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Maharashtra

Principals from Delhi Public Schools met Governor

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A group of principals of various public schools in Delhi and eminent educationists, led by Dr. Alka Kapur, Principal, Modern Public School, Shalimar Bagh, met the Governor of Maharashtra Jishnu Dev Varma, at Lok Bhavan, Mumbai.

The educators discussed the changing role of teachers and the need to focus on the holistic development of students—giving them both “wings and roots”—while preparing them for a rapidly changing world shaped by Artificial Intelligence and Climate Change. They also emphasised the importance of nurturing students as responsible and socially conscious citizens.

The Governor said that public schools have given the nation leaders in various walks of life. He observed that “a good teacher inspires, and does not merely teach.” He urged public schools to go beyond academics and play the role of mentors, helping students develop character, values and a sense of purpose.

The Governor also emphasised the importance of integrating the Indian Knowledge System into education and adding value throughout the formative years of children. He observed that children today are over-informed. “Educators are not merely making leaders; they must also make students good human beings,” he said.

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धोबी-परीट समाज का संविधान चौक में अनशन का ऐलान, SC जैसी सुविधाओं की मांग

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  • डॉ. भांडे समिति की सिफारिश के बावजूद आरक्षण से वंचित होने का आरोप, 27 अक्टूबर से उपोषण और श्रृंखला उपोषण शुरू करने की घोषणा, विशेष जीआर निकालने की मांग

नागपुर, 26 अक्टूबर :

महाराष्ट्र के धोबी (परीट) समाज को आरक्षण संबंधी सुविधाएं देने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से नागपुर के संविधान चौक में उपोषण और साखळी उपोषण शुरू करने का ऐलान किया गया है। समाज की प्रमुख मांग है कि जब तक अनुसूचित जाति की सूची में समावेश नहीं होता, तब तक राज्य सरकार विशेष बाब के तौर पर SC को मिलने वाली सभी आरक्षण सुविधाएं धोबी समाज को भी दे।

मांग : राज्य शासन द्वारा गठित डॉ. भांडे समिति की सिफारिश क्रमांक 3 के अनुसार महाराष्ट्र में धोबी, परीट जाति का अनुसूचित जाति में समावेश नहीं होता, तब तक अनु. जाति को मिलने वाली सभी आरक्षण की सुविधाएं खास बाब के तौर पर राज्य शासन तुरंत जीआर निकालकर दे।

आंदोलनकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र शासन ने 5 सितंबर 2001 को पूर्व मंत्री डॉ. डी.एम. भांडे की अध्यक्षता में अभ्यास समिति बनाई थी। समिति ने धोबी समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कर धोबी के साथ ही परीट, वरठी, रजक, वढ्ढी, मडवळ, मडलेवार और धोबा जैसी तत्सम जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की थी। साथ ही समावेश होने तक विशेष तरतूद के तहत समान सुविधा देने की भी सिफारिश की थी।

समाज का दावा है कि महाराष्ट्र राज्य निर्माण से पहले भंडारा और बुलढाणा जिलों में धोबी समाज को SC की सुविधाएं मिलती थीं, जो 1 मई 1960 को राज्य बनने के बाद बंद कर दी गईं। समाज की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय में कोई मूलभूत बदलाव नहीं होने के बावजूद सुविधाएं बंद हुईं। 1976 में SC-ST के लिए क्षेत्रीय बंधन हटने के बाद भी धोबी समाज का मुद्दा लंबित रहा।

समाज ने मांग की है कि मराठा और धनगर समाज के लिए लागू समकक्ष सुविधाओं की तर्ज पर धोबी-परीट समाज के लिए भी स्वतंत्र शासन निर्णय (जीआर) निकाला जाए।

ऐतिहासिक दस्तावेजों और भांडे समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन तुरंत निर्णय ले, ताकि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान अवसर मिल सके।

