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सहाही विधानसभा क्षेत्रांत रंगला ‘महापौर श्रावण उत्सव’।

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जगद्गुरु नरेंद्राचार्य महाराज के हाथों ‘सनातन पंचांग 2027’ मराठी ऐप का लोकार्पण

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  • दशहरा के शुभ मुहूर्त पर हुआ लोकार्पण, 7 भाषाओं में उपलब्ध है ऐप, 48 लाख से अधिक डाउनलोड

श्री क्षेत्र नाणिज, 21 अक्टूबर :

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी नरेंद्राचार्य महाराज के कर-कमलों द्वारा दशहरा के शुभ मुहूर्त पर, 20 अक्टूबर 2026 को ‘सनातन पंचांग 2027’ (मराठी) ऐप का भव्य लोकार्पण किया गया। इस मंगल अवसर पर उपस्थित जनसमूह को आशीर्वाद देते हुए स्वामी जी ने कहा, “यह अत्यंत सुंदर पंचांग ऐप है। ‘सनातन पंचांग’ बहुत ही उत्कृष्ट एवं अत्यधिक उपयोगी है। अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए।”

स्वामी जी ने स्वयं किया डाउनलोड

स्वामी जी ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि ‘सनातन पंचांग’ 7 भाषाओं में उपलब्ध है और उन्होंने उसी समय अपने मोबाइल में भी इस ऐप को डाउनलोड किया। इस शुभ दिन पर स्वामी जी के पावन हाथों से ऐप का लोकार्पण होने पर ‘सनातन पंचांग’ परिवार की ओर से उनके श्रीचरणों में कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस अवसर पर ‘सनातन पंचांग’ समूह की ओर से श्री गोविंद भारद्वाज, श्रीमती दीपा औंधकर, श्रीमती शुभांगी मुळ्ये एवं श्री हनुमंत करंबेळकर उपस्थित थे।

7 भाषाओं में उपलब्ध है ऐप

‘सनातन पंचांग’ ऐप Android और iOS, दोनों प्रणालियों पर मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड़, तेलुगु और तमिल – इन 7 भाषाओं में उपलब्ध है। Android प्रणाली पर अब तक 41 लाख से अधिक, जबकि iOS प्रणाली पर 7 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने इस ऐप को डाउनलोड किया है। ‘सनातन पंचांग’ समूह की ओर से आह्वान किया गया है कि आप स्वयं इस ऐप को डाउनलोड करें और अपने रिश्तेदारों, मित्रों, पड़ोसियों तथा सहकर्मियों को भी इसके लिए प्रेरित कर भारतीय संस्कृति के प्रसार में अपना बहुमूल्य योगदान दें।

ऐप की प्रमुख विशेषताएं

‘सनातन पंचांग’ ऐप में दैनिक जीवन के लिए आवश्यक जानकारी, जैसे- शुभ मुहूर्त, पर्व-त्योहार, धर्मशिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी सुझाव और सुविचार आदि विस्तार से दिए गए हैं। इसके साथ ही, संकष्टी चतुर्थी और एकादशी जैसी महत्वपूर्ण तिथियों की पूर्व सूचनाएं (नोटिफिकेशन्स), दिनविशेष, होमस्क्रीन विजेट और रिमाइंडर जैसी अनेक आधुनिक सुविधाएं भी इस ऐप में उपलब्ध हैं।

डाउनलोड के लिए लिंक : http://Sanatanpanchang.com/download-apps/

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मानसून ने पश्चिम विदर्भ को दिया धोखा – 40 लाख हेक्टेयर पर फसल संकट

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  • अगस्त में 58% बारिश की कमी, अकोला 84%, अमरावती 82%, यवतमाल 78% सूखे की मार में – दोबार-तिबार बुवाई के बाद फूल-फलियां-बोंड बनने की अवस्था में लंबा ब्रेक; 6 महीने में 815 किसान आत्महत्या के बाद अब नापीकी का नया संकट, किशोर तिवारी ने पीएम मोदी से विदर्भ दौरे और 12 सूत्री एकीकृत कृषि संकट निर्मूलन कार्यक्रम की मांग की

यवतमाल,6 सितंबर 2026 : यंदा के मानसून ने पश्चिम विदर्भ के किसान को धोखा दे दिया है। पावसाचे उशिरा आगमन, शुरू में अनिश्चितता, बीच में अतिवृष्टि, दोबार-तिबार पेरणी और फिर अगस्त में पड़े अभूतपूर्व लंबे सूखे ने यवतमाल, अमरावती, अकोला, वाशिम, बुलढाणा और वर्धा – इन छह जिलों के लगभग 40 लाख हेक्टेयर कोरडवाहू पट्टे पर खड़ी कपास, सोयाबीन, तूर, मूंग-उड़द की खरीफ फसल को गंभीर खतरे में डाल दिया है। यह चेतावनी विदर्भ जन आंदोलन समिति के नेता किशोर तिवारी ने दी है।

