लेखक ने उठाए सवाल — भारत में ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध, फिर करोड़ों खर्च क्यों?
विदेशी डिग्री का मोह: अंडरग्रेजुएट पढ़ाई के लिए बच्चों को विदेश भेजने का बढ़ता चलन खतरनाक संकेत *उपशीर्षक*: लेखक विजय फणशिकर ने उठाए सवाल — भारत में ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध, फिर करोड़ों खर्च क्यों?
इंट्रो: लाखों रुपये कर्ज लेकर माता-पिता अपने बच्चों को नॉन-स्पेशलाइज्ड अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए विदेश भेज रहे हैं। यह चलन अब सामाजिक चिंता का विषय बन गया है। ‘द हितवाद’ में प्रकाशित लेख में वरिष्ठ लेखक विजय फणशिकर ने इसे “अनफॉर्चुनेट सोशल-ट्रेंड” बताते हुए रेड-फ्लैग करने की अपील की है।
नागपुर, 24 मई 2026
विस्तार से समाचार
नागपुर से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक ‘द हितवाद’ के “Loud Thinking” कॉलम में वरिष्ठ लेखक विजय फणशिकर ने विदेशी शिक्षा के बढ़ते क्रेज पर कड़ा प्रहार किया है। लेख का शीर्षक “Red-flagging an unfortunate social-trend” है।
फणशिकर के अनुसार, कई परिवार भीख मांगकर या भारी कर्ज लेकर बच्चों को सामान्य ग्रेजुएशन के लिए विदेश भेज रहे हैं। वे तीन बड़े कारण गिनाते हैं जिनसे इस चलन को रोकना चाहिए:
पहला: भारत में ही अच्छी सामान्य शिक्षा आसानी से उपलब्ध है। विदेश जाने की कोई मजबूरी नहीं।
दूसरा: अंडरग्रेजुएट के लिए करोड़ों खर्च करना परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ है।
तीसरा: विदेश पढ़े बच्चे खुद को भारत में पढ़े युवाओं से श्रेष्ठ समझने लगते हैं और उनमें देश की बजाय विदेशी जीवनशैली के प्रति “साइलेंट लॉयल्टी” विकसित हो जाती है।
लेखक ने ‘द हितवाद’ में काम करने वाली एक लड़की का उदाहरण दिया। पत्रकारिता का पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स करने वह विदेश गई। परिवार ने दो साल के लिए भारी रकम खर्च की। लौटकर उसने माना कि उसे अपने “स्पेशलाइजेशन” के बारे में कुछ भी नया नहीं पता, सिवाय एक विदेशी सर्टिफिकेट के।
फणशिकर लिखते हैं कि कई युवा खुद मानते हैं कि विदेशी कोर्सों में टीचिंग क्वालिटी या इंफ्रास्ट्रक्चर भारत से बेहतर नहीं है। उनका तर्क है कि आज के भारत में अनगिनत लोग बिना विदेशी डिग्री के ही सफल हुए हैं। देश के ज्यादातर सामाजिक, राजनीतिक और औद्योगिक लीडर भारत में ही पढ़कर निकले हैं।
लेखक का मानना है कि इस चलन को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और देशभक्ति की भावना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय डायस्पोरा से जुड़ाव की तारीफ की, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि क्या अंडरग्रेजुएट के लिए बच्चों को भारी खर्च पर विदेश भेजना समझदारी है?
