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देवाभाऊ, हार पचाने के लिए बड़ा दिल चाहिए; ‘हिटलिस्ट’ का रोना बंद करो!

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  • नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हार के बाद मुख्यमंत्री की कथित हिटलिस्ट पर सवाल, फडणवीसशाही के अहंकार और पार्टी के भीतर के असंतोष का परिणाम है नागपुर की हार, किसान नेता किशोर तिवारी का तीखा लेख

नागपुर, 01 नवंबर 2026 : नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में हार के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कथित ‘हिटलिस्ट’ पर भाजपा के पांच बड़े नेता होने की खबर सत्तावेध ने प्रकाशित की है। यह खबर अगर सच है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। देवाभाऊ, हार पचाने के लिए बड़ा दिल चाहिए। अपनी राजनीतिक गलतियों को छिपाने के लिए पार्टी के नेताओं को आरोपी के कटघरे में खड़ा करना सिर्फ रोने का खेल है!

किसान नेता और राजनीतिक विश्लेषक किशोर तिवारी ने अपने लेख में कहा है कि मूल रूप से नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पिछली चुनाव से भाजपा के कब्जे में नहीं रहा है। उस समय इससे भी बड़ी हार हुई थी। पार्टी में असंतोष की फुसफुसाहट तब भी थी। इस बार सुधाकर कोहले ने बेहद अच्छी लड़ाई लड़ी। सही समन्वय साधा होता, तो जीत भी संभव थी। लेकिन उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लगाते समय पार्टी खड़ी करने वाले वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लिया गया क्या?

यह हार एक उम्मीदवार की नहीं, बल्कि जनता के घटते विश्वास, गलत नीतियों, पार्टी में खत्म होती लोकतंत्र और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का राजनीतिक परिणाम है। जिन्होंने चालीस साल जनसंघ-भाजपा संगठन बढ़ाने के लिए खून-पसीना एक किया, अपना संसार बर्बाद किया, वे आज आर्थिक तंगी और राजनीतिक कूड़ेदान में हैं। लेकिन सत्ता आने पर मलाई खाने के लिए जुटे अवसरवादी खुद को सबसे बड़ा निष्ठावान बताते हैं। सत्ता के सहारे हजारों करोड़ की संपत्ति की चर्चा वाले प्रभावशाली लोगों की आर्थिक उन्नति और राजनीतिक प्रभाव की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

सत्ता के दलालों की हिटलिस्ट बनाओ –
देवाभाऊ, हिटलिस्ट बनानी ही है तो निष्ठावान कार्यकर्ताओं की नहीं, सत्ता के इर्द-गिर्द की दलाली की बनाओ! अपने आसपास नवनाथ बन, विक्की मुत्रेजा, मनोज कंपोस्ट और अविश्वास महाठग व कुख्यात पत्रकार और सत्तावृत्त के आसपास हमेशा भीड़ करने वाले राजनीतिक विश्लेषण करने वाले कुलकर्णी जोशी के इतिहास और आप पर हुए प्रभाव के बारे में आत्मपरीक्षण करो। पार्टी की निर्णय प्रक्रिया में सच्चे कार्यकर्ताओं से ज्यादा सत्ता के करीबी लोगों को ज्यादा महत्व क्यों मिलता है, इसका जवाब दो।

दिल्ली में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के राजनीतिक सहारे महाराष्ट्र में एकाधिकार चलाने का मोह छोड़ो। दिल्ली के इन दो गुजराती नेताओं के केंद्रीकृत राजनीति से देशभर में पैदा हुए असंतोष को भी नजरअंदाज मत करो। जनता के मन की नाराजगी किसी भी राजनीतिक हिटलिस्ट से ज्यादा प्रभावी होती है।

अनिल सोले और गिरीश व्यास जैसे वरिष्ठ नेताओं का असंतोष पार्टी के लिए खतरे की घंटी था। उस पर संवाद से रास्ता निकालने के बजाय अब हार के बाद कथित भीतरघात की खबरें फैलाकर ‘सबको देख लूंगा’ जैसा संदेश देना मतलब पार्टी में बची-खुची लोकतंत्र को भी खत्म करने का रास्ता है।

मतभेद मतलब गद्दारी नहीं। नेतृत्व पर आलोचना मतलब पार्टीद्रोह नहीं। और हार की जिम्मेदारी लेना मतलब कमजोरी नहीं!

