सिक्स-लेन नागपुर-ग्वालियर इकोनॉमिक कॉरिडोर और नागपुर-हैदराबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर का DPR तैयार, समृद्धि एक्सप्रेस-वे से जुड़कर तेलंगाना-कर्नाटक-बेंगलुरु तक बनेगा हाई-स्पीड नेटवर्क, कृषि-फार्मा-लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा
नागपुर,16 सितंबर 2026 :
नागपुर से ग्वालियर या बेंगलुरु तक यात्रा आने वाले वर्षों में काफी तेज होने वाली है। मध्य भारत से लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को बदलने वाले दो बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट प्लानिंग स्टेज में हैं।
इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से नागपुर की भारत के भौगोलिक परिवहन केंद्र के रूप में स्थिति और मजबूत होगी।
1. नागपुर-ग्वालियर सिक्स-लेन इकोनॉमिक कॉरिडोर –
प्रस्तावित नागपुर-ग्वालियर इकोनॉमिक कॉरिडोर को सिक्स-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे के रूप में बनाया जाएगा। इसका विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) NHAI के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा तैयार किया जा रहा है।
यह कॉरिडोर नागपुर को ग्वालियर से बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, भोपाल, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी और मुरैना होते हुए जोड़ेगा। यह कॉरिडोर उत्तर में आगरा-ग्वालियर हाईवे से और दक्षिण में नागपुर-मुंबई हाईवे नेटवर्क से जुड़ेगा।
प्रारंभिक योजना दस्तावेजों के अनुसार यह कॉरिडोर मध्यप्रदेश में आर्थिक और लॉजिस्टिक्स रीढ़ के रूप में काम करेगा, जिसके किनारे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब प्रस्तावित हैं। इससे कृषि उत्पाद, फार्मास्युटिकल्स, मसाले, फल और सब्जियों को प्रमुख खपत केंद्रों और निर्यात गेटवे तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा।
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि हाईवे को लगभग 50-60 किलोमीटर के अंतराल पर सीमित एंट्री-एग्जिट प्वाइंट के साथ प्लान किया जा रहा है, जिससे औसत गति अधिक रहेगी। इससे ग्वालियर और नागपुर के बीच यात्रा का समय मौजूदा कई शहरी केंद्रों से गुजरने वाले हाईवे रूट की तुलना में काफी कम हो जाएगा।
2. नागपुर-हैदराबाद हाई-स्पीड दक्षिणी कॉरिडोर –
इसी के साथ नागपुर को हैदराबाद और आगे दक्षिण भारत से जोड़ने वाले नए हाई-स्पीड कॉरिडोर का DPR भी तैयार किया जा रहा है। NHAI अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे को समृद्धि एक्सप्रेस-वे के चंद्रपुर की ओर नियोजित विस्तार से जोड़ा जा सकता है, जिससे तेलंगाना और कर्नाटक की ओर एक निरंतर हाई-स्पीड रूट बनेगा।
यह दक्षिणी कॉरिडोर यात्री और माल परिवहन के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकता है। आगामी हाईवे परियोजनाओं के साथ एकीकृत होने पर नागपुर और हैदराबाद के बीच सड़क यात्रा का समय तेजी से घटने की उम्मीद है, वहीं बेंगलुरु तक की कनेक्टिविटी भी काफी बेहतर होगी।
विदर्भ के लिए क्या फायदा –
दोनों प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे मिलकर तेज यात्रा, कम लॉजिस्टिक्स लागत और बेहतर औद्योगिक कनेक्टिविटी के जरिए उत्तर और दक्षिण भारत को विदर्भ के काफी करीब ला देंगे। इससे क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।
क्या है नागास्त्र-2 की ताकत – यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।
रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट
सबसे बड़ी खूबी – ECCM – नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।
कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।
2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट ने किया कड़ा विरोध, कहा – हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए
नई दिल्ली :
स्वदेशी व्यापारी मंच और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भारत में अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक (स्पेसएक्स) द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान करने की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। दोनों संगठनों ने स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा है कि यह प्रवेश देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक और कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि स्टारलिंक के आने से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न होगा।
