EVM हटाओ सेना ने उठाए 7 सवाल, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर उठे गंभीर प्रश्न
नागपुर : EVM-VVPAT मशीनों में लगे काले काँच और लाइट सेंसर के जरिए करोड़ों वोटों की चोरी का आरोप लगाते हुए ‘EVM हटाओ सेना’ के बिहार और पश्चिम बंगाल प्रभारी राहुल तिवारी ने 7 सवालों के जवाब के साथ एक विस्तृत लेख जारी किया है। तिवारी का दावा है कि भारत के बुद्धिजीवी, मीडिया, पत्रकार और राजनीतिक दल इस जानकारी को जनता से छुपा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल 1 से 10 लोगों की मदद से मॉक पोल को बायपास कर एक साथ करोड़ों वोट चुराए जा सकते हैं।
1. चुनाव आयोग को मशीन देने का दावा
सवाल उठा कि वोट चोरी का आरोप लगाने वाले चुनाव आयोग क्यों नहीं जाते। इस पर जवाब दिया गया कि फरवरी 2024 में ही ₹40,000 का DD चेक ड्राफ्ट लेटर चुनाव आयोग को भेजा गया था। पत्र में मांग की गई थी कि आयोग एक EVM दे, ताकि उसमें ‘EVM BLACK GLASS CODE’ डालकर साबित किया जा सके कि मॉक पोल को बायपास कर करोड़ों वोट चुराए जा सकते हैं। ड्राफ्ट लेटर का लिंक भी सार्वजनिक किया गया है।
2. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट जाने के सवाल पर बताया गया कि काले काँच और लाइट सेंसर का मुद्दा कोर्ट के सामने गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस पर बार-बार चर्चा करके समय खराब नहीं करना चाहता। आरोप है कि कोर्ट ने आज तक इस तकनीकी मुद्दे पर कोई सुनवाई ही नहीं की। संबंधित लिंक भी साझा किया गया है।
3. रैंडम EVM भेजने के बाद भी चोरी संभव
सभी बूथों पर रैंडम EVM भेजे जाने के तर्क पर जवाब दिया गया कि SYMBOL LOADING FILE और BEL के टेक्नीशियन द्वारा लैपटॉप से डाला जाने वाला सॉफ्टवेयर प्रोग्राम एक ही जगह यानी कलेक्टर ऑफिस में डाला जाता है। उसके बाद ही EVM रैंडम बूथों पर भेजी जाती हैं। इसलिए सभी EVM में पहले से ही वोट चोरी का प्रोग्राम डाला जा सकता है। IITian राहुल मेहता द्वारा बनाए गए डेमो मशीन में यह करके दिखाया गया है।
4. इंटरनेट नहीं, फिर भी मैनिपुलेशन संभव
EVM में ब्लूटूथ, वाई-फाई, इंटरनेट नहीं होने के बावजूद छेड़छाड़ का दावा किया गया। बताया गया कि EVM केवल वोटिंग मशीन नहीं बल्कि ‘सॉफ्टवेयर प्रोग्रामेबल मशीन’ है। चुनाव से 14 दिन पहले BEL और ECIL के 3 से 4 प्रोग्रामर सॉफ्टवेयर लिखते हैं। वही प्रोग्राम 150 से 200 लैपटॉप के जरिए टेक्नीशियन VVPAT में डालते हैं। अगर प्रोग्रामर सर्वर में वोट चोरी का कोड डाल दें तो किसी को पता नहीं चलेगा। टेक्नीशियन केवल प्रोग्राम ट्रांसफर करते हैं, पढ़ नहीं सकते।
मॉक पोल बायपास करने का तरीका
VVPAT में लगे ‘रियल टाइम क्लॉक’ से मॉक पोल बायपास किया जा सकता है। ECI के मैनुअल में VVPAT में रियल टाइम क्लॉक होने की पुष्टि है।
पर्ची दिखाने का खेल
60% से 90% मतदाता पर्ची कटकर गिरते नहीं देखते। डेमो में बताया गया कि अगर मतदाता ने पर्ची गिरते नहीं देखी तो लाइट सेंसर यह समझकर लाइट बंद कर देता है और पर्ची नहीं गिराता। एक ही पर्ची को बार-बार दिखाकर 4 वोट में से 3 वोट चुराए जा सकते हैं। बाद में VVPAT अंधेरे में काले काँच के पीछे चोरी के वोट की पर्ची छाप देता है। इससे इलेक्ट्रॉनिक वोट और पर्ची का 100% मिलान होने पर भी चोरी पकड़ में नहीं आती। पूरा डेमो http://EvmHatao.com पर उपलब्ध है।
5. बैलेट पेपर से पेड़ नहीं कटेंगे