आज विदर्भ का किसान सूखा, कर्ज और आत्महत्याओं के संकट में जल रहा है। बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सवालों से जनता परेशान है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री को अपनी पार्टी के विरोधियों को सबक सिखाने के बजाय जनता का खोया विश्वास वापस पाने की कोशिश करनी चाहिए।

देवाभाऊ, बदले से संगठन खड़ा नहीं होता, धमकियों से निष्ठा पैदा नहीं होती और अहंकार से जनता का दिल नहीं जीता जाता! नागपुर के नतीजे ने दिया संदेश स्वीकार करो। अपने फैसलों की जिम्मेदारी लो। सत्ता की दलाली से दूरी रखो। जिन्होंने पार्टी के लिए जीवन लगाया, उन ईमानदार कार्यकर्ताओं को फिर सम्मान के साथ पास लाओ।

क्योंकि लोकतंत्र में अंतिम हिटलिस्ट मुख्यमंत्री नहीं बनाते; जनता मतदान से सत्ताधारियों का हिसाब चुकता करती है!

देवाभाऊ, यह राजनीतिक वैर से दी गई सलाह नहीं है। जनसंघ के त्याग, निष्ठावान कार्यकर्ताओं के संघर्ष और विदर्भ की राजनीतिक संस्कृति की समझ रखने वाले एक कार्यकर्ता और राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर की गई यह विनम्र विनती है।

हार का बदला मत लो; हार से सबक लो। नहीं तो नागपुर का इशारा कल पूरे महाराष्ट्र का फैसला बन सकता है!

  • किशोर तिवारी

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Crime

इतवारी के 8 सराफा व्यापारियों को बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी, 10-10 लाख की रंगदारी की मांग

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  • धमकी भरे पत्र में लिखा – पैसे नहीं दिए तो हाथ काटकर सड़क पर फेंक देंगे, परिवार को खत्म कर देंगे, पुलिस के पास गए तो जिम्मेदार तुम होगे; दुकान के बाहर ‘जय श्री राम’ लिखने का फरमान; सराफा एसोसिएशन ने सीएम और पुलिस कमिश्नर को दी सूचना

नागपुर, 01 नवंबर 2026 – दीपावली से पहले नागपुर के सबसे व्यस्त कारोबारी इलाके इतवारी सराफा बाजार में दहशत फैल गई है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से कम से कम 8 बड़े सराफा व्यापारियों को धमकी भरे पत्र भेजकर 10-10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई है।

पत्र भेजने वालों ने धमकी दी है कि अगर पैसे नहीं दिए या पुलिस को सूचना दी तो व्यापारियों और उनके परिवार को मार दिया जाएगा। इन पत्रों से सराफा बाजार में हड़कंप मच गया है, जबकि बाजार दीपावली सीजन की तैयारी में है जब व्यापार और नकदी लेन-देन आमतौर पर बढ़ जाता है।

डाक से आए पत्र, दुकान के बाहर ‘जय श्री राम’ लिखने को कहा –
पुलिस के अनुसार धमकियों का यह सिलसिला करीब 4 से 5 दिन पहले शुरू हुआ। शुरुआत में दो व्यापारियों को डाक के जरिए पत्र मिले। बाद में अन्य सराफा व्यापारियों को भी इसी तरह के पत्र अलग-अलग समय पर भेजे गए। सभी पत्र कथित तौर पर एक ही डाकघर से अलग-अलग समय पर पोस्ट किए गए थे। भेजने वालों ने अपनी पहचान नहीं बताई है।

