नागपुर में 300 से अधिक श्वान, नींद छीनी, स्वास्थ्य पर खतरा, प्रशासन के उपाय निष्फल
नागपुर शहर आज एक दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक ओर स्वच्छ भारत का सपना, दूसरी ओर सड़कों पर बढ़ती आवारा श्वानों की भीड़। _द हितवाद_ ने समय समय पर इस मुद्दे को उठाया, परन्तु समस्या घटने के स्थान पर विकराल होती जा रही है। फुटाला से शिवाजी नगर तक, वायुसेना नगर से बालोद्यान तक, हर गली-नुक्कड़ पर श्वानों के झुंड नागरिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति: आँकड़े जो डराते हैं
फुटाला-वायुसेना नगर क्षेत्र: अनुमानतः 200 से 300 आवारा श्वान। इनमें से अनेक चर्म रोग से ग्रस्त हैं। कई इतने आक्रामक हैं कि दोपहिया वाहनों और प्रातः भ्रमण करने वालों पर झपट पड़ते हैं।
बालोद्यान: विद्यालय जाने वाले बच्चों का प्रमुख खेल स्थल। यहाँ 25 से 30 श्वानों का स्थायी डेरा है। मल-मूत्र से अस्वच्छता फैलती है। अभिभावक बच्चों को भेजने से डरते हैं।
शिवाजी नगर: रात्रि 11 बजे के बाद यहाँ सोना कठिन है। 30 से 40 श्वान पूरी रात भौंकते हैं, लड़ते हैं। नागरिकों की नींद और मानसिक शांति दोनों भंग हैं।
नए श्वानों की वृद्धि: हर दो से तीन माह में 10 से 15 नए श्वान झुंड में जुड़ जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि नगर निगम का पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम केवल कागजों पर चल रहा है।
समस्या के मूल कारण* – *प्रशासनिक शिथिलता*: एबीसी कार्यक्रम के अंतर्गत नसबंदी और टीकाकरण की गति अत्यंत धीमी है। पकड़े गए श्वानों को कुछ दिन बाद उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है।- *नागरिकों का अंध-प्रेम*: कुछ नागरिक दया भाव से 4-5 श्वानों को भोजन देते हैं, परन्तु उनकी नसबंदी नहीं कराते। प्लॉट नं. 172, शिवाजी नगर का उदाहरण सामने है, जहाँ एक परिवार ने 2 से बढ़ाकर 5 श्वान कर लिए। रात में इन्हें खुला छोड़ दिया जाता है।- *पालतू स्वामियों की गैर-जिम्मेदारी*: समस्या केवल आवारा श्वानों की नहीं है। ऊँची नस्ल के श्वान पालने वाले अनेक स्वामी उन्हें सड़क, फुटपाथ और दूसरों के घर के द्वार पर ही शौच कराते हैं। हाथ में पॉलिथीन या स्कूपर रखना वे अपनी शान के विरुद्ध समझते हैं।- *आवारा पशुओं की भरमार*: शिवाजी नगर में ही लगभग एक दर्जन आवारा गायें भी घूमती हैं। श्वान का मल और गोबर मिलकर पूरे क्षेत्र को रोग का घर बना रहे हैं।
समस्या के मूल कारण
प्रशासनिकशिथिलता: एबीसी कार्यक्रम के अंतर्गत नसबंदी और टीकाकरण की गति अत्यंत धीमी है। पकड़े गए श्वानों को कुछ दिन बाद उसी क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है।
नागरिकों का अंध-प्रेम: कुछ नागरिक दया भाव से 4-5 श्वानों को भोजन देते हैं, परन्तु उनकी नसबंदी नहीं कराते। प्लॉट नं. 172, शिवाजी नगर का उदाहरण सामने है, जहाँ एक परिवार ने 2 से बढ़ाकर 5 श्वान कर लिए। रात में इन्हें खुला छोड़ दिया जाता है।
पालतू स्वामियों की गैर-जिम्मेदारी: समस्या केवल आवारा श्वानों की नहीं है। ऊँची नस्ल के श्वान पालने वाले अनेक स्वामी उन्हें सड़क, फुटपाथ और दूसरों के घर के द्वार पर ही शौच कराते हैं। हाथ में पॉलिथीन या स्कूपर रखना वे अपनी शान के विरुद्ध समझते हैं।
