अविनाश चौरसिया बोले: “शिकायत झूठी साबित हो तो दो साल जेल भुगतूंगा, वरना 2008 की सहमति को धोखाधड़ी से प्राप्त बताकर रद्द किया जाए“
नागपुर, 7 अगस्त 2026 :एम्पायरियन टाउनशिप कोटेवाड़ा, नागपुर के निवासी और वरिष्ठ नागरिक अविनाश चौरसिया ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री राहुल रेखावार, आईएएस से 15 अगस्त 2026 से पहले स्पष्ट और बाइनरी निर्णय जारी करने की मांग दोहराई है।
27 जुलाई 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति, 4 अगस्त 2026 को विधि अनुभाग को दिए गए विस्तृत अभ्यावेदन और यह सूचना मिलने के बाद कि मामला अब एमपीसीबी के विधि प्रकोष्ठ में है, अब तक कोई लिखित निर्णय नहीं आया है। इसी के चलते चौरसिया ने सार्वजनिक अपील की है।
दो विकल्पों की मांग चौरसिया ने बोर्ड के समक्ष दो विकल्प रखे हैं:
पहला: बोर्ड लिखित रूप में प्रमाणित करे कि उनकी शिकायत झूठी है। इस स्थिति में वे स्वेच्छा से माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय में उपस्थित होकर दो वर्ष की जेल की सजा की मांग करेंगे।
दूसरा: 6 नवंबर 2008 को जारी सहमति पत्र को धोखाधड़ी, तथ्यों के दमन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त बताया जाए और उसे शुरू से ही शून्य घोषित किया जाए। इसके साथ 12 जुलाई 2010 की पर्यावरण मंजूरी को भी शून्य माना जाए।
उन्होंने 12, 13 और 14 अगस्त 2026 को विधि अधिकारी और सहायक सचिव स्थापना से व्यक्तिगत भेंट का समय मांगा है। साथ ही सदस्य सचिव से यह गारंटी भी मांगी है कि विधि प्रकोष्ठ केवल सरकारी अभिलेखों के आधार पर काम करेगा और कोई गलत राय नहीं देगा।
कानूनी आधार चौरसिया ने कहा कि भारतीय कानून में धोखाधड़ी से ली गई वैधानिक अनुमति शुरू से ही शून्य मानी जाती है। “फ्रॉड एवरीथिंग को खत्म कर देता है” के सिद्धांत का हवाला देते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एस.पी. चेंगलवराया नायडू बनाम जगन्नाथ, ए.वी. पापैया शास्त्री बनाम आंध्र प्रदेश सरकार और भाऊराव दगडू परलकर मामलों का उल्लेख किया। उनके अनुसार यदि 2008 की सहमति झूठे एनओसी, वास्तविक भूमि क्षेत्र को छिपाकर और मिलीभगत से ली गई थी, तो उस पर आधारित सभी पुनर्वैधीकरण और संचालन सहमतियां, जिनमें 12 जुलाई 2010 की पर्यावरण मंजूरी और 22 मई 2026 का नवीनीकरण शामिल है, स्वतः शून्य हैं।
मुख्य आरोप चौरसिया के 27 जुलाई के प्रेस नोट और बाद के पत्राचार में ये आरोप दोहराए गए हैं:
203.23 एकड़ के लिए 2008 की सहमति गलत जानकारी पर दी गई। टाउन प्लानिंग द्वारा मानी गई वास्तविक भूमि 60.62 हेक्टेयर यानी लगभग 149.79 एकड़ थी। एडीटीपी शाखा और ग्राम पंचायत का कथित फर्जी एनओसी इस्तेमाल हुआ।
11 दिसंबर 2019 और 22 मई 2026 सहित बाद की सभी सहमतियां इसी के आधार पर हैं, इसलिए शून्य हैं।
2017 से 2022 के बीच मूल फाइलें, 30 सितंबर 2022 की जांच समिति की रिपोर्ट, साइट विजिट रिपोर्ट और शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए साक्ष्य एमपीसीबी कार्यालयों से गायब बताए गए हैं।
ईआईए अधिसूचना 2006, पर्यावरण मंजूरी की शर्तों, आरआरजेड नीति, विशेष टाउनशिप प्रावधानों और वेना नदी के बफर जोन का उल्लंघन कर निर्माण हुआ।
फर्जी अनुपालन रिपोर्ट के आधार पर नवीनीकरण किए गए। करीब 2 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लंबित रखा गया और आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश पर कार्रवाई नहीं हुई।
लगभग 1,130 घर और 10 दुकानें अवैध हो गई हैं, जिससे गृह खरीदारों को भारी आर्थिक और कानूनी नुकसान हुआ है।
चौरसिया का बयान “अब गेंद विधि अनुभाग और सदस्य सचिव के पाले में है। धोखाधड़ी सब कुछ खत्म कर देती है। जब 1,130 अवैध घर खड़े हैं तो इसे छोटी चूक नहीं कहा जा सकता। कलेक्टर ने मेरे अपने विला के अवैध निर्माण की पुष्टि पहले ही कर दी है। मैं जेल जाने को तैयार हूं अगर मेरी शिकायत झूठी निकले। मुझे बस अभिलेखों के आधार पर ईमानदार फैसला चाहिए और वह तय समय में मिले। 27 जुलाई का प्रेस नोट पूरी तरह लागू है। यह केवल 15 अगस्त से पहले कार्रवाई के लिए समयबद्ध अपील है।”