धमकी भरे पत्र में हाथ से लिखा हुआ है –

“10 लाख रुपये भेजा अरेंज करो पैसे नहीं दिए तो कु तेरे दोनों हाथ काट और सड़क पर नगर के ले जाऊंगा तेरे पूरे परिवार को खत्म कर दूंगा जिस तरह कृष्णा ने चाकू से रावतसा को खत्म किया था इतनी एकता कलयुगी कोर्स हो ऐसे लोग पैसे का धमक करवाने वाले पुलिस के बीच में लाया तो उसके जिम्मेदार तुम होगे पैसा जमा होने पर गार पर जय श्री राम का पोस्टर लगा देना मैं समझ जाऊंगा”

व्यापारियों को निर्देश दिया गया था कि वे 10 लाख रुपये तैयार रखें और दुकान के बाहर ‘जय श्री राम’ का नारा लिखें, ताकि गैंग को पता चल सके कि व्यापारी पैसे देने के लिए तैयार हैं। इसके बाद उन्हें बताया जाता कि पैसा कहां और कैसे देना है।

डीसीपी जोन-3 राहुल मदने ने कहा कि तहसील पुलिस थाने में मामला दर्ज किया जाएगा। पुलिस ने व्यापारियों से बात की है, जो शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या स्थानीय अपराधी बिश्नोई गैंग के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों को डराकर वसूली करने की कोशिश कर रहे हैं। असली पहचान जांच के बाद ही साफ होगी।

सराफा एसोसिएशन ने व्यापारियों को सुरक्षा का आश्वासन दिया –
घटना के बाद सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश रोकड़े और सचिव अंशुल हरडे ने व्यापारियों से घबराने की अपील नहीं करने और किसी भी धमकी भरे कॉल, पत्र या मैसेज की सूचना तुरंत एसोसिएशन को देने को कहा है। व्यापारी रोकड़े, सचिव हरडे या पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम से संपर्क कर सकते हैं।

एसोसिएशन ने बताया कि मामला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संज्ञान में लाया गया है और पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटिल से भी चर्चा हुई है। एसोसिएशन ने आश्वासन दिया कि वह पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।

व्यापारियों से यह भी कहा गया है कि वे दुकानों के बाहर हॉकरों को न लगने दें, ट्रैफिक आवाजाही साफ रखें और अपने गार्ड और कर्मचारियों को निर्देश दें। निर्देश न मानने वालों की फोटो खींचकर एसोसिएशन को सूचित करें।

बिश्नोई गैंग के नाम से दहशत क्यों –
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम के इस्तेमाल से व्यापारी और ज्यादा घबराए हुए हैं। यह गैंग देशभर में कई हाई-प्रोफाइल फायरिंग और हत्या के मामलों से जुड़ा रहा है। हाल ही में फिल्मी हस्तियों और अन्य प्रमुख लोगों को धमकियों और फायरिंग की घटनाओं में इसका नाम आया है।

इस गैंग का नाम पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या, अभिनेता सलमान खान को धमकी और फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग की जांच में भी सामने आया है। कॉमेडियन कपिल शर्मा से जुड़े कनाडा के कैफे पर हमले को भी इस गैंग से जोड़ा गया है।

व्यापारियों ने पुलिस से मांग की है कि पत्र भेजने वालों की पहचान कर उनके और उनके परिवारों की बिना डर के काम करने की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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Health

योग माया : रहस्य का पर्दा

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  • माया भ्रम नहीं, बल्कि सत्य को ढकने वाला परदा है; अविद्या से मुक्ति ही कैवल्य का मार्ग

