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भाजपा अध्यक्ष को मिलेगी मोदी मंत्रिमंडल में बड़ी कुर्सी, 55 पार मंत्रियों की होगी छुट्टी

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  • दिल्ली में सियासी भूचाल!

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में बड़े बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच शनिवार रात केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दिल्ली स्थित आवास पर करीब ढाई घंटे तक एक अहम बैठक हुई। इस बैठक ने आने वाले दिनों में होने वाले सियासी और प्रशासनिक बदलावों के संकेत दे दिए हैं।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद
सूत्रों के अनुसार इस गोपनीय मंथन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष भी उपस्थित थे। तीनों शीर्ष नेताओं ने संगठनात्मक बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार दोनों विषयों पर गहन चर्चा की।

बैठक का मुख्य एजेंडा था — “पहले संगठन, फिर सरकार”। तय किया गया कि पहले भाजपा के संगठन में नए सिरे से नियुक्तियां और बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जाएगा, ताकि संगठन के जिन प्रमुख कार्यकर्ताओं को सरकार में स्थान नहीं मिल पाएगा, उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सके।

मोदी मंत्रिमंडल का नया फॉर्मूला: युवा, कर्मठ और 55 से कम
बैठक में सबसे बड़ा निर्णय उम्र को लेकर हुआ। सूत्रों का कहना है कि इस बार मंत्रिमंडल में 55 वर्ष से कम आयु के मंत्रियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य सरकार में नई ऊर्जा और ताजगी लाना है।

इस फॉर्मूले के तहत कई युवा चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इनमें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद तेजस्वी सूर्या तथा प्रवक्ता गौरव भाटिया के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।

किन दिग्गजों की हो सकती है विदाई
उम्र और प्रदर्शन के आधार पर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की विदाई भी तय मानी जा रही है। चर्चा है कि:

  1. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर
  2. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
  3. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

इन तीनों वरिष्ठ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है। हालांकि निर्मला सीतारमण के लिए एक विकल्प भी रखा गया है। सूत्रों के अनुसार उन्हें शिक्षा मंत्रालय का दायित्व सौंपा जा सकता है। इसी प्रकार भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को भी शिक्षा मंत्रालय दिए जाने की चर्चा थी, लेकिन उन्होंने विनम्रता से यह प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

भाजपा अध्यक्ष को मिलेगी सबसे बड़ी जिम्मेदारी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को लेकर हुआ। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी नड्डा को अपने मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी देना चाहते हैं। पहले संगठन में बदलाव किया जाएगा और नड्डा के स्थान पर नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद नड्डा को मंत्री बनाया जाएगा।

किन्हें नहीं मिलेगा मौका, इसके 5 कारण तय
बैठक में यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि किन नेताओं को सरकार और संगठन दोनों में जगह नहीं मिलेगी:

  1. स्वयं अयोग्य मानने वाले: कुछ नेताओं ने पहले ही कह दिया है कि वे मंत्री बनने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
  2. खराब प्रदर्शन वाले: जिन मंत्रियों का पिछले कार्यकाल में प्रदर्शन ठीक नहीं रहा।
  3. दोहरा लाभ नहीं: जो पहले मंत्री रह चुके हैं और अब फिर से संगठन में पद चाहते हैं।
  4. गलत संदेश से बचाव: ऐसे लोगों को मंत्री बनाने से कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाएगा।
  5. युवा नेतृत्व को अवसर: पुरानों को जगह देने से नए और मेहनती कार्यकर्ताओं का रास्ता रुकेगा।

अन्य महत्वपूर्ण नाम
बैठक में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को वापस केंद्रीय मंत्रिमंडल में लाने पर भी चर्चा हुई। उन्हें रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने के संकेत मिले हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल 2024 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। सरकार एक युवा, ऊर्जावान और परिणाम देने वाली टीम के साथ जनता के बीच जाना चाहती है।

अब सबकी निगाहें प्रधानमंत्री आवास से आने वाले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।

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हरियाली में बसा नन्हा मेहमान – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट, छोटे तालाब-बगिया बने आशियाना

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  • शहर के छोटे गार्डन, घास के मैदान और जलकुंड दे रहे दुर्लभ डेमसेल्फ्लाई को जीवन, शिवाजी साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. शार्यु घोणमोडे की रिसर्च में खुलासा, मानसून बाद दिखता है सेब जैसा हरा-पीला कीट, शहरी जैव-विविधता के लिए शुभ संकेत

