लुप्त होती कलाओं के संरक्षण के लिए विश्वविद्यालय आगे आएं : राज्यपाल
आगामी समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। इनके अनेक लाभ हैं, लेकिन इनके कारण कई समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अधिक संवेदनशील बनाने पर गंभीर चिंतन होना आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विस्तार इस प्रकार होना चाहिए कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुँचे और समावेशी विकास सुनिश्चित हो, ऐसा प्रतिपादन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने आज यहाँ किया।
मुंबई स्थित एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी द्वारा नवोन्मेषी कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्थापित ‘सेंटर फॉर इनोवेशन’ का उद्घाटन राज्यपाल के हस्ते शुक्रवार (दि. 24) को बीकेसी स्थित शैक्षणिक परिसर में किया गया। इस अवसर पर वे संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के ‘सिरिल श्रॉफ सेंटर ऑफ एआई, लॉ एंड रेगुलेशन’ के सहयोग से आयोजित ‘गवर्निंग एआई : कानून, प्रौद्योगिकी और समाज’ विषयक सेमिनार का भी उद्घाटन राज्यपाल ने किया।
राज्यपाल ने कहा कि केवल तकनीक उपलब्ध होना, परंतु स्पष्ट उद्देश्य का अभाव होना या विज्ञान का विकास होना लेकिन उसमें मानवीय मूल्यों का अभाव होना, यह खतरनाक हो सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नियमन में दया, करुणा और सहानुभूति का समावेश होना चाहिए। इस दिशा में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों में कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का उन्होंने आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान’ के साथ ‘जय किसान’ का नारा दिया, तत्पश्चात प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘जय विज्ञान’ जोड़ा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें ‘जय अनुसंधान’ जोड़ा। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान युग विज्ञान और नवाचार का युग है।
राज्यपाल ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयः’ की भावना का साकार होना है, जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति का समग्र विकास आवश्यक है।
लुप्त होती कलाओं का संरक्षण आवश्यक
आधुनिकीकरण और बड़े पैमाने पर मशीन निर्मित वस्तुओं के बढ़ते उपयोग के कारण विश्वभर में हजारों पारंपरिक कला और हस्तकलाएँ लुप्त होने के कगार पर हैं। एक भी कला के समाप्त होने से हमारी सांस्कृतिक पहचान को क्षति पहुँचती है। इसलिए इन कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए विश्वविद्यालयों को आगे आना चाहिए, ऐसा राज्यपाल ने कहा।
उन्होंने कहा कि किसी दुर्लभ कला को बचाने का अर्थ उसे संग्रहालय में बंद कर देना नहीं है, बल्कि उसे नया जीवन देना है। इस दिशा में एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी को भी पहल करने का उन्होंने आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल के हस्ते ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एआई गवर्नेंस रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी की संस्थापिका डॉ. इंदु शहानी ने प्रस्तावना रखी, जबकि ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सी. राज कुमार ने ‘गवर्निंग एआई’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की शुरुआत में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के इनोवेशन सेंटर का दौरा किया और विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनके नवाचारों और प्रयोगों की जानकारी ली।
इस अवसर पर एटलस स्किलटेक यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष सिद्धार्थ शहानी, कुलपति डॉ. राजन वेळूकर, सिरिल अमरचंद मंगलदास के प्रबंध साझेदार सिरिल श्रॉफ, अपग्रैड के अध्यक्ष रॉनी स्क्रूवाला, रजिस्ट्रार पराग अमीन, प्राध्यापक, आमंत्रित अतिथि और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
487.77 करोड़ के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा, वेस्ट साइड में दो-तरह की पार्किंग, टू-व्हीलर का 2 घंटे तक 10 रुपये और कार का पिक-अप-ड्रॉप 1 घंटे 50 रुपये, 120 मिनट से ज्यादा पार्किंग पर 1000 रुपये जुर्माना और टोइंग