भारतीय दर्शन में ‘माया’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है। इसे प्रकृति की रहस्यमय शक्ति माना जाता है जो सत्य को छुपाती है और भ्रम पैदा करती है। यह हमें वास्तविकता को समझने से रोकती है। इसे सृष्टि की अभिव्यक्ति की शक्ति भी कहा जाता है, जहाँ एक ही वास्तविकता अनेक रूपों में व्यक्त होती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 7 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि माया तीन गुणों से बनी है – सत्व या पवित्रता, रजस या कर्मशीलता और तमस या जड़ता। ये तीनों गुण प्रकृति के बदलते स्वरूप हैं।

महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र में पाँच क्लेशों या दुखों का वर्णन किया है – अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश। ये पाँच प्रकार के कष्ट हैं – अज्ञान, अहंकार, आसक्ति, घृणा और मृत्यु का भय। ये क्लेश मानव अनुभव को इस प्रकार प्रभावित करते हैं कि मनुष्य की आँखें विकृत रूपों को ही वास्तविकता समझ बैठती हैं।

माया कोई भ्रम नहीं है, बल्कि वह परदा है जो वास्तविकता को विभिन्न बदलते प्रारूपों में ढक लेता है। पतंजलि ने अविद्या शब्द का प्रयोग किया है। अविद्या का अर्थ है दुख का मूल कारण। इस अविद्या के कारण व्यक्ति वास्तविकता को उसकी भ्रमित अवस्था में देखता है। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि अविद्या ही मिथ्या पहचान है।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से यदि हम अपनी सामाजिक स्थिति को गहराई से समझें, तो हम पाते हैं कि बहुत ही रोचक समानताएँ हैं। हमारे विश्वास, अपेक्षाएँ और भावनात्मक अनुकूलन (कंडीशनिंग) हमारी देखने की क्षमता निर्धारित करते हैं। इस मानसिक अनुकूलन के कारण हम चीजों को जैसे वे हैं, वैसे नहीं देख पाते। हम उनमें अपना ही रंग भर देते हैं और उन्हें विकृत रूप में देखते हैं। संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह और चयनात्मक ध्यान भी हमारी आँखों से वास्तविकता को छिपा देते हैं।

हम अक्सर अपनी पहचान अपने शरीर, विचारों, भावनाओं, उपलब्धियों, संपत्ति और सामाजिक स्थिति से जोड़ लेते हैं। लेकिन हमारे अस्तित्व की उचित समझ यह बताती है कि हमारा मूल अस्तित्व शुद्ध चेतना है।

तंत्रिका विज्ञान के अनुसार, मस्तिष्क संवेदी सूचनाओं, यादों और भविष्यवाणियों को एकीकृत करके दुनिया के बारे में हमारे अनुभवों का निर्माण करता है। यही कारण है कि एक ही बात पर अलग-अलग व्यक्तियों की राय अलग-अलग होती है। भावनात्मक प्रभाव और भय का बादल हमारी धारणाओं और निर्णयों पर छा जाता है। आत्म-संदर्भित सोच इस बात का एक और उदाहरण है कि हम वास्तविकता को कैसे विकृत करते हैं।

भारतीय दर्शन ने आत्म-अन्वेषण, मन को और वास्तविकता को देखने की विधि के रूप में निर्धारित की है।

ध्यान विचारों और भावनाओं को देखने में मदद करता है। गहरे मानसिक अनुकूलन को तोड़ने से वैराग्य या अनासक्ति कम होती है। अत्यधिक बाहरी परिस्थितियों पर निर्भरता कम होती है। स्वाध्याय आत्म-अध्ययन और चिंतन है। यह आत्म-जागरूकता की ओर ले जाता है। अभ्यास के परिणामस्वरूप वैराग्य और विवेक या विवेकशील शक्ति विकसित होती है। यह विवेकपूर्ण ज्ञान नित्य और अनित्य के बीच भेद करने में मदद करता है। विवेक साक्षी भाव या चीजों को जैसी हैं वैसी देखने की भावना का आधार है।