तिवारी ने कहा – “यंदा का मानसून पश्चिम विदर्भ के लिए कृषि आपातकाल बन गया है। हंगाम खत्म होने के बाद पंचनामा करने से अच्छा है आज खेत में खड़ी फसल और जिंदा किसान को बचाया जाए।”

अगस्त ने तोड़ी कमर

आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में विदर्भ में सामान्य 297.1 मिमी के मुकाबले सिर्फ 125.5 मिमी बारिश हुई – 58% की सीधी तूट। संचयी जून-अगस्त की तूट 22% दिखती है, लेकिन असली मार समय की है।

जिलेवार अगस्त की तूट देखिए – अकोला 84%, अमरावती 82%, यवतमाल 78%, वर्धा 73%, वाशिम 71%, बुलढाणा 61%। जुलाई में हुई ज्यादा बारिश से औसत भले ही सुधरा दिखे, पर मिट्टी में नमी खत्म होने से कपास पाते-फूल-बोंड की अवस्था में झड़ रहा है, सोयाबीन फूल और शेंगा भरने के टप्पे पर सूख रहा है, तूर की बढ़त रुक गई है।

तिवारी ने कहा – सरकार पूरे हंगाम की औसत दिखाकर अगस्त की 60 से 80% की तूट को छुपाए नहीं। खेती में बारिश कब हुई, यह कितनी हुई उतना ही महत्वपूर्ण है।

40 लाख हेक्टेयर का सवाल और 815 मौतें

पश्चिम विदर्भ के इस पट्टे का सैटेलाइट, मिट्टी की नमी और गांव-निहाय प्रत्यक्ष सर्वे से 7 दिन में विशेष नुकसान आकलन हो, यह मांग है।

यह संकट ऐसे इलाके पर आया है जहां जनवरी से जून 2026 के बीच 6 महीने में ही 815 किसान आत्महत्याएं हुई हैं – अमरावती 176, बुलढाणा 169, अकोला 130, यवतमाल 128, वाशिम 112। तिवारी ने कहा – “इन मौतों को व्यक्तिगत विफलता कहना वास्तविकता से भागना है। कर्ज, लागत, बाजार, बीमा और मौसम का झटका एक साथ आता है तो किसान टूटता है। अब 40 लाख हेक्टेयर की नापीकी इसे और भयावह बनाएगी।”

1995 से संकट, 2006 में PM आए, अब फिर जरूरत

तिवारी ने याद दिलाया कि 1995 से विदर्भ का संकट राष्ट्रीय चर्चा में है। 2006 में तत्कालीन PM डॉ. मनमोहन सिंह ने अमरावती-वर्धा-यवतमाल आकर किसान परिवारों से संवाद किया था और विशेष पैकेज दिया था।

“20 साल बाद भी वहीं आत्महत्या हो रही है और जलवायु परिवर्तन ने संकट को और जटिल बना दिया है। अब सिर्फ पैकेज नहीं, नीति बदलनी होगी।”

उन्होंने PM नरेंद्र मोदी से अपील की – “दिल्ली की फाइल और राज्य की औसत मत देखिए, आप खुद यवतमाल, अमरावती, अकोला, वाशिम, बुलढाणा, वर्धा के खेत में आइए। जलती कपास-सोयाबीन देखिए, विधवाओं से बात कीजिए, आदिवासी कोरडवाहू किसानों को सुनिए और फिर एकीकृत कृषि संकट निर्मूलन कार्यक्रम घोषित कीजिए।”

MSP का ऐलान काफी नहीं, खरीद जरूरी

2026-27 के लिए केंद्र ने MSP घोषित किया है – पीला सोयाबीन 5,708 रु, तूर 8,450 रु, मध्यम कपास 8,267 रु, लंबा कपास 8,667 रु प्रति क्विंटल। पर MSP घोषित करने से कुछ नहीं होगा, पहले दिन से सरकारी खरीद होनी चाहिए।

साथ ही 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास आयात पर सीमा शुल्क माफी पर सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा – “वस्त्रोद्योग को सस्ता कच्चा माल चाहिए, पर कीमत विदर्भ का कपास किसान क्यों चुकाए? हर आयात-निर्यात फैसले से पहले किसान-आय पर असर का मूल्यांकन अनिवार्य हो।”

