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Nagpur

Metro Staff Shift to Public Transport as New Feeder Bus Service Begins

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NAGPUR,JUNE 24, 2026 : In a push for sustainable commuting and better last-mile links, Maha Metro employees have started using public transport for their daily office commute.

The move follows a meeting held at Hingna Depot on 16.06.2026, where employees agreed to adopt public transport. Acting on Maha Metro’s request, NMC launched a dedicated feeder bus service from Lokmanya Nagar Metro Station to Maha Metro’s Hingna Mount View Car Depot on 22.06.2026.

The service was flagged off by GM (O&M) Shri Sudhakar Urade, JGM (MMI) Shri Mahesh Moroney, DGM (Commercial) Shri S G Rao, Shri Mahesh Dhamecha, DGM, Shri Rajeev Ghatole, Manager (Operations) NMC, and Shri Purushottam Nimsarkar, Sr. Operations Manager, Chalo Mobility. Shri B V Rao, AM (HR), and employees of Maha Metro’s O&M department were also present.

Key details:*

– *Route*: Lokmanya Nagar Metro Station ↔ Hingna Mount View Depot

– *Launch date*: 22.06.2026

– *Timings*: Aligned with Metro train schedules and employee office hours for seamless travel

Employees welcomed the service, calling it practical and comfortable. Many said it would cut travel time and make daily commutes more predictable and hassle-free.

Officials highlighted that a metro system without last-mile connectivity is “like a river without tributaries” — powerful but unable to reach its communities. This feeder service bridges that gap, extending Metro benefits beyond stations into daily commuter journeys.

The initiative supports Nagpur’s larger vision of an integrated, people-centric transport system. Under the guidance of the Municipal Commissioner, NMC, Additional Municipal Commissioner, NMC, and Mango Director, Maha Metro, the focus remains on commuter convenience.

By adopting public transport first for its own workforce, Maha Metro aims to set an example for other institutions and citizens. Officials expect the move to reduce traffic congestion, fuel use, and emissions while encouraging wider public transport adoption.

The dedicated feeder service for Hingna Mount View Car Depot employees is expected to serve as a model for future connectivity solutions in Nagpu

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Crime

नायलॉन मांझे के स्रोत का पता लगाकर 6 करोड़ का जाल तोड़ने पर हाईकोर्ट ने की नागपुर ग्रामीण पुलिस की प्रशंसा

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  • सिलवासा फैक्ट्री पर छापा, 6.26 लाख का माल जब्त, एसपी हर्ष पोद्दार की टीम को कोर्ट ने बताया कौतुकास्पद, जिले में 662 हिस्ट्रीशीटरों की परेड, साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर सुरक्षा उपाय, अवैध शराब पर 15 केस

नागपुर ग्रामीण, 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) :

माननीय मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ ने प्रतिबंधित नायलॉन मांझे के उत्पादन और आपूर्ति के मूल स्रोत का पता लगाने पर नागपुर ग्रामीण पुलिस की खुलकर प्रशंसा की है। कोर्ट ने 23/10/2026 के आदेश में कहा कि पुलिस की जांच कौतुकास्पद है और अन्य जिलों को भी ऐसी कार्रवाई कर 29/10/2026 तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

क्या है मामला –
दिनांक 08/12/2025 को कलमेश्वर पुलिस स्टेशन अंतर्गत मौजा गोडखेरी में VR लॉजिस्टिक वेयरहाउस कंटेनर क्रमांक GJ-21-V-3238 से नायलॉन मांझा ले जाते आरोपी छविनाथ मोहन निषाद, उम्र 30, उत्तर प्रदेश को पकड़ा गया था। 9,200 नग नायलॉन मांझा प्लास्टिक चक्री कीमत 14,40,000 रुपये और कंटेनर कीमत 20,00,000 रुपये, कुल 34,40,000 रुपये का माल जब्त किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष ए. पोद्दार और अपर अधीक्षक अनिल मस्के के मार्गदर्शन में स्थानीय गुन्हे शाखा के निरीक्षक अंकुश माने और निरीक्षक स्नेहल राऊत की टीम ने गोपनीय जानकारी, तकनीकी पुरावे और बैंक लिंकेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

कलमेश्वर में दर्ज गुनाह के संबंध में दमन के औद्योगिक परिसर, डेमनी रोड दादरा और नगर हवेली के सिलवासा में मांझा निर्माता की फैक्ट्री पर छापा मारकर कुल 6 करोड़ 26 लाख 43 हजार 840 रुपये का प्रतिबंधित नायलॉन मांझा, उसे बनाने का कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई।