वैश्विक नेटवर्क और निगरानी में चुनौती
भरतिया ने बताया कि स्टारलिंक का नेटवर्क हजारों सैटेलाइट का वैश्विक जाल है, जो लेजर लिंक से जुड़े हैं। भारतीय यूजर का डेटा विदेशी ग्राउंड स्टेशनों से होकर जा सकता है और भारत के बाहर डिक्रिप्ट हो सकता है। ऐसी स्थिति में कानून सम्मत निगरानी, बॉर्डर क्षेत्रों में सुरक्षा (जमीन से 50 किमी और समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक) और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। 26/11 जैसे हमलों के बाद जब सैटेलाइट फोन का दुरुपयोग हुआ था, भारत ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं कर सकता।
डेटा संप्रभुता पर भी खतरा
भरतिया ने आगे कहा कि स्टारलिंक के कारण देश की डेटा संप्रभुता का भी खतरा है। इंटरनेट सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय डेटा है। अगर स्टारलिंक को अनुमति मिली तो हमारे किसानों, जवानों, व्यापारियों और नागरिकों का संवेदनशील डेटा एक विदेशी निजी कंपनी के नियंत्रण वाले सर्वर पर जाएगा। यह डेटा लोकलाइजेशन और आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत के खिलाफ है।
हमारे पास स्वदेशी तकनीक है
स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट का मानना है कि भारत के पास अपनी क्षमता है। इसरो, एनएसआईएल, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती एयरटेल समर्थित वनवेब जैसी भारतीय कंपनियां सैटेलाइट संचार सेवा देने के लिए तैयार हैं। जब हमारे पास स्वदेशी तकनीक मौजूद है, तो अपनी रणनीतिक डिजिटल बुनियाद एक अमेरिकी कंपनी को क्यों सौंपें? भरतिया ने प्रश्न किया।
सरकार के समक्ष तीन सुझाव
विषय को आगे ले जाते हुए बालकृष्ण भरतिया ने भारत सरकार के समक्ष अपने सुझाव दिए –
क) स्टारलिंक को अंतिम व्यावसायिक और स्पेक्ट्रम आवंटन की अनुमति न दी जाए। ख) मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के तहत भारतीय सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता और बढ़ावा दिया जाए। ग) किसी भी सैटेलाइट ऑपरेटर के लिए 100% ग्राउंड उपकरण भारत में बनाना और सारा डेटा भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य किया जाए।
भरतिया ने अंत में सभी देशभक्त नागरिकों, उद्योग संगठनों और मीडिया से स्वदेशी तकनीक का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा – भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए।
ROC फाइलिंग की समय-सीमा को आयकर ऑडिट के अनुरूप करने की मांग, छोटी कंपनियों को ऑडिट से छूट का विरोध
नागपुर :
आईसीएआई की कॉर्पोरेट लॉज कमेटी द्वारा आयोजित तथा आईसीए नागपुर शाखा (डब्ल्यूआईआरसी) के आतिथ्य में आयोजित पूर्ण-दिवसीय कॉर्पोरेट लॉज सेमिनार के दौरान नागपुर के कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) दीपक परसोया और आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य एवं कॉर्पोरेट लॉज कमेटी के अध्यक्ष सीए पीयूष छाजेड़ के बीच कॉर्पोरेट अनुपालन, नियामक सुधारों तथा चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
आरओसी फाइलिंग की समय-सीमा को आयकर ऑडिट के अनुरूप करने की आवश्यकता
चर्चा के दौरान कंपनी अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक फाइलिंग की समय-सीमाओं को आयकर ऑडिट की समय-सीमाओं के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह कहा गया कि दोनों अनुपालन व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से कंपनियों एवं पेशेवरों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां कम होंगी, कार्यों की पुनरावृत्ति से बचा जा सकेगा तथा व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्तावित कंपनी संशोधन विधेयक पर आईसीएआई की चिंताएं
