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10 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट राइट-ऑफ, किसान को जीरो माफी

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  • मोदी सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर किशोर तिवारी का बड़ा सवाल – 12 साल में बड़े कॉर्पोरेट का 9.95 लाख करोड़ बट्टे खाते में, केंद्र ने एक भी कृषि कर्ज माफी नहीं दी

विदर्भ/नागपुर,21 सितंबर 2026 :

किसान नेता और कृषि संकट कार्यकर्ता किशोर तिवारी, जो महाराष्ट्र सरकार के किसान संकट निवारण मिशन के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं, ने नरेंद्र मोदी सरकार पर “गहरे असमान वित्तीय ढांचे” का आरोप लगाया है, जिसमें बड़े कॉर्पोरेट संकट को संस्थागत समाधान मिलता है, जबकि कर्ज में डूबे ग्रामीण परिवारों को फसल बर्बादी, भाव का झटका और बढ़ते कर्ज को अकेले झेलने को कहा जाता है।

तिवारी ने हाल ही में संसद में बताए गए सरकारी आंकड़ों का हवाला दिया। इसके अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने 2014-15 से 2025-26 तक 12 वित्तीय वर्षों में “लार्ज – इंडस्ट्रीज एंड सर्विसेज” श्रेणी में लगभग 9.95 लाख करोड़ रुपये राइट-ऑफ (बट्टे खाते में) डाले। उसी संसदीय जवाब में कहा गया है कि प्रश्न की अवधि में केंद्र सरकार ने कोई कृषि कर्ज माफी नहीं दी।

तिवारी ने कहा, “यह अब वैचारिक बहस नहीं रही, यह सरकार के अपने आंकड़े हैं। एक तरफ 12 साल में लगभग 10 लाख करोड़ का राइट-ऑफ, और दूसरी तरफ उसी अवधि में केंद्र की ओर से किसानों के लिए कोई कर्ज माफी नहीं। इसी बैलेंस शीट पर ग्रामीण भारत को मोदी सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल पूछने का पूरा हक है।”

राइट-ऑफ माफी नहीं, तो वसूली बताओ –

तिवारी ने स्पष्ट किया कि बैंक राइट-ऑफ तकनीकी रूप से कर्ज माफी नहीं है। सरकार कहती है कि राइट-ऑफ एक अकाउंटिंग उपाय है और इससे कर्जदार की देनदारी खत्म नहीं होती। लेकिन तिवारी ने कहा कि यही भेद वसूली के खुलासे को और भी जरूरी बना देता है।

“अगर ये कर्ज पूरी तरह वसूली योग्य हैं, तो सरकार और RBI को देश को पारदर्शी तरीके से बताना चाहिए कि वास्तव में कितनी वसूली हुई, कितना बकाया है, कितने बड़े कर्जदार शामिल थे और बैंकिंग सिस्टम को अंततः कितना नुकसान उठाना पड़ा।”

किसान संकट का मानवीय बैलेंस शीट –

तिवारी ने कहा कि कॉर्पोरेट राइट-ऑफ के आंकड़ों को कृषि संकट की मानवीय कीमत के साथ भी देखना होगा।

NCRB के 2024 के उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार खेती-किसानी में लगे लोगों में 10,546 आत्महत्याएं दर्ज हुईं – 4,633 किसान/काश्तकार और 5,913 खेत मजदूर। अकेले महाराष्ट्र में इनमें से 3,824 मौतें हुईं। NCRB का व्यावसायिक वर्गीकरण यह स्थापित नहीं करता कि हर आत्महत्या का कारण सरकारी नीति, कर्ज या फसल बर्बादी ही है, लेकिन ये आंकड़े खेत क्षेत्र में आत्महत्या से मौतों के लगातार पैमाने को दर्शाते हैं।

तिवारी ने कहा, “कॉर्पोरेट संकट पर रिस्ट्रक्चरिंग, रिजॉल्यूशन, रिकवरी और बैलेंस-शीट क्लीनजिंग की भाषा में चर्चा होती है। ग्रामीण संकट को अंतिम संस्कारों में मापा जाता है। हर किसान या खेत मजदूर की आत्महत्या के पीछे एक परिवार है जो अपना कमाने वाला, अपनी सुरक्षा और अपना भविष्य खो देता है।”

