्धन, लघु सिंचाई, नालों का गहरीकरण, जलयुक्त शिवार, गालमुक्त धरण-गालयुक्त शिवार और वनराई बंधारों के कामों को प्राथमिकता दी जाए।
जलसंपदा विभाग के कामों के लिए खनिज निधि उपलब्ध कराई जाएगी। विधायकों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर विधानसभा क्षेत्रवार कामों के आराखड़े तैयार किए जाएं। इन कामों के साथ ही ग्रामीण इलाके के नागरिकों को VBG रामजी योजना के तहत रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। प्रस्तावित कामों की विस्तृत नोंद कर उसे आगामी मंत्रिमंडल बैठक में पेश किया जाएगा। उसके बाद जरूरी निधि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही CSR निधि और उद्योग समूहों के सहयोग से भी जलसंधारण के काम पूरे किए जाएंगे, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
जंगल परिसर के पानी का सही नियोजन कर वनराई बंधारे बनाए जाएं। इसके लिए जरूरी निधि और नियोजन को लेकर संबंधितों के साथ बैठक ली जाए। जिले की पुरानी कुओं का पुनर्भरण किया जाए। कामठी में चलाए गए उपक्रम की तर्ज पर जिले की सभी नगर परिषदों के मुख्य अधिकारियों ने भी इस तरह के काम हाथ में लेने चाहिए। गांवों में पानी टंचाई दूर करने के लिए छोटी नल जलापूर्ति योजनाएं तैयार की जाएं, ऐसे निर्देश उन्होंने दिए।
जिले के कुओं का गहरीकरण तथा बंद कुओं का पुनर्भरण कर जल भंडार बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए विधानसभा क्षेत्रवार जलसंधारण आराखड़े तैयार किए जाएं। उपविभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर इन कामों का नियोजन किया जाए।
जलसंधारण के कामों पर विशेष जोर –
पानी टंचाई पर स्थायी रूप से मात करने के लिए नालों का गहरीकरण व चौड़ीकरण, तालाबों का गहरीकरण और गांव-वार जलतारा योजना लागू करने पर विशेष जोर दिया जाए। जिले के लिए रिचार्ज शाफ्ट मंजूर किए गए हैं, वे गांव-वार बनाए जाने को लेकर जिला भूमि सर्वेक्षण यंत्रणा ने प्रस्ताव पेश करना चाहिए। इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी, ऐसे निर्देश पालकमंत्री ने दिए।
चारा टंचाई पर मात के लिए अभी से नियोजन –
संभावित सूखे की स्थिति में पशुधन के लिए चारा टंचाई पैदा न हो, इसके लिए पशुसंवर्धन विभाग ने चारा बुआई के लिए सही जमीन का चयन करना चाहिए। जिले में उपलब्ध जमीनों की जांच कर कृषि विभाग के सहयोग से चारा बुआई का नियोजन किया जाए, ऐसा बावनकुले ने कहा।
इस अवसर पर वित्त राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल ने संभावित पानी टंचाई की पृष्ठभूमि में जिले के सभी बोरवेल धारकों और टैंकर उपलब्ध कराने वाले यंत्र मालिकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। सरकारी जमीन पर बचत समूहों को चारा बुआई के लिए अनुमति दी जाए। पानी की बचत के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग के काम किए जाएं तथा नालों के गहरीकरण को प्राथमिकता दी जाए, ऐसा भी उन्होंने कहा। इस अवसर पर स्थानीय विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रवार कामों की जानकारी दी।
बैठक में पानलोट, सिंचाई, जलसंधारण, कृषि, वनराई बंधारे, लघु सिंचाई, पोखरा योजना, जल जीवन मिशन, पशुसंवर्धन और विद्युत विभाग के कामों की विस्तृत समीक्षा की गई।
पशुसंवर्धन विभाग के ‘चारा साक्षरता व संवर्धन’ अभियान के तहत 200 गांवों में जनजागरूकता करने वाले चारा रथ को पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के हाथों हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया गया।
