Connect with us

Hindi

एक करोड़ में अदालत को खरीदने की कोशिश

Published

on

  • सीजेआई सूर्यकांत ने वकील को लगाई लताड़

दिल्ली :अपने पक्ष में फैसला लेने के लिए प्रदान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक करोड में न्याय पालिका को खरीदने की कोशिश की, इस खबर को देख कर, सुनकर आप सभी लोगों दंग रह जाएंगे, सभी लोगों को मालूम है कि उन जजों के लिए मोदी सरकार हमेशा तत्पर रहती है, जो जज मोदी चालिसा पढ़ते हैं, नरेंद्र मोदी के पक्ष में फैसला सुनाते हैं, मोदी जी जैसा कहे, देखते हैं, वैसा करते हैं. उन जजों पर मेहरबान हैं. मोदी सरकार, और इसका जीता जाता उदाहरण भी देते हैं, कोई गवर्नर बना बैठा हैं, तो कोई राज्यसभा का सांसद बना बैठा है, कोई कहां तो कहां। यानि की हमारे पक्ष में फैसला सुनाईए हम आपको खरीद लेंगे। हमारे पक्ष में फैसला सुनाईए हम आपको बड़ा-बड़ा पद देंगे। अरे हमारे साथ आजाइए रिटायर्मेंट के बाद आप आ जाएंगे, हमारी गोद में, आइए हम सांसद बना देंगे।आप एक पूर्व सीजेआई को बचाने के लिए आपने एक करोड़ रुपये फीस दे दी वो भी एक सुनवाई की. अगर दस सुनवाई होती तो दस करोड़ आप देते. आप हजारों करोड़ भी खर्च कर देते. आखिरकार आप पूर्म सीजेआई दीपक मिश्रा को क्यों बचाना चाहते हैं. क्या दीपक मिश्रा ने आपके लिए कुछ किया है?, क्या दीपक मिश्रा ने आपको फायदा पहुचाया है?, क्या पूर्म सीजेआई दीपक मिश्रा ने आपके लिए कुछ किया है। जिसके लिए आप एक करोड़ रुपए एक सुनवाई के लिए वकील को दे रहे है।जब वकील पहुंचा और कहने लगा कि पूर्र्व सीजेआाई दीपक मिश्रा को छोड़ दीजिए. उन पर लगे मुकदमे हटा दीजिये तो सीजेआई सूरकांत भडक़ गए। उन्होंने कहा कि आप एक करोड़ में न्याय पालिका को नहीं खरीद सकते। आप एक करोड़ लेकर आईए दस करोड़ लेकर आईए आप न्याय पालिका को नहीं खरीद सकते। जिससे मोदी सरकार की जमकर फजियत हो गई. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं छिपने की जगह ढूंढ रहे हैं। लेकिन वो छिप नहीं पा रहे हैं, क्योंकि सीजेआई सूर्यकांत ने वकील की याचिका को ना सिर्फ खारिज किया, बल्कि एक हिसाब से डाट कर भगा दिया कि आप पैसों के दम पर न्याय पालिका को नहीं खरीद सकते हैं। आप एक करोड़ की नोटों की गड्डी दिखा करके न्याय सिस्टम को नहीं खरीद सकते हैं। एक जज पर इतने भद्धे आरोप लगाए अब मानिये बोल रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सीजेआई दीपग मिश्रा को बचाने के लिए एक करोड़ रुपये फीस मांगने वाले वकील अशोक पांडे की याचिका खारिज कर दी. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि, समाज सेवा अनमोल है और इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती है. आप एक करोड कैसे मांग सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी से। न्याय सिस्टम को खरीदिने की कोशिश की जा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जाय मालिया बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस याचिका को निराधार और गलत फहमी पर आधारित करार देते हुए खारिज कर दिया. पीठ ने टिपण्णी करते हुए कहा कि, उच्च न्यायालय द्वारा उनकी याचका को खारिज करने का फैसला बिलकुल सही था। अब गोर फर्माईये कर सीधा मोदी सरकार से एक करोड़ और बिना डील हुए एक करोड़ वकील नहीं मांग सकता है. एक दिन की सुनवाई के लिए एक करोड़ रुपये यहां पर मांगे जा रहे हैं। अब आप लोग समझ सकते हैं कि क्या से क्या हो रहा है। सभी लोगों को मालूम है कि जजों पर गंभीर आरोप लगते हैं। कुछ जज निष्पक्ष होकर भी बेइमान हो जाते हैं और जज को लोग किस तरीके से जज करते हैं। उनका अपना नजरिया होता है। कुछ लोग जज को गलत नजर से देखते हैं। कुछ लोग अच्छे नजर से देखते हैं। कुछ लोग कहते हैं न्याय पालिका में भ्रष्टाचार है। न्याय पालका भ्रष्ट है। यहां तक कि बड़े बड़े लोग केवल आम इंसानी नहीं, बल्कि बड़े -बड़े पदों पर बैठे हुए लोग, सुप्रीम कोर्ट के लोग, हाईकोर्ट के लोग यह कहते हैं न्याय पालिका बिक चुकी है। न्याय सिस्टम को खरीदा जा रहा है। करोड़ों में डील हो रही है। यानि कि जनता की नहीं सुनी जा रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के लिए अदालत खुली है।अभी हाल ही में एक मामला सीजेआई सूर्यकांत के सामने गया था। जहां पर एक वकिल भीड गया और कहने लगा कि अगर यही अडानी, अंबानी की याचिका होती तो आपके पास टाइम होता। आप सुन लेते लेकिन एक किसी गरीब की याचिका है तो आपके पास टाइम नहीं सुनने के लिए।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