बैलेट पेपर से पर्यावरण नुकसान के सवाल पर कहा गया कि 5 साल के सभी चुनावों में 7 से 9 करोड़ किलो कागज लगेगा। लेकिन इसे बिना पेड़ काटे भी बनाया जा सकता है। इसके लिए रिसाइकल पेपर 35%, गन्ने की खोई 20%, गेहूं का भूसा 15%, पराली 15%, बांस 5%, जूट 5% और इंडस्ट्रियल हेम्प 5% का इस्तेमाल होगा। अभी भी VVPAT में 5 साल में 5 से 6.5 लाख किलो कागज लगता है जिसमें 13,000 से 16,000 पेड़ कटते हैं।*
6. EVM को कौन कंट्रोल करता है
जीतने वाली पार्टी के लिए EVM सही होने के सवाल पर कहा गया कि EVM को कोई एक पार्टी कंट्रोल नहीं करती। EVM को वही कंट्रोल कर सकता है जो मीडिया को कंट्रोल करता है। 2010 में महात्मा हरिप्रसाद ने असली EVM में वोट चोरी करके दिखाई थी, लेकिन मीडिया ने जनता को नहीं दिखाया। जून 2017 में चुनाव आयोग ने पारदर्शी काँच हटाकर काला काँच लगा दिया, यह खबर भी मीडिया ने दबा दी। दावा है कि भारत का 100% मीडिया FDI के जरिए अमेरिका के कंट्रोल में है। अमेरिका से मुक्त होने के लिए खुद के हथियार बनाने होंगे और राजनीति में असली विपक्ष लाना होगा, जो बैलेट पेपर से ही संभव है।
7. बूथ कैप्चरिंग का डर गलत
बैलेट पेपर से बूथ लूट के सवाल पर कहा गया कि बिहार, बंगाल, यूपी में 1 लाख बूथ हैं। 10% यानी 10,000 बूथ लूटने के लिए 1 लाख बंदूक और 1 लाख गुंडे चाहिए। हर बूथ पर 5 सशस्त्र सैनिक होते हैं जो वहीं मार गिराएंगे। हर बूथ पर CCTV है और जनता के पास मोबाइल कैमरा है। वीडियो बनने पर कानूनी कार्रवाई होगी। फिर भी अगर कुछ बूथ कैप्चर हों तो दोबारा चुनाव आसानी से हो जाएगा। लेकिन EVM में करोड़ों वोट कौन चुरा रहा है, यह पता लगाना नामुमकिन है क्योंकि सभी पार्टियां, मीडिया और सुप्रीम कोर्ट इस पर चुप हैं।
मांग: बैलेट पेपर का विकल्प दो
‘EVM हटाओ सेना’ ने कहा कि भारतीय हर साल सरकार को 35 लाख करोड़ कमाकर देते हैं। इसलिए संविधान अनुच्छेद 328 के तहत सभी मुख्यमंत्रियों को बैलेट पेपर से वोट देने का विकल्प देना चाहिए। अगर मुख्यमंत्री ईमानदार हैं तो यह अधिकार दें, वरना जन आंदोलन बढ़ेगा। ज्यादा जानकारी और डेमो के लिए http://EvmHatao.Com पर जाने की अपील की गई।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने लिया सम्मान, बोले- 2047 तक 80 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, भारत मेट्रो नेटवर्क में जल्द अमेरिका को पछाड़ेगा
भुवनेश्वर/नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया’ (UMI) सम्मेलन में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महामेट्रो – नागपुर मेट्रो रेल परियोजना) ने बड़ा सम्मान हासिल किया है। महामेट्रो को अपने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों के दम पर प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ (Best Exhibitor) पुरस्कार से नवाजा गया।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल के कर-कमलों द्वारा महामेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री श्रावण हर्डीकर ने यह पुरस्कार स्वीकार किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर आधारित था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा – 2047 तक 80 करोड़ आबादी शहरों में पुरस्कार वितरण अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “वर्तमान में देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा शहरों में रहता है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा, जब देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी। इसका