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

कंक्रीट के जंगल के बीच नागपुर की छोटी-छोटी हरियाली में एक नन्हा, सेब जैसा हरा-पीला कीट अपना घर बसा रहा है। नाम है – वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट (Ischnura rubilio)। यह छोटी सी डेमसेल्फ्लाई बता रही है कि जंगल बचाने के लिए बड़े जंगल जरूरी नहीं, छोटा सा तालाब, बगिया का जलकुंड और घास का टुकड़ा भी काफी है।

कांग्रेस नगर स्थित शिवाजी साइंस कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. शार्यु व्ही. घोणमोडे के अवलोकन के अनुसार, शहर के छोटे गार्डन, घास के पैच और जल निकाय इस दुर्लभ प्रजाति को आवास दे रहे हैं।

डॉ. घोणमोडे ने बताया, “शहर में वेस्टर्न गोल्डन डार्टलेट की मौजूदगी दिखाती है कि छोटे-छोटे हरे-भरे टुकड़े भी ताजे पानी से जुड़ी जैव-विविधता को शहरीकरण के बीच बचा सकते हैं। गार्डन के तालाब से लेकर घास के मैदान तक, यह कीट याद दिलाता है कि शहरी वन्यजीवों को जिंदा रहने के लिए हमेशा बड़े जंगलों की जरूरत नहीं होती।”

कैसा दिखता है यह कीट ?
डॉ. घोणमोडे ने बताया कि नर कीट का शरीर सेब जैसा हरा, छाती पर काली धारियां और पेट का हिस्सा नीली टिप के साथ पीला होता है। बहुत ध्यान से देखने पर ही दिखता है। मादा आमतौर पर थोड़ी फीकी होती है और उसके शरीर के ऊपर काली पट्टी ज्यादा चौड़ी होती है।

कहां मिलता है ?
तालाब, गार्डन के जलकुंड, नाली के किनारे की हरियाली, मौसमी दलदल और बारिश के पानी से भरे गड्ढे – ये सब इन कीटों के लिए उपयुक्त घर बन सकते हैं। डेमसेल्फ्लाई के लिए पानी सिर्फ लैंडस्केप का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन चक्र के लिए जरूरी है।

डॉ. घोणमोडे के अनुसार, “मानसून के बाद का समय इन कीटों को देखने के लिए सबसे अच्छा है। नम मिट्टी, अस्थायी जलकुंड और ताजी वनस्पति उन्हें अनुकूल परिस्थितियां देती है, जबकि ठंडी सुबहों में उन्हें घास की पत्तियों पर शांत बैठे देखा जा सकता है।”

पर्यावरण के लिए संकेतक :
इनकी मौजूदगी ताजे पानी के आवास की उपलब्धता के बारे में सुराग देती है। डॉ. घोणमोडे ने कहा, “डेमसेल्फ्लाई अपने लार्वा चरण में जलीय पर्यावरण पर निर्भर रहती हैं। इनकी मौजूदगी यह बताती है कि क्षेत्र में उपयुक्त जलीय और अर्ध-जलीय आवास मौजूद है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नन्हे कीट का नागपुर में दिखना शहर की शहरी जैव-विविधता के लिए एक शुभ और उत्साहजनक संकेत है।

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4 साल बाद भी अधूरा : Y-शेप मोमिनपुरा RoB, लागत 145 से बढ़कर 185 करोड़, जनता का सब्र टूटा

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  • महा-रेल का दावा – 85% काम पूरा, लैंडिंग शिफ्ट से इनकार, निवासियों में आक्रोश – टिमकी आर्म अब गुप्ता आटा चक्की के पास उतरेगा, गड्ढों से पटी सर्विस रोड, तंग गलियों में विशाल पिलर, डेडलाइन दिसंबर 2025 से खिसक कर मार्च 2027 हुई

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

चार साल बीत गए, लेकिन नागपुर का बहुचर्चित Y-आकार का मोमिनपुरा रेलवे ओवर ब्रिज (RoB) आज भी अधूरा है और स्थानीय लोगों, खासकर आसपास रहने वालों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। महाराष्ट्र रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MRIDC) यानी महा-रेल द्वारा बनाया जा रहा यह 2.82 किमी लंबा RoB कडबी चौक से गोलीबार चौक तक मोतीबाग क्रॉसिंग की भीड़ से निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित था।