AI

AI क्षमता हासिल करने का नया फॉर्मूला, 4 रास्ते तय करेंगे कंपनी की रणनीति

Published

on

  • BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला

नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।

इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।

फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –

01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।

02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।

03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।

04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।

रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।

अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।

Continue Reading

Hindi

विधान परिषद पदवीधर चुनाव की कल मतगणना,समर्थकों का उत्साह चरम पर

Published

on

  • मौदा तहसील में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न, अरोली में 70.54%, खात में 76.70% वोटिंग

कोदामंडी – 26 October

विधान परिषद के पदवीधर मतदारसंघ के लिए हुए चुनाव की मतगणना कल मंगलवार 27 अक्टूबर को होंगी।

इससे पहले 23 अक्टूबर को हुए मतदान में मौदा तहसील में शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से वोटिंग हुई। अरोली स्थित बूथ क्रमांक 43 पर 370 में से 261 मतदाताओं ने मतदान किया। अरोली में 70.54%, खात में 76.70%, मौदा के दो मतदान केंद्रों पर क्रमशः 78.98% और 72.37% मतदान दर्ज किया गया। मौदा तहसील में कुल 1910 पदवीधर मतदाता हैं।

तहसील में पदवीधर मतदाताओं के बढ़-चढ़कर मतदान करने से उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह चरम पर है।

अरोली में महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहळे के समर्थन में लगाए गए बूथ पर महायुति के कई नेताओं ने भेंट दी। इनमें राज्यमंत्री आशीष जयसवाल, पूर्व विधायक टेकचंद सावरकर, भाजपा तहसील मौदा मंडल अध्यक्ष भगवान बावनकुळे, चाचेर मंडल अध्यक्ष रवी चव्हाण, शिवसेना तालुकाध्यक्ष प्रशांत भुरे, मौदा नगरपंचायत नगराध्यक्ष प्रसन्ना (राजा) तिडके,भाजयुमो जिल्हा उपाध्यक्ष संजू वाघमारे, पंचायत समिति के पूर्व उपसभापति खेमराज चाफले,पंढरी कडू, अरोली सर्कल के भाजपा नेता सदानंद निमकर, विष्णू देशमुख, रोशन उमप, कैलास समरीत, कोदामेंढी उपसरपंच गोपाल गिरमेकर सहित महायुति के अनेक पदाधिकारियों का समावेश था।

Continue Reading

Hindi

धोबी-परीट समाज का संविधान चौक में अनशन का ऐलान, SC जैसी सुविधाओं की मांग

Published

on

  • डॉ. भांडे समिति की सिफारिश के बावजूद आरक्षण से वंचित होने का आरोप, 27 अक्टूबर से उपोषण और श्रृंखला उपोषण शुरू करने की घोषणा, विशेष जीआर निकालने की मांग

नागपुर, 26 अक्टूबर :

महाराष्ट्र के धोबी (परीट) समाज को आरक्षण संबंधी सुविधाएं देने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से नागपुर के संविधान चौक में उपोषण और साखळी उपोषण शुरू करने का ऐलान किया गया है। समाज की प्रमुख मांग है कि जब तक अनुसूचित जाति की सूची में समावेश नहीं होता, तब तक राज्य सरकार विशेष बाब के तौर पर SC को मिलने वाली सभी आरक्षण सुविधाएं धोबी समाज को भी दे।

मांग : राज्य शासन द्वारा गठित डॉ. भांडे समिति की सिफारिश क्रमांक 3 के अनुसार महाराष्ट्र में धोबी, परीट जाति का अनुसूचित जाति में समावेश नहीं होता, तब तक अनु. जाति को मिलने वाली सभी आरक्षण की सुविधाएं खास बाब के तौर पर राज्य शासन तुरंत जीआर निकालकर दे।

आंदोलनकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र शासन ने 5 सितंबर 2001 को पूर्व मंत्री डॉ. डी.एम. भांडे की अध्यक्षता में अभ्यास समिति बनाई थी। समिति ने धोबी समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कर धोबी के साथ ही परीट, वरठी, रजक, वढ्ढी, मडवळ, मडलेवार और धोबा जैसी तत्सम जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की थी। साथ ही समावेश होने तक विशेष तरतूद के तहत समान सुविधा देने की भी सिफारिश की थी।

समाज का दावा है कि महाराष्ट्र राज्य निर्माण से पहले भंडारा और बुलढाणा जिलों में धोबी समाज को SC की सुविधाएं मिलती थीं, जो 1 मई 1960 को राज्य बनने के बाद बंद कर दी गईं। समाज की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय में कोई मूलभूत बदलाव नहीं होने के बावजूद सुविधाएं बंद हुईं। 1976 में SC-ST के लिए क्षेत्रीय बंधन हटने के बाद भी धोबी समाज का मुद्दा लंबित रहा।

समाज ने मांग की है कि मराठा और धनगर समाज के लिए लागू समकक्ष सुविधाओं की तर्ज पर धोबी-परीट समाज के लिए भी स्वतंत्र शासन निर्णय (जीआर) निकाला जाए।

ऐतिहासिक दस्तावेजों और भांडे समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन तुरंत निर्णय ले, ताकि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान अवसर मिल सके।

नेतृत्व : समिति प्रमुख आशिषभाऊ कदम, समिति अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्के, कार्याध्यक्ष राजेंद्र खैरनार, सुधीर खैरनार, मुरलीधर शिंदे, संतोष सवतीरकर, राहुल वरणकर।

Continue Reading
Advertisement

Nagpur, IN
11:37 am, 27 Oct 2026
weather icon 29.9 °C
Mainly Clear
Wind Gust 17.7 Km/h

Trending