उन्होंने कहा कि विदर्भ और अन्य कृषि क्षेत्रों ने बार-बार फसल नुकसान, अस्थिर भाव, बढ़ती इनपुट लागत, अपर्याप्त सिंचाई, कर्ज और कुछ किसानों को समय पर बीमा और संस्थागत वित्त मिलने में कठिनाइयों के परिणाम भुगते हैं।

“क्रेडिट आय नहीं है और कर्ज समृद्धि नहीं है” –

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि इस अवधि में कृषि ऋण वितरण काफी बढ़ा, जबकि “लार्ज – इंडस्ट्रीज एंड सर्विसेज” श्रेणी में बकाया अग्रिम मार्च 2015 तक लगभग 30.65 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 69.22 लाख करोड़ रुपये हो गया।

तिवारी ने कहा, “किसान का ज्यादा कर्ज लेना अपने आप यह मतलब नहीं देता कि किसान अमीर हो गया। क्रेडिट आय नहीं है। कर्ज समृद्धि नहीं है। अगर इनपुट लागत बढ़ती है, फसल फेल होती है या भाव लागत नहीं निकालता, तो अतिरिक्त क्रेडिट अतिरिक्त देनदारी बन जाता है। कृषि नीति की असली परीक्षा यह है कि क्या काश्तकार को उत्पादन लागत चुकाने के बाद टिकाऊ शुद्ध आय मिलती है।”

तिवारी ने मोदी सरकार के दृष्टिकोण को “कॉर्पोरेट-फर्स्ट, किसान-लास्ट पॉलिसी फ्रेमवर्क” करार दिया। यह तिवारी का राजनीतिक आकलन है; सरकार का कहना है कि राइट-ऑफ कर्ज माफी नहीं है और बैंक वसूली जारी रखते हैं। सरकारी आंकड़ों में पब्लिक सेक्टर बैंकों द्वारा लार्ज इंडस्ट्री एंड सर्विसेज श्रेणी से पर्याप्त वसूली भी दर्ज है।

संसदीय श्वेत पत्र की मांग –

तिवारी ने मांग की कि केंद्र सरकार और RBI संसद के सामने 2014-2026 का व्यापक श्वेत पत्र – लार्ज बॉरोअर राइट-ऑफ, रिकवरी और कृषि कर्ज पर रखे, जिसमें बड़े कर्जदारों की कुल संख्या और श्रेणियां जिनके कर्ज राइट-ऑफ हुए, साल-वार राइट-ऑफ राशि, बाद की वसूली, अनसुलझी राशि और विभिन्न वसूली और दिवाला तंत्रों के तहत परिणाम, लागू प्रकटीकरण कानूनों के अधीन बताए जाएं।

साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय कृषि कर्ज राहत और पुनर्वास फ्रेमवर्क की मांग की, जिसमें आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त सूखा, बाढ़ और विनाशकारी फसल नुकसान के बाद वास्तविक संकटग्रस्त कृषि कर्ज का समयबद्ध पुनर्गठन, आधिकारिक आपदा के दौरान जबरदस्ती वसूली से सुरक्षा, ताजा संस्थागत ऋण तक पहुंच की बहाली, प्रभावी फसल बीमा निपटान और छोटे और सीमांत किसानों तथा कमजोर कृषि परिवारों के लिए विशेष सुरक्षा हो।

अंत में तिवारी ने कहा – “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरा सवाल सीधा है – अगर भारत की वित्तीय प्रणाली संकटग्रस्त कॉर्पोरेट कर्ज के समाधान के लिए विस्तृत तंत्र विकसित कर सकती है, तो वह संकटग्रस्त किसानों के लिए स्थायी, पारदर्शी और मानवीय कर्ज-समाधान तंत्र क्यों नहीं बना सकती?”

