6 जिलों का भार चंद हाथों पर, रिपब्लिकन भीमशक्ति ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाला सबसे महत्वपूर्ण तंत्र आज स्वयं कमजोर पड़ गया है। एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी ACB में वर्षों से न तो नए पद सृजित हुए और न ही पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति हुई। परिणामस्वरूप आम जनता को त्वरित न्याय मिलने के बजाय लंबी प्रक्रिया और अधूरी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
इस स्थिति को लेकर रिपब्लिकन भीमशक्ति के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर भीमटे ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि यदि ACB को तत्काल सुदृढ़ नहीं किया गया तो राज्य से भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
छह जिलों की जिम्मेदारी, डेढ़ सौ से कम कर्मचारी चंद्रशेखर भीमटे के अनुसार नागपुर ACB के दायरे में छह जिले आते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि आज भी यहां उतने ही अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं जितने कई वर्ष पहले थे।
वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
एक पुलिस अधीक्षक
चार उप पुलिस अधीक्षक
नौ थानेदार
कुल मिलाकर डेढ़ सौ से भी कम कर्मचारी
प्रत्येक जिले में एक इकाई तो स्थापित है, परंतु वहां केवल एक पुलिस निरीक्षक और सात से आठ कर्मचारी ही तैनात हैं। इतने सीमित बल के भरोसे पूरे जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। स्टाफ की कमी का सीधा प्रभाव जांच और कार्रवाई की गति पर पड़ रहा है।
‘छोटी मछली’ पर शिकंजा, ‘मगरमच्छ’ स्वतंत्र विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भीमटे ने कहा कि ACB जैसे संवेदनशील विभाग में भी पक्षपातपूर्ण कार्रवाई हो रही है।
उनके शब्दों में, “आज कार्रवाई के नाम पर केवल चपरासी, पटवारी, लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। बड़े अधिकारियों को छापे या जांच की सूचना पहले ही कैसे मिल जाती है, यह अपने आप में जांच का विषय है। नाममात्र की खानापूर्ति कर बड़े लोगों को बचा लिया जाता है।”
इस कारण जनता का विश्वास ACB की निष्पक्षता से उठता जा रहा है। पारदर्शिता के अभाव में विभाग की साख पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
जटिल प्रक्रिया भ्रष्टाचार को दे रही संरक्षण संगठन ने यह भी उजागर किया कि शिकायत दर्ज करने से लेकर कार्रवाई तक की प्रक्रिया अत्यंत लंबी और पेचीदा है। इस अंतराल में आरोपी को अपना बचाव करने और साक्ष्य नष्ट करने का पर्याप्त समय मिल जाता है।
सरकारी और निजी संस्थाओं पर निगरानी रखने वाले इस विभाग के हाथ जानबूझकर कमजोर किए गए प्रतीत होते हैं। इसी कारण अवैध आर्थिक लेन-देन और भ्रष्टाचार खुले रूप से पनप रहा है।
सरकार से चार सूत्रीय मांग रिपब्लिकन भीमशक्ति ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और राज्य के सभी 288 विधायकों से मांग की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए। संगठन ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
तत्काल स्टाफ वृद्धि: ACB में रिक्त पदों को अविलंब भरा जाए और नए पदों का सृजन किया जाए।
प्रतिनियुक्ति पर रोक: कर्मचारियों की अस्थायी प्रतिनियुक्ति का खेल बंद किया जाए और स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
निष्पक्ष जांच: बड़े अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों की बिना भेदभाव जांच हो।
सरल एवं गोपनीय प्रक्रिया: शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया को सरल तथा पूर्णतः गोपनीय बनाया जाए।
अंतिम चेतावनी चंद्रशेखर भीमटे ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो ACB के नाम पर चल रही यह औपचारिकता जनता के साथ विश्वासघात के समान होगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का सपना तभी साकार होगा जब उसे लागू करने वाली संस्था स्वयं सक्षम और सशक्त होगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राज्य सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेती है, अथवा नागपुर ACB की यह दुर्दशा आने वाले समय में भी इसी प्रकार बनी रहेगी।
BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला
नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।
इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।
फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –
01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।
02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।
03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।
04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।
रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।
अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।
मौदा तहसील में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न, अरोली में 70.54%, खात में 76.70% वोटिंग
कोदामंडी – 26 October
विधान परिषद के पदवीधर मतदारसंघ के लिए हुए चुनाव की मतगणना कल मंगलवार 27 अक्टूबर को होंगी।
इससे पहले 23 अक्टूबर को हुए मतदान में मौदा तहसील में शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से वोटिंग हुई। अरोली स्थित बूथ क्रमांक 43 पर 370 में से 261 मतदाताओं ने मतदान किया। अरोली में 70.54%, खात में 76.70%, मौदा के दो मतदान केंद्रों पर क्रमशः 78.98% और 72.37% मतदान दर्ज किया गया। मौदा तहसील में कुल 1910 पदवीधर मतदाता हैं।
तहसील में पदवीधर मतदाताओं के बढ़-चढ़कर मतदान करने से उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह चरम पर है।
अरोली में महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहळे के समर्थन में लगाए गए बूथ पर महायुति के कई नेताओं ने भेंट दी। इनमें राज्यमंत्री आशीष जयसवाल, पूर्व विधायक टेकचंद सावरकर, भाजपा तहसील मौदा मंडल अध्यक्ष भगवान बावनकुळे, चाचेर मंडल अध्यक्ष रवी चव्हाण, शिवसेना तालुकाध्यक्ष प्रशांत भुरे, मौदा नगरपंचायत नगराध्यक्ष प्रसन्ना (राजा) तिडके,भाजयुमो जिल्हा उपाध्यक्ष संजू वाघमारे, पंचायत समिति के पूर्व उपसभापति खेमराज चाफले,पंढरी कडू, अरोली सर्कल के भाजपा नेता सदानंद निमकर, विष्णू देशमुख, रोशन उमप, कैलास समरीत, कोदामेंढी उपसरपंच गोपाल गिरमेकर सहित महायुति के अनेक पदाधिकारियों का समावेश था।
डॉ. भांडे समिति की सिफारिश के बावजूद आरक्षण से वंचित होने का आरोप, 27 अक्टूबर से उपोषण और श्रृंखला उपोषण शुरू करने की घोषणा, विशेष जीआर निकालने की मांग
नागपुर, 26 अक्टूबर :
महाराष्ट्र के धोबी (परीट) समाज को आरक्षण संबंधी सुविधाएं देने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से नागपुर के संविधान चौक में उपोषण और साखळी उपोषण शुरू करने का ऐलान किया गया है। समाज की प्रमुख मांग है कि जब तक अनुसूचित जाति की सूची में समावेश नहीं होता, तब तक राज्य सरकार विशेष बाब के तौर पर SC को मिलने वाली सभी आरक्षण सुविधाएं धोबी समाज को भी दे।
मांग : राज्य शासन द्वारा गठित डॉ. भांडे समिति की सिफारिश क्रमांक 3 के अनुसार महाराष्ट्र में धोबी, परीट जाति का अनुसूचित जाति में समावेश नहीं होता, तब तक अनु. जाति को मिलने वाली सभी आरक्षण की सुविधाएं खास बाब के तौर पर राज्य शासन तुरंत जीआर निकालकर दे।
आंदोलनकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र शासन ने 5 सितंबर 2001 को पूर्व मंत्री डॉ. डी.एम. भांडे की अध्यक्षता में अभ्यास समिति बनाई थी। समिति ने धोबी समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कर धोबी के साथ ही परीट, वरठी, रजक, वढ्ढी, मडवळ, मडलेवार और धोबा जैसी तत्सम जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की थी। साथ ही समावेश होने तक विशेष तरतूद के तहत समान सुविधा देने की भी सिफारिश की थी।
समाज का दावा है कि महाराष्ट्र राज्य निर्माण से पहले भंडारा और बुलढाणा जिलों में धोबी समाज को SC की सुविधाएं मिलती थीं, जो 1 मई 1960 को राज्य बनने के बाद बंद कर दी गईं। समाज की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय में कोई मूलभूत बदलाव नहीं होने के बावजूद सुविधाएं बंद हुईं। 1976 में SC-ST के लिए क्षेत्रीय बंधन हटने के बाद भी धोबी समाज का मुद्दा लंबित रहा।
समाज ने मांग की है कि मराठा और धनगर समाज के लिए लागू समकक्ष सुविधाओं की तर्ज पर धोबी-परीट समाज के लिए भी स्वतंत्र शासन निर्णय (जीआर) निकाला जाए।
ऐतिहासिक दस्तावेजों और भांडे समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन तुरंत निर्णय ले, ताकि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान अवसर मिल सके।
नेतृत्व : समिति प्रमुख आशिषभाऊ कदम, समिति अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्के, कार्याध्यक्ष राजेंद्र खैरनार, सुधीर खैरनार, मुरलीधर शिंदे, संतोष सवतीरकर, राहुल वरणकर।