अर्थ है करीब 80 करोड़ लोग शहरों में निवास करेंगे। इतनी विशाल आबादी के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी से तैयार करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक परिवहन विकसित करते समय समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में देश में लगभग 1,185 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित है, जबकि अमेरिका में यह 1,385 किमी है। भारत में विस्तार की वर्तमान गति से हम जल्द ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे। भविष्य के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन अनिवार्य है।”
महामेट्रो स्टॉल पर डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन – सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों ने महामेट्रो के स्टॉल का अवलोकन किया। प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने विभिन्न डिजिटल प्रणालियों की जानकारी दी :
डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट डैशबोर्ड : परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन।
संचालन एवं रखरखाव का डिजिटल रूपांतरण (O&M) : दैनिक संचालन और रख-रखाव में अत्याधुनिक तकनीक।
डिजिटल आई एवं मास्टरमाइंड : यात्री सुरक्षा के लिए उन्नत निगरानी व सुरक्षा तंत्र।
सीमलेस ‘वन ऐप’ यात्रा : टिकट बुकिंग से लेकर पूरे सफर के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव।
स्मार्ट एवं कनेक्टेड मोबिलिटी : लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की सुगम सुविधा।
सोशल मीडिया एंगेजमेंट : यात्रियों से त्वरित और सीधे संवाद का माध्यम।
इस उपलब्धि से नागपुर मेट्रो परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल और सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी मॉडल के रूप में पहचान मिली है।
गंजीपेठ फायर स्टेशन को सुबह 8:47 बजे कॉल, 4 मिनट में दमकल मौके पर, 5 फायर स्टेशनों की मदद से 7 घंटे बाद आग पर काबू, फ्रिज-एसी-वाशिंग मशीन और कंप्रेसर खाक
नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
सीए रोड, लोधीपुरा स्थित गीतांजली टॉकीज के सामने एक दुकान में लगी भीषण आग में लाखों का नुकसान हो गया। घटना की रिपोर्ट गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र को प्राप्त हुई है।
गंजीपेठ अग्निशमन केंद्र अंतर्गत प्राप्त घटना रिपोर्ट के अनुसार PBX से ऑपरेटर श्री चाटे द्वारा सुबह 08:47 बजे आग की सूचना दी गई। कॉल का स्वरूप ‘बड़ी आग’ बताया गया। सूचना मिलते ही गंजीपेठ केंद्र से MH 31 DS 4927 और MH 31 FC 2826 दो गाड़ियां रवाना हुईं और 08:51 बजे घटनास्थल पर पहुंच गईं, यानी महज 4 मिनट में रिस्पॉन्स।
मौके पर मौजूद अधिकारी/कर्मचारी – प्रमुख अग्नि विमोचक श्रीमान तिलगुले साहेब, श्री विजबे, चालक आत्माराम जाधव, चालक दिनेश खडसे, चालक कमल के., अग्नि विमोचक फिरोज चौधरी, सफाई कर्मचारी विनायक मेश्राम, प्रशिक्षणार्थी घेंडे, डंबारे सहित सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा और सुगतनगर अग्निशमन केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त रूप से मौजूद रहे।
दुकान और मकान का विवरण –
दुकान : अल कौसर रेफ्रिजरेटर, मालक मोहम्मद अश्पाक मो. 9371490718, मोहम्मद अतिक 9922883272 और अब्दुल लतीफ अंसारी 7020459914
बाजू का घर : रमेश मदनलाल भावठा मो. 9604838954