900 करोड़ से बैराज और 400 करोड़ से पेंच के 35 एमएलडी पानी के उपयोग से नागपुर को स्थायी रूप से पानी टंचाई से मुक्ति मिलेगी, व्यावसायिक पानी उपयोग पर रोक लगाओ – पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देश, मनपा-एनएमआरडीए-जलसंपदा विभाग को प्रस्ताव भेजने को कहा
नागपुर, 31 अक्टूबर – नागपुर शहर और सटे हुए शहरों की जलापूर्ति की समस्या का समाधान करने के लिए कन्हान-कोलार बैराज बनाने के लिए 900 करोड़ रुपये तथा पेंच में अतिरिक्त बचे 35 मिलियन लीटर के उपयोग के लिए एनएमआरडीए की ओर से 400 करोड़ रुपये की योजनाओं को लागू किया जाए तो पानी की कमी से नागपुर की स्थायी रूप से मुक्ति हो सकेगी। इन दोनों योजनाओं के प्रस्ताव नागपुर महानगरपालिका, एनएमआरडीए और जलसंपदा विभाग ने तैयार कर राज्य सरकार को तुरंत भेजने चाहिए, ऐसे निर्देश राज्य के राजस्व मंत्री और नागपुर जिले के पालकमंत्री श्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आज दिए।
नागपुर शहर की पानी टंचाई के उपायों की समीक्षा के लिए पालकमंत्री श्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नियोजन भवन में आज 31 तारीख को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली और उपायों की समीक्षा की। इस बैठक में अर्थ और नियोजन राज्यमंत्री श्री आशीष जयस्वाल, महापौर श्रीमती निता ठाकरे, सांसद श्रीमती मायाताई इवनाते, विधायक श्री राजीव पोद्दार, विधायक श्री संजय भेंडे, विधायक श्री कृष्णा खोपड़े, विधायक श्री प्रवीण दटके, उपमहापौर श्रीमती लीला हाथीबेड, स्थायी समिति की सभापति श्रीमती शिवानी दाणी-वखरे, सत्ता पक्ष नेता श्री नरेंद्र बाल्या बोरकर, आयुक्त डॉ. विपीन, नागपुर सुधार प्रन्यास के सभापति श्री संजय मीना, अतिरिक्त आयुक्त श्री अंकित, एनएमआरडीए की श्रीमती सुप्रिया थूल, जलसंपदा विभाग की मुख्य अभियंता श्रीमती सोनाली चोपड़े, कार्यकारी अभियंता श्री राजेश दुफारे, कार्यकारी अभियंता श्री श्रीकांत वाईकर उपस्थित थे।
आयुक्त का प्रेजेंटेशन – 860 सार्वजनिक कुएं, 400 पर सोलर पंप, कार वॉशिंग पर कार्रवाई – बैठक की शुरुआत में आयुक्त डॉ. विपीन ने शहर में जल बचत और जलसंवर्धन अभियान 2026 के बारे में जानकारी का पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुतीकरण किया। इसमें पानी के रिसाव को खोजने के लिए तुरंत उपाय कर रिसाव की मात्रा कम की जाएगी, ऐसा बताया गया। उसी के साथ रेनवाटर हार्वेस्टिंग के लिए उपाय किए जाएंगे। उसी के साथ कार वॉशिंग के लिए मनपा के नल के पानी का उपयोग करने वालों के कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई है, ऐसा आयुक्त ने बताया।
शहर के कुओं का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए कुओं पर लघु जलापूर्ति योजना शुरू की जाएगी। शहर में कुल 860 सार्वजनिक कुएं हैं। इन पर मेडा की मदद से सौर दोहरी जलपम्पिंग प्रणाली 400 कुओं पर लगाई जाएगी। इस पर अनुमानित खर्च 16 करोड़ रुपये इतना है। इससे प्रतिदिन 20 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति शहर को होगी, ऐसा भी डॉ. विपीन ने बताया।
गंदे पानी के पुनः उपयोग के लिए शहर में 10 गंदे पानी प्रक्रिया केंद्र STP में हाइड्रेंट लगाकर टैंकर द्वारा जलापूर्ति शहर के उद्यानों, सड़कों के किनारे के पेड़ों के लिए की जाएगी।
शहर के 293 वॉशिंग सेंटरों का सर्वेक्षण मनपा ने किया है। इसमें 75 नल के पानी का उपयोग करने वाले केंद्रों पर नोटिस जारी किए गए हैं। इन केंद्रों को पीने के पानी के अलावा अन्य स्रोत से पानी के उपयोग के लिए कहा गया है, ऐसी जानकारी इस अवसर पर आयुक्त ने दी।
पालकमंत्री ने कहा – नया स्थायी जलस्रोत जरूरी – नागपुर शहर और सटे शहरों की बढ़ती पानी की मांग को देखते हुए भविष्य में नागपुर को पानी की कमी महसूस न हो, इसके लिए नई शाश्वत जलापूर्ति योजना जरूरी है, ऐसा मत पालकमंत्री श्री बावनकुले ने व्यक्त किया। इस अवसर पर कन्हान-कोलार नदी पर बैराज बनाने की योजना फिर से प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। इससे शहर को 100 प्रतिशत स्थायी जलस्रोत उपलब्ध रहेगा। इसके लिए 900 करोड़ रुपये की जरूरत है। इस संबंध में मनपा और जलसंपदा विभाग के अधिकारियों ने मिलकर तुरंत एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना चाहिए, इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी लेकर स्थायी रूप से पानी टंचाई से मुक्ति पाने में इस योजना का लाभ मिलेगा।
उसी के साथ नागपुर से सटे शहरों को जलापूर्ति करने के लिए एनएमआरडीए की ओर से 400 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित की गई है। पेंच बांध में नागपुर मनपा के हक का 35 एमएम क्यूब पानी बचा हुआ है। इस पानी का उपयोग कर एनएमआरडीए की ओर से यह योजना प्रस्तावित करने के निर्देश पालकमंत्री श्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस अवसर पर दिए।
व्यावसायिक उपयोग पर मर्यादा लगाओ – श्री बावनकुले – इस अवसर पर बारिश कम होने से सूखे की स्थिति है। इस काल में पानी का उपयोग संभलकर करना चाहिए। उसी के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लगाने के लिए सख्ती करनी चाहिए, ऐसे निर्देश पालकमंत्री श्री बावनकुले ने इस अवसर पर दिए। उसी के साथ व्यावसायिक काम के लिए पानी के उपयोग पर मर्यादा लगाई जाए, ऐसे निर्देश पालकमंत्री ने इस अवसर पर दिए।
पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई के नेतृत्व में गुजरात के केवडिया एकतानगर में राष्ट्रीय एकता दिवस पर महाराष्ट्र का विशेष दालन, गढ़-किले, समुद्र तट, धार्मिक स्थल, खाद्य संस्कृति और हस्तकला का प्रदर्शन, IHM दादर के किचन स्टूडियो से महाराष्ट्रीयन व्यंजनों की प्रस्तुति
मुंबई, 31 अक्टूबर : महाराष्ट्र पर्यटन विभाग की ओर से गुजरात के केवडिया एकतानगर में राष्ट्रीय एकता दिवस और भारत पर्व 2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई के नेतृत्व में महाराष्ट्र का विशेष पर्यटन दालन स्थापित किया गया है। इस दालन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौरा किया।
इस भेंट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के पारंपरिक हथकरघे पर बनी सुंदर पैठणी साड़ियों का अवलोकन किया। पैठणी बुनाई के पीछे की कारीगरी, पारंपरिक तकनीक, उसकी बारीकियों और महाराष्ट्र की समृद्ध वस्त्र परंपरा की उन्होंने जानकारी ली। इस माध्यम से महाराष्ट्र की पारंपरिक कला, हस्तकला, सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों के कौशल का दर्शन उन्हें हुआ। पर्यटन निदेशालय के उपसंचालक विजय जाधव और उनकी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया।
राष्ट्रीय एकता दिवस और भारत पर्व 2026 के अवसर पर गुजरात के केवडिया एकतानगर में 1 से 15 नवंबर 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र पर्यटन विभाग भाग ले रहा है। पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई के मार्गदर्शन में विभाग की ओर से स्थापित इस विशेष दालन के माध्यम से महाराष्ट्र के विविध पर्यटन स्थल, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला, खाद्य संस्कृति और हस्तकला का दर्शन देशभर के पर्यटकों को कराया जा रहा है।
इस उपक्रम के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के प्रतिनिधि के रूप में छत्रपति संभाजीनगर के विभागीय उपसंचालक विजय जाधव उपस्थित हैं। दालन में महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी देने वाली पुस्तिकाएं और पर्यटन संबंधी साहित्य उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पैठणी बुनाई का लाइव प्रदर्शन, महाराष्ट्रीयन खाद्य पदार्थों के स्टॉल, पारंपरिक खाद्य संस्कृति और हस्तकला की विविध वस्तुएं इस दालन के मुख्य आकर्षण हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट IHM, दादर के किचन स्टूडियो के माध्यम से महाराष्ट्र की विशिष्ट खाद्य संस्कृति की भी प्रस्तुति की जा रही है। इसके अलावा, महाराष्ट्र की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं का दर्शन कराने के लिए विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
महाराष्ट्र के गढ़-किले, समुद्र तट, धार्मिक स्थल, प्राकृतिक पर्यटन स्थल, साहसिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक परंपरा की जानकारी इस दालन के माध्यम से पर्यटकों को दी जा रही है। पैठणी जैसी पारंपरिक वस्त्र कला, स्थानीय व्यंजन, हस्तकला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के सांस्कृतिक वैभव की पहचान कराने पर विशेष जोर दिया गया है। इस उपक्रम से महाराष्ट्र के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि मिलने के साथ-साथ राज्य के पर्यटन व्यवसाय, स्थानीय कलाकार, कारीगर और खाद्य संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यटन सचिव संजय यादव ने कहा – पर्यटन विभाग के सचिव संजय यादव ने कहा, “राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विशेषताओं की पहचान कराना, आपसी संवाद बढ़ाना और विविधता में एकता की भावना को और मजबूत करना इस उपक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। पर्यटन मंत्री श्री शंभूराज देसाई के नेतृत्व में महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत, विशिष्ट खाद्य परंपरा और पर्यटन क्षेत्र की विविध संभावनाओं का देशभर के पर्यटकों के सामने प्रभावी ढंग से परिचय कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र पर्यटन के दालन का दौरा कर राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति और पारंपरिक पैठणी बुनाई की जानकारी ली, इसके लिए हम उनका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। उनका यह दौरा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक व्यापक प्रसिद्धि दिलाने वाला साबित होगा।”
निदेशक विकास पानसरे ने कहा – पर्यटन निदेशालय के निदेशक श्री विकास पानसरे ने कहा कि, “महाराष्ट्र को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाने के लिए राज्य की पर्यटन विविधता की देश के अंदर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रस्तुति करना आवश्यक है। पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई के नेतृत्व में महाराष्ट्र पर्यटन विभाग विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राज्य के पर्यटन वैभव को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रयासरत है। गुजरात के केवडिया एकतानगर में आयोजित इस उपक्रम के माध्यम से महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, पारंपरिक कला, खाद्य संस्कृति और सांस्कृतिक परंपरा को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।”
“महाराष्ट्र पर्यटन के दालन का दौरा करने और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सराहने के लिए हम प्रधानमंत्री का हृदय से आभार मानते हैं। उनके इस दौरे से महाराष्ट्र के पर्यटन वैभव को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक व्यापक प्रसिद्धि मिलने के साथ-साथ राज्य के पर्यटन स्थलों की ओर देशभर के पर्यटकों का ध्यान आकर्षित होने और पर्यटन क्षेत्र के विकास को गति मिलने में मदद होगी।”
नागपुर संभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी सुधाकर कोहले की हार के पीछे सुनियोजित भीतरघात, जानबूझकर नाम के आगे ‘2’ लिखकर 80 फीसदी वोट रद्द करवाए – मुख्यमंत्री की गोपनीय जांच में 5 नाम बेनकाब, अनिल सोले और गिरीश व्यास की मान-मनौव्वल के बाद भी पीठ पीछे साजिश का पर्दाफाश
नागपुर, 31 अक्टूबर – नागपुर संभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी सुधाकर कोहले की अप्रत्याशित पराजय के बाद पार्टी के अंदर भूचाल आ गया है। इस पराजय के पीछे पार्टी के भीतर ही रची गई बड़ी साजिश और योजनाबद्ध तरीके से कराया गया क्रॉस वोटिंग मुख्य कारण रहा है, इसका खुलासा हुआ है।
इस गुप्त बगावत और भीतरघात का पता लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं अपनी विशेष टीम को जांच पर लगाया था। इस जांच में भाजपा के ही 5 बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं। ये सभी नेता अब मुख्यमंत्री की हिट-लिस्ट में आ चुके हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इन पर शीघ्र ही बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत हैं।
80 हजार से जीत का दावा, फिर हजारों वोट अवैध कैसे हो गए ? मतदान के दौरान भारी मतदान को देखते हुए भाजपा को पूरा विश्वास था कि सुधाकर कोहले पहले ही चरण में 80 हजार मतों की बढ़त लेकर आसानी से विजयी हो जाएंगे। परंतु परिणाम सामने आने पर हजारों मत अवैध घोषित कर दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 80 प्रतिशत अवैध मतों को रद्द करने का तरीका एक जैसा था। कोहले के नाम के सामने जानबूझकर ‘2’ अंक लिखकर उन मतों को अवैध कराया गया था।
हजारों मतदाता एक ही प्रकार की गलती कैसे कर सकते हैं, इसी बिंदु से यह स्पष्ट हो गया कि यह स्वाभाविक भूल नहीं, बल्कि सुनियोजित षड्यंत्र था। कई कार्यकर्ताओं ने यह बात मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाई। यह भूल नहीं, बल्कि घात है, यह स्पष्ट होते ही मुख्यमंत्री ने कठोर जांच के आदेश दिए और अपनी गुप्त टीम को सक्रिय किया। इसी जांच में 5 सूत्रधारों के नाम सामने आने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
उम्मीदवारी के बाद नाराजगी का नाटक और पर्दे के पीछे घात ? सुधाकर कोहले की उम्मीदवारी घोषित होते ही पार्टी में तीव्र असंतोष उभर आया था। पूर्व विधायक अनिल सोले ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के समक्ष उम्मीदवारी वापस लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया था और मिलने से भी परहेज किया था। इसके बाद पूर्व विधायक गिरीश व्यास ने सीधे भाजपा से त्यागपत्र देकर अनिल सोले को खुला समर्थन दे दिया था। व्यास के कार्यालय में हुई सोले की बैठक में पार्टी के कोषाध्यक्ष, कुछ पदाधिकारी और उनके प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
स्थिति हाथ से बाहर जाती देख मुख्यमंत्री ने स्वयं सारी कमान अपने हाथ में ले ली। वे सीधे सोले के घर पहुंचे, उनकी मान-मनौव्वल की और उन्हें नाम वापस लेने के लिए राजी किया। साथ ही गिरीश व्यास की नाराजगी भी दूर की गई। इसके बाद ये सभी नेता कोहले के प्रचार में शामिल हो गए। सोले और व्यास को चुनाव का सह-प्रभारी बनाया गया, व्यास ने घोषणा-पत्र भी तैयार किया।
ऊपर से सब कुछ सामान्य और सुचारू दिख रहा था, लेकिन जांच में अब यह स्पष्ट हो गया है कि इन नेताओं ने मंच पर एकता दिखाते हुए पर्दे के पीछे पार्टी से विश्वासघात कर क्रॉस वोटिंग का जाल बुना था।
अब मुख्यमंत्री के हाथ में इन सभी की पूरी कुंडली आ जाने के बाद इन पांच नेताओं पर पार्टी के भीतर क्या कार्रवाई होती है, इस पर पूरे राजनीतिक जगत की निगाहें टिकी हुई हैं।