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ग्रामीण ट्रस्टों और एनजीओ पर आयकर मांग का खतरा, फॉर्म भरने की त्रुटियों से छूट संकट में

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  • विदर्भ के छोटे धर्मार्थ एवं धार्मिक संगठनों को आयकर विभाग की सख्ती का सामना; विशेषज्ञों ने 30 सितंबर तक ऑडिट रिपोर्ट जमा करने और विशेषज्ञ से परामर्श की दी सलाह

नागपुर– विदर्भ के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत छोटे धर्मार्थ ट्रस्टों, गैर-सरकारी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं पर अब आयकर की बड़ी मांग का खतरा मंडरा रहा है। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, ऑडिट रिपोर्ट और आयकर विवरणी फॉर्म-7 यानी आईटीआर-7 भरने में हुई गलतियों के कारण इन संगठनों की कर छूट रद्द हो सकती है।

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 11 और 12 के तहत मिलने वाली छूट का दावा करने वाले मामलों में सबसे अधिक त्रुटियां देखी गई हैं। विभाग का कहना है कि कई बार यह केवल रिपोर्टिंग में हुई तकनीकी भूल या प्रक्रियागत चूक होती है, लेकिन इसी के कारण संगठन की आय को कर योग्य मान लिया जाता है और उसके बाद कर मांग का नोटिस जारी हो जाता है। मामला आगे चलकर कानूनी विवाद में भी फंस सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में फॉर्म भरने की अंतिम तिथि और आवश्यकताओं को लेकर स्पष्टता के अभाव के कारण कई गलतियां हुईं। कुछ मामलों में धारा 11 के अंतर्गत छूट योग्य आय को आईटीआर-7 के गलत स्तंभों या अनुसूचियों में दर्ज कर दिया गया। प्रसंस्करण के समय इस आय को छूट के लिए नहीं माना गया, जिससे संगठनों को अप्रत्याशित कर दायित्व और मांग पत्र प्राप्त हुए।

वर्तमान मूल्यांकन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर विभाग ने विवरणियों का प्रसंस्करण शुरू कर दिया है। केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्र ने व्यक्तिगत करदाताओं के आईटीआर-1 और आईटीआर-2 की जांच आरंभ कर दी है। नागपुर के करदाताओं को धारा 143(1) के अंतर्गत सूचना और प्रसंस्करण संदेश भी मिलने लगे हैं।

विदर्भ के ग्रामीण इलाकों में कार्यरत चार्टर्ड अकाउंटेंटों का कहना है कि समस्या वहां अधिक गंभीर है जहां ट्रस्टी स्वयं आयकर प्रावधानों से परिचित नहीं हैं और पूरी तरह लेखाकारों, अधिवक्ताओं या कर सलाहकारों पर निर्भर रहते हैं।

कर विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि यह आवश्यक नहीं कि संगठन आय छिपा रहे हों। एक छोटी तकनीकी त्रुटि भी उस छूट को प्रभावित कर सकती है जिस पर संगठन की कर स्थिति निर्भर करती है। विदर्भ के छोटे ट्रस्टों और धार्मिक संस्थाओं के लिए इस बार की अंतिम तिथि और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। सही ढंग से भरी गई ऑडिट रिपोर्ट और आईटीआर-7 ही तय करेगा कि छूट बनी रहेगी या कर विवाद शुरू होगा।

विशेषज्ञों ने सभी छोटे ट्रस्टों, एनजीओ और धार्मिक संस्थाओं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत संगठनों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय की प्रतीक्षा न करें। ऑडिट रिपोर्ट 30 सितंबर तक जमा कर देनी चाहिए, जबकि आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है। साथ ही सभी वित्तीय आंकड़े और छूट से संबंधित विवरण आईटीआर-7 के सही स्तंभों में दर्ज किए जाएं। ट्रस्ट संबंधी गहन जानकारी रखने वाले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या कर पेशेवर से समय रहते परामर्श लेना भी आवश्यक बताया गया है।

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वेकोलि में ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ के संदेश के साथ सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ

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  • सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे ने दिलाई शपथ, डिजिटल पारदर्शिता और नैतिक कार्यसंस्कृति पर जोर, मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में होंगे विविध कार्यक्रम

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ आज दिनांक 26.10.2026 को ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ की थीम के साथ किया गया।

वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत शरद पांडे ने कंपनी मुख्यालय में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता जागरूकता की शपथ दिलाकर सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक (वित्त एवं मानव संसाधन) श्री बिक्रम घोष, निदेशक (तकनीकी/परिचालन एवं योजना) डॉ. अंजनी कुमार तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सीएमडी ने दिया पारदर्शिता और नैतिकता का संदेश –
अपने संबोधन में डॉ. हेमंत शरद पांडे ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को अपने कार्यों का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर सतर्कता के प्रति सदैव सजग रहना और प्रत्येक दायित्व का निर्वहन सकारात्मक दृष्टिकोण, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ करना आवश्यक है। सभी को अपने आचरण एवं कार्यप्रणाली में उच्च नैतिक मानदंडों का पालन करते हुए सत्यनिष्ठा को कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

डिजिटल प्रयासों से बढ़ी पारदर्शिता –
मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे ने अपने संबोधन में वेकोलि द्वारा पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे डिजिटल प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से कार्यों में मैन्युअल हस्तक्षेप कम हुआ है तथा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है। डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग सुशासन एवं भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यप्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत वेकोलि मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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सोलर डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपे ‘नागास्त्र-2’ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन के 21 यूनिट, 650 MM आर्मर भेदने में सक्षम

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  • 4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।

क्या है नागास्त्र-2 की ताकत –
यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।

  • रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
  • एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
  • तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
  • 80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट

सबसे बड़ी खूबी – ECCM –
नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।

कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।

2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

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स्टारलिंक की एंट्री से देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा : बालकृष्ण भरतिया

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  • स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट ने किया कड़ा विरोध, कहा – हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए

नई दिल्ली :

स्वदेशी व्यापारी मंच और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भारत में अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक (स्पेसएक्स) द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान करने की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। दोनों संगठनों ने स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा है कि यह प्रवेश देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक और कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि स्टारलिंक के आने से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न होगा।

वैश्विक नेटवर्क और निगरानी में चुनौती

भरतिया ने बताया कि स्टारलिंक का नेटवर्क हजारों सैटेलाइट का वैश्विक जाल है, जो लेजर लिंक से जुड़े हैं। भारतीय यूजर का डेटा विदेशी ग्राउंड स्टेशनों से होकर जा सकता है और भारत के बाहर डिक्रिप्ट हो सकता है। ऐसी स्थिति में कानून सम्मत निगरानी, बॉर्डर क्षेत्रों में सुरक्षा (जमीन से 50 किमी और समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक) और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। 26/11 जैसे हमलों के बाद जब सैटेलाइट फोन का दुरुपयोग हुआ था, भारत ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं कर सकता।

डेटा संप्रभुता पर भी खतरा

भरतिया ने आगे कहा कि स्टारलिंक के कारण देश की डेटा संप्रभुता का भी खतरा है। इंटरनेट सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय डेटा है। अगर स्टारलिंक को अनुमति मिली तो हमारे किसानों, जवानों, व्यापारियों और नागरिकों का संवेदनशील डेटा एक विदेशी निजी कंपनी के नियंत्रण वाले सर्वर पर जाएगा। यह डेटा लोकलाइजेशन और आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत के खिलाफ है।

हमारे पास स्वदेशी तकनीक है

स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट का मानना है कि भारत के पास अपनी क्षमता है। इसरो, एनएसआईएल, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती एयरटेल समर्थित वनवेब जैसी भारतीय कंपनियां सैटेलाइट संचार सेवा देने के लिए तैयार हैं। जब हमारे पास स्वदेशी तकनीक मौजूद है, तो अपनी रणनीतिक डिजिटल बुनियाद एक अमेरिकी कंपनी को क्यों सौंपें? भरतिया ने प्रश्न किया।

सरकार के समक्ष तीन सुझाव

विषय को आगे ले जाते हुए बालकृष्ण भरतिया ने भारत सरकार के समक्ष अपने सुझाव दिए –

क) स्टारलिंक को अंतिम व्यावसायिक और स्पेक्ट्रम आवंटन की अनुमति न दी जाए।
ख) मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के तहत भारतीय सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता और बढ़ावा दिया जाए।
ग) किसी भी सैटेलाइट ऑपरेटर के लिए 100% ग्राउंड उपकरण भारत में बनाना और सारा डेटा भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य किया जाए।

भरतिया ने अंत में सभी देशभक्त नागरिकों, उद्योग संगठनों और मीडिया से स्वदेशी तकनीक का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा – भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए।

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Nagpur, IN
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