पोकलेन से झरा खोलने का प्रयास, बारिश के पानी को तालाब तक लाने के लिए तीन जलमार्ग चिन्हित – एलआईटी पहाड़ी का मुख्य प्रवाह, टेनिस कोर्ट और बाजीप्रभु गार्डन का वर्षा जल; विधायक विकास ठाकरे, एलआईटी प्रशासन और मनपा से तत्काल व्यवस्था की मांग
नागपुर, 30 अगस्त 2026 :
पंढराबोडी लेक को बचाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंढराबोडी लेक पुनर्जीवन अभियान के तहत आज लेक परिसर में एक प्राकृतिक जलस्रोत – पानी का झरा – दिखाई दिया। पोकलेन मशीन की मदद से इस जलस्रोत को खोलने का प्रयास किया गया, ताकि प्राकृतिक रूप से आने वाले पानी को सीधे तालाब तक पहुंचाया जा सके।
इसी दौरान बारिश के पानी को तालाब में लाने के संभावित रास्तों का भी अध्ययन किया गया, जिसमें तीन महत्वपूर्ण जलमार्ग सामने आए हैं।
तीन जलमार्ग जो बचा सकते हैं लेक को
एलआईटी कॉलेज की पहाड़ी से आने वाला मुख्य प्राकृतिक जलप्रवाह: यह तालाब में पानी पहुंचने का प्रमुख और ऐतिहासिक रास्ता था, लेकिन वर्तमान में यह मार्ग बंद हो गया है। इसे पुनः खोलने की तत्काल आवश्यकता है।
टेनिस कोर्ट का बारिश का पानी: तालाब के समीप स्थित टेनिस कोर्ट पर गिरने वाला बारिश का पानी पाइपलाइन के माध्यम से सीधे तालाब में पहुंचाया जा सकता है।
बाजीप्रभु गार्डन का बारिश का पानी: गार्डन में जमा होने वाले वर्षाजल को भी उचित पाइपलाइन एवं जलनिकासी व्यवस्था बनाकर पंढराबोडी लेक में पहुंचाया जा सकता है।
वर्तमान स्थिति यह है कि यह बहुमूल्य वर्षाजल सड़क और नालों के रास्ते बहकर बाहर चला जाता है, जबकि पंढराबोडी लेक पानी के लिए तरस रही है और सूखने की कगार पर है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने माननीय विधायक विकास ठाकरे, एलआईटी कॉलेज प्रशासन, स्थानीय नगरसेवक, मनपा गार्डन विभाग तथा टेनिस कोर्ट संचालक से आग्रह किया है कि इन प्राकृतिक एवं संभावित जलमार्गों को जोड़कर बारिश के पानी को पंढराबोडी लेक में पहुंचाने की तत्काल व्यवस्था की जाए।
कार्यकर्ताओं का नारा है – “बारिश का पानी नाले में नहीं, तालाब में जाए। प्राकृतिक जलस्रोत बचे, तालाब बचे। पंढराबोडी लेक बचेगी, तो आने वाली पीढ़ियों का जलस्रोत बचेगा।”
पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि यदि इन तीनों स्रोतों को जोड़ दिया जाए तो हर मानसून में लाखों लीटर पानी तालाब में आ सकता है, जिससे भूजल स्तर भी बढ़ेगा और नागपुर के इस ऐतिहासिक तालाब का पुनर्जीवन संभव हो सकेगा।
वरोरा-चंद्रपुर-बल्लारपुर-बामणी मार्ग पर ओवरलोड वसूली का आरोप; डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और शिकायतकर्ताओं पर मुकदमे का भी दावा
चंद्रपुर,13 अगस्त 2026 :
वरोरा-चंद्रपुर-बल्लारपुर-बामणी मार्ग पर स्थित टोल परियोजना में ओवरलोड के नाम पर वर्षों से अतिरिक्त वसूली किए जाने का गंभीर आरोप लगा है। शिवसेना के चंद्रपुर लोकसभा संघटक मुकेश मनोज जीवतोडे ने दावा किया है कि करार की शर्तों का उल्लंघन कर वाहन चालकों से नियम विरुद्ध टोल वसूला गया। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र आर्थिक और डिजिटल फॉरेंसिक जांच की मांग की है।
