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कलमेश्वर बना ‘न्यू नागपुर’

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  • सैटेलाइट सिटी के दर्जे के साथ अडाणी का ₹70,000 करोड़ का मेगा प्लांट, 30,000 नौकरियों से बदलेगी विदर्भ की किस्मत,नागपुर से सिर्फ 20 किमी दूर लिंगा में लगेगा देश का सबसे बड़ा कोल गैसीफिकेशन प्लांट, हॉस्पिटल-होटल-टाउनशिप के लिए ₹1,850 से शुरू हुए कमर्शियल प्लॉट; निवेशकों के लिए खुला ‘गोल्डन गेटवे’

कलमेश्वर/नागपुर, 02 जून 2026

नागपुर की सीमा से लगे कलमेश्वर की तकदीर रातोंरात बदल गई है। ‘नागपुर की सैटेलाइट सिटी’ का आधिकारिक दर्जा मिलने के साथ ही अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यहां लिंगा गांव में ₹70,000 करोड़ का इंटीग्रेटेड कोल गैसीफिकेशन प्लांट लगाने का ऐलान किया है। इस एक प्रोजेक्ट से 30,000 से ज्यादा लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा। अडाणी प्लांट के साथ कलमेश्वर MIDC, गोंडखैरी लॉजिस्टिक पार्क और JSW स्टील जैसे इंडस्ट्रियल हब की वजह से यहां हॉस्पिटल, होटल, ऑफिस और रेसिडेंशियल टाउनशिप की मांग आसमान छू रही है। नेशनल हाईवे टच प्राइम लोकेशन पर ₹1,850 प्रति वर्ग फीट से शुरू कमर्शियल प्लॉट और ₹3,200 प्रति वर्ग फीट के हॉस्पिटल-होटल प्लॉट बिल्डर्स और नए उद्यमियों के लिए ‘गोल्डन अपॉर्चुनिटी’ बनकर उभरे हैं।

क्यों खास है कलमेश्वर?

  • इंडस्ट्रियल बूम: अडाणी के ₹70,000 करोड़ के प्लांट से 30,000+ वर्कर्स की फौज आएगी। कर्मचारियों के लिए घर, स्कूल और हेल्थकेयर की भारी डिमांड तय है।
  • जीरो माइल से 20 मिनट:नागपुर-दिल्ली और नागपुर-मुंबई हाईवे की सीधी कनेक्टिविटी। जीरो माइल से सिर्फ 20 किमी, यानी 20 मिनट की ड्राइव।
  • मेडिकल हब की तैयारी: कलमेश्वर क्षेत्र में एक भी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल नहीं है। VIP रोड सेलू पर नेशनल हाईवे टच हॉस्पिटल प्लॉट ₹3,200 प्रति वर्ग फीट में उपलब्ध।
  • होटल बिजनेस का हब : कॉर्पोरेट गेस्ट, बिजनेस ट्रैवलर्स और 30,000 इंडस्ट्रियल वर्कर्स के चलते होटल इंडस्ट्री के लिए 100% ऑक्यूपेंसी की गारंटी।
  • पहली बड़ी टाउनशिप: अफोर्डेबल लिविंग के लिए 20.6 एकड़ में कलमेश्वर की पहली बिग रेसिडेंशियल टाउनशिप लॉन्च। ₹1,850 प्रति वर्ग फीट के प्री-लॉन्च रेट में 1250, 1371, 1645 वर्ग फीट के प्लॉट। क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, गार्डन वॉक के साथ।

निवेशकों के लिए संदेश

आज इन्वेस्ट करें, कल हाई रिटर्न पाएं। कलमेश्वर अब सिर्फ हाई ग्रोथ एरिया नहीं, ‘हाई रिटर्न अस्योर्ड’ डेस्टिनेशन बन चुका है। कॉर्पोरेट ऑफिस, इंडस्ट्री और लॉजिस्टिक पार्क से घिरा यह क्षेत्र लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और रेंटल इनकम की फुल गारंटी दे रहा ह

साइट विजिट के लिए संपर्क करें : 9373935815

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‘मुख्यमंत्री सौर कृषी वाहिनी २.०’ अंतर्गत नागपूर जिल्ह्यात 50 मेगावॅटची स्थापित क्षमता यशस्वीरीत्या साध्य

