- 3.32 एकड़ शेती स्मशानभूमि को दान करने का फैसला – 1912 से नक्शे पर दर्ज शेतरस्ते पर JCB से नाली, तार कंपाउंड कर रास्ता बंद,मौजा आजनगांव (नागमोते), काटोल का मामला – तहसीलदार ने 17 महीने बाद आदेश दिया, SDO ने उसी दिन स्टे दिया, 5 महीने बाद फाइल वापस – किसान प्रमोद मोहोड बोले, शासन परिपत्रक में 7 दिन में अतिक्रमण हटाने का नियम फिर भी खेत पड़ीत
नागपुर :
शेत में जाने का रास्ता न मिलने से तंग आकर किसान ने अपनी पूरी खेती ही गांव की स्मशानभूमि के लिए दान करने का ऐलान कर दिया है। मौजा आजनगांव, पोस्ट मेंढेपठार, तहसील काटोल, जिला नागपुर में पत्रकार परिषद लेकर शेतकरी प्रमोद पंजाबराव मोहोड ने यह निर्णय घोषित किया।
मामला क्या है –
प्रमोद मोहोड की सर्वे क्रमांक 12 और सुभाष भाऊराव जिचकार की सर्वे क्रमांक 7 में खेती है। इस खेती में जाने के लिए आजनगांव से लाखोली की ओर जाने वाले डांबरी रस्ते से लगा हुआ श्रीमती राजश्री श्रीकांत जिचकार (सर्वे नं. 3) और स्व. डॉ. श्रीकांत जिचकार के छोटे भाई सुरेंद्र जिचकार (सर्वे नं. 8) के दोनों खेतों के बांध पर से शेतरस्ता था।
इसी रस्ते से पीछे के खेतों के किसान, मेटपांजरा रेलवे स्टेशन जाने वाले प्रवासी और कोहला गांव के ग्रामीण आते-जाते थे। किसान का दावा है कि ब्रिटिश काल से इस रस्ते की नोंद सन 1912-13, 1977-78 और 1986-87 के नक्शों में, वाजिब-उल-अर्ज में और सर्वे नं. 3 के सातबारा उतारे में भी दर्ज है।
आरोप है कि उपरोक्त दोनों ने यह शेतरस्ता अड़वाकर बांध के बीच से JCB से नाली खोद दी और पूरे रास्ते पर तार का कंपाउंड कर दिया, जिससे शेत में जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया।
प्रशासन के चक्कर – 90 दिन के बजाय 17 महीने में आदेश, उसी दिन स्टे –
सुभाष जिचकार ने 16 जनवरी 2020 को तहसीलदार काटोल को अर्ज देकर बैलगाड़ी मार्ग मोकळा करने की मांग की, जिसमें सुरेंद्र जिचकार द्वारा अरेरावी और जोर-जबरदस्ती कर रास्ता बंद करने का उल्लेख था। आरोप है कि अर्ज की साधारण दखल तक नहीं ली गई और उल्टा जिचकार परिवार का वर्चस्व दिखाकर अधिकारियों ने सुभाष जिचकार को शांत बैठने की सलाह दी, जिससे उन्होंने प्रयास छोड़ दिया।
उसके बाद सुभाष के बांध से आगे वाले सर्वे नं. 12 के मालक प्रमोद मोहोड का भी रास्ता बंद हो गया, तो उन्होंने 12 मार्च 2024 को तहसीलदार को अर्ज किया।
जबकि महाराष्ट्र जमीन महसूल अधिनियम के अनुसार 90 दिन में निर्णय बंधनकारक है, तहसीलदार ने तब्बल 17 महीने बाद 7 अक्टूबर 2025 को शासकीय रस्ता मोकळा करने का आदेश दिया और भूमी अभिलेख कार्यालय को सीमांकन का पत्र दिया।
भूमी अभिलेख विभाग ने 16 दिसंबर 2025 को नोटिस निकाली। इस नोटिस पर गैरअर्जदारों ने 23 दिसंबर 2025 को SDO के पास अपील की। आश्चर्य की बात है कि उसी दिन नोटरी और उसी दिन SDO ने अपील पर स्टे भी दे दिया। इतनी तत्परता दिखाने वाले SDO ने उसके बाद 5 महीने बाद आदेश दिया कि प्रकरण तहसीलदार काटोल को वापस भेजा जाता है और तहसीलदार ने स्वयं मौका चौकशी कर सुधारित आदेश पारित करना चाहिए। अब तहसीलदार के सुधारित आदेश के लिए पिछले 5 महीने से अभ्यास शुरू है और इस बीच शेती पड़ीत पड़ी है।
कानून क्या कहता है –
पत्रकार परिषद में बताया गया कि महाराष्ट्र जमीन महसूल अधिनियम 1966 के कलम 20 के अनुसार यह शेतरस्ता शासन की संपत्ति है और कलम 50 के अनुसार केवल 7 दिन का नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का अधिकार प्रशासन को है।
शासन के एक परिपत्रक में कहा गया है कि गांव नक्शे पर दर्शाए गए और शासकीय जगह पर अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को तहसीलदार 7 दिन में अतिक्रमण हटाने की नोटिस दे, नहीं हटाया तो आधार कार्ड और फार्मर ID 5 साल तक ब्लॉक कर शासकीय लाभ बंद किया जाए। दूसरे परिपत्रक में कहा गया है कि यदि पूर्व का शेतरस्ता अस्तित्व में हो तो नया रस्ता मंजूर न किया जाए, किया तो संबंधित अधिकारी पर शिस्तभंग की कार्रवाई होगी।
इकडे आड तिकडे विहीर – इसलिए दान का निर्णय –
प्रमोद मोहोड ने कहा, “इकडे आड तिकडे विहीर” जैसी स्थिति बन गई है। आजनगांव (नागमोते) गांव में स्वतंत्र स्मशानभूमी ही नहीं है। इसलिए पूरी 3.32 एकड़ शेती शासन को दान करने का निर्णय लिया है, ताकि गांव को स्मशानभूमी मिले और स्मशानभूमी में जाने के लिए ही सही, शासकीय रस्ता मोकळा हो जाए। उस बहाने सुभाष जिचकार को भी खेत में जाने का रास्ता मिलेगा और शेतपांधण रस्ते का सपना साकार होगा।
यह पत्रकार परिषद किसान मित्र फाउंडेशन काटोल के संस्थापक प्रमोद मोहोड की अध्यक्षता में हुई। मंच पर आजणगांव की सरपंच श्रीमती अश्विनीताई नागमोते, आशाताई निहारे, सुभाष जिचकार, सुनील ढेंगरे, दिगांबर जिचकार उपस्थित थे।