इसी जांच के लिए मुंबई हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) दाखिल हुई थी। कोर्ट में एसपी द्वारा दाखिल प्रतिज्ञापत्र पर यह प्रशंसा हुई।

अन्य बड़ी कार्रवाईयां –

1. साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर प्रतिबंधक उपाय –
साबनेर शहर से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच मौजूद पेड़ से हादसे का खतरा था। विशेषकर रात में अंधेरा होने से या सामने से तेज रोशनी से चालक का ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका थी। एसपी हर्ष पोद्दार के निर्देश पर साबनेर पुलिस ने पेड़ के चारों ओर रिफ्लेक्टर और रेडियम पट्टी लगाई, ‘सावधान, काम शुरू है’ के सूचना फलक लगाए और वेग मर्यादित रखने की अपील की। PWD और वन विभाग से समन्वय कर पेड़ को स्थायी रूप से हटाने की कार्रवाई शुरू है।

2. घरफोड़ी के 2 गुनाह उजागर, 4.16 लाख का माल जब्त –
स्थानीय गुन्हे शाखा ने दिनांक 23/10/2026 को आरोपी प्रवीण अशोक डेकाटे, उम्र 30, तिलक वार्ड मोहाड़ी, ता. मोहाड़ी, जि. भंडारा को गिरफ्तार किया। गोपनीय जानकारी मिली थी कि वह मीठा माधनी परिसर में चोरी के सोने के दागिने बेचने घूम रहा है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ में उसने मीठा परिसर में 12 दिन पहले और उमरेड में 1 महीने पहले घरफोड़ी करने की कबूली दी। पंचनामे में उसके पैंट की जेब से सोने के दागिने मिले, कुल 4,16,000 रुपये का माल जब्त। उसके खिलाफ मौदा अप.क्र. 693/2026 कलम 305(अ),331(3) और उमरेड अप.क्र. 934/2026 में केस दर्ज है।

3. खाने के अयोग्य सुपारी की 40 टन खेप जब्त – वडोदा पुलिस की कार्रवाई –
वडोदा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि वडोदा हद के महालगाव-लिंगगाव के नवकार वेयरहाउस में बिना परवाना मानव सेवन के अयोग्य सुपारी चार वाहनों से लाई जा रही है। पुलिस ने जाल बिछाकर चारों वाहनों की तलाशी में करीब 40 टन सुपारी जब्त की। चारों वाहन सीज कर अन्न व औषध प्रशासन विभाग को पत्र व्यवहार किया गया है। विभाग की जांच के बाद आगे कार्रवाई होगी।

4. अवैध शराब पर 15 गुनाह –
एसपी के मार्गदर्शन में 23/10/2026 को जिले भर में अवैध शराब निर्माण, बिक्री और सेवन पर कार्रवाई कर कुल 15 गुनाह दर्ज किए। खापा में 4, कळंब में 1, साबनेर में 2, उमरेड, रामटेक, बोरी, नरखेड, जलालखेड़ा में 1-1 और भिवापुर में 2 गुनाह। कार्रवाई में 32,230 मिली देशी दारू, 360 मिली विदेशी दारू, 24 लीटर मोहफूल दारू कुल 8,060 रुपये का माल जब्त कर मौके पर पंचनामा कर नष्ट किया गया।

5. अस्तित्व छुपाकर घूमने वाले पर गुनाह –
अरोली पुलिस ने 23/10/2026 को पेट्रोलिंग के दौरान आरोपी तुषार उर्फ नांदूजी तुलसीदास वानखेडे, 30 वर्ष, संताजी नगर कन्हान, ता. पारशिवनी को मौजा रोंगली बार में अपना अस्तित्व छुपाकर सूर्यास्त के बाद संदिग्ध रूप से घूमते पकड़ा। नाम-पता पूछने पर उड़वा-जवाब देने पर धारा 122 महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत गुनाह दर्ज किया।

6. 662 रिकॉर्डेड अपराधियों की परेड –
जिले के सभी 24 पुलिस थानों में शरीर और संपत्ति के विरुद्ध अपराध, महिला-बाल अत्याचार, अवैध शराब, जुआ आदि के 662 रेकॉर्डवरील आरोपियों की परेड ली गई। इसमें नागपुर उपविभाग में 68, उमरेड में 124, साबनेर में 136, कन्हान में 69, रामटेक में 119, काटोल में 127 आरोपियों को बुलाकर चेक किया गया और हिदायत दी गई।