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नागपूर,18 ऑक्टोबर 2026: महाराष्ट्राच्या कृषी क्षेत्राला शाश्वत आणि आत्मनिर्भर ऊर्जेची जोड देण्यासाठी राज्य शासनाने सुरू केलेल्या अतिशय महत्त्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सौर कृषी वाहिनी योजना २.०’ (MSKVY २.०) अंतर्गत नागपूर जिल्ह्याने 50 मेगावॅटचा महत्त्वपूर्ण टप्पा पार केला आहे. जिल्ह्यात 50 मेगावॅट क्षमतेचे सौर ऊर्जा प्रकल्प यशस्वीरीत्या प्रस्थापित करून महावितरण आणि स्थानिक प्रशासनाने ग्रामीण भागात ऊर्जा क्रांतीची नवी पहाट आणली आहे. यामुळे जिल्ह्यातील सुमारे 16 हजार शेतकऱ्यांना आता रात्रीच्या अंधारात किंवा बिकट परिस्थितीत सिंचन करण्याची गरज उरणार नसून, त्यांना दिवसा आणि पूर्ण दाबाने अखंडित वीजपुरवठा उपलब्ध होण्याचा मार्ग सुकर झाला आहे.

गेल्या अनेक दशकांपासून शेतीसाठी रात्रीच्या वेळी मिळणाऱ्या विजेमुळे शेतकऱ्यांना वन्यजीवांचा धोका, साप-विंचवांची भीती आणि रात्रीच्या वेळी शेतात पाणी भरताना अनेक संकटांचा सामना करावा लागत होता. मात्र, राज्य सरकारच्या या विशेष उपक्रमामुळे ही अडचण कायमची दूर होण्याच्या दिशेने नागपूर जिल्ह्याने भक्कम पाऊल उचलले आहे. महावितरणच्या उपकेंद्रांनजीक विकेंद्रित स्वरूपात उभारण्यात आलेल्या या 10 सौर ऊर्जा प्रकल्पांमुळे 50 मेगावॅटची हरित ऊर्जा थेट कृषी वाहिन्यांमध्ये जोडली जात आहे. यामुळे वीज वहनादरम्यान होणारा अपव्यय टाळता येत असून स्थानिक पातळीवरच गुणवत्तेचा वीजपुरवठा करणे शक्य झाले आहे.

या योजनेची अंमलबजावणी केवळ विजेपुरती मर्यादित न राहता ती ग्रामीण अर्थव्यवस्थेला उभारी देणारी ठरत आहे. सौर प्रकल्पांसाठी जमिनी देणाऱ्या स्थानिक शेतकऱ्यांना आणि जमीन मालकांना या माध्यमातून प्रतिहेक्टरी आकर्षक वार्षिक भाडेतत्त्वाचा निश्चित मोबदला मिळत आहे. नागपूर जिल्ह्यातील या प्रकल्पांमुळे शेतकऱ्यांना एक हक्काचा, सुरक्षित उत्पन्नाचा स्रोत मिळाला आहे. 50 मेगावॅटची ही प्रस्थापित क्षमता साध्य करण्यासाठी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या मार्गदर्शनात आणि अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) आभा शुक्ला आणि मुख्यमंत्री यांचे अपर मुख्य सचिव आणि महावितरणचे अध्यक्ष व व्यवस्थापकीय संचालक लोकेश चंद्र यांच्या नेतृत्वात नागपूर जिल्ह्याचे मुख्य अभियंता राजेश नाईक व नागपूर ग्रामीण मंडळाचे अधीक्षक अभियंता संजय वाकडे, नागपूर जिल्हा प्रशासन, , सौर ऊर्जा विकासक आणि स्थानिक शेतकऱ्यांचा समन्वय अत्यंत महत्त्वाचा ठरला आहे.

पर्यावरणाच्या दृष्टीनेही हा प्रकल्प नागपूर जिल्ह्यासाठी वरदान ठरत आहे. पारंपरिक औष्णिक विजेवरील अवलंबित्व कमी करून स्वच्छ, हरित आणि प्रदूषणमुक्त सौर विजेचा वापर वाढल्याने हजारो टन कार्बनचे उत्सर्जन रोखण्यास मदत होणार आहे. ‘मुख्यमंत्री सौर कृषी वाहिनी २.०’ ही केवळ वीज निर्मितीची योजना नसून, ती बळीराजाच्या जीवनात प्रकाश आणि समृद्धी आणणारी एक सामाजिक-आर्थिक क्रांती ठरत आहे. नागपूर जिल्ह्यातील येनवा, कचारीसावंगा, भारसिंगी, सावरगाव, कळमेशवर, कुही, रामटेक, चिकलापार, उमरेड आणि वडवहिरा येथील 33/11 केव्ही उपकेंद्रावर उभारण्यात आलेल्या या अकूण 50 मेगावॅट सौर ऊर्जा निर्मिती प्रकल्पाचे हे यश नागपूर जिल्ह्याला ऊर्जेच्या बाबतीत स्वावलंबी बनवणारे असून, यामुळे सुमारे 16 हजार शेतक-यांना सींचनासाथी दिवसा वीज उपलब्ध झाली अहे. आगामी काळात 100 टक्के कृषी वाहिन्यांचे सौरीकरण करण्याच्या महावितरणच्या ध्येयाला यामुळे मोठी गती मिळाली आहे.