2014 से शुरू वसूली, करार उल्लंघन का आरोप इस टोल परियोजना पर 26 दिसंबर 2014 से वसूली शुरू हुई थी। शिकायत के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट में ओवरलोड वाहनों पर अतिरिक्त टोल वसूलने की स्पष्ट प्रक्रिया तय है। लेकिन उपलब्ध टोल रसीदों की जांच में पाया गया कि 10 प्रतिशत से कम अतिरिक्त वजन वाली गाड़ियों से भी अतिरिक्त टोल लिया गया। कुछ मामलों में ओवरवेट शून्य होने के बावजूद अतिरिक्त राशि वसूली गई। जीवतोडे ने मांग की है कि वाहनवार जांच कर यह पता लगाया जाए कि कितनी राशि नियम विरुद्ध वसूली गई।
रोज 2 से 3 लाख की कथित अतिरिक्त वसूली शिकायतकर्ता के अनुसार टोल नाके पर रोजाना औसतन 2 से 3 लाख रुपये अतिरिक्त वसूले जाते थे। 2014 से 2025 तक लगभग 11 वर्षों तक यह सिलसिला चला। इस हिसाब से कुल कथित गड़बड़ी करीब 150 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शुरुआती अनुमान है। वास्तविक रकम वेइब्रिज डेटा, टोल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, अतिरिक्त टोल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच के बाद ही तय हो सकेगी।
शिकायत के बाद रुकी वसूली, पर हिसाब नहीं ओवरलोड वसूली को लेकर 11 जून 2025 को सार्वजनिक निर्माण विभाग में शिकायत दी गई थी। इसके बाद 17 जून, 18 जून और 7 जुलाई 2025 को विभाग ने पत्र लिखकर करार उल्लंघन का मुद्दा उठाया। आरोप है कि निर्देश के बाद अतिरिक्त वसूली रोक दी गई, लेकिन बीते वर्षों की वसूली का ऑडिट और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई।
आरटीआई के बाद ‘टेक्निकल एरर’ और डेटा बदलने का आरोप मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई। आरोप है कि इसके बाद टोल की कंप्यूटर प्रणाली में ‘टेक्निकल एरर’ बताकर पुराने रिकॉर्ड बदल दिए गए और नया सॉफ्टवेयर लगाया गया। इससे पुराने वेइब्रिज रिकॉर्ड, टोल लेनदेन डेटा, अतिरिक्त टोल गणना और ऑडिट ट्रेल की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। जीवतोडे ने स्वतंत्र डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है ताकि पता चल सके कि डेटा कब और कैसे बदला या हटाया गया।
शिकायतकर्ताओं पर ही केस का आरोप 23 जुलाई 2026 को घोडपेठ में हुए हादसे के बाद शिकायत दी गई थी। 24 जुलाई को सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारी निरीक्षण पर थे। उस दौरान टोल प्रबंधक से ओवरलोड से जुड़ा डेटा मांगा गया था। इसके कुछ दिन बाद मुकेश जीवतोडे और उनके साथ मौजूद 20 से 25 लोगों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। जीवतोडे का कहना है कि यह शिकायत झूठी है और ओवरलोड वसूली के खिलाफ आवाज उठाने के कारण दबाव बनाने के लिए की गई है। उन्होंने इसकी भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
किस खाते में गई रकम, इसकी भी मांग शिकायत में कहा गया है कि सिर्फ टोल रसीदें नहीं, बल्कि 26 दिसंबर 2014 से अब तक का पूरा वाहनवार ब्योरा खंगाला जाए। इसमें शामिल हों:
वाहन का वास्तविक कुल वजन
वसूला गया अतिरिक्त टोल
वेइब्रिज डेटा
पुराने और नए सॉफ्टवेयर के रिकॉर्ड
सर्वर लॉग और ऑडिट ट्रेल
सीसीटीवी फुटेज
बैंक लेनदेन