आवारा पशुओं की भरमार: शिवाजी नगर में ही लगभग एक दर्जन आवारा गायें भी घूमती हैं। श्वान का मल और गोबर मिलकर पूरे क्षेत्र को रोग का घर बना रहे हैं।
प्रभाव: केवल श्वान-दंश नहीं
स्वास्थ्य संकट: रेबीज के अतिरिक्त श्वानों से टिक बुखार, त्वचा रोग फैलते हैं। बच्चों और वृद्धों पर आक्रमण का खतरा सदैव बना रहता है।
मानसिक तनाव: रात भर का शोर, घर से निकलते समय हमले का डर, नागरिकों में चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ा रहा है।
स्वच्छता अभियान पर प्रश्नचिह्न: जब मुख्य सड़कों पर ही मल पड़ा हो, तो स्वच्छ भारत अभियान का क्या अर्थ रह जाता है? पर्यटन और शहर की छवि दोनों प्रभावित हो रही हैं।
दुर्घटनाएँ: अचानक सड़क पर दौड़ते श्वानों के कारण दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो देते हैं
समाधान: अब विलंब घातक
युद्ध-स्तर पर नसबंदी: प्रति प्रभाग लक्ष्य तय कर 6 माह में सभी आवारा श्वानों की नसबंदी और टीकाकरण पूरा किया जाए। निजी पशु चिकित्सालयों का सहयोग लिया जाए।
क्षेत्र-विशिष्ट आश्रय स्थल: आक्रामक और रोगग्रस्त श्वानों को शहर से बाहर बने आश्रय स्थलों में रखा जाए। गोद लेने की प्रक्रिया को सरल किया जाए।
कठोर दंड का प्रावधान: पालतू श्वानों का पंजीकरण अनिवार्य हो। सड़क पर शौच कराने वाले स्वामियों पर 5000 रुपये तक का अर्थदंड लगाया जाए। दूसरी बार पकड़े जाने पर श्वान जब्त हो।
नागरिक सहभागिता: जो लोग श्वानों को भोजन देते हैं, उन्हें निगम में पंजीकृत किया जाए। उन्हें नसबंदी कराने की जिम्मेदारी दी जाए। भोजन केवल निश्चित स्थानों पर ही दिया जाए।
जागरूकता अभियान: विद्यालयों, सोसायटियों में रेबीज, जिम्मेदार पशु-पालन और कानूनों की जानकारी दी जाए
निष्कर्ष
आवारा श्वान समस्या अब केवल पशु-प्रेम का विषय नहीं रही। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता का प्रश्न बन चुकी है। केवल निवेदन से बात नहीं बनेगी। प्रशासन को संवेदना और कठोरता का संतुलन साधना होगा। यदि आज ठोस कदम नहीं उठे, तो कल यह समस्या नियंत्रण से पूर्णतः बाहर हो जाएगी। नागरिकों का जीवन, बच्चों का बचपन और शहर का भविष्य, तीनों दाँव पर हैं।
सिलवासा फैक्ट्री पर छापा, 6.26 लाख का माल जब्त, एसपी हर्ष पोद्दार की टीम को कोर्ट ने बताया कौतुकास्पद, जिले में 662 हिस्ट्रीशीटरों की परेड, साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर सुरक्षा उपाय, अवैध शराब पर 15 केस
नागपुर ग्रामीण, 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) :
माननीय मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ ने प्रतिबंधित नायलॉन मांझे के उत्पादन और आपूर्ति के मूल स्रोत का पता लगाने पर नागपुर ग्रामीण पुलिस की खुलकर प्रशंसा की है। कोर्ट ने 23/10/2026 के आदेश में कहा कि पुलिस की जांच कौतुकास्पद है और अन्य जिलों को भी ऐसी कार्रवाई कर 29/10/2026 तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला – दिनांक 08/12/2025 को कलमेश्वर पुलिस स्टेशन अंतर्गत मौजा गोडखेरी में VR लॉजिस्टिक वेयरहाउस कंटेनर क्रमांक GJ-21-V-3238 से नायलॉन मांझा ले जाते आरोपी छविनाथ मोहन निषाद, उम्र 30, उत्तर प्रदेश को पकड़ा गया था। 9,200 नग नायलॉन मांझा प्लास्टिक चक्री कीमत 14,40,000 रुपये और कंटेनर कीमत 20,00,000 रुपये, कुल 34,40,000 रुपये का माल जब्त किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष ए. पोद्दार और अपर अधीक्षक अनिल मस्के के मार्गदर्शन में स्थानीय गुन्हे शाखा के निरीक्षक अंकुश माने और निरीक्षक स्नेहल राऊत की टीम ने गोपनीय जानकारी, तकनीकी पुरावे और बैंक लिंकेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
