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सेना को भर्गवास्त्र ड्रोन रोधी प्रणाली का सफल प्रदर्शन

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नागपुर :

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) ने शुक्रवार को भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में अपनी स्वदेशी, वाहन-आधारित, बहुस्तरीय ‘भर्गवास्त्र’ काउंटर-स्वार्म ड्रोन प्रणाली का पूर्ण क्षमता के साथ सफल प्रदर्शन किया।

एसडीएएल, सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है। कंपनी ने इस हथियार प्रणाली को कमांड एंड कंट्रोल वाहन (सीवी) के साथ प्रस्तुत किया। इस वाहन में रडार, सी4आई यानी कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स और इंटेलिजेंस प्रणाली के साथ एकीकृत डिटेक्टर और सभी लॉन्च वाहनों को ले जाने वाला लांचर शामिल है।

प्रदर्शन के दौरान एसडीएएल की टीम ने ड्रोन का झुंड उड़ाया। रडार और डिटेक्टरों ने ड्रोन को सफलतापूर्वक पकड़ा। इसके बाद सी4आई प्रणाली ने स्थिति की पूरी जानकारी दी और ड्रोन हमले की चेतावनी जारी की। इसके बाद लांचर को सी4आई प्रणाली द्वारा लक्ष्य सौंपे गए और फायरिंग का पूरा क्रम सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया। सुरक्षा कारणों से संयंत्र परिसर में वास्तविक रॉकेट दागे नहीं गए।

10 किमी तक पहचान, 5000 मीटर तक तैनाती
‘भर्गवास्त्र’ विशेष रूप से भारतीय परिचालन परिस्थितियों के लिए तैयार की गई है। यह रेगिस्तान, मैदान और पर्वतीय क्षेत्रों में समुद्र तल से 5000 मीटर तक की ऊंचाई पर तैनात की जा सकती है। इससे देश की संपूर्ण भूमि सीमा पर हवाई खतरों से विश्वसनीय सुरक्षा मिलेगी।

इस प्रणाली में 10 किमी तक मानव रहित हवाई वाहनों का पता लगाने में सक्षम रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड निगरानी प्रणाली और निष्क्रिय रेडियो आवृत्ति सेंसर लगे हैं। ये सेंसर बहुस्तरीय लक्ष्य पहचान, ट्रैकिंग और वर्गीकरण करते हैं। इससे संचालक व्यक्तिगत ड्रोन या समन्वित ड्रोन झुंड दोनों को निशाना बना सकते हैं।

महंगा नहीं, ‘हार्ड-किल’ समाधान
जैमिंग या स्पूफिंग पर आधारित पारंपरिक ‘सॉफ्ट-किल’ प्रणालियों के विपरीत ‘भर्गवास्त्र’ इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरोधक उपायों से अप्रभावित स्वायत्त ड्रोन के खिलाफ प्रभावी ‘हार्ड-किल’ समाधान देती है। कंपनी ने इसमें स्वदेशी रूप से विकसित अनिर्देशित रॉकेट और सटीक माइक्रो-मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें बहुस्तरीय संलग्नता संरचना में लगाया गया है।

सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के संस्थापक और अध्यक्ष सत्यनारायण नुवाल ने कहा कि यह प्रणाली दुनिया की पहली पूर्ण एकीकृत, वाहन-आधारित, बहुस्तरीय काउंटर-स्वार्म ड्रोन प्रणाली में से एक मानी जाती है। उन्होंने कहा, “अजरबैजान-आर्मेनिया, रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि हर साल सक्रिय युद्ध में एक लाख से अधिक ड्रोन इस्तेमाल होते हैं। इन्हें महंगी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से नष्ट करना आर्थिक रूप से संभव नहीं है। इसी चुनौती को देखते हुए हमने ‘भर्गवास्त्र’ विकसित की।”

प्रणाली देखने आई सेना की टीम ने एसडीएएल की तकनीकी उपलब्धि की सराहना की और संतोष व्यक्त किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘भर्गवास्त्र’ स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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AI क्षमता हासिल करने का नया फॉर्मूला, 4 रास्ते तय करेंगे कंपनी की रणनीति

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  • BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला

नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।

इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।

फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –

01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।

02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।

03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।

04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।

रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।

अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।

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विधान परिषद पदवीधर चुनाव की कल मतगणना,समर्थकों का उत्साह चरम पर

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  • मौदा तहसील में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न, अरोली में 70.54%, खात में 76.70% वोटिंग

कोदामंडी – 26 October

विधान परिषद के पदवीधर मतदारसंघ के लिए हुए चुनाव की मतगणना कल मंगलवार 27 अक्टूबर को होंगी।