नेतृत्व : समिति प्रमुख आशिषभाऊ कदम, समिति अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्के, कार्याध्यक्ष राजेंद्र खैरनार, सुधीर खैरनार, मुरलीधर शिंदे, संतोष सवतीरकर, राहुल वरणकर।

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महाराष्ट्र राज्य लॉटरी के सितंबर माह के ड्रॉ के परिणाम घोषित, 58 हजार से ज्यादा टिकटों पर इनाम

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  • मासिक और भव्यतम ड्रॉ में 12,731 और साप्ताहिक ड्रॉ में 45,774 टिकट विजेता, गणपति भव्यतम ड्रॉ में 2-2 लाख के चार द्वितीय पुरस्कार, कुल 2.28 करोड़ से अधिक की राशि वितरित

मुंबई, 26 अक्टूबर 2026 :

महाराष्ट्र राज्य लॉटरी द्वारा सितंबर 2026 माह में निकाली गई मासिक, भव्यतम और साप्ताहिक लॉटरी ड्रॉ के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं।

महाराष्ट्र राज्य लॉटरी की ओर से सालभर में छह भव्यतम ड्रॉ, हर महीने पांच मासिक ड्रॉ और रोजाना विभिन्न साप्ताहिक ड्रॉ आयोजित किए जाते हैं। सितंबर 2026 में महाराष्ट्र सह्याद्री, महाराष्ट्र गणेशलक्ष्मी गणपति विशेष, महाराष्ट्र गौरव, महाराष्ट्र तेजस्विनी, महाराष्ट्र गणपति (भव्यतम) और महाराष्ट्र गजराज ये मासिक ड्रॉ निकाले गए। ये ड्रॉ क्रमशः 11, 15, 16, 19, 24 और 29 सितंबर को हुए।

भव्यतम ड्रॉ में बड़े इनाम –
24 सितंबर को हुए महाराष्ट्र गणपति (भव्यतम) ड्रॉ में प्रत्येकी दो लाख रुपये के चार द्वितीय पुरस्कार और प्रत्येकी एक लाख रुपये के चार प्रोत्साहन पुरस्कार घोषित हुए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र सागरलक्ष्मी से लेकर महाराष्ट्रलक्ष्मी तक की साप्ताहिक ड्रॉ में प्रत्येकी सात लाख रुपये के प्रथम क्रमांक के कुल छह पुरस्कार घोषित किए गए हैं।

कुल विजेता और राशि –
सितंबर माह के मासिक व भव्यतम ड्रॉ से 12 हजार 731 टिकटों पर कुल 59 लाख 4 हजार 350 रुपये के इनाम और साप्ताहिक ड्रॉ से 45 हजार 774 टिकटों पर कुल 1 करोड़ 69 लाख 20 हजार 700 रुपये के इनाम घोषित हुए हैं। यानी कुल 58,505 टिकटों पर 2 करोड़ 28 लाख से अधिक की पुरस्कार राशि।

महाराष्ट्र राज्य लॉटरी के सभी विजेताओं से अपील की गई है कि पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए राज्य लॉटरी की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई प्रक्रिया पूरी करें। दस हजार रुपये से अधिक राशि के पुरस्कार के लिए आवश्यक दस्तावेजों सहित मांग संबंधित कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी। दस हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि के लिए लॉटरी विक्रेता से संपर्क करें, ऐसा आह्वान उपसंचालक, महाराष्ट्र राज्य लॉटरी, वाशी ने किया है।

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महाराष्ट्र में दो रिजर्व वन क्षेत्रों को अभयारण्य का दर्जा – 14 नए कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने को मंजूरी – मुख्यमंत्री फडणवीस

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मुंबई, 26 अक्टूबर 2026 :

महाराष्ट्र में वन्यजीव संरक्षण को बड़ी मजबूती देते हुए राज्य वन्यजीव मंडल की 26वीं बैठक में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में गडचिरोली जिले के “कोलामार्का कंजर्वेशन रिजर्व” को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने और “नया विस्तारित तानसा वन्यजीव अभयारण्य” बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पुणे, रायगढ़, नाशिक, नंदुरबार, ठाणे, पालघर और चंद्रपुर जिलों के 14 कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्रों के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में वन मंत्री गणेश नाइक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। इस अवसर पर वन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय खंदारे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) एम. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्रीनिवास रेड्डी, मंडल के सदस्य तथा ‘मित्रा’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी सहित मंडल के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