चौरसिया ने वेना नदी में लगातार बदबूदार सीवेज छोड़े जाने का भी मुद्दा उठाया है। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभा से आग्रह किया है कि वे इस मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण और एमपीसीबी के समक्ष औपचारिक रूप से उठाएं।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने लिया सम्मान, बोले- 2047 तक 80 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, भारत मेट्रो नेटवर्क में जल्द अमेरिका को पछाड़ेगा
भुवनेश्वर/नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया’ (UMI) सम्मेलन में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महामेट्रो – नागपुर मेट्रो रेल परियोजना) ने बड़ा सम्मान हासिल किया है। महामेट्रो को अपने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों के दम पर प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ (Best Exhibitor) पुरस्कार से नवाजा गया।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल के कर-कमलों द्वारा महामेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री श्रावण हर्डीकर ने यह पुरस्कार स्वीकार किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर आधारित था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा – 2047 तक 80 करोड़ आबादी शहरों में पुरस्कार वितरण अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “वर्तमान में देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा शहरों में रहता है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा, जब देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी। इसका अर्थ है करीब 80 करोड़ लोग शहरों में निवास करेंगे। इतनी विशाल आबादी के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी से तैयार करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक परिवहन विकसित करते समय समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में देश में लगभग 1,185 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित है, जबकि अमेरिका में यह 1,385 किमी है। भारत में विस्तार की वर्तमान गति से हम जल्द ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे। भविष्य के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन अनिवार्य है।”
महामेट्रो स्टॉल पर डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन – सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों ने महामेट्रो के स्टॉल का अवलोकन किया। प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने विभिन्न डिजिटल प्रणालियों की जानकारी दी :
डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट डैशबोर्ड : परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन।
संचालन एवं रखरखाव का डिजिटल रूपांतरण (O&M) : दैनिक संचालन और रख-रखाव में अत्याधुनिक तकनीक।
डिजिटल आई एवं मास्टरमाइंड : यात्री सुरक्षा के लिए उन्नत निगरानी व सुरक्षा तंत्र।
सीमलेस ‘वन ऐप’ यात्रा : टिकट बुकिंग से लेकर पूरे सफर के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव।
स्मार्ट एवं कनेक्टेड मोबिलिटी : लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की सुगम सुविधा।
सोशल मीडिया एंगेजमेंट : यात्रियों से त्वरित और सीधे संवाद का माध्यम।
इस उपलब्धि से नागपुर मेट्रो परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल और सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी मॉडल के रूप में पहचान मिली है।
गंजीपेठ फायर स्टेशन को सुबह 8:47 बजे कॉल, 4 मिनट में दमकल मौके पर, 5 फायर स्टेशनों की मदद से 7 घंटे बाद आग पर काबू, फ्रिज-एसी-वाशिंग मशीन और कंप्रेसर खाक
नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
सीए रोड, लोधीपुरा स्थित गीतांजली टॉकीज के सामने एक दुकान में लगी भीषण आग में लाखों का नुकसान हो गया। घटना की रिपोर्ट गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र को प्राप्त हुई है।
गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र अंतर्गत प्राप्त घटना रिपोर्ट के अनुसार PBX से ऑपरेटर श्री चाटे द्वारा सुबह 08:47 बजे आग की सूचना दी गई। कॉल का स्वरूप ‘बड़ी आग’ बताया गया। सूचना मिलते ही गंजीपेठ केंद्र से MH 31 DS 4927 और MH 31 FC 2826 दो गाड़ियां रवाना हुईं और 08:51 बजे घटनास्थल पर पहुंच गईं, यानी महज 4 मिनट में रिस्पॉन्स।