इससे पहले 23 अक्टूबर को हुए मतदान में मौदा तहसील में शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से वोटिंग हुई। अरोली स्थित बूथ क्रमांक 43 पर 370 में से 261 मतदाताओं ने मतदान किया। अरोली में 70.54%, खात में 76.70%, मौदा के दो मतदान केंद्रों पर क्रमशः 78.98% और 72.37% मतदान दर्ज किया गया। मौदा तहसील में कुल 1910 पदवीधर मतदाता हैं।

तहसील में पदवीधर मतदाताओं के बढ़-चढ़कर मतदान करने से उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह चरम पर है।

अरोली में महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहळे के समर्थन में लगाए गए बूथ पर महायुति के कई नेताओं ने भेंट दी। इनमें राज्यमंत्री आशीष जयसवाल, पूर्व विधायक टेकचंद सावरकर, भाजपा तहसील मौदा मंडल अध्यक्ष भगवान बावनकुळे, चाचेर मंडल अध्यक्ष रवी चव्हाण, शिवसेना तालुकाध्यक्ष प्रशांत भुरे, मौदा नगरपंचायत नगराध्यक्ष प्रसन्ना (राजा) तिडके,भाजयुमो जिल्हा उपाध्यक्ष संजू वाघमारे, पंचायत समिति के पूर्व उपसभापति खेमराज चाफले,पंढरी कडू, अरोली सर्कल के भाजपा नेता सदानंद निमकर, विष्णू देशमुख, रोशन उमप, कैलास समरीत, कोदामेंढी उपसरपंच गोपाल गिरमेकर सहित महायुति के अनेक पदाधिकारियों का समावेश था।

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धोबी-परीट समाज का संविधान चौक में अनशन का ऐलान, SC जैसी सुविधाओं की मांग

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  • डॉ. भांडे समिति की सिफारिश के बावजूद आरक्षण से वंचित होने का आरोप, 27 अक्टूबर से उपोषण और श्रृंखला उपोषण शुरू करने की घोषणा, विशेष जीआर निकालने की मांग

नागपुर, 26 अक्टूबर :

महाराष्ट्र के धोबी (परीट) समाज को आरक्षण संबंधी सुविधाएं देने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से नागपुर के संविधान चौक में उपोषण और साखळी उपोषण शुरू करने का ऐलान किया गया है। समाज की प्रमुख मांग है कि जब तक अनुसूचित जाति की सूची में समावेश नहीं होता, तब तक राज्य सरकार विशेष बाब के तौर पर SC को मिलने वाली सभी आरक्षण सुविधाएं धोबी समाज को भी दे।

मांग : राज्य शासन द्वारा गठित डॉ. भांडे समिति की सिफारिश क्रमांक 3 के अनुसार महाराष्ट्र में धोबी, परीट जाति का अनुसूचित जाति में समावेश नहीं होता, तब तक अनु. जाति को मिलने वाली सभी आरक्षण की सुविधाएं खास बाब के तौर पर राज्य शासन तुरंत जीआर निकालकर दे।

आंदोलनकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र शासन ने 5 सितंबर 2001 को पूर्व मंत्री डॉ. डी.एम. भांडे की अध्यक्षता में अभ्यास समिति बनाई थी। समिति ने धोबी समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कर धोबी के साथ ही परीट, वरठी, रजक, वढ्ढी, मडवळ, मडलेवार और धोबा जैसी तत्सम जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की थी। साथ ही समावेश होने तक विशेष तरतूद के तहत समान सुविधा देने की भी सिफारिश की थी।

समाज का दावा है कि महाराष्ट्र राज्य निर्माण से पहले भंडारा और बुलढाणा जिलों में धोबी समाज को SC की सुविधाएं मिलती थीं, जो 1 मई 1960 को राज्य बनने के बाद बंद कर दी गईं। समाज की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय में कोई मूलभूत बदलाव नहीं होने के बावजूद सुविधाएं बंद हुईं। 1976 में SC-ST के लिए क्षेत्रीय बंधन हटने के बाद भी धोबी समाज का मुद्दा लंबित रहा।

समाज ने मांग की है कि मराठा और धनगर समाज के लिए लागू समकक्ष सुविधाओं की तर्ज पर धोबी-परीट समाज के लिए भी स्वतंत्र शासन निर्णय (जीआर) निकाला जाए।

ऐतिहासिक दस्तावेजों और भांडे समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन तुरंत निर्णय ले, ताकि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान अवसर मिल सके।

नेतृत्व : समिति प्रमुख आशिषभाऊ कदम, समिति अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्के, कार्याध्यक्ष राजेंद्र खैरनार, सुधीर खैरनार, मुरलीधर शिंदे, संतोष सवतीरकर, राहुल वरणकर।

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