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राज्य के उपक्रम और विभाग अब निजी बैंकों में भी कर सकेंगे लेन-देन : सरकार ने दी अनुमति

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  • मार्च 2020 के प्रतिबंध के बाद बड़ा बदलाव, सरप्लस फंड पर FD के लिए शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों को मिली मंजूरी, HDFC-ICICI D-SIB घोषित, निजी बैंक की नेट वैल्यू 16 हजार करोड़ और राज्य सहकारी बैंक की 4 हजार करोड़ की शर्त

नागपुर/मुंबई,16 सितंबर 2026 :

महाराष्ट्र सरकार ने अब राष्ट्रीयकृत बैंकों से आगे देखते हुए राज्य के सभी उपक्रमों और विभागों को निजी क्षेत्र के बैंकों में बैंकिंग लेन-देन और अतिरिक्त राशि की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) खोलने की अनुमति दे दी है। वित्त विभाग के एक आदेश में यह जानकारी दी गई है।

सरकार ने शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों और महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में लेन-देन की छूट दी है। इसके लिए एकमात्र शर्त यह है कि निजी बैंक का नेट वैल्यूएशन 16,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए, जबकि स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक का नेट वर्थ कम से कम 4,000 करोड़ रुपये होना चाहिए। यह मंजूरी केवल चालू वित्तीय वर्ष के लिए है और उपक्रमों व कार्यालयों के वित्तीय प्रबंधन के अनुभव के आधार पर इसकी समीक्षा की जाएगी।

मार्च 2020 का प्रतिबंध अब ढीला –

बता दें कि मार्च 2020 में जारी अधिसूचना ने राज्य संस्थाओं की पूंजी की आवाजाही को राष्ट्रीयकृत बैंकों के नेटवर्क के बाहर प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन निजी बैंकों के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने अब उपक्रमों को सर्वोत्तम रिटर्न पाने की अनुमति देने का फैसला किया है।

नई अधिसूचना में विस्तार से बताया गया है कि IDBI का स्वामित्व केंद्र सरकार के पास है, उसके पास 97.34 प्रतिशत शेयर हैं, इसलिए सरकारी लेन-देन और उपक्रम उसमें अपनी राशि जमा कर सकते हैं।

सरकार का यह उदारीकरण का फैसला केंद्र सरकार की हाल की अधिसूचनाओं पर आधारित है, जिसमें राज्यों को राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ-साथ शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों के साथ बैंकिंग पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। इससे बैंकिंग क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और सरकारी संस्थाओं को इन बैंकों से नई सेवाएं भी मिल सकेंगी। अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रीयकृत बैंकों की कार्यप्रणाली काफी पुराने ढर्रे की हो गई है, जबकि निजी बैंक अभिनव वित्तीय उत्पाद पेश कर रहे हैं।

शर्तें और पात्र बैंक –

बैंकिंग लेन-देन और जमा को उदार बनाते हुए सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि चयनित बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के किसी प्रतिबंध का सामना न कर रहा हो। इसी तरह निजी क्षेत्र के बैंकों को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) का सामना नहीं करना चाहिए।

सरकार ने पात्र शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की सूची जारी की है और RBI के अनुसार HDFC और ICICI को डोमेस्टिकली सिस्टमैटिकली इंपॉर्टेंट बैंक (D-SIB) के रूप में सूचीबद्ध किया है।

जहां तक महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक का सवाल है, सरकार ने कहा है कि ऐसा बैंक पिछले पांच वर्षों से मुनाफे में होना चाहिए और उसके पास ‘A’ सर्टिफिकेट होना चाहिए। पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio) 12 प्रतिशत और उससे अधिक होना चाहिए। बैलेंस शीट के अनुसार वर्ष 2025-26 के लिए महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा धारित शुद्ध संपत्ति मूल्य 5746.61 करोड़ रुपये है।

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सोलर बिजली के ToD नियम से होटल इंडस्ट्री परेशान – होटल संचालकों ने सरकार से नीति में बदलाव की मांग की

