छत्तीसगढ़ में हॉकी सेंटरों के विस्तार पर हुई चर्चा
नई दिल्ली/रायपुर – छत्तीसगढ़ राज्य में हॉकी खेल के समग्र विकास, खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हॉकी इंडिया के सह-सचिव फ़िरोज़ अंसारी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय खेल प्राधिकरण (खेलों इंडिया)के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव से सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में हॉकी इंडिया के उपाध्यक्ष द्वय श्री मनोज भोरे और श्री लालरिनफेला कार्यकारिणी सदस्य अरुण सारस्वत, जूनियर भारतीय हॉकी टीम के कोच पूर्व ओलंपियन श्री रजनीश मिश्रा आदि शामिल थे
मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ सहित उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र,राजस्थान और मिजोरम में खेलों के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में संचालित खेलो इंडिया योजनाओं एवं गतिविधियों की सराहना करते हुए इन कार्यक्रमों के दायरे और प्रभाव को और बढ़ाने का अनुरोध किया, ताकि प्रदेश के अधिकाधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं एवं अवसरों का लाभ मिल सके।
बैठक में विशेष रूप से राज्य में हॉकी खेल की बढ़ती लोकप्रियता और प्रतिभाओं को ध्यान में रखते हुए नए हॉकी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग रखी कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर सरगुजा, कबीरधाम और कोरबा जैसे आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों के साथ दुर्ग में अतिरिक्त हॉकी सेंटर स्थापित किए जाएं, जिससे उभरते खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, आधुनिक खेल अवसंरचना तथा विशेषज्ञ प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। यदि खेलो इंडिया की गतिविधियों का और विस्तार किया जाता है तथा हॉकी के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाते हैं, तो राज्य से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।
डीडी जी श्री मयंक श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखे गए सुझावों और मांगों को गंभीरता से सुना तथा खेलों के विकास से संबंधित प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए सभी राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर निरंतर कार्य किया जा रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि केंद्र एवं राज्य के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा तथा युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
जीर्णोद्धार और इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर NMC ने बहाए करोड़ों, द हितवादा के स्पॉट इंस्पेक्शन में खुली पोल, तालाब में जलकुंभी और झाड़ियों का कब्जा, दुर्गा मूर्तियों के अवशेष सड़ रहे, दुर्गंध से लोग परेशान
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
उत्तर-पश्चिम नागपुर स्थित पुलिस लाइन टाकली तालाब के जीर्णोद्धार और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 9 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने के बावजूद नागपुर महानगर पालिका (NMC) इसकी देखभाल में पूरी तरह विफल साबित हुई है। तालाब और उससे लगा कृत्रिम विसर्जन टैंक फिर से बदहाल स्थिति में पहुंच गया है, जिससे सार्वजनिक परियोजनाओं के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ज्ञात हो कि तालाब के बड़े हिस्से पर घनी जलकुंभी, बढ़ी हुई झाड़ियां और जंगली घास ने कब्जा कर लिया है। कई जगहों पर कंक्रीट की रिटेनिंग वॉल मुश्किल से दिखाई दे रही हैं। पानी के नीचे उगी खरपतवार पूरे तालाब के तल में फैल गई है, जबकि कमल के पत्तों ने लगभग आधी जल सतह को ढक लिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार वनस्पति की अनियंत्रित वृद्धि से जल परिसंचरण और ऑक्सीजन स्तर पर असर पड़ता है, जिससे जलीय जीवन खतरे में पड़ सकता है। यह तालाब के पारिस्थितिक स्वास्थ्य की दयनीय स्थिति को दर्शाता है।
विसर्जन टैंक बना कचरा कुंड – तालाब के बगल में बना कृत्रिम विसर्जन टैंक नवरात्रि समाप्त होने के तुरंत बाद ही गंदा हो गया है। टैंक में मां दुर्गा की विसर्जित मूर्तियों के सड़ते अवशेष, लकड़ी के ढांचे, भूसा, फेंके गए कपड़े और सड़ी हुई निर्माल्य सामग्री काले, ठहरे हुए पानी में तैरती देखी गई। कचरे से तेज दुर्गंध उठ रही है, जिससे आसपास की बस्तियां परेशान हैं।