12 सूत्री मांग

  1. तालुका-निहाय वैज्ञानिक मूल्यांकन कर पात्र जगह सूखा घोषित करो।
  2. 40 लाख हेक्टेयर का 7 दिन में उपग्रह + जमीनी सर्वे।
  3. गंभीर नुकसान पर 50,000 रु/हेक्टेयर विशेष मदद।
  4. जबरन वसूली बंद, कर्ज पुनर्गठन/माफी और नया फसल कर्ज।
  5. फसल बीमा दावे तुरंत, बीमा कंपनी का प्रीमियम और भुगतान सार्वजनिक।
  6. कपास-सोयाबीन-तूर की MSP पर पहले दिन से पर्याप्त खरीद।
  7. किसान को फसल और प्रमाणित बीज-तकनीक चुनने की आजादी, कम पानी-गर्मी सहने वाले वाण पर शोध।
  8. जल सुरक्षा – खेत-तलैया, सूक्ष्म सिंचाई, भूजल पुनर्भरण।
  9. आयात-निर्यात नीति से पहले किसान-परिणाम मूल्यांकन।
  10. आत्महत्याग्रस्त परिवार को 10 लाख, बच्चों की शिक्षा, विधवा को रोजगार।
  11. खेत मजदूर-भूमिहीन को 200 दिन रोजगार और अन्न सुरक्षा।
  12. 2001 के बाद की आत्महत्या, पैकेज, कर्ज, सिंचाई, बीमा, बाजार और जलवायु परिवर्तन पर श्वेतपत्र और गांव स्तर पर आर्थिक संकट की पूर्व-चेतावनी प्रणाली।

तिवारी ने अंत में कहा – “बारिश सरकार के हाथ में नहीं, पर बारिश ने धोखा देने के बाद किसान को कर्ज-बीमा-बाजार के दरवाजे पर अकेला छोड़ना है या पूरी सरकार उसके पीछे खड़ी करनी है, यह सरकार के हाथ में है। 40 लाख हेक्टेयर फसल बची तो लाखों परिवार बचेंगे।”

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बुटीबोरी प्लॉट मामले में MIDC को झटका, बेगाजो इंडस्ट्रीज की बड़ी कानूनी जीत

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  • हाईकोर्ट ने कहा – नीलामी के बाद मिले सेल सर्टिफिकेट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने स्टाम्प ड्यूटी की मांग को किया खारिज

नागपुर,6 सितंबर : बुटीबोरी MIDC के एक औद्योगिक प्लॉट को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई में बेगाजो इंडस्ट्रीज प्रा. लि. ने महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (MIDC) के खिलाफ जीत हासिल की है। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने MIDC को आदेश दिया है कि वह NCLT नीलामी में खरीदार बेगाजो इंडस्ट्रीज का नाम लीजधारक के रूप में बिना सेल सर्टिफिकेट के रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी की जिद किए दर्ज करे।

न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश आर. व्यास की खंडपीठ ने कंपनी के अधिकृत निदेशक अजय शिवशंकर खेमका द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया।

क्या है पूरा मामला

कंपनी ने वरुण सैक्स प्रा. लि. के परिसमापक (Liquidator) द्वारा की गई नीलामी में बुटीबोरी MIDC स्थित प्लॉट नंबर D-40 को 2.36 करोड़ रुपये में खरीदा था। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत वरुण सैक्स के परिसमापन का आदेश दिया था। परिसमापक ने 23 अगस्त 2022 को बेगाजो इंडस्ट्रीज को सेल सर्टिफिकेट जारी किया और उसी दिन संपत्ति का कब्जा भी सौंप दिया।

इसके बाद कंपनी ने MIDC से लीजहोल्ड अधिकार अपने नाम पर ट्रांसफर करने के लिए संपर्क किया। लेकिन MIDC ने यह कहकर इनकार कर दिया कि सेल सर्टिफिकेट का रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 की धारा 17 के तहत नहीं हुआ है।

कोर्ट ने MIDC का तर्क खारिज किया

हाईकोर्ट ने MIDC के इस रुख को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक नीलामी के बाद जारी किया गया सेल सर्टिफिकेट अधिनियम की धारा 17(1) के तहत अनिवार्य रजिस्ट्रेशन की श्रेणी में नहीं आता।

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसलों – स्टेट ऑफ पंजाब बनाम फेरस अलॉय फोर्जिंग्स प्रा. लि. और बी. अरविंदकुमार बनाम भारत सरकार – का हवाला भी दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल MIDC में लीजधारक का नाम बदलने की मांग करना सेल सर्टिफिकेट का अलग से उपयोग नहीं है, जिस पर स्टाम्प ड्यूटी लगे।

इसी के साथ कोर्ट ने MIDC द्वारा 1 फरवरी 2023, 23 मई 2023, 5 सितंबर 2023 और 8 जनवरी 2025 को जारी किए गए पत्रों को रद्द कर दिया और MIDC को निर्देश दिया कि वह बिना रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी की मांग के बेगाजो इंडस्ट्रीज को लीजधारक के रूप में दर्ज करे।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित खरे और अधिवक्ता पीयूष मिश्रा ने पैरवी की, जबकि MIDC की ओर से अधिवक्ता जे. बी. कासट और प्रतिवादी क्र. 4 की ओर से AGP के. पी. मरपकवार उपस्थित थे।

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