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मेट्रो फेज-III : सदर में अंडरग्राउंड, कोराडी तक बिना ड्राइवर दौड़ेगी मेट्रो

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  • 11.5 किमी कस्तूरचंद पार्क-कोराडी कॉरिडोर वाया मानकापुर पर RITES कर रही DPR तैयार, अप्रैल 2027 तक प्लानिंग पूरी होने की उम्मीद, CBTC ग्रेड-4 ऑटोमेशन से UTO का प्रस्ताव

नागपुर,16 सितंबर 2026 :

शहर के अगले मेट्रो विस्तार में रेलवे शहर के सबसे व्यस्त हिस्सों में से एक के नीचे जा सकती है और ट्रेन खुद एक कदम और आगे बढ़कर बिना ड्राइवर के चल सकती है। प्रस्तावित फेज-III के तहत महामेट्रो सदर से गुजरने वाले अंडरग्राउंड सेक्शन और कोराडी तक प्रस्तावित 11.5 किमी के कस्तूरचंद पार्क-कोराडी कॉरिडोर वाया मानकापुर पर अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन (UTO) की संभावना तलाश रही है।
यह शहर के मेट्रो नेटवर्क के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव होगा।

सदर में क्यों अंडरग्राउंड का प्रस्ताव –

सदर के लिए अंडरग्राउंड प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, जहां मौजूदा सड़क ढांचा, जिसमें फ्लायओवर भी शामिल हैं, पहले से मौजूद चीजों को बिना डिस्टर्ब किए एक लंबा एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाना मुश्किल बनाता है। ऊपर के इंफ्रास्ट्रक्चर को हटाने या उसमें बड़ा बदलाव करने के बजाय मेट्रो उसके नीचे से गुजर सकती है।

प्रस्तावित अंडरग्राउंड अलाइनमेंट के कस्तूरचंद पार्क के आसपास के एलिवेटेड हिस्से से जुड़ने की उम्मीद है, जिसमें इस क्षेत्र में एक नया अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित है और अंडरग्राउंड सेक्शन मौजूदा कस्तूरचंद पार्क स्टेशन से शुरू होगा।

DPR का ठेका जुलाई 2026 में RITES को दिया गया था, और यह प्रक्रिया लगभग नौ महीने में पूरी होने की उम्मीद है। प्लानिंग के पूरा होने की संभावित तिथि अप्रैल 2027 के आसपास है। तब तक सदर अंडरग्राउंड स्ट्रेच एक प्रस्ताव ही बना रहेगा, जिसकी तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता स्थापित की जानी है।

कोराडी तक ड्राइवरलेस मेट्रो की तैयारी –

ड्राइवरलेस प्रस्ताव की जांच भी कोराडी की ओर जाने वाले इसी फेज-III कॉरिडोर पर की जा रही है। UTO के तहत ट्रेनें बिना ड्राइवर के चल सकती हैं। नागपुर मेट्रो वर्तमान में ग्रेड-3 ऑटोमेशन के साथ CBTC-आधारित सिग्नलिंग का उपयोग करती है। ट्रेन की आवाजाही और कई परिचालन कार्य स्वचालित हैं, लेकिन एक प्रशिक्षित ऑपरेटर बोर्ड पर रहता है। ग्रेड-4 ऑटोमेशन से ऑनबोर्ड ड्राइवर की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जिसमें ट्रेन की आवाजाही को सिग्नलिंग और ऑपरेशंस सिस्टम के माध्यम से नियंत्रित और मॉनिटर किया जाएगा।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पूरी तरह से नए कॉरिडोर पर UTO शुरू करना अधिक व्यावहारिक है क्योंकि ड्राइवरलेस ऑपरेशन के लिए सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम को एक साथ काम करने के लिए डिजाइन करने की आवश्यकता होती है। किसी ऑपरेटिंग कॉरिडोर को रेट्रोफिट करने के लिए कई परस्पर जुड़ी प्रणालियों में बदलाव की आवश्यकता होगी। इसलिए प्रस्तावित कोराडी कॉरिडोर शुरू से ही इन आवश्यकताओं को लाइन में बनाने का अवसर प्रदान करता है।