कोलामार्का बनेगा जंगली भैंसों का अभयारण्य :
गडचिरोली जिले का कोलामार्का क्षेत्र जंगली भैंसों (रान म्हशी) के लिए प्रसिद्ध और उपयुक्त क्षेत्र है, इसलिए इसे कंजर्वेशन रिजर्व से अपग्रेड कर वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का निर्णय लिया गया है।

14 नए कंजर्वेशन रिजर्व को मंजूरी :
बैठक में जिन 14 कंजर्वेशन रिजर्व को मंजूरी दी गई, उनमें शामिल हैं :
पुणे/रायगढ़ का वेल्हे-मुळशी, पुणे का भोरगिरीगड़, नाशिक के दिंडोरी, सुरगना और ताहाराबाद, नंदुरबार का चिंचपाड़ा, रायगढ़ के अलीबाग और घेरा मानिकगढ़, पुणे/रायगढ़ का लोणावला, ठाणे का गुमतारा, पालघर के जव्हार, आशेरीगढ़ और धामणी तथा चंद्रपुर का एकारा।

तानसा अभयारण्य का विस्तार :
तानसा वन्यजीव अभयारण्य को मानव-रहित करने के लिए नए विस्तारित तानसा अभयारण्य में मौजे ओगदा, खोडदे, तिरमाल, पाचघर, फणसाड और आमले इन छह गांवों के 588.767 हेक्टेयर राजस्व व निजी क्षेत्र को शामिल करने के प्रस्ताव को मंडल ने मंजूरी दी।

कोका और जायकवाडी को मिला विशेष दर्जा :
कोका वन्यजीव अभयारण्य के 100.139 वर्ग किमी और जायकवाडी पक्षी अभयारण्य के 255.79 वर्ग किमी क्षेत्र को संकटग्रस्त वन्यजीव अधिवास (Critical Wildlife Habitat) घोषित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री के अहम निर्देश –
मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिए कि अभयारण्यों में बांधों की मरम्मत, पुनर्वास और गाद निकालने जैसे नियमित कार्यों को संबंधित अभयारण्यों के प्रबंधन प्लान में शामिल किया जाए। नियमों के अनुरूप मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार कर तीन महीने में प्रबंधन प्लान में आवश्यक सुधार किए जाएं। हर बार अलग से मंजूरी लेने के बजाय संबंधित वन्यजीव अधिकारियों को पूर्व सूचना देने की व्यवस्था की जाए।

इसके साथ ही संरक्षित क्षेत्रों, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों और बाघ कॉरिडोर में सिंचाई, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, पुल, सड़क, भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर, बिजली लाइन आदि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

बैठक में राज्य के छह टाइगर रिजर्व के कोर, बफर और अधिसूचित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों को शांतता क्षेत्र (Silence Zone) के रूप में अधिसूचित करने, मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्राकृतिक आपदा घोषित करने और टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में इच्छुक गांवों के पुनर्वास के लिए नीति तैयार करने जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन कानून के तहत जिलाधिकारी की जिम्मेदारी, मौजूदा मुआवजा व्यवस्था और वन विभाग के अधिकारों में तालमेल बैठाकर आगे की कार्रवाई की जाए।

साथ ही, अभयारण्य घोषित होने के बावजूद अभी भी प्रादेशिक वन विभाग या वन विकास निगम के प्रबंधन में मौजूद क्षेत्रों को वन्यजीव विंग को सौंपने के संबंध में कर्मचारियों के समायोजन, प्रतिनियुक्ति और रिक्त पदों का अध्ययन कर एक महीने में निर्णय हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए।

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Nagpur, IN
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