मौके पर मौजूद अधिकारी/कर्मचारी – प्रमुख अग्नि विमोचक श्रीमान तिलगुले साहेब, श्री विजबे, चालक आत्माराम जाधव, चालक दिनेश खडसे, चालक कमल के., अग्नि विमोचक फिरोज चौधरी, सफाई कर्मचारी विनायक मेश्राम, प्रशिक्षणार्थी घेंडे, डंबारे सहित सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा और सुगतनगर अग्निशमन केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त रूप से मौजूद रहे।
दुकान और मकान का विवरण –
दुकान : अल कौसर रेफ्रिजरेटर, मालक मोहम्मद अश्पाक मो. 9371490718, मोहम्मद अतिक 9922883272 और अब्दुल लतीफ अंसारी 7020459914
बाजू का घर : रमेश मदनलाल भावठा मो. 9604838954
बाजू का घर : मनोज मन्नूलाल श्रीवास मो. 8329205337 पता – गीतांजली टॉकीज समोर, लोधीपुरा, सी.ए. रोड, नागपुर। थाना – गणेशपेठ।
नुकसान का विवरण –
अल कौसर रेफ्रिजरेटर में फ्रिज, एसी, वायरिंग, वाशिंग मशीन, कंप्रेसर व अन्य साहित्य जलकर खाक – अंदाजन 35 लाख रुपये का नुकसान।
रमेश भावठा के घर में फर्नीचर, कांच साहित्य, इलेक्ट्रिक फिटिंग, पीओपी – 50,000 रुपये।
मनोज श्रीवास के घर में बेड, चेयर, छत की टाडपत्री, एयर कंडीशन – 20,000 रुपये।
कुल अंदाजन नुकसान 35 लाख 70 हजार रुपये मालिकों के दावे के अनुसार बताया गया है। वहीं करीब 5 लाख रुपये की घरगुती सामग्री, लेथ मशीन, स्क्रैप सामान, वाशिंग मशीन, फ्रिज बचा लिया गया। आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात है।
आग को सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा, सुगतनगर अग्निशमन केंद्रों के सहयोग से संयुक्त रूप से बुझाया गया। गाड़ियां दोपहर 15:50 बजे थाने पर वापस लौटीं। मामले की आगे जांच गणेशपेठ पुलिस कर रही है।
विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन, सीएम देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर कैबिनेट में प्रस्ताव रखने का आश्वासन, नागपुर और यवतमाल में भी एक-एक परियोजना को नाम देने की मांग
नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर को विदर्भवीर भाऊ जांबुवंतराव धोटे का नाम देने के लिए प्रयास करने का आश्वासन केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया है।
आज पूर्व विधायक तथा भाऊ की पत्नी विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने गडकरी से मुलाकात कर इस संबंध में निवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर भाऊ की पुत्री ज्वाला जांबुवंतराव धोटे, अन्याय निवारण मंच के सदस्य अंजय्या अनपर्थी और भाजपा आध्यात्मिक सेल के महामंत्री चंद्रशेखर दुबे उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विजया धोटे महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री बैरिस्टर रामराव आदिक की पुत्री हैं।
ज्ञापन में क्या कहा – ज्ञापन में उल्लेख है कि महाराष्ट्र विधानसभा के लिए पांच बार और लोकसभा के लिए दो बार चुने गए भाऊ जांबुवंतराव धोटे ने किसान, मजदूर, छात्र और वंचित वर्गों के सवालों के लिए निरंतर संघर्ष किया।
अकोला में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया था, जो विदर्भ के शैक्षणिक और कृषि विकास की लड़ाई में महत्वपूर्ण साबित हुआ। पशु चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और नागपुर मुख्यालय वाले महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी भाऊ ने लगातार पैरवी की थी।
उनके कार्य से जुड़े विश्वविद्यालय को उनका नाम दिए जाने से भावी पीढ़ियों को उनकी जनसेवा और विदर्भ के विकास के लिए किए गए संघर्ष की प्रेरणा मिलेगी, ऐसी भूमिका शिष्टमंडल ने रखी।
इसके साथ ही भाऊ के सार्वजनिक जीवन से घनिष्ठ संबंध रखने वाले नागपुर और यवतमाल दोनों स्थानों पर एक-एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी सुविधा अथवा विकास परियोजना को उनका नाम देने की मांग भी की गई।
विजया धोटे ने निवेदन में कहा कि भाऊ के कार्य का सम्मान उनके परिवार के साथ ही उनके विचारों और कार्यों से प्रेम करने वाले विदर्भ के असंख्य नागरिकों की भावनाओं को न्याय देने वाला होगा।
गडकरी का आश्वासन – शिष्टमंडल की मांग सुनने के बाद गडकरी ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर मंत्रिमंडल में निर्णय हो, इसके लिए प्रयास करेंगे।