साथ ही मनी ट्रेल की जांच कर यह पता लगाया जाए कि अतिरिक्त वसूली की रकम का लाभ किसे मिला। यदि जांच में डेटा नष्ट करना या बदलना साबित होता है तो जिम्मेदारों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल 150 करोड़ का आंकड़ा शिकायतकर्ता का अनुमान है। इसकी पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी। अब सबकी निगाहें सरकार द्वारा गठित की जाने वाली उच्चस्तरीय जांच पर टिकी हैं।
सिमडेगा के भंडारटोली गांव में होटल व्यवसायी गिरफ्तार, 33.767 किलो अफीम, 23.35 लाख नकद समेत तौल मशीन व मोबाइल बरामद
नागपुर :* नागपुर ग्रामीण पुलिस के मादक पदार्थ निरोधक दस्ते (एएनसी) ने झारखंड और महाराष्ट्र के बीच सक्रिय एक संगठित अंतर-राज्यीय अफीम तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने ₹1.92 करोड़ से अधिक मूल्य का मादक पदार्थ जब्त किया है।
कार्रवाई का विवरण
विशेष आसूचना मिलने पर पुलिस दल 25 मई को झारखंड के सिमडेगा जिले के करपनाडाश क्षेत्र स्थित भंडारटोली गांव पहुंचा। वहां छापा मारकर पुलिस ने मनीषकुमार अंबिका प्रसाद (46 वर्ष) को गिरफ्तार किया। आरोपी गांव का निवासी है और होटल का व्यवसाय करता है।
आरोपी के घर की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में अफीम बरामद हुई, जिसे घर के अंदर छिपाकर रखा गया था।
जब्त सामग्री का ब्यौरा
अफीम: 33 किलो 767 ग्राम, बाजार मूल्य ₹1,68,83,500
नकद राशि: ₹23,35,000
अन्य सामान: एक इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन, प्लास्टिक की पैकिंग सामग्री, रबर बैंड और एक मोबाइल फोन
कुल जब्ती: ₹1,92,18,500
अधिकारियों का बयान:
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल म्हस्के ने कहा, “ये नेटवर्क कई राज्यों में अत्यंत व्यवस्थित तरीके से काम करते हैं। इन्हें तोड़ने के लिए समन्वय, आसूचना आधारित पुलिस व्यवस्था और निरंतर जांच जरूरी है।”
पुलिस अधीक्षक डॉ. हर्ष ए. पोद्दार ने बताया, “हमारा उद्देश्य सिर्फ वाहकों को पकड़ना नहीं, बल्कि आपूर्तिकर्ता से लेकर प्राप्तकर्ता तक पूरी श्रृंखला को ध्वस्त करना है।”
जांच का दायरा बढ़ा:
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से झारखंड-महाराष्ट्र के बीच चल रहे मादक पदार्थ नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य आपूर्तिकर्ताओं, माल ढोने वालों, वित्तपोषण करने वालों और स्थानीय स्तर पर माल लेने वालों की तलाश कर रही है।
अफीम क्या है और इसका अवैध व्यापार
अफीम पोस्ता के पौधे (पैपेवर सोम्निफेरम) के फल से निकलने वाले दूधिया रस से बनती है। किसान पोस्ता के फल पर चीरा लगाते हैं, जिससे रस निकलकर सूख जाता है और भूरा चिपचिपा पदार्थ बन जाता है, जिसे कच्ची अफीम कहते हैं।
इसकी तस्करी कई क्षेत्रों में अवैध रूप से की जाती है। सेवन के लिए इसे धूम्रपान किया जाता है, खाया जाता है या अन्य पदार्थों में मिलाया जाता है। अवैध बाजार में इसकी कीमत शुद्धता और आपूर्ति श्रृंखला के आधार पर ₹4,000 से ₹8,000 प्रति ग्राम तक होती है।
पुलिस ने इसे संगठित मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है। मामले की आगे जांच जारी है।