आधुनिक विज्ञान भी इस मत का है कि जो ठोस दिखता है वह वास्तव में ऊर्जा का कंपन है। वे केवल दिखने से कहीं अधिक हैं। माया को समझने का यह परिप्रेक्ष्य हमारी भावनात्मक नियमन, संबंधों और वास्तविकता को देखने की हमारी क्षमता को बेहतर बनाने में बहुत मदद करता है। साथ ही यह विखंडन से एकीकरण की ओर और व्यक्तिवाद से सामूहिकता की ओर भी ले जाएगा।

  • डॉ. भूषण कुमार उपाध्याय

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आश्रमशाला में विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल, 16 वर्षीय आदिवासी छात्र लापता

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  • 45 विद्यार्थियों वाले देवलापार के स्वामी विवेकानंद छात्रावास में निगरानी की जिम्मेदारी किसकी ? परीक्षा देकर लौटते समय हुआ लापता, आदिवासी विकास विभाग से जांच की मांग

देवलापार (रामटेक), 01 नवंबर 2026 – आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। आश्रमशालाओं एवं छात्रावासों में विद्यार्थियों के निवास, भोजन, शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होती है। इसके बावजूद देवलापार स्थित स्वामी विवेकानंद आदिवासी विद्यार्थी छात्रावास में रहने वाला 16 वर्षीय छात्र लापता होने से छात्रावासों की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वामी विवेकानंद आदिवासी विद्यार्थी छात्रावास, देवलापार में संग्राम भीमप्रसाद पटले (16), निवासी तिरोडी ग्राम, मिरजापुर, तहसील पांढरवाड़ी, जिला बालाघाट (मध्य प्रदेश) रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा था।

बताया जाता है कि 29 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 10 बजे संग्राम दसवीं की परीक्षा देने के लिए छात्रावास से स्वामी विवेकानंद विद्यालय गया था। दोपहर करीब 1 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद वह विद्यालय से बाहर निकला। इसके बाद स्कूल की पोशाक बदलकर देवलापार की दिशा में जाते हुए देखे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि देर रात तक वह छात्रावास वापस नहीं पहुंचा।

छात्र के वापस नहीं लौटने पर छात्रावास प्रशासन, परिजनों, रिश्तेदारों एवं मित्रों ने उसकी तलाश शुरू की। आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन करने के बावजूद उसका कोई पता नहीं चल सका। अंततः इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। देवलापार पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। परीक्षा देने गया छात्र वापस लौटते समय कहां और किन परिस्थितियों में लापता हुआ, इसकी पड़ताल पुलिस कर रही है।

45 विद्यार्थियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल –
आदिवासी समाज के अनेक विद्यार्थी बेहतर शिक्षा प्राप्त करने की उम्मीद में अपने परिवार से दूर शासकीय छात्रावासों में रहते हैं। अभिभावक शासन की व्यवस्था पर विश्वास जताते हुए अपने बच्चों को छात्रावासों में भेजते हैं। ऐसे में किसी विद्यार्थी का लापता होना छात्रावास की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। करीब 45 विद्यार्थियों के निवास वाले इस छात्रावास में विद्यार्थियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है, यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।

छात्रावास में प्रतिदिन विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने, विद्यालय आने-जाने का रिकॉर्ड रखने, छात्रावास से बाहर जाने की अनुमति तथा वापस लौटने की पुष्टि करने के लिए क्या व्यवस्था है ? संग्राम के लापता होने के बाद छात्रावास प्रशासन ने तत्काल क्या कदम उठाए? उसकी अनुपस्थिति की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों एवं परिजनों को समय पर दी गई थी या नहीं? इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

आदिवासी विकास विभाग से जांच की मांग –
इस घटना के बाद आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से पूरे मामले की गहन जांच कराने तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग उठ रही है। साथ ही पुलिस जांच के अलावा छात्रावास की उपस्थिति, निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था की भी स्वतंत्र जांच किए जाने की आवश्यकता जताई जा रही है। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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