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नागपुर पदवीधर चुनाव : गठ्ठा लगाने की प्राथमिक मतगणना पूरी, अब वरीयता मतों की गिनती शुरू

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  • पहले राउंड में 84 हजार मतपत्रों की गिनती, हर टेबल पर 25 के 40 बंडल यानी 1000 वोट गिने जाएंगे

नागपुर, 27 अक्टूबर :

नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ चुनाव की प्राथमिक मतगणना का पहला चरण पूरा हो गया है। प्रशासन के अनुसार मतपत्रिकाओं के गठ्ठे लगाने (बंडल बनाने) की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

सभी मतपत्रिकाओं की सरमिसळ (आपस में मिलाने) का काम पूरा होने के बाद अब प्रत्यक्ष पसंतीक्रम यानी वरीयता के आधार पर मतों की गिनती शुरू हो रही है।

जानकारी के अनुसार पहले राउंड में प्रत्येक टेबल पर 25 मतपत्रिकाओं के 40 गठ्ठे बनाए गए हैं। इस हिसाब से एक टेबल पर 1000 मतपत्रिकाओं की गिनती होगी। कुल 84 टेबलों पर पहले राउंड में 84 हजार मतपत्रिकाओं की गिनती की जाएगी। मानकापुर इनडोर स्टेडियम में कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना जारी है।

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अदानी-अंबानी को बचाने के लिए ठाकरे बंधु और शरद पवार आगे – सुजात आंबेडकर का बड़ा आरोप

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  • सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने के 500 रुपये, अब डिलीट करने के भी पैसे मिलते हैं – राज ठाकरे पर तंज, दुष्काल को लेकर प्रकाश आंबेडकर ने सरकार को दिया आंदोलन का अल्टीमेटम

वाशिम / मुंबई, 27 अक्टूबर :

वंचित बहुजन आघाडी के नेता सुजात आंबेडकर ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राकांपा (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार पर बड़ा हमला बोला है। वाशिम में एक सभा को संबोधित करते हुए सुजात ने आरोप लगाया कि अदानी और अंबानी को बचाने के लिए ठाकरे परिवार और शरद पवार हमेशा आगे रहते हैं।

500 रुपये वाला नया खुलासा –

सुजात आंबेडकर ने कहा – “हमें पता था कि सोशल मीडिया पर पोस्ट टाकने के लिए 500 रुपये मिलते हैं। लेकिन अब पता चला है कि पोस्ट डिलीट करने के लिए भी पैसे मिलते हैं, यह नया प्रकार सामने आया है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई के एक बड़े नेता ने सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट मुंबई पुलिस या गौतम अदानी के कार्यालय से फोन आने के बाद डिलीट कर दी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और कांग्रेस के कुछ लोग 500 रुपये लेकर पोस्ट करते हैं, कमेंट करते हैं और दूसरों को ट्रोल करते हैं।

सुजात ने कहा कि महापालिका चुनाव के समय राज ठाकरे ने अपनी आघाडी बनाई थी। इस आघाडी से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की राकांपा पर भी निशाना साधा।

सुजात के अनुसार, इस आघाडी के नेताओं ने गुजराती उद्योगपतियों के विरोध में भूमिका ली थी, लेकिन राज ठाकरे का गौतम अदानी के घर आना-जाना है। धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट अदानी को कैसे दिया जाए, इसके लिए ठाकरे परिवार प्रयत्नशील है। गणेशोत्सव के समय ये नेता एक-दूसरे के घर जाते हैं। अदानी और अंबानी को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और शरद पवार हमेशा आगे रहते हैं।

दुष्काल पर प्रकाश आंबेडकर की चेतावनी – पानी-अनाज दो वरना आंदोलन –

दूसरी ओर, वंचित के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने राज्य में दुष्काल की स्थिति को लेकर सरकार को कड़ा इशारा दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति गंभीर है और दिवाली के बाद यह और ज्यादा बिगड़ने की संभावना है।