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर रेलवे स्टेशन के वर्ल्ड क्लास स्टेशन प्रोजेक्ट के तहत पहली सुविधा वेस्ट साइड में शुरू हो गई है। 20 अक्टूबर से अंडरग्राउंड पार्किंग ऑपरेशनल हो गई है, जिससे स्टेशन के सामने पिछले चार साल से लग रहा ट्रैफिक जाम खत्म हो गया है।
यह सुविधा 487.77 करोड़ रुपये के नागपुर स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर 2022 को किया था। इसे रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RLDA) ने 44 महीनों में बनाकर मध्य रेलवे के नागपुर डिवीजन को सौंप दिया है।
दो हिस्सों में पार्किंग –
अंडरग्राउंड टू-व्हीलर और कार पार्किंग :
टू-व्हीलर चार्ज : 2 घंटे तक 10 रुपये, 2-6 घंटे 15 रुपये, 6-12 घंटे 20 रुपये, 12-24 घंटे 35 रुपये। 24 घंटे के बाद 35 रुपये प्रतिदिन। हेलमेट चार्ज 24 घंटे के लिए 5 रुपये। QR कोड से ऑनलाइन पेमेंट भी।
फीचर्स : सफेद पिलर, LED लाइटिंग, फायर सेफ्टी पाइपलाइन, वेंटिलेशन फैन, मराठी-हिंदी-अंग्रेजी में नीले बोर्ड पर सफेद अक्षरों में “Car and Two Wheeler”, “Lift”, “Exit / No Entry” के साइन। अप्रोच रोड पर तीन तीर – पिक-अप-ड्रॉप, सिर्फ टू-व्हीलर और कार पार्किंग के लिए।
एक्सेस कंट्रोल पिक-अप एंड ड्रॉप पार्किंग (सीमेंट रोड के पास) : यहां करीब 120 फोर-व्हीलर पार्क हो सकती हैं। चार्ज – 0-1 घंटा 50 रुपये, 1-2 घंटा 100 रुपये।
नियम सख्त : इस जोन में ऑटो, टैक्सी, बस, मिनीबस जैसे कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और टू-व्हीलर को अनुमति नहीं। 120 मिनट (2 घंटे) से ज्यादा पार्किंग की अनुमति नहीं, उल्लंघन पर वाहन टो कर लिया जाएगा और 1,000 रुपये फ्लैट पेनाल्टी लगेगी।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
RTI में खुलासा – 2024 में 877, 2025 में 849 और 2026 में 15 अक्टूबर तक 516 तलाक, स्टाफ की 83 में से 22 पोस्ट खाली, स्टेनो और क्लर्क की कमी से दबाव बढ़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2024 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 2,242 आपसी सहमति (म्यूचुअल कंसेंट) तलाक याचिकाओं को मंजूरी दी है, जबकि कोर्ट में अभी भी 7,321 मामले लंबित हैं, जिनमें 408 मामले ऐसे हैं जो 5 साल या उससे अधिक समय से अनसुलझे हैं। यह आंकड़ा अभय कोलारकर द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया है।
फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार –
2024 में877 म्यूचुअल तलाक मंजूर, 95 खारिज।
2025 में849 मंजूर, 87 खारिज।
1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 516 मंजूर, 65 खारिज।
केसों का बोझ – कोर्ट ने 2024 में 5,532 केस दर्ज किए और 3,838 निपटाए। 2025 में 3,433 दर्ज और 3,554 निपटाए। 1 जनवरी से 15 अक्टूबर 2026 तक 3,512 केस दर्ज और 4,068 निपटाए। 2026 के साढ़े नौ महीनों में दर्ज से ज्यादा केस निपटाने के बावजूद बैकलॉग काफी है।
15 अक्टूबर 2026 तक लंबित 7,321 केसों में से 3,303 केस 1 से 3 साल से पेंडिंग हैं।
भरण-पोषण और कस्टडी – भरण-पोषण मामलों में 2024 में 590, 2025 में 826 और 2026 में 747 आवेदन मंजूर हुए। चाइल्ड कस्टडी में 2024 में 52, 2025 में 61 और 15 अक्टूबर 2026 तक 60 आवेदन मंजूर हुए। आंकड़ों में पहले दाखिल मामलों का निपटारा भी शामिल है, इसलिए सीधे नए आवेदनों से तुलना नहीं की जा सकती।
स्टाफ की भारी कमी से दबाव –
RTI जवाब के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक फैमिली कोर्ट में क्लास II से क्लास IV तक के 83 स्वीकृत पदों में से 22 पद खाली हैं।
स्टेनोग्राफर ग्रेड-I के 7 में से 4 पद खाली
स्टेनोग्राफर ग्रेड-III के 5 में से 2 पद खाली
जूनियर क्लर्क के 17 में से 5 पद खाली
डिप्टी रजिस्ट्रार का 1 पद खाली
शिरस्तेदार के 7 में से 2 पद खाली
डिपोजिशन राइटर के 5 में से 2 पद खाली
प्यून के 15 में से 4 और स्वीपर के 4 में से 2 पद खाली
कोर्ट ने बताया कि 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 के बीच स्टाफ कैडर की एक भी खाली पोस्ट नहीं भरी गई।