“शब्दावली के पीछे मत छिपो। पूरे आंकड़े संसद के सामने रखो – राइट-ऑफ, रिकवरी, अनसुलझा कर्ज और कृषि राहत। देश को देखने दो कि किसे संस्थागत समाधान मिला और किसे बोझ ढोने के लिए छोड़ दिया गया। भारत अपने गांवों की पीड़ा पर टिकाऊ आर्थिक महाशक्ति नहीं बन सकता। किसान दान नहीं मांग रहा। किसान आर्थिक न्याय, लाभकारी खेती और वित्तीय प्रणाली के सामने समानता मांग रहा है।”।

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वेकोलि में ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ के संदेश के साथ सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ

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  • सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे ने दिलाई शपथ, डिजिटल पारदर्शिता और नैतिक कार्यसंस्कृति पर जोर, मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में होंगे विविध कार्यक्रम

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ आज दिनांक 26.10.2026 को ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ की थीम के साथ किया गया।

वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत शरद पांडे ने कंपनी मुख्यालय में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता जागरूकता की शपथ दिलाकर सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक (वित्त एवं मानव संसाधन) श्री बिक्रम घोष, निदेशक (तकनीकी/परिचालन एवं योजना) डॉ. अंजनी कुमार तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सीएमडी ने दिया पारदर्शिता और नैतिकता का संदेश –
अपने संबोधन में डॉ. हेमंत शरद पांडे ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को अपने कार्यों का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर सतर्कता के प्रति सदैव सजग रहना और प्रत्येक दायित्व का निर्वहन सकारात्मक दृष्टिकोण, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ करना आवश्यक है। सभी को अपने आचरण एवं कार्यप्रणाली में उच्च नैतिक मानदंडों का पालन करते हुए सत्यनिष्ठा को कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

डिजिटल प्रयासों से बढ़ी पारदर्शिता –
मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे ने अपने संबोधन में वेकोलि द्वारा पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे डिजिटल प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से कार्यों में मैन्युअल हस्तक्षेप कम हुआ है तथा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है। डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग सुशासन एवं भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यप्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत वेकोलि मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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सोलर डिफेंस ने भारतीय सेना को सौंपे ‘नागास्त्र-2’ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन के 21 यूनिट, 650 MM आर्मर भेदने में सक्षम

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  • 4 किलो टेंडम वारहेड, 50 KM तक फायर-एंड-फॉरगेट, 60 मिनट तक हवा में, दिन-रात निगरानी कैमरा और ECCM तकनीक से जैमिंग में भी कामयाब, महाजन फील्ड में ट्रायल पास

नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :

शहर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने गुरुवार को भारतीय सेना को ‘नागास्त्र-2′ एंटी-टैंक लॉइटर म्युनिशन सिस्टम के 21 यूनिट की खेप सौंपी। कंपनी के प्लांट से वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खेप रवाना की गई।

क्या है नागास्त्र-2 की ताकत –
यह सिस्टम दिन और रात निगरानी कैमरों और 4 किलोग्राम के टेंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड से लैस है, जो 650 MM तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) से सुरक्षित टारगेट को भी भेद सकता है।

  • रेंज : रिकवर और रीयूज मोड में 25 KM, फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 KM
  • एंड्योरेंस : 60 मिनट तक हवा में रहने में सक्षम
  • तकनीक : 360 डिग्री जिम्बल कैमरा, नाइट ऑपरेशन के लिए थर्मल कैमरा का ऑप्शन, वीडियो और टेलीमेट्री के लिए प्रोपराइटरी एन्क्रिप्शन, 2 मीटर CEP के साथ हाई-प्रिसिजन टारगेटिंग
  • 80% से ज्यादा स्वदेशी कंटेंट

सबसे बड़ी खूबी – ECCM –
नागास्त्र-2 की सबसे अहम तकनीकी विशेषता इसकी इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता है। यह इलेक्ट्रॉनिकली कॉन्टेस्टेड बैटलफील्ड में कम्युनिकेशन जैमिंग, GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों के बीच भी ऑपरेट कर सकती है।

