कृष्ण केवल नाम नहीं बल्कि एक गुण हैं, वे महान योगेश्वर हैं।” — महिमा वाचक सुरभि दीदी
दिनांक 14 जून 2026 : डॉक्टर वसंतराव देशपांडे मेमोरियल हॉल, नागपुर में पावन चिंतन धारा आश्रम की नागपुर इकाई द्वारा भव्य “श्रीकृष्ण भक्ति संध्या” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम पूज्य गुरु माँ डॉ. कविता अस्थाना जी और अग्निहोत्री श्री विवेक जी पांढरीकर गुरुजी की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नागपुर के विशिष्ट व्यक्तिमत्व जैसे कि श्री संत आबाजी महाराज देवस्थान के अध्यक्ष श्री जयंत येरावार जी, रायसोनी फाउंडेशन के तरफ से श्रीमती मृणालिनी नाईक जी, लोकमत ग्रुप कि असिस्टेंट मैनेजर इवेंट्स श्रीमती नेहा जोशी जी, अवचट इंडस्ट्रीज़ के मालिक श्री शांताराम अवचट जी, ज्येष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री राजीव मिश्राजी सहित महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं एवं कृष्ण भक्तों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर पूज्य गुरु माँ डॉ. कविता अस्थाना जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आश्रम का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्र चेतना की स्थापना करना है। उन्होंने कहा कि सेवा ही ईश्वर प्राप्ति और मोक्ष का मार्ग है तथा भक्ति और ज्ञान का संतुलन जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
व्यासपीठ पर विराजमान सुप्रसिद्ध महिमा वाचक आदरणीय सुरभि दीदी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के अनेक प्रेरणादायी एवं अनछुए प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “कृष्ण केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक दिव्य गुण हैं। वे महान योगेश्वर, उच्च कोटि के विद्वान और धर्म की स्थापना करने वाले आदर्श पुरुष हैं।”
सुरभि दीदी ने श्रीकृष्ण के जीवन, कर्मयोग, मित्रता, धर्मनिष्ठा एवं राष्ट्रधर्म से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मकता, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य श्रीकृष्ण के किसी एक गुण को भी अपने जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन सफल एवं सार्थक हो सकता है।
कार्यक्रम के दौरान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मित्रता, कृष्णनीति, भगवद्गीता के संदेशों तथा श्रीकृष्ण के त्याग एवं संघर्ष का मार्मिक वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। सुरभि दीदी ने सभी भक्तों से श्रीकृष्ण के दिखाए मार्ग पर चलने, पंच विकारों को दूर करने तथा राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में लोकप्रिय गायक डॉ. संजय अंदुरकर जी, भाई करण जी, सुश्री ख्याति जी एवं आस्तिक सिन्हा जी सहित आश्रम की सुर साधक मंडली द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।ज्ञातव्य हो कि पावन चिंतन धारा आश्रम एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगठन है, जो परमपूज्य डॉ. पवन सिन्हा ‘गुरुजी’ के मार्गदर्शन में धर्म, सेवा, शिक्षा एवं राष्ट्र जागरण के कार्यों में निरंतर सक्रिय है। कार्यक्रम से प्राप्त दानराशि आश्रम द्वारा संचालित निःशुल्क अनौपचारिक विद्यालय ‘ऋषिकुलशाला’ के माध्यम से निर्धन बच्चों की शिक्षा एवं संस्कार हेतु समर्पित की जाएगी।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में पावन चिंतन धारा आश्रम की नागपुर इकाई के सदस्यों का तथा रायसोनी फाउंडेशन, लोकमत सखी मंच और श्री संत आबाजी महाराज देवस्थान का विशेष योगदान रहा।