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Marathi

मध्यस्थीच्या प्रभावी अंमलबजावणीत न्यायाधीशांची भूमिका महत्त्वाची

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  • न्यायमूर्ती ए. एस. गडकरी यांचे प्रतिपादन
  • नागपुरात विभागीय मध्यस्थी परिषदेचे यशस्वी आयोजन

नागपूर, दि. २४ : न्यायदान प्रक्रिया अधिक सुलभ, जलद आणि प्रभावी करण्यासाठी मध्यस्थी ही महत्त्वाची प्रक्रिया असून, तिच्या प्रभावी अंमलबजावणीत जिल्हा न्यायव्यवस्थेची भूमिका निर्णायक आहे. न्यायालयांमधील प्रलंबित वादांचे मध्यस्थीच्या माध्यमातून निराकरण करण्यासाठी न्यायाधीशांनी पुढाकार घ्यावा, असे प्रतिपादन महाराष्ट्र राज्य विधी सेवा प्राधिकरण, मुंबईचे कार्यकारी अध्यक्ष तथा मुंबई उच्च न्यायालयाच्या मुख्य मध्यस्थी देखरेख समितीचे अध्यक्ष न्यायमूर्ती ए. एस. गडकरी यांनी केले.

महाराष्ट्र राज्य विधी सेवा प्राधिकरण, मुंबई, मुंबई उच्च न्यायालयाच्या मध्यस्थी देखरेख उपसमिती, नागपूर आणि जिल्हा विधी सेवा प्राधिकरण, नागपूर यांच्या संयुक्त विद्यमाने सिव्हिल लाइन्स येथील वसंतराव देशपांडे सभागृहात विभागीय मध्यस्थी परिषदेचे आयोजन करण्यात आले. या परिषदेचे उद्घाटन न्यायमूर्ती ए. एस. गडकरी यांच्या हस्ते झाले. यावेळी नागपूर मध्यस्थी देखरेख उपसमितीचे अध्यक्ष न्यायमूर्ती ए. एस. किलोर, सदस्य न्यायमूर्ती ए. एल. पानसरे, मुंबई उच्च न्यायालयाचे मध्यस्थी देखरेख समितीचे संचालक तथा समन्वयक टी. एस. अकाली आणि जिल्हा विधी सेवा प्राधिकरणाचे अध्यक्ष तथा प्रमुख जिल्हा व सत्र न्यायाधीश एम. सलमान आझमी उपस्थित होते.

कार्यक्रमाच्या प्रारंभी मान्यवरांचे रोपटे देऊन स्वागत करण्यात आले. महाराष्ट्र राज्य विधी सेवा प्राधिकरणाच्या कार्यावर आधारित गीताने परिषदेची सुरुवात झाली. मान्यवरांनी रोपट्यांना पाणी देऊन पर्यावरण संवर्धनाचा संदेशही दिला.

मध्यस्थी प्रक्रियेला प्रोत्साहन देण्याचे आवाहन

उद्घाटनपर भाषणात न्यायमूर्ती ए. एस. गडकरी यांनी भारतातील मध्यस्थी प्रक्रियेचे वाढते महत्त्व अधोरेखित केले. वादांचे निराकरण करण्यासाठी मध्यस्थीचा अधिकाधिक वापर व्हावा, यासाठी जिल्हा विधी सेवा प्राधिकरणांनी उपलब्ध निधीचा पुरेपूर उपयोग करून वार्षिक नियोजन करावे, असे आवाहन त्यांनी केले. तसेच मध्यस्थी प्रक्रियेद्वारे प्रकरणे निकाली काढण्यासाठी न्यायाधीशांनी सक्रिय सहभाग घ्यावा, असेही त्यांनी सांगितले.

सर्वोच्च न्यायालयाच्या मेडिएशन अँड कॉन्सिलिएशन प्रोजेक्ट कमिटीने सुरू केलेल्या ‘मेडिएशन फॉर द नेशन 3.0’ या उपक्रमाचाही त्यांनी उल्लेख केला. बदलत्या परिस्थितीत मध्यस्थीच्या माध्यमातून वादांचे निराकरण करण्याची गरज वाढत असल्याचे त्यांनी नमूद केले.
कौटुंबिक वादांसह विविध प्रकरणांत मध्यस्थी
परिषदेत तज्ज्ञांनी मध्यस्थीचे सध्याचे स्वरूप, भविष्यातील दिशा, कौटुंबिक वादांमधील मध्यस्थी, समुपदेशनाची भूमिका आणि मध्यस्थीकडे प्रकरणे सोपविणाऱ्या न्यायाधीशांची जबाबदारी या विषयांवर मार्गदर्शन केले.