नागपुर, 24 मई 2026 : लाखों रुपये कर्ज लेकर माता-पिता अपने बच्चों को नॉन-स्पेशलाइज्ड अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए विदेश भेज रहे हैं। यह चलन अब सामाजिक चिंता का विषय बन गया है,लेखक ने रेड-फ्लैग करने की अपील की है।
लेखक ने विदेशी शिक्षा के बढ़ते क्रेज पर कड़ा प्रहार किया है। लेख का शीर्षक “Red-flagging an unfortunate social-trend” है।
लेखक के अनुसार, कई परिवार भीख मांगकर या भारी कर्ज लेकर बच्चों को सामान्य ग्रेजुएशन के लिए विदेश भेज रहे हैं। वे तीन बड़े कारण गिनाते हैं जिनसे इस चलन को रोकना चाहिए:
पहला: भारत में ही अच्छी सामान्य शिक्षा आसानी से उपलब्ध है। विदेश जाने की कोई मजबूरी नहीं।
दूसरा: अंडरग्रेजुएट के लिए करोड़ों खर्च करना परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ है।
तीसरा: विदेश पढ़े बच्चे खुद को भारत में पढ़े युवाओं से श्रेष्ठ समझने लगते हैं और उनमें देश की बजाय विदेशी जीवनशैली के प्रति “साइलेंट लॉयल्टी” विकसित हो जाती है।
एक लड़की का उदाहरण दिया। पत्रकारिता का पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स करने वह विदेश गई। परिवार ने दो साल के लिए भारी रकम खर्च की। लौटकर उसने माना कि उसे अपने “स्पेशलाइजेशन” के बारे में कुछ भी नया नहीं पता, सिवाय एक विदेशी सर्टिफिकेट के।
लेखक लिखते हैं कि कई युवा खुद मानते हैं कि विदेशी कोर्सों में टीचिंग क्वालिटी या इंफ्रास्ट्रक्चर भारत से बेहतर नहीं है। उनका तर्क है कि आज के भारत में अनगिनत लोग बिना विदेशी डिग्री के ही सफल हुए हैं। देश के ज्यादातर सामाजिक, राजनीतिक और औद्योगिक लीडर भारत में ही पढ़कर निकले हैं।
लेखक का मानना है कि इस चलन को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और देशभक्ति की भावना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय डायस्पोरा से जुड़ाव की तारीफ की, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि क्या अंडरग्रेजुएट के लिए बच्चों को भारी खर्च पर विदेश भेजना समझदारी है?
उच्च व तंत्र शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील बोले – एक भी रुपया नहीं देना होगा, पहले शुल्क भर चुके छात्रों को होगी वापसी, सभी विश्वविद्यालयों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
मुंबई, 23 अक्टूबर :
राज्य के दुष्काळग्रस्त तालुकों के विद्यार्थियों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। उच्च व तंत्र शिक्षा विभाग ने परीक्षा शुल्क माफी का निर्णय लिया है और इसके लिए परीक्षा फॉर्म में ‘जीरो चलन’ की सुविधा शुरू की गई है।
मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने बताया कि अब तक 2 लाख 40 हजार 365 विद्यार्थियों ने बिना एक रुपया भरे जीरो चलन के जरिए परीक्षा अर्ज दाखल किए हैं। उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी से पढ़ाई में रुकावट न आए।
उन्होंने बताया कि सभी विश्वविद्यालयों, संचालनालय और परीक्षा विभाग स्तर पर यंत्रणा कार्यरत है और परिपत्रक जारी किए गए हैं। जो विद्यार्थी पहले ही शुल्क भर चुके हैं, उन्हें राशि वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पात्र विद्यार्थी लाभ से वंचित न रहे और सवलत लेते समय कोई दिक्कत न आए।
शिकायत या जानकारी के लिए संपर्क –
विभाग ने प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए संपर्क अधिकारियों के नंबर जारी किए हैं –
मुंबई विद्यापीठ : डॉ. पूजा रौंदले – 9322020589, लीलाधर बनसोड – 9833969977
सावित्रीबाई फुले पुणे :डॉ. राजेंद्र तलवारे – 9890642431, डॉ. सविता कुलकर्णी – 7720036774
शिवाजी कोल्हापुर : डॉ. अजितसिंग जाधव – 9545595999
नागपुर (राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज) : डॉ. अनुप पळसोकर – 8378974240, डॉ. विजय तांगडे – 9545112555
गोंडवाना गडचिरोली : डॉ. नवीन मंगुळे – 9511910575, डॉ. प्रिया गेडाम – 9049474119
अमरावती, जळगाव, नांदेड, संभाजीनगर, सोलापुर, SNDT, YCMOU नाशिकके लिए भी अलग अधिकारियों के नंबर जारी किए गए हैं।
छात्र अपने विश्वविद्यालय के परीक्षा व मूल्यमापन मंडल या विद्यार्थी विकास विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
प्राध्यापक पर छात्रा को आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप, निष्पक्ष जांच और निलंबन की मांग, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
नागपुर,18 अक्टूबर 2026 :
