जब विकास की अंधी दौड़ में मिटने लगे गलियों के किस्से और चौपालों की गूँज
Nagpur : एक सवाल जो हर शहर पूछ रहा है सुबह आँख खुलते ही खिड़की के बाहर क्रेन की आवाज़, धूल का गुबार और एक और पुरानी इमारत को गिरते देखना अब आम हो गया है। नागपुर हो या नोएडा, पुणे हो या पटना, हर शहर एक ही रफ़्तार से भाग रहा है। फ्लाईओवर, मेट्रो, चौड़ी सड़कें, काँच के टावर। नाम तरक्की का है, पर कीमत क्या है? नागरिकों से लेकर वास्तुकारों तक की आवाज़ एक ही दर्द बयाँ करती है: हम शहरों को आधुनिक तो बना रहे हैं, पर क्या उनके भीतर धड़कने वाली रूह को कहीं मार तो नहीं रहे?
क्लोन सिटी’ का साया: जब हर शहर लगने लगे एक जैसा
अरविन्द सिंह इसे ‘क्लोन सिटी सिंड्रोम’ कहते हैं। सोचिए, आपको आँखों पर पट्टी बाँधकर किसी मॉल में छोड़ दिया जाए। क्या आप बता पाएँगे कि आप जयपुर में हैं, भोपाल में या राँची में? शायद नहीं। क्योंकि हर जगह वही बड़े ब्रांड, वही फूड कोर्ट, वही काँच और स्टील की दीवारें हैं।
पहले हर शहर की अपनी खुशबू थी। लखनऊ की शाम में कबाब की महक थी, तो मैसूर की सुबह में चंदन की। नागपुर की पहचान उसके संतरे के बाग और चौड़ी सड़कों के किनारे लगे विशाल पेड़ थे। बनारस की पहचान उसकी तंग गलियाँ और घाटों की सीढ़ियाँ थीं। आज विकास के नाम पर हम उस ‘अलगपन’ को ही मिटा रहे हैं। जहाँ पहले बंगले और अमरूद के पेड़ थे, वहाँ अब दस मंज़िला इमारतें खड़ी हैं। जहाँ बच्चों के खेलने के मैदान थे, वहाँ अब पार्किंग है। हम सुविधा के नाम पर एकरूपता खरीद रहे हैं, और बदले में अपनी पहचान बेच रहे हैं।
विकास का अर्थ विध्वंस नहीं होता
यह कहना बेईमानी होगी कि विकास नहीं चाहिए। सड़कें चाहिए, अस्पताल चाहिए, मेट्रो चाहिए। जनसंख्या बढ़ रही है, तो शहरों को भी बढ़ना होगा। सवाल विकास पर नहीं, उसके तरीके पर है। वास्तुकार सांगिता सिंह पूछती हैं कि क्या नागपुर का विकास वहाँ की काली मिट्टी, खुले मैदान और पुराने पेड़ों को बचाकर नहीं हो सकता?
यूरोप के शहरों को देखिए। पेरिस ने मेट्रो बनाई, पर अपने हौसमैन शैली के भवनों को नहीं तोड़ा। रोम ने आधुनिक सुविधाएँ जोड़ीं, पर कोलोसियम के आसपास का चरित्र नहीं बदला। उनके लिए विरासत बोझ नहीं, पूँजी है। हमारे यहाँ क्यों लगता है कि पुराना होना पिछड़ा होना है? अदिति सिंह बिल्कुल ठीक कहती हैं कि बुनियादी ढाँचे का काम शहर के चरित्र को मज़बूत करना है, उसे बदलना नहीं। फ्लाईओवर बनाइए, पर उस सौ साल पुराने पीपल के पेड़ को बचाकर। सड़क चौड़ी कीजिए, पर फुटपाथ इतना रखिए कि बुज़ुