NGT पुणे ने लिया स्वत: संज्ञान, दिल्ली बेंच को भेजा केस | पीड़ित घर खरीदार का खुला आरोप: “2021 से झूठी रिपोर्ट, 50 एकड़ पर अवैध प्लॉटिंग को NMRDA ने दी मंजूरी” | कमिश्नर संजय मीना IAS, JDTP सुप्रिया थूल, EE ललित राउत कटघरे में
नागपुर, 19 मई 2026 : नागपुर मेट्रो रीजन में “प्लॉटेड डेवलपमेंट” और “फैंसी सिटी” के नाम पर EIA नोटिफिकेशन 2006 का खुला उल्लंघन सामने आया है। घर खरीदार अविनाश चौरसिया ने दस्तावेजों के साथ आरोप लगाया है कि वेना नदी के चिन्हित बाढ़ क्षेत्र में 1140 आवासीय इकाइयां बिना पूर्व पर्यावरण मंजूरी के बना दी गईं। इनमें से 120 यूनिट आज भी बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के खाली पड़ी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए NGT पश्चिम क्षेत्र पीठ, पुणे के रजिस्ट्रार ने 2 फरवरी 2026 को यह पूरा मामला NGT प्रधान पीठ, नई दिल्ली को स्वत: संज्ञान के लिए भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला: 1994 से बाढ़ क्षेत्र, 2019 से निर्माण
शिकायतकर्ता चौरसिया के अनुसार वेना नदी का बाढ़ क्षेत्र 1994-95 के सर्वे में ही चिन्हित हो चुका था। इसके बावजूद 2019 से इस जमीन पर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग और निर्माण शुरू हुआ। 2 अक्टूबर 2023 को पहली बार NGT पुणे में शिकायत दी गई, लेकिन निर्माण नहीं रुका। आरोप है कि NMRDA ने 50 एकड़ जमीन पर “प्लॉटेड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट” के तहत जमीन बेचने और निर्माण की अनुमति देकर अवैध काम को वैधता दे दी।
2. EIA-2006 का उल्लंघन: 8(a) vs 8(b) का खेल
EIA नोटिफिकेशन 2006 की अनुसूची के अनुसार:- *8(a) Building & Construction:
यदि Plottable Area × FSI = Built Up Area 20,000 से 1,50,000 वर्ग मीटर है तो EC अनिवार्य।
8(b) Township & Area Development:* यदि BUA 1,50,000 वर्ग मीटर से ज्यादा या जमीन 50 हेक्टेयर से ज्यादा है तो EC अनिवार्य।
चौरसिया का आरोप है कि NMRDA ने जानबूझकर बड़े प्रोजेक्ट को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर “स्प्लिट प्रोजेक्ट” दिखाया और EC से बचाया। डेवलपर्स का “मिथक” है कि 50 हेक्टेयर/124 एकड़ से कम में EC जरूरी नहीं, चाहे BUA कितना भी हो।
NGT के पुराने आदेश: R. कल्याणरमन vs यूनियन ऑफ इंडिया, NGT साउथ जोन और विजय सावरकर vs अर्बन डेवलपमेंट, NGT सेंट्रल जोन में साफ है कि जमीन को टुकड़ों में बांटकर EC से बचना अवैध है। Cumulative impact देखा जाएगा।
NMRDA कमिश्नर संजय मीना IAS से 7 लिखित सवाल चौरसिया ने NMRDA कमिश्नर को लीगल नोटिस की भाषा में चेतावनी दी है: “टालमटोल या इनकार का मतलब है सच्चाई छिपाने के कारण हैं, प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जाए।”
मांगी गई जानकारी:
लेआउट का पूरा डेटा : NMRDA बनने से लेकर आज तक और आपके कार्यकाल में मंजूर सभी ले-आउट की लिस्ट। हर ले-आउट का प्लॉटेबल एरिया वर्ग मीटर में, स्वीकृत FSI 1.5 से 2, और कुल BUA = एरिया × FSI। बताएं कितने 8(a) और कितने 8(b) में आते हैं।
पानी का लोड :हर ले-आउट में मंजूर प्लॉट की संख्या। 130-140 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और 5-10 व्यक्ति प्रति घर मानकर कुल पानी की मांग। आपूर्ति NMRDA करेगा या बिल्डर? अगर बिल्डर करेगा तो क्या बोरवेल की अनुमति दी? दैनिक निकासी सीमा क्या है? CGWA अनुमति की कॉपी दें।
STP और सीवेज : ले-आउट में STP प्रस्तावित था या नहीं? बना है या नहीं? क्षमता कितनी? MPCB ने ऑपरेट करने की अनुमति दी या नहीं? आखिरी मॉनिटरिंग रिपोर्ट कब की है?
रैन वाटर हार्वेस्टिंग : DPR में प्रस्ताव था या नहीं? जमीन पर बना या नहीं? किस NMRDA अधिकारी ने सत्यापन किया, तारीख सहित बताएं।
ओवरहेड टैंक :स्वीकृत प्लान में पानी की टंकी प्रस्तावित थी या नहीं? क्षमता कितनी? बनी या नहीं?
जिम्मेदारी तय करें : जिन प्रोजेक्ट में बिल्डर पानी, STP, RWH नहीं दे रहा, वहां EIA-2006 और जल अधिनियम 1974 के तहत NMRDA पर्यावरण संरक्षण और नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार क्यों नहीं?
4. किन अधिकारियों पर आरोप
शिकायत किसी एक बिल्डर के खिलाफ नहीं है। सीधे आरोप NMRDA कमिश्नर संजय मीना, IAS और उनके पूर्ववर्तियों पर है कि उन्होंने बिना EC के ले-आउट मंजूर किए। साथ ही JDTP सुप्रिया थूल और कार्यकारी अभियंता ललित राउत जो बिल्डिंग प्लान मंजूरी के लिए जिम्मेदार हैं, और उनके अधीनस्थ अतिरिक्त आयुक्त पर भी मिलीभगत का आरोप है। MPCB RO हेमादेशपांडे, नागपुर से भी जवाब मांगा गया है।
5. कानूनी आधार: सुप्रीम कोर्ट ने दी है ताकत
NGT पुणे ने केस फॉरवर्ड करते समय सुप्रीम कोर्ट के MCGM vs अंकिता सिन्हा 2021 फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि NGT को पर्यावरण को जारी नुकसान के मामलों में स्वत: संज्ञान लेने का पूरा अधिकार है। केवल अखबार की खबर का इंतजार जरूरी नहीं। चौरसिया ने कहा, “मैं खुद पीड़ित घर खरीदार हूं। मेरा घर अवैध है तो बाकी 1140 यूनिट भी अवैध हैं।”
6. अब आगे क्या: 157 पत्रकारों को अपील
*चौरसिया ने यह पूरा मामला 157 प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को भेजा है। मांग की है कि NMRDA कमिश्नर और MPCB RO से कैमरे पर स्पष्टीकरण लिया जाए। साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट और NGT से अपील है कि हजारों फंसे हुए घर खरीदारों को देखते हुए तत्काल सुनवाई हो।
NMRDA का पक्ष : खबर लिखे जाने तक NMRDA कमिश्नर कार्यालय और MPCB से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। प्रतिक्रिया आते ही प्रकाशित की जाएगी।
अगर आप भी हैं पीड़ित तो ये करें
अपने ले-आउट का NMRDA मंजूरी नंबर लेकर RTI फाइल करें और ऊपर दिए 7 सवाल पूछें।
BUA 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा है और EC नहीं दिख रही तो NGT में केस फाइल करें।
बोरवेल से पानी मिल रहा है तो CGWA की अनुमति मांगे, न हो तो शिकायत करें।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –
2024 में877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
2025 में849 मंजूर, 87 खारिज।
1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।
केसों का बोझ – कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।
15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।
भरण-पोषण और कस्टडी – भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।
स्टाफ की भारी कमी से दबाव –
RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली
कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।