न्यायमूर्ती ए. एल. पानसरे, न्यायमूर्ती यू. एस. जोशी-फाळके आणि न्यायमूर्ती नंदेश एस. देशपांडे यांनी मध्यस्थी प्रक्रियेचे महत्त्व स्पष्ट केले.
मध्यस्थीमुळे संबंधित पक्षांना आपली बाजू मांडण्याची, एकमेकांच्या भावना समजून घेण्याची आणि परस्पर संवादातून वाद सोडविण्याची संधी मिळते. त्यामुळे अनावश्यक संघर्ष कमी होऊन परस्पर संबंध टिकविण्यास मदत होते. मध्यस्थीची प्रक्रिया प्रभावी होण्यासाठी योग्य प्रकरणांची निवड, कुशल व निष्पक्ष मध्यस्थ, योग्य समुपदेशन आणि पक्षकारांचा विश्वास महत्त्वाचा असल्याचे तज्ज्ञांनी सांगितले.
तसेच मध्यस्थी प्रक्रियेत सहभागी न्यायाधीशांसाठी संवादकौशल्य, पक्षकारांचे म्हणणे ऐकून घेणे आणि प्रकरणांचे योग्य मूल्यमापन याबाबत सातत्याने प्रशिक्षण आवश्यक असल्याचे अधोरेखित करण्यात आले. तंत्रज्ञानाच्या मदतीने ऑनलाइन मध्यस्थी शक्य झाल्याने दुर्गम भागातील पक्षकारांनाही या प्रक्रियेत सहभागी होण्याची संधी उपलब्ध झाली आहे.

मध्यस्थी ही कायदेशीर प्रक्रियेचा महत्त्वाचा भाग

समारोप सत्रात न्यायमूर्ती ए. एस. किलोर यांनी मध्यस्थी ही न्यायव्यवस्थेच्या चौकटीबाहेरील प्रक्रिया नसून, कायद्याच्या आधारे वाद सोडविण्याचा महत्त्वाचा मार्ग असल्याचे स्पष्ट केले. मध्यस्थीच्या माध्यमातून पक्षकारांना वादाच्या निराकरणात अर्थपूर्ण सहभाग घेता येतो. योग्य पद्धतीने राबविलेल्या मध्यस्थीमुळे संवाद सुधारतो, संघर्ष कमी होतो आणि शक्य असेल तेथे परस्पर संबंध टिकवून ठेवता येतात, असे त्यांनी नमूद केले.

वादाचे स्वरूप, संबंधित पक्षांची परिस्थिती आणि मध्यस्थीच्या माध्यमातून न्याय्य व उपयुक्त तोडगा निघण्याची शक्यता लक्षात घेऊन प्रकरणे मध्यस्थीकडे पाठविण्याचा निर्णय न्यायाधीशांनी घ्यावा, असेही त्यांनी सांगितले.

न्यायालये, विधी सेवा संस्था, वकील संघटना आणि मध्यस्थी केंद्रांमधील समन्वय प्रभावी मध्यस्थीसाठी महत्त्वाचा असल्याचे त्यांनी स्पष्ट केले.
कार्यक्रमाचे आभारप्रदर्शन प्रमुख जिल्हा व सत्र न्यायाधीश तथा जिल्हा विधी सेवा प्राधिकरणाचे अध्यक्ष एम. सलमान आझमी यांनी केले. नागपूर येथील लघुवाद न्यायालयाच्या अतिरिक्त न्यायाधीश एन. एन. बेदरकर आणि १७ व्या सह दिवाणी न्यायाधीश कनिष्ठ स्तर व न्यायदंडाधिकारी प्रथम श्रेणी एल. एच. पटेल यांनी कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन केले.

परिषदेच्या यशस्वीतेसाठी प्राधिकरणाचे अधिकारी, मुंबई उच्च न्यायालय नागपूर खंडपीठाचे प्रबंधक बी.पी. क्षीरसागर, उच्च न्यायालय विधी सेवा उप समितीचे सचिव सुनील हाके, जिल्हा विधिसेवा प्राधिकरणाचे सचिव प्रवीण उन्हाळे व जिल्ह्यातील न्यायिक अधिकारी यांनी परिश्रम घेतले.


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Health

न्यूएरा हॉस्पिटल्स का वर्धमान नगर में 300 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल शुरू

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  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।

2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।

अत्याधुनिक सुविधाएं
अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।

प्रबंधन का बयान
प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है।
निदेशक डॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे।
निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।

अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।

न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

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