जफर नगर के एक निवासी ने चिंता जताई कि ठहरा हुआ पानी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है। अक्टूबर की गर्मी और वेक्टर-जनित बीमारियों के मौसमी बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गंदा पानी डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल प्रजनन स्थल बन गया है।
कैसे खर्च हुए 9 करोड़ – बताया जाता है कि तालाब पहले भी बर्बादी के कगार पर पहुंच गया था। पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी ने जीर्णोद्धार अभियान शुरू किया था, जिसके लिए क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत हेतु 50 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। बाद में मनपा प्रशासन ने तालाब के बगल में मूर्तियों के सीधे विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए लगभग 8.50 करोड़ रुपये खर्च कर कृत्रिम विसर्जन टैंक का निर्माण किया। इस प्रकार कुल खर्च 9 करोड़ से अधिक हो गया।
लेकिन तालाब और विसर्जन टैंक की वर्तमान स्थिति बताती है कि बुनियादी ढांचे को पर्याप्त नियमित रखरखाव नहीं मिला। गाद निकालना, खरपतवार हटाना और नियमित सफाई जल निकाय की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, जो नहीं हो रहा।
स्थानीय नागरिकों ने NMC से तत्काल हस्तक्षेप कर खरपतवार हटाने, जमा कचरा निकालने, विसर्जन टैंक को साफ करने और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है।
नागपुर में 5वीं सप्तर्षि पुरस्कार श्रृंखला 2026 में 7 विभूतियों का सम्मान, पद्मश्री भालचंद्र नेमाड़े, थलाप्पिल प्रदीप और IIT मद्रास के वी. कामकोटि समेत वैज्ञानिक, साहित्यकार और उद्यमी पुरस्कृत, हिंदू रिसर्च फाउंडेशन का आयोजन
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वराखेड़ी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव प्रगति का साधन बना रहना चाहिए, वह मानवीय मूल्यों पर हावी नहीं होना चाहिए। AI का उपयोग भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों द्वारा निर्देशित होना चाहिए। तकनीक के उपयोग में आत्म-संयम जरूरी है और ‘भारतीय प्रज्ञा’ ही राष्ट्र की प्रगति को मजबूत कर सकती है।
प्रो. वराखेड़ी रविवार को पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, IT पार्क स्थित कवि कुलगुरु कालिदास ऑडिटोरियम में आयोजित 5वीं सप्तर्षि पुरस्कार श्रृंखला 2026 के पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिंदू रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किया गया था।
संस्था के संस्थापक एवं प्रबंध ट्रस्टी डॉ. टी.एस. भाल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी और कहा कि प्राचीन ज्ञान आम लोगों तक पहुंचना चाहिए और अतीत को केवल महिमामंडित नहीं, बल्कि प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। मंच पर IIM-नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराय मेत्री, इम्मवर्सAI के सह-संस्थापक आर. रामकृष्णन, प्रतिभा नेमाड़े और सुरेश कोटे भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गीता कृष्णन जी. पिल्लई, यूनिट हेड, डेटा एंड इनोवेशन डिवीजन, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन रिसर्च सेंटर, जामनगर ने की। जीवदया फाउंडेशन, सूरत के किशोरभाई शाह अतिथि सम्माननीय थे।
7 पुरस्कार विजेता सम्मानित –
1. महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार : पद्मश्री भालचंद्र वनाजी नेमाड़े को साहित्य के लिए। प्रसिद्ध मराठी उपन्यासकार ‘कोसला’ और ‘हिंदू: जगण्याची समृद्ध अडगळ’ के लेखक ने कहा कि अतीत को भविष्य को सूचित करना चाहिए और हिंदू धर्म की विविधता को पहचानना चाहिए। उन्होंने भारतीय साहित्य में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया।
2. नागार्जुन पुरस्कार : पद्मश्री प्रो. थलाप्पिल प्रदीप, IIT मद्रास में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर को। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी परिस्थितियां फिर से बनानी होंगी जो मौलिक वैज्ञानिक सोच को पोषित करें और बच्चों की जिज्ञासा को देश का सबसे बड़ा वैज्ञानिक खजाना बताया।
3. आर्यभट्ट पुरस्कार : पद्मश्री प्रो. वी. कामकोटि वीज्हीनाथन, निदेशक IIT मद्रास और शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के निर्माता को। उन्होंने पीतल से ‘राम यंत्र’ बनाने की प्राचीन शिल्प कौशल की सटीकता का उदाहरण दिया और गांवों में कम से कम दो परिवारों को बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करने का आह्वान किया।