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  • सुबह 9 से शाम 5 बजे का स्लॉट अव्यवहारिक – होटलों में सिर्फ 5% बिजली दिन में खर्च होती है, 92% सोलर बिजली MSEDCL को जाती है फिर भी खुद की बिजली पर 1.92 रुपये प्रति यूनिट देना अनुचित, होटल प्रीतम, होटल अशोक और एनराइज बाय सयाजी के डायरेक्टर्स ने जताया विरोध, रात 10 से सुबह 10 बजे तक अलग ToD विंडो की मांग

नागपुर, 9 सितंबर 2026 : नागपुर की होटल इंडस्ट्री ने बिजली के मौजूदा टाइम-ऑफ-डे (ToD) टैरिफ फ्रेमवर्क को लेकर कड़ी आलोचना की है। होटल संचालकों का कहना है कि सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक का मौजूदा विंडो अव्यवहारिक और आर्थिक रूप से नुकसानदायक है। द हितवाद में प्रकाशित खबर के अनुसार होटल इंडस्ट्री ने सोलर पावर ToD घंटों में बदलाव की मांग की है।

क्या है पूरा मामला ?

शहर के प्रमुख होटल संचालक और होटल प्रीतम, गांधीबाग के डायरेक्टर तेजिंदर सिंह रेनू ने कहा – “होटल इंडस्ट्री ने सरकार की नीतियों पर भरोसा करके सोलर एनर्जी सिस्टम में बड़ा निवेश किया था। बीच में नियम बदलना और उसे पिछली तारीख से लागू करना भरोसे का उल्लंघन है। इससे निवेशकों में बहुत गलत संदेश जाता है, जिन्होंने अच्छी नीयत से ग्रीन एनर्जी को सपोर्ट किया था।”

रेनू के बिजली बिलों के विश्लेषण के अनुसार होटलों की कुल बिजली खपत का सिर्फ लगभग 5 प्रतिशत ही मौजूदा ToD घंटों यानी सुबह 9 से शाम 5 बजे के बीच होता है। जबकि होटलों की सबसे ज्यादा बिजली की खपत शाम और रात में होती है। इसलिए उनका सोलर उत्पादन उनकी वास्तविक मांग से मेल नहीं खाता।

नतीजा यह है कि नागपुर की होटल इंडस्ट्री का अनुमान है कि रूफटॉप सोलर से बनने वाली बिजली का सिर्फ 8 प्रतिशत ही होटल खुद इस्तेमाल कर पाते हैं, जबकि लगभग 92 प्रतिशत बिजली MSEDCL को एक्सपोर्ट हो जाती है।

उन्होंने बताया कि स्थिति तब और अनुचित हो जाती है जब होटलों को अपनी खुद की सोलर निवेश से पैदा की गई बिजली पर 1.92 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता है, जबकि उसका बड़ा हिस्सा ग्रिड को चला जाता है।

क्या मांग कर रहे हैं होटलियर्स ?

उन्होंने राज्य सरकार से होटलों पर लागू ToD फ्रेमवर्क की तुरंत समीक्षा करने का अनुरोध किया है। उनका सुझाव है कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए एक अलग ToD विंडो होनी चाहिए, जो रात 10 बजे से सुबह 10 बजे तक हो, जो होटलों के वास्तविक खपत पैटर्न के ज्यादा करीब होगी।

शहर के एक और प्रमुख होटल संचालक और होटल अशोक, लक्ष्मी नगर के डायरेक्टर संजय गुप्ता ने कहा कि बिजली टैरिफ और ToD संरचना को महाराष्ट्र टूरिज्म पॉलिसी 2024 के उद्देश्यों के साथ जोड़ा जाना चाहिए, खासकर निवेश, प्रतिस्पर्धा और टिकाऊ टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने पर जोर देना चाहिए।

गुप्ता ने कहा – “एक तर्कसंगत ToD नीति न केवल होटलों को राहत देगी बल्कि महाराष्ट्र के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को भी मजबूत करेगी। उद्देश्य MSEDCL, उपभोक्ताओं और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के लिए विन-विन फ्रेमवर्क बनाना होना चाहिए।”

बजाज नगर स्थित एनराइज बाय सयाजी के डायरेक्टर अनिल नायर ने भी तत्काल नीति समीक्षा की अपील की है ताकि ToD सिस्टम व्यावहारिक, पारदर्शी बने और होटलों की ऑपरेशनल हकीकत और राज्य के टूरिज्म और रिन्यूएबल एनर्जी उद्देश्यों के अनुरूप हो।

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