सीए पीयूष छाजेड़ ने उपस्थित सदस्यों को बताया कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे गए प्रस्तावित कंपनी संशोधन विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा पेशेवर कदाचार के लिए आपराधिक दायित्व तथा अवैतनिक जुर्माने की वसूली भू-राजस्व के बकाया के रूप में किए जाने संबंधी प्रस्ताव भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि आईसीएआई एक महत्वपूर्ण हितधारक होने के नाते संयुक्त संसदीय समिति द्वारा आमंत्रित किया गया था, ताकि वह प्रस्तावित संशोधनों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत कर सके।
आईसीएआई ने प्रस्तावित वसूली व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब देश व्यवसाय करने में सुगमता बढ़ाने और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसे कठोर प्रावधानों पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। संस्थान ने आयकर एवं जीएसटी सहित विभिन्न कानूनों के अंतर्गत जुर्माने की वसूली की व्यवस्था में एकरूपता तथा आनुपातिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
छोटी कंपनियों को वैधानिक ऑडिट से छूट देने के प्रस्ताव पर चिंता
चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण विषय निर्धारित टर्नओवर सीमा से कम टर्नओवर वाली कंपनियों को अनिवार्य वैधानिक ऑडिट से छूट देने का प्रस्ताव था।
सीए छाजेड़ ने बताया कि आईसीएआई ने संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत की थीं, विशेष रूप से कंपनियों की सीमित देयता संरचना को ध्यान में रखते हुए। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाली कंपनियां कुल कंपनियों का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा हैं। ऐसी संस्थाओं को वैधानिक ऑडिट से छूट देने से कॉर्पोरेट संरचना के दुरुपयोग तथा मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों की संभावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आईसीएआई ने इस बात पर जोर दिया कि वैधानिक ऑडिट वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही तथा हितधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वतंत्र निदेशकों के लिए आईसीएआई द्वारा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
सीए छाजेड़ ने यह भी घोषणा की कि आईसीएआई अपने सदस्यों को कंपनी के बोर्ड में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से स्वतंत्र निदेशकों के लिए एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है।
यह पाठ्यक्रम स्वतंत्र निदेशक की भूमिका, जिम्मेदारियों, वैधानिक दायित्वों तथा इस पद से जुड़े संभावित जोखिमों पर केंद्रित होगा। इस पहल से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए नए पेशेवर अवसर सृजित होने के साथ-साथ कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस चर्चा ने इस बात को रेखांकित किया कि कॉर्पोरेट कानूनों को व्यावहारिक, पारदर्शी तथा व्यावसायिक विकास के अनुकूल बनाए रखने के लिए नियामकों, पेशेवर संस्थानों एवं नीति-निर्माताओं के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है, ताकि जवाबदेही से समझौता किए बिना व्यवसाय के विकास को प्रोत्साहन दिया जा सके।
इस कार्यक्रम में आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य एवं कॉर्पोरेट लॉज कमेटी के अध्यक्ष सीए पीयूष छाजेड़, नागपुर के कंपनी रजिस्ट्रार दीपक परसोया, आईसीएआई नागपुर शाखा (डब्ल्यूआईआरसी) की अध्यक्ष सीए स्वरूपा एस. वजलवार, सचिव सीए तृप्ति भट्टड़, निवर्तमान अध्यक्ष सीए दिनेश राठी, प्रबंध समिति के सदस्य सीए आशीष अग्रवाल एवं सीए प्रणवकुमार लिमजे, सीए ओ. एस. बागड़िया तथा पूर्व अध्यक्ष सीए संजय एम. अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
तकनीकी सत्रों में प्रख्यात वक्ताओं सीए रंगनाटकी रंगाचारी (रमा), सीए टिमल पी. मारू तथा सीए पराग वेद ने कॉर्पोरेट कानूनों के अंतर्गत लेखांकन एवं ऑडिटिंग के उभरते मुद्दों, धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग, ऑडिट निष्कर्षों के निर्माण तथा शेयरों के मूल्यांकन पर अपने विचार एवं विशेषज्ञता साझा की।
इन सत्रों की अध्यक्षता सीए नितिन अल्शी तथा सीए संदीप धोडपकर ने की। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रमुख सदस्यों में सीए श्वेता गनेरीवाला, सीए राजीव दुग्गल, सीएस अमित राजकोटिया, सीए अनूप जायसवाल, सीए मनीष मंधाना तथा पेशे से जुड़े अनेक अन्य सदस्य शामिल थे।
कार्यक्रम का समन्वय आईसीएआई नागपुर शाखा (डब्ल्यूआईआरसी) के उपाध्यक्ष सीए दीपक जेठवानी ने किया।