कलमेश्वर में दर्ज गुनाह के संबंध में दमन के औद्योगिक परिसर, डेमनी रोड दादरा और नगर हवेली के सिलवासा में मांझा निर्माता की फैक्ट्री पर छापा मारकर कुल 6 करोड़ 26 लाख 43 हजार 840 रुपये का प्रतिबंधित नायलॉन मांझा, उसे बनाने का कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई।
इसी जांच के लिए मुंबई हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) दाखिल हुई थी। कोर्ट में एसपी द्वारा दाखिल प्रतिज्ञापत्र पर यह प्रशंसा हुई।
अन्य बड़ी कार्रवाईयां –
1. साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर प्रतिबंधक उपाय – साबनेर शहर से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच मौजूद पेड़ से हादसे का खतरा था। विशेषकर रात में अंधेरा होने से या सामने से तेज रोशनी से चालक का ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका थी। एसपी हर्ष पोद्दार के निर्देश पर साबनेर पुलिस ने पेड़ के चारों ओर रिफ्लेक्टर और रेडियम पट्टी लगाई, ‘सावधान, काम शुरू है’ के सूचना फलक लगाए और वेग मर्यादित रखने की अपील की। PWD और वन विभाग से समन्वय कर पेड़ को स्थायी रूप से हटाने की कार्रवाई शुरू है।
2. घरफोड़ी के 2 गुनाह उजागर, 4.16 लाख का माल जब्त – स्थानीय गुन्हे शाखा ने दिनांक 23/10/2026 को आरोपी प्रवीण अशोक डेकाटे, उम्र 30, तिलक वार्ड मोहाड़ी, ता. मोहाड़ी, जि. भंडारा को गिरफ्तार किया। गोपनीय जानकारी मिली थी कि वह मीठा माधनी परिसर में चोरी के सोने के दागिने बेचने घूम रहा है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ में उसने मीठा परिसर में 12 दिन पहले और उमरेड में 1 महीने पहले घरफोड़ी करने की कबूली दी। पंचनामे में उसके पैंट की जेब से सोने के दागिने मिले, कुल 4,16,000 रुपये का माल जब्त। उसके खिलाफ मौदा अप.क्र. 693/2026 कलम 305(अ),331(3) और उमरेड अप.क्र. 934/2026 में केस दर्ज है।
3. खाने के अयोग्य सुपारी की 40 टन खेप जब्त – वडोदा पुलिस की कार्रवाई – वडोदा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि वडोदा हद के महालगाव-लिंगगाव के नवकार वेयरहाउस में बिना परवाना मानव सेवन के अयोग्य सुपारी चार वाहनों से लाई जा रही है। पुलिस ने जाल बिछाकर चारों वाहनों की तलाशी में करीब 40 टन सुपारी जब्त की। चारों वाहन सीज कर अन्न व औषध प्रशासन विभाग को पत्र व्यवहार किया गया है। विभाग की जांच के बाद आगे कार्रवाई होगी।
4. अवैध शराब पर 15 गुनाह – एसपी के मार्गदर्शन में 23/10/2026 को जिले भर में अवैध शराब निर्माण, बिक्री और सेवन पर कार्रवाई कर कुल 15 गुनाह दर्ज किए। खापा में 4, कळंब में 1, साबनेर में 2, उमरेड, रामटेक, बोरी, नरखेड, जलालखेड़ा में 1-1 और भिवापुर में 2 गुनाह। कार्रवाई में 32,230 मिली देशी दारू, 360 मिली विदेशी दारू, 24 लीटर मोहफूल दारू कुल 8,060 रुपये का माल जब्त कर मौके पर पंचनामा कर नष्ट किया गया।