तथा कार्यक्रम के यशस्वीते के लिए श्री. देवेन्द्र आष्टनकर सरपंच कोठेवाडा, राजेंद्र पहाडे जुनोना, किशोर दमाह, राजेश पारेख, नरेंद्र बर्डे, सुनील मौर्य, ललितजी अग्रवाल, सुनीता ताई खातखेडे, डॉ. अतुल शृंगारपुरे, डॉ. अजय कडूसकर, अभय चोरगडे इनका महत्त्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के पश्चात भक्तजनो से सुंदर प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। भक्ति संध्या में ह.भ.प. बोरोटकर महाराज, ह.भ.प. गुडवार महाराज तथा अनेक वारकरी भक्तों ने आनंद उत्सव मनाया ।कार्यक्रम का संचलन सौ. श्रुति ऋषिकेश राउत इन्होंने किया तथा आभार प्रदर्शन पावन चिंतन धारा के नागपुर इकाई के प्रवक्ता श्रेयश अंदूरकर इन्होंने किया।
जीर्णोद्धार और इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर NMC ने बहाए करोड़ों, द हितवादा के स्पॉट इंस्पेक्शन में खुली पोल, तालाब में जलकुंभी और झाड़ियों का कब्जा, दुर्गा मूर्तियों के अवशेष सड़ रहे, दुर्गंध से लोग परेशान
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
उत्तर-पश्चिम नागपुर स्थित पुलिस लाइन टाकली तालाब के जीर्णोद्धार और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 9 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने के बावजूद नागपुर महानगर पालिका (NMC) इसकी देखभाल में पूरी तरह विफल साबित हुई है। तालाब और उससे लगा कृत्रिम विसर्जन टैंक फिर से बदहाल स्थिति में पहुंच गया है, जिससे सार्वजनिक परियोजनाओं के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ज्ञात हो कि तालाब के बड़े हिस्से पर घनी जलकुंभी, बढ़ी हुई झाड़ियां और जंगली घास ने कब्जा कर लिया है। कई जगहों पर कंक्रीट की रिटेनिंग वॉल मुश्किल से दिखाई दे रही हैं। पानी के नीचे उगी खरपतवार पूरे तालाब के तल में फैल गई है, जबकि कमल के पत्तों ने लगभग आधी जल सतह को ढक लिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार वनस्पति की अनियंत्रित वृद्धि से जल परिसंचरण और ऑक्सीजन स्तर पर असर पड़ता है, जिससे जलीय जीवन खतरे में पड़ सकता है। यह तालाब के पारिस्थितिक स्वास्थ्य की दयनीय स्थिति को दर्शाता है।
विसर्जन टैंक बना कचरा कुंड – तालाब के बगल में बना कृत्रिम विसर्जन टैंक नवरात्रि समाप्त होने के तुरंत बाद ही गंदा हो गया है। टैंक में मां दुर्गा की विसर्जित मूर्तियों के सड़ते अवशेष, लकड़ी के ढांचे, भूसा, फेंके गए कपड़े और सड़ी हुई निर्माल्य सामग्री काले, ठहरे हुए पानी में तैरती देखी गई। कचरे से तेज दुर्गंध उठ रही है, जिससे आसपास की बस्तियां परेशान हैं।
जफर नगर के एक निवासी ने चिंता जताई कि ठहरा हुआ पानी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकता है। अक्टूबर की गर्मी और वेक्टर-जनित बीमारियों के मौसमी बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गंदा पानी डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल प्रजनन स्थल बन गया है।
कैसे खर्च हुए 9 करोड़ – बताया जाता है कि तालाब पहले भी बर्बादी के कगार पर पहुंच गया था। पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी ने जीर्णोद्धार अभियान शुरू किया था, जिसके लिए क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत हेतु 50 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। बाद में मनपा प्रशासन ने तालाब के बगल में मूर्तियों के सीधे विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए लगभग 8.50 करोड़ रुपये खर्च कर कृत्रिम विसर्जन टैंक का निर्माण किया। इस प्रकार कुल खर्च 9 करोड़ से अधिक हो गया।
लेकिन तालाब और विसर्जन टैंक की वर्तमान स्थिति बताती है कि बुनियादी ढांचे को पर्याप्त नियमित रखरखाव नहीं मिला। गाद निकालना, खरपतवार हटाना और नियमित सफाई जल निकाय की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, जो नहीं हो रहा।
स्थानीय नागरिकों ने NMC से तत्काल हस्तक्षेप कर खरपतवार हटाने, जमा कचरा निकालने, विसर्जन टैंक को साफ करने और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है।