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), नागपुर महानगर द्वारा सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, नागपुर में छात्राओं से जुड़े एक गंभीर मामले को लेकर छात्रों के हित में 17 अक्टूबर को प्रदर्शन किया गया। छात्रा के हितों की रक्षा के लिए अधिक से अधिक संख्या में अभाविप कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यकर्ताओं ने महाविद्यालय प्रशासन को निवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं कठोर कार्रवाई की मांग की।
महाविद्यालय के एक प्राध्यापक द्वारा एक छात्रा को कथित रूप से अत्यंत आपत्तिजनक एवं धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले संदेश भेजे जाने का मामला सामने आया है। छात्रा के परिवार द्वारा उसके मोबाइल में यह संदेश देखे जाने के बाद यह प्रकरण उजागर हुआ। अभाविप ने इसे गंभीर विषय मानते हुए छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और महाविद्यालय में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निवेदन महाविद्यालय को सौंपा।
प्रमुख मांगें
निवेदन के माध्यम से अभाविप ने मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने, जांच पूरी होने तक आवश्यक अंतरिम कार्रवाई करने तथा शिकायतकर्ता छात्रा की पहचान गोपनीय रखने की मांग की। साथ ही, छात्रा एवं गवाहों पर किसी प्रकार का दबाव या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न होने देने और जांच की प्रगति की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
जब तक जांच नहीं होती तब तक के लिए प्राध्यापक को निष्कासित किया जाना चाहिए और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, यह विद्यार्थी परिषद की एक प्रमुख मांग है।
अभाविप का स्पष्ट मत
अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि हैं तथा प्रशासन को बिना किसी विलंब के नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो अभाविप द्वारा छात्रहित एवं न्याय के लिए लोकतांत्रिक माध्यमों से आगे की भूमिका अपनाई जाएगी।
आंदोलन में महानगर सहमंत्री संकेत खड़कर, पश्चिम जिला संयोजक तनु समुद्रे, दक्षिण जिला संयोजक अथर्व देशमुख सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
Nagpur, October 10, 2026: Young kalam science exibition 2026 was organized at Gulmohar Hall, Bajaj Nagar, under the joint initiative of Nagpur Municipal Corporation (NMC) and HCL, based on the ‘Viksit Bharat’ theme provided by the Central Government. The objective of the exhibition was to promote scientific thinking, creativity, innovation, and technical skills among students.
Students from Nagpur Municipal Corporation schools showcased various innovative scientific devices and models, keeping the vision of ‘Viksit Bharat’ at the centre of their presentations. Through their creativity, scientific thinking, and technical skills, the students demonstrated how innovation in science and education can play a significant role in the development of the nation.
The programme was attended by Mrs. Santosh Devi Deepak Laddha, Chairperson of the Education Committee of Nagpur Municipal Corporation; Mr. Raju Kanate; Mr. Vishnu Chandes, President of the Teachers’ Association and Senate Member of Rashtrasant Tukadoji Maharaj Nagpur University; Additional Commissioner Mr. Murugananthan M. Deputy commissioner dr. Meghna wasankar Education Officer Mr. Amit bhadane and other dignitaries.
The dignitaries visited the exhibition, examined the models prepared by the students, and interacted with them to learn about their projects. They appreciated the students’ talent and efforts and encouraged them to pursue further opportunities in science, technology, and innovation.
On this occasion, students who demonstrated outstanding performance were honoured with first, second, and third prizes.
The exhibition provided students with a platform to showcase their talent while encouraging them to understand their role in building ‘Viksit Bharat’ and to develop scientific approaches to finding solutions to future challenges.