4. आचार्य कणाद पुरस्कार :प्रो. संजय जनराव धोबले, भौतिकी विभाग, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय को। सड़क सुरक्षा और किसानों को वन्यजीवों से बचाने की तकनीक सहित सामाजिक लाभ वाले अनुसंधान के लिए।
5. विश्वकर्मा पुरस्कार :डॉ. अनिल रामजी सुतार, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नागपुर के स्वामी विवेकानंद पुतले से जुड़े मूर्तिकार को।
6. आचार्य भारद्वाज पुरस्कार :सुयश सिंह, सह-संस्थापक और CEO, गैलेक्सआई स्पेस सॉल्यूशंस को। उन्होंने युवाओं से उद्यमिता अपनाने, अंतरिक्ष तकनीक के अवसरों और भारत के विजन 2047 को हासिल करने के लिए रणनीति के महत्व पर जोर दिया।
7. आचार्य सुश्रुत पुरस्कार :डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, प्रो-चांसलर, दत्ता मेघे उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए। डॉ. पिल्लई ने कहा कि जानकारी प्रचुर है लेकिन उसे सार्थक ज्ञान में बदलना चुनौती है। AI प्राचीन ज्ञान को आधुनिक साधनों से जोड़ सकता है, लेकिन विवेक लोगों से ही आएगा।
आर. रामकृष्णन ने भारतीय ज्ञान परंपराओं पर आधारित दुनिया के पहले स्क्रिप्ट लैंग्वेज मॉडल को विकसित करने पर बात की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिता तिलवे और डॉ. रिचा सुगंध ने किया, आभार हर्षा देशमुख ने माना।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने लिया सम्मान, बोले- 2047 तक 80 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, भारत मेट्रो नेटवर्क में जल्द अमेरिका को पछाड़ेगा
भुवनेश्वर/नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया’ (UMI) सम्मेलन में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महामेट्रो – नागपुर मेट्रो रेल परियोजना) ने बड़ा सम्मान हासिल किया है। महामेट्रो को अपने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों के दम पर प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ (Best Exhibitor) पुरस्कार से नवाजा गया।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल के कर-कमलों द्वारा महामेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री श्रावण हर्डीकर ने यह पुरस्कार स्वीकार किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर आधारित था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा – 2047 तक 80 करोड़ आबादी शहरों में पुरस्कार वितरण अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “वर्तमान में देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा शहरों में रहता है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा, जब देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी। इसका अर्थ है करीब 80 करोड़ लोग शहरों में निवास करेंगे। इतनी विशाल आबादी के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी से तैयार करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक परिवहन विकसित करते समय समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में देश में लगभग 1,185 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित है, जबकि अमेरिका में यह 1,385 किमी है। भारत में विस्तार की वर्तमान गति से हम जल्द ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे। भविष्य के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन अनिवार्य है।”
महामेट्रो स्टॉल पर डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन – सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों ने महामेट्रो के स्टॉल का अवलोकन किया। प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने विभिन्न डिजिटल प्रणालियों की जानकारी दी :
डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट डैशबोर्ड : परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन।
संचालन एवं रखरखाव का डिजिटल रूपांतरण (O&M) : दैनिक संचालन और रख-रखाव में अत्याधुनिक तकनीक।
डिजिटल आई एवं मास्टरमाइंड : यात्री सुरक्षा के लिए उन्नत निगरानी व सुरक्षा तंत्र।
सीमलेस ‘वन ऐप’ यात्रा : टिकट बुकिंग से लेकर पूरे सफर के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव।
स्मार्ट एवं कनेक्टेड मोबिलिटी : लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की सुगम सुविधा।
सोशल मीडिया एंगेजमेंट : यात्रियों से त्वरित और सीधे संवाद का माध्यम।
इस उपलब्धि से नागपुर मेट्रो परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल और सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी मॉडल के रूप में पहचान मिली है।