नागपुर में 5वीं सप्तर्षि पुरस्कार श्रृंखला 2026 में 7 विभूतियों का सम्मान, पद्मश्री भालचंद्र नेमाड़े, थलाप्पिल प्रदीप और IIT मद्रास के वी. कामकोटि समेत वैज्ञानिक, साहित्यकार और उद्यमी पुरस्कृत, हिंदू रिसर्च फाउंडेशन का आयोजन
नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वराखेड़ी ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव प्रगति का साधन बना रहना चाहिए, वह मानवीय मूल्यों पर हावी नहीं होना चाहिए। AI का उपयोग भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता और मानवीय मूल्यों द्वारा निर्देशित होना चाहिए। तकनीक के उपयोग में आत्म-संयम जरूरी है और ‘भारतीय प्रज्ञा’ ही राष्ट्र की प्रगति को मजबूत कर सकती है।
प्रो. वराखेड़ी रविवार को पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, IT पार्क स्थित कवि कुलगुरु कालिदास ऑडिटोरियम में आयोजित 5वीं सप्तर्षि पुरस्कार श्रृंखला 2026 के पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिंदू रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किया गया था।
संस्था के संस्थापक एवं प्रबंध ट्रस्टी डॉ. टी.एस. भाल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी और कहा कि प्राचीन ज्ञान आम लोगों तक पहुंचना चाहिए और अतीत को केवल महिमामंडित नहीं, बल्कि प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। मंच पर IIM-नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराय मेत्री, इम्मवर्सAI के सह-संस्थापक आर. रामकृष्णन, प्रतिभा नेमाड़े और सुरेश कोटे भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गीता कृष्णन जी. पिल्लई, यूनिट हेड, डेटा एंड इनोवेशन डिवीजन, WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन रिसर्च सेंटर, जामनगर ने की। जीवदया फाउंडेशन, सूरत के किशोरभाई शाह अतिथि सम्माननीय थे।
7 पुरस्कार विजेता सम्मानित –
1. महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार : पद्मश्री भालचंद्र वनाजी नेमाड़े को साहित्य के लिए। प्रसिद्ध मराठी उपन्यासकार ‘कोसला’ और ‘हिंदू: जगण्याची समृद्ध अडगळ’ के लेखक ने कहा कि अतीत को भविष्य को सूचित करना चाहिए और हिंदू धर्म की विविधता को पहचानना चाहिए। उन्होंने भारतीय साहित्य में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया।
2. नागार्जुन पुरस्कार : पद्मश्री प्रो. थलाप्पिल प्रदीप, IIT मद्रास में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर को। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी परिस्थितियां फिर से बनानी होंगी जो मौलिक वैज्ञानिक सोच को पोषित करें और बच्चों की जिज्ञासा को देश का सबसे बड़ा वैज्ञानिक खजाना बताया।
3. आर्यभट्ट पुरस्कार : पद्मश्री प्रो. वी. कामकोटि वीज्हीनाथन, निदेशक IIT मद्रास और शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के निर्माता को। उन्होंने पीतल से ‘राम यंत्र’ बनाने की प्राचीन शिल्प कौशल की सटीकता का उदाहरण दिया और गांवों में कम से कम दो परिवारों को बच्चों को शिक्षा की ओर प्रेरित करने का आह्वान किया।
4. आचार्य कणाद पुरस्कार :प्रो. संजय जनराव धोबले, भौतिकी विभाग, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय को। सड़क सुरक्षा और किसानों को वन्यजीवों से बचाने की तकनीक सहित सामाजिक लाभ वाले अनुसंधान के लिए।
5. विश्वकर्मा पुरस्कार :डॉ. अनिल रामजी सुतार, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नागपुर के स्वामी विवेकानंद पुतले से जुड़े मूर्तिकार को।
6. आचार्य भारद्वाज पुरस्कार :सुयश सिंह, सह-संस्थापक और CEO, गैलेक्सआई स्पेस सॉल्यूशंस को। उन्होंने युवाओं से उद्यमिता अपनाने, अंतरिक्ष तकनीक के अवसरों और भारत के विजन 2047 को हासिल करने के लिए रणनीति के महत्व पर जोर दिया।