कंपनी के अनुसार नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (MFFR) में तकनीकी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां यूजर्स ने सभी ऑपरेशनल और ECCM पैरामीटर देखे। सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश के झांसी के पास बबीना सहित कई जगहों पर किया गया है।

2025 में भारतीय सेना ने SDAL को लगभग 450 नागास्त्र-1R लॉइटरिंग म्युनिशन का ऑर्डर दिया था। नागास्त्र-1R किफायती और लांचर सिस्टम के पूर्ण रीयूज वाला सिस्टम है। नागास्त्र-2 की डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने और सेना को एडवांस, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन लॉइटर म्युनिशन से लैस करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

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स्टारलिंक की एंट्री से देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा : बालकृष्ण भरतिया

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  • स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट ने किया कड़ा विरोध, कहा – हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए

नई दिल्ली :

स्वदेशी व्यापारी मंच और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने भारत में अमेरिकी कंपनी स्टारलिंक (स्पेसएक्स) द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदान करने की एंट्री का कड़ा विरोध किया है। दोनों संगठनों ने स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय डेटा संप्रभुता के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा है कि यह प्रवेश देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक और कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि स्टारलिंक के आने से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न होगा।

वैश्विक नेटवर्क और निगरानी में चुनौती

भरतिया ने बताया कि स्टारलिंक का नेटवर्क हजारों सैटेलाइट का वैश्विक जाल है, जो लेजर लिंक से जुड़े हैं। भारतीय यूजर का डेटा विदेशी ग्राउंड स्टेशनों से होकर जा सकता है और भारत के बाहर डिक्रिप्ट हो सकता है। ऐसी स्थिति में कानून सम्मत निगरानी, बॉर्डर क्षेत्रों में सुरक्षा (जमीन से 50 किमी और समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक) और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। 26/11 जैसे हमलों के बाद जब सैटेलाइट फोन का दुरुपयोग हुआ था, भारत ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं कर सकता।

डेटा संप्रभुता पर भी खतरा

भरतिया ने आगे कहा कि स्टारलिंक के कारण देश की डेटा संप्रभुता का भी खतरा है। इंटरनेट सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय डेटा है। अगर स्टारलिंक को अनुमति मिली तो हमारे किसानों, जवानों, व्यापारियों और नागरिकों का संवेदनशील डेटा एक विदेशी निजी कंपनी के नियंत्रण वाले सर्वर पर जाएगा। यह डेटा लोकलाइजेशन और आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत के खिलाफ है।

हमारे पास स्वदेशी तकनीक है

स्वदेशी व्यापारी मंच और कैट का मानना है कि भारत के पास अपनी क्षमता है। इसरो, एनएसआईएल, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती एयरटेल समर्थित वनवेब जैसी भारतीय कंपनियां सैटेलाइट संचार सेवा देने के लिए तैयार हैं। जब हमारे पास स्वदेशी तकनीक मौजूद है, तो अपनी रणनीतिक डिजिटल बुनियाद एक अमेरिकी कंपनी को क्यों सौंपें? भरतिया ने प्रश्न किया।

सरकार के समक्ष तीन सुझाव

विषय को आगे ले जाते हुए बालकृष्ण भरतिया ने भारत सरकार के समक्ष अपने सुझाव दिए –

क) स्टारलिंक को अंतिम व्यावसायिक और स्पेक्ट्रम आवंटन की अनुमति न दी जाए।
ख) मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया के तहत भारतीय सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता और बढ़ावा दिया जाए।
ग) किसी भी सैटेलाइट ऑपरेटर के लिए 100% ग्राउंड उपकरण भारत में बनाना और सारा डेटा भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य किया जाए।

भरतिया ने अंत में सभी देशभक्त नागरिकों, उद्योग संगठनों और मीडिया से स्वदेशी तकनीक का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हमारा इंटरनेट, हमारा डेटा, हमारी सुरक्षा – भारतीय हाथों में ही रहनी चाहिए।

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Nagpur, IN
10:47 am, 27 Oct 2026
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