महा-रेल ने 85 प्रतिशत फिजिकल प्रोग्रेस का दावा किया है और RoB की लैंडिंग शिफ्ट से इनकार किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कह रही है।

क्या है विवाद – लैंडिंग शिफ्ट का ?
पहलवान शाह दरगाह टी-पॉइंट पर यह RoB दो हिस्सों में बंटता है। एक 11 मीटर आर्म टिमकी स्क्वायर पुलिस चौकी की ओर जाता है। निवासियों का आरोप है कि भूमिपूजन के समय टिमकी आर्म को गोलीबार चौक से ठीक पहले उतरना था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया। अब लैंडिंग गुप्ता आटा चक्की के पास होगी, जो पहले तय लंबाई से काफी छोटी है।

निवासियों का कहना है कि लैंडिंग का काम कब्रिस्तान, दो स्कूल, अस्पताल और दुकानों का रास्ता बंद कर रहा है। इस पर महा-रेल के अधिकारी ने कहा कि कोई शिफ्टिंग नहीं हुई है। अधिकारी ने बताया, “टिमकी आर्म की लैंडिंग पॉइंट वहीं है और वह मूल रूप से गुप्ता आटा चक्की के पास ही थी। फायर ब्रिगेड के आने-जाने के लिए पियर P1 और P2 के बीच 4.50 मीटर से अधिक वर्टिकल क्लीयरेंस है।” स्थानीय चिंताओं पर अधिकारी ने कहा कि Abutment 1 (A1) से 20 मीटर पर रीइन्फोर्स्ड अर्थ (RE) वॉल में चूड़ी लेन को दारुल उलूम रोड से जोड़ने के लिए एक अंडरपास प्रस्तावित है।

लागत और डेडलाइन दोनों फेल :
यह प्रोजेक्ट जुलाई 2021 में 146 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ था और दिसंबर 2025 तक पूरा होना था। अब लागत बढ़कर 185 करोड़ रुपये हो गई है और नई डेडलाइन मार्च 2027 कर दी गई है।

लागत बढ़ने की वजह महा-रेल ने बताई – GST 12% से बढ़कर 18% होना, 11 KV और 33 KV की अंडरग्राउंड लाइन और पानी की पाइपलाइन शिफ्ट करना, रेलवे भूमि लीज चार्ज में बढ़ोतरी, देरी के कारण प्राइस वेरिएशन और सार्वजनिक शौचालय निर्माण की अतिरिक्त लागत।

देरी की वजहों में – मोमिनपुरा आर्म में अत्यधिक ट्रैफिक के कारण केवल रात में काम, रेलवे और नजूल भूमि पर अतिक्रमण हटाना जो कलेक्टर और NMC ने 27 जनवरी 2025 को क्लीयर किया, कडबी स्क्वायर से टिमकी तक 600mm व्यास की पानी की पाइपलाइन (850 मीटर) और अंडरग्राउंड केबल शिफ्ट करना, पेड़ काटने के लिए NMC से अनुमति में देरी (8 अगस्त 2025 तक), सेंट्रल और साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे से गर्डर लॉन्चिंग की अनुमति में देरी और स्थानीय लोगों द्वारा बार-बार काम रोकना व आंदोलन।

85% का दावा, हकीकत में गड्ढे और धूल :
महा-रेल का कहना है कि फाउंडेशन और सब-स्ट्रक्चर का काम पूरा हो चुका है और सुपर-स्ट्रक्चर का काम प्रगति पर है। कुल 85% काम हो गया है।

लेकिन स्थानीय निवासियों की तस्वीर भयावह है। गरीब नवाज मस्जिद और HB मेडिकल स्टोर्स के पास तंग गलियों में विशाल पिलर खड़े हो गए हैं, लेकिन नीचे की कैरिजवे कई जगह धंस गई है।

टूटी सर्विस रोड पर महा-रेल के अधिकारी ने कहा, “सर्विस रोड में अगर कोई गड्ढा है तो नियमित रूप से भरा जा रहा है और कोई ट्रैफिक जाम नहीं है। धूल को नियंत्रित करने के लिए पीक ऑवर्स में नियमित पानी का छिड़काव हो रहा है। स्थायी सीमेंट कंक्रीट रोड का काम प्रगति पर है।”