बाजू का घर : मनोज मन्नूलाल श्रीवास मो. 8329205337 पता – गीतांजली टॉकीज समोर, लोधीपुरा, सी.ए. रोड, नागपुर। थाना – गणेशपेठ।
नुकसान का विवरण –
अल कौसर रेफ्रिजरेटर में फ्रिज, एसी, वायरिंग, वाशिंग मशीन, कंप्रेसर व अन्य साहित्य जलकर खाक – अंदाजन 35 लाख रुपये का नुकसान।
रमेश भावठा के घर में फर्नीचर, कांच साहित्य, इलेक्ट्रिक फिटिंग, पीओपी – 50,000 रुपये।
मनोज श्रीवास के घर में बेड, चेयर, छत की टाडपत्री, एयर कंडीशन – 20,000 रुपये।
कुल अंदाजन नुकसान 35 लाख 70 हजार रुपये मालिकों के दावे के अनुसार बताया गया है। वहीं करीब 5 लाख रुपये की घरगुती सामग्री, लेथ मशीन, स्क्रैप सामान, वाशिंग मशीन, फ्रिज बचा लिया गया। आग लगने का कारण फिलहाल अज्ञात है।
आग को सिव्हील, लकड़गंज, वाठोड़ा, सक्करदरा, सुगतनगर अग्निशमन केंद्रों के सहयोग से संयुक्त रूप से बुझाया गया। गाड़ियां दोपहर 15:50 बजे थाने पर वापस लौटीं। मामले की आगे जांच गणेशपेठ पुलिस कर रही है।
विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन, सीएम देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर कैबिनेट में प्रस्ताव रखने का आश्वासन, नागपुर और यवतमाल में भी एक-एक परियोजना को नाम देने की मांग
नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर को विदर्भवीर भाऊ जांबुवंतराव धोटे का नाम देने के लिए प्रयास करने का आश्वासन केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिया है।
आज पूर्व विधायक तथा भाऊ की पत्नी विजया धोटे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने गडकरी से मुलाकात कर इस संबंध में निवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर भाऊ की पुत्री ज्वाला जांबुवंतराव धोटे, अन्याय निवारण मंच के सदस्य अंजय्या अनपर्थी और भाजपा आध्यात्मिक सेल के महामंत्री चंद्रशेखर दुबे उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विजया धोटे महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री बैरिस्टर रामराव आदिक की पुत्री हैं।
ज्ञापन में क्या कहा – ज्ञापन में उल्लेख है कि महाराष्ट्र विधानसभा के लिए पांच बार और लोकसभा के लिए दो बार चुने गए भाऊ जांबुवंतराव धोटे ने किसान, मजदूर, छात्र और वंचित वर्गों के सवालों के लिए निरंतर संघर्ष किया।
अकोला में डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया था, जो विदर्भ के शैक्षणिक और कृषि विकास की लड़ाई में महत्वपूर्ण साबित हुआ। पशु चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और नागपुर मुख्यालय वाले महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भी भाऊ ने लगातार पैरवी की थी।
उनके कार्य से जुड़े विश्वविद्यालय को उनका नाम दिए जाने से भावी पीढ़ियों को उनकी जनसेवा और विदर्भ के विकास के लिए किए गए संघर्ष की प्रेरणा मिलेगी, ऐसी भूमिका शिष्टमंडल ने रखी।
इसके साथ ही भाऊ के सार्वजनिक जीवन से घनिष्ठ संबंध रखने वाले नागपुर और यवतमाल दोनों स्थानों पर एक-एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी सुविधा अथवा विकास परियोजना को उनका नाम देने की मांग भी की गई।
विजया धोटे ने निवेदन में कहा कि भाऊ के कार्य का सम्मान उनके परिवार के साथ ही उनके विचारों और कार्यों से प्रेम करने वाले विदर्भ के असंख्य नागरिकों की भावनाओं को न्याय देने वाला होगा।
गडकरी का आश्वासन – शिष्टमंडल की मांग सुनने के बाद गडकरी ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से चर्चा कर मंत्रिमंडल में निर्णय हो, इसके लिए प्रयास करेंगे।