प्रकाश आंबेडकर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने नागरिकों के लिए पीने के पानी और अन्न-धान्य की उचित व्यवस्था नहीं की, तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिल्हा प्रमुखों और भाजपा के जिल्हाध्यक्षों के घरों के सामने कतार में खड़े होकर भोजन और पानी की मांग करते हुए तीव्र आंदोलन किया जाएगा।

मतदान का महत्व और ओबीसी वोट –

प्रकाश आंबेडकर ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों की याद दिलाते हुए कहा कि मतदान व्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रभावी अधिकार है। जब तक यह अधिकार नागरिकों के हाथ में है, तब तक कोई भी उन्हें गुलाम नहीं बना सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म और भगवान के नाम पर ओबीसी के वोट लिए गए। उसके बाद मनोज जरांगे पाटिल को ओबीसी की छाती पर बिठाने का काम सरकार ने ही किया। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव में पहले ओबीसी उम्मीदवार आसानी से चुनकर आते थे, लेकिन इस बार इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लाया गया है।

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शेतकरी हिंसा का रास्ता न अपनाएं, संविधान के रास्ते लड़ें – किशोर तिवारी

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  • प्रकाश आंबेडकर का हिंसा का सुझाव गलत, शेतकरी नालायक नहीं सरकार की नीतियां नालायक हैं – विदर्भ के वरिष्ठ शेतकरी नेता की दो टूक प्रतिक्रिया

नागपुर / यवतमाल, 27 अक्टूबर :

महाराष्ट्र में दुष्काळ के भीषण संकट के बीच वंचित बहुजन आघाडी के अध्यक्ष एड. प्रकाश उर्फ बाळासाहेब आंबेडकर के विवादित बयान पर विदर्भ के ज्येष्ठ शेतकरी नेता किशोर तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तिवारी ने कहा है कि शेतकरियों को कानून हाथ में लेने और हिंसा का रास्ता अपनाने की सलाह पूरी तरह गलत है।

किशोर तिवारी ने कहा – “शेतकरियों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को शेतकरी चुनकर नहीं देते, यह खंत कुछ हद तक सही है। लेकिन शेतकरियों को नालायक कहना, कानून हाथ में लेने की सलाह देना और आत्महत्या से पहले राजनीतिक नेताओं को मारने की भाषा बोलना किसी भी हालत में समर्थनीय नहीं है।”

प्रकाश आंबेडकर ने क्या कहा था ?
प्रकाश आंबेडकर ने हाल ही में कहा था कि शेतकरी अपने लिए लड़ने वालों को वोट नहीं देते और हताशा में आत्महत्या करने से पहले नेताओं को मारना चाहिए। इसी बयान पर विवाद खड़ा हो गया है।

किशोर तिवारी का जवाब – शेतकरी नालायक नहीं, व्यवस्था नाकर्ता है

तीन दशकों से विदर्भ में शेतकरी आत्महत्याओं के खिलाफ लड़ रहे किशोर तिवारी ने कहा –

“मैं दावे के साथ कहता हूं, शेतकरी नालायक नहीं है। शेतकरी कष्टकरी है, ईमानदार है, स्वाभिमानी है। नालायक है तो शेतकरी को न्याय देने में फेल हुई सरकारें और नाकर्ता है तो शेतकरी के श्रम का मोल न देने वाली आर्थिक व्यवस्था। शेतकरी साल भर धूप में जलता है, लेकिन उत्पादन खर्च बढ़ता है, भाव नहीं मिलता, बीमा नहीं मिलता, कर्जमाफी के वादे पूरे नहीं होते।”

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद शेतकरियों ने कांग्रेस को आजमाया, फिर भाजपा को मौका दिया, लेकिन सत्ता बदली, शेतकरी की समस्या वहीं रही। इसलिए मतदान पर शेतकरी को दोष देने से बेहतर है कि राजनीतिक दल आत्मपरीक्षण करें कि उन्होंने शेतकरी का विश्वास क्यों खोया।