निवासियों का पलटवार है कि कडबी चौक-गरीब नवाज चौक का पैच हर मरम्मत के बाद फिर बैठ जाता है, जबकि किडवई रोड-टिमकी बाजार लिंक का कांक्रीटीकरण टेढ़ा-मेढ़ा है।

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दिवाली बूम – पेंच टाइगर रिजर्व में सफारी बुकिंग 90% फुल, 6 से 14 नवंबर तक हाउसफुल

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  • 1,100 से ज्यादा बुकिंग एडवांस में, रोज 180 जिप्सियां 2,000 से अधिक पर्यटकों को करा रही जंगल की सैर, सात सफारी गेटों पर रौनक, सिल्लारी और खुर्सापार में सबसे ज्यादा भीड़, मध्य प्रदेश के कुंभीपानी-टेकाड़ी गेट पर भी पैक

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

इस दिवाली वन्यजीव प्रेमी पटाखों से दूर, पेंच टाइगर रिजर्व (PTR) की हरियाली में त्योहार मनाने का प्लान कर रहे हैं। पेंच में 6 नवंबर से 14 नवंबर तक दिवाली वीक के लिए लगभग 90% सफारी स्लॉट बुक हो चुके हैं। पेंच और मध्य प्रदेश की ओर स्थित कुंभीपानी-टेकाड़ी (UPK) गेट सहित करीब 1,100 बुकिंग एडवांस में दर्ज हो चुकी हैं, जो व्यस्त हॉलिडे सीजन का संकेत है।

बुकिंग का यह ट्रेंड ऐसे समय आया है जब परिवार और वाइल्डलाइफ उत्साही फेस्टिव ब्रेक में जंगल घूमने का प्लान बना रहे हैं।

सात गेट, रोज 2,000 पर्यटक :
पेंच में सफारी के मुख्य गेट सिल्लारी, खुर्सापार, चोरबहुली और कोलितमारा के साथ ही नागलवाड़ी, सालेघाट और खुबाला हैं। कई एंट्री पॉइंट होने से पर्यटक लैंडस्केप के अलग-अलग हिस्सों को एक्सप्लोर कर पाते हैं, हालांकि बुकिंग की उपलब्धता डिमांड और चुने गए जोन पर निर्भर करती है।

रोजाना पेंच के सातों सफारी गेटों पर लगभग 180 जिप्सियां संचालित होती हैं, जो रोज 2,000 से अधिक पर्यटकों को जंगल में ले जाती हैं। सिल्लारी और खुर्सापार में करीब 50-50 जिप्सी, चोरबहुली में 24, नागलवाड़ी में 14 और सालेघाट व खुबाला में 10-10 जिप्सियां हैं।

डिप्टी डायरेक्टर ने दी जानकारी :
PTR के उप निदेशक अक्षय गजभिये ने रिजर्व की सफलता का श्रेय बाघों की संख्या बनाए रखने के संरक्षण प्रयासों, फ्रंटलाइन स्टाफ और स्थानीय समुदायों के योगदान को दिया। उन्होंने कहा, “हमारे संरक्षण प्रयासों से बाघों की अच्छी संख्या मिली है, यह सफलता हमारे फील्ड स्टाफ और स्थानीय समुदायों की देन है।”

उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे वाइल्डलाइफ पार्क के नियमों का पालन करें और जिम्मेदार इको-टूरिज्म सुनिश्चित करने में अधिकारियों का सहयोग करें। “मैं आगंतुकों से अपील करता हूं कि वे पार्क अनुशासन का पालन करें और सबसे बढ़कर, सफारी का आनंद लेते हुए अधिकारियों को इको-टूरिज्म और वन्यजीव संरक्षण को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद करें,” गजभिये ने कहा।

बुकिंग पहले से 90% के करीब होने से पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे स्लॉट की उपलब्धता पहले से जांच लें। यह मजबूत प्रतिक्रिया इस बात के महत्व को भी रेखांकित करती है कि पर्यटकों की रुचि और रिजर्व की संरक्षण प्राथमिकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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Nagpur, IN
05:43 pm, 26 Oct 2026
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