7. आचार्य सुश्रुत पुरस्कार :डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, प्रो-चांसलर, दत्ता मेघे उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए। डॉ. पिल्लई ने कहा कि जानकारी प्रचुर है लेकिन उसे सार्थक ज्ञान में बदलना चुनौती है। AI प्राचीन ज्ञान को आधुनिक साधनों से जोड़ सकता है, लेकिन विवेक लोगों से ही आएगा।
आर. रामकृष्णन ने भारतीय ज्ञान परंपराओं पर आधारित दुनिया के पहले स्क्रिप्ट लैंग्वेज मॉडल को विकसित करने पर बात की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिता तिलवे और डॉ. रिचा सुगंध ने किया, आभार हर्षा देशमुख ने माना।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के हाथों प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने लिया सम्मान, बोले- 2047 तक 80 करोड़ लोग शहरों में रहेंगे, भारत मेट्रो नेटवर्क में जल्द अमेरिका को पछाड़ेगा
भुवनेश्वर/नागपुर, 25 अक्टूबर 2026 :
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित 19वें ‘अर्बन मोबिलिटी इंडिया’ (UMI) सम्मेलन में महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महामेट्रो – नागपुर मेट्रो रेल परियोजना) ने बड़ा सम्मान हासिल किया है। महामेट्रो को अपने अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों के दम पर प्रतिष्ठित ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शक’ (Best Exhibitor) पुरस्कार से नवाजा गया।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल के कर-कमलों द्वारा महामेट्रो के प्रबंध निदेशक श्री श्रावण हर्डीकर ने यह पुरस्कार स्वीकार किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन द डिजिटल एज’ विषय पर आधारित था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा – 2047 तक 80 करोड़ आबादी शहरों में पुरस्कार वितरण अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा, “वर्तमान में देश की कुल आबादी का 37 प्रतिशत हिस्सा शहरों में रहता है। वर्ष 2047 तक यह आंकड़ा 50 प्रतिशत के पार पहुंच जाएगा, जब देश की अनुमानित जनसंख्या लगभग 160 करोड़ होगी। इसका अर्थ है करीब 80 करोड़ लोग शहरों में निवास करेंगे। इतनी विशाल आबादी के लिए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अभी से तैयार करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “सार्वजनिक परिवहन विकसित करते समय समाज के सबसे कमजोर और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की जरूरतों का ध्यान रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। वर्तमान में देश में लगभग 1,185 किमी लंबा मेट्रो नेटवर्क संचालित है, जबकि अमेरिका में यह 1,385 किमी है। भारत में विस्तार की वर्तमान गति से हम जल्द ही अमेरिका को भी पीछे छोड़ देंगे। भविष्य के लिए मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन अनिवार्य है।”
महामेट्रो स्टॉल पर डिजिटल तकनीक का प्रदर्शन – सम्मेलन में गणमान्य अतिथियों ने महामेट्रो के स्टॉल का अवलोकन किया। प्रबंध निदेशक श्रावण हर्डीकर ने विभिन्न डिजिटल प्रणालियों की जानकारी दी :
डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट डैशबोर्ड : परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन।
संचालन एवं रखरखाव का डिजिटल रूपांतरण (O&M) : दैनिक संचालन और रख-रखाव में अत्याधुनिक तकनीक।
डिजिटल आई एवं मास्टरमाइंड : यात्री सुरक्षा के लिए उन्नत निगरानी व सुरक्षा तंत्र।
सीमलेस ‘वन ऐप’ यात्रा : टिकट बुकिंग से लेकर पूरे सफर के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव।
स्मार्ट एवं कनेक्टेड मोबिलिटी : लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की सुगम सुविधा।
सोशल मीडिया एंगेजमेंट : यात्रियों से त्वरित और सीधे संवाद का माध्यम।
इस उपलब्धि से नागपुर मेट्रो परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल और सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी मॉडल के रूप में पहचान मिली है।