उन्होंने रविकांत तुपकर जैसे आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क पर उतरने, लाठियां खाने वालों को चुनाव में हराया जाना महाराष्ट्र की दुखद हकीकत है, लेकिन इसके पीछे जातीय समीकरण, धर्म का ध्रुवीकरण और पैसे का खेल भी जिम्मेदार है।

बाबासाहेब के नातू से हिंसा की उम्मीद नहीं –

किशोर तिवारी ने कहा, “संविधान के निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने इस देश को संविधान, कानून का राज और लोकतंत्र का रास्ता दिखाया। अन्याय के खिलाफ लड़ाई लोकतांत्रिक दायरे में होनी चाहिए। ऐसे महामानव के नातू बाळासाहेब आंबेडकर का शेतकरियों को हिंसा की ओर ले जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। नेताओं की हत्या से शेतकरी के सवाल हल नहीं होंगे, बल्कि गरीब शेतकरी परिवार उजड़ जाएंगे।”

उन्होंने अपील की – “शेतकरी के हाथ में हथियार नहीं, संविधान होना चाहिए। हिंसा की मशाल नहीं, लोकतांत्रिक जनआंदोलन का झंडा होना चाहिए।”

शेतकरी भाइयों से भावुक अपील – आत्महत्या मत करो, जियो –

तिवारी ने विदर्भ के हजारों परिवारों की पीड़ा का हवाला देते हुए कहा – “मैंने कर्ता पुरुष को खोने के बाद उसकी पत्नी, बच्चों और बूढ़े मां-बाप की बेबसी देखी है। इसलिए हाथ जोड़कर कहता हूं, कितना भी कर्ज हो, कितना भी भीषण दुष्काळ हो, फसल बर्बाद हो गई हो, आत्महत्या का विचार मत करो। तुम्हारी जान किसी भी कर्ज से अनमोल है। तुम जिओगे तो लड़ पाओगे, संगठित होओगे तो सरकार को नीति बदलने पर मजबूर कर पाओगे।”

दुष्काळ में 7 प्रमुख मांगें –

किशोर तिवारी ने इस संकट में सरकार के सामने 7 मांगें रखी हैं –

  1. दुष्काळग्रस्त शेतकरी को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये मदद दो, दो हेक्टेयर की सीमा मत लगाओ।
  2. संपूर्ण कर्जमाफी कर नया फसल कर्ज दो।
  3. बैंक, निजी साहूकार और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की जबरन वसूली तुरंत रोको।
  4. कपास, सोयाबीन, तुअर सहित सभी फसलों को उत्पादन खर्च पर आधारित हमीभाव और सरकारी खरीदी की गारंटी दो।
  5. फसल बीमा का बकाया मुआवजा तुरंत दो।
  6. हर दुष्काळग्रस्त गांव में पीने का पानी, जानवरों के लिए चारा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधा दो।
  7. आत्महत्याग्रस्त परिवारों का पुनर्वसन, विधवाओं की आर्थिक सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार ले।

प्रकाश आंबेडकर को खुला आह्वान –

अंत में किशोर तिवारी ने प्रकाश आंबेडकर से कहा – “बाळासाहेब, आपकी संतप्त भावना हम समझते हैं, लेकिन शेतकरी को दोष देने और हिंसा की भाषा का समय नहीं है। आप बाबासाहेब के संविधान के वारिस हो, उसी संविधान का झंडा लेकर विदर्भ, मराठवाड़ा और पूरे महाराष्ट्र के शेतकरी, मजदूर, आदिवासी, दलित, महिला बचत गट के साथ अहिंसक, लोकतांत्रिक राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा करो। सभी संगठनों को एक मंच पर लाने की पहल करो।”

उन्होंने नारा दिया – “शेतकरी को मरने की सलाह नहीं, जीने का अधिकार चाहिए! हिंसा का रास्ता नहीं, न्याय दिलाने वाला जन आंदोलन चाहिए!”

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