5. अस्तित्व छुपाकर घूमने वाले पर गुनाह – अरोली पुलिस ने 23/10/2026 को पेट्रोलिंग के दौरान आरोपी तुषार उर्फ नांदूजी तुलसीदास वानखेडे, 30 वर्ष, संताजी नगर कन्हान, ता. पारशिवनी को मौजा रोंगली बार में अपना अस्तित्व छुपाकर सूर्यास्त के बाद संदिग्ध रूप से घूमते पकड़ा। नाम-पता पूछने पर उड़वा-जवाब देने पर धारा 122 महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत गुनाह दर्ज किया।
6. 662 रिकॉर्डेड अपराधियों की परेड – जिले के सभी 24 पुलिस थानों में शरीर और संपत्ति के विरुद्ध अपराध, महिला-बाल अत्याचार, अवैध शराब, जुआ आदि के 662 रेकॉर्डवरील आरोपियों की परेड ली गई। इसमें नागपुर उपविभाग में 68, उमरेड में 124, साबनेर में 136, कन्हान में 69, रामटेक में 119, काटोल में 127 आरोपियों को बुलाकर चेक किया गया और हिदायत दी गई।
कुल 2.55 लाख में से 1.65 लाख ने किया मतदान, पुरुष 69% – महिला 59%, पहले 65% का अनुमान था, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुलकर्णी ने जारी किया आंकड़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुए मतदान की अंतिम टक्केवारी जारी हो गई है। सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा अपर आयुक्त (सा.प्र.) नागपुर विभाग, प्रदीप कुलकर्णी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 64.82 प्रतिशत मतदान हुआ है।
कुल 2,55,603 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,65,672 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत महिलाओं से अधिक रहा।
जिलावार फाइनल आंकड़ा – जिला कुल मतदाता मतदान प्रतिशत नागपुर 1,44,466 87,187 60.35% – सबसे कम भंडारा 21,349 14,319 67.07% गोंदिया 22,176 15,810 71.29% वर्धा 21,742 14,861 68.35% चंद्रपुर 32,262 23,568 73.05% – सबसे ज्यादा गड़चिरोली 13,608 9,927 72.95% कुल2,55,6031,65,67264.82% जेंडर वाइज विश्लेषण –
पुरुष मतदाता : 1,47,280 में से 1,01,672 ने किया मतदान – 69.03%
महिला मतदाता : 1,08,301 में से 63,999 ने किया मतदान – 59.09%
अन्य : 22 में से 1 – 4.55%
पहले अनौपचारिक तौर पर 65% मतदान का अनुमान लगाया जा रहा था, जो फाइनल आंकड़े में 64.82% पर आकर स्थिर हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य 50-55% के औसत से काफी अधिक है।
सबसे कम मतदान नागपुर जिले में 60.35% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05% दर्ज किया गया। गोंदिया 71.29% और गड़चिरोली 72.95% के साथ दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे।
अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां इस बढ़े हुए मतदान का असर भाजपा-कांग्रेस दोनों के भाग्य पर तय होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।
2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।
अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
प्रबंधन का बयान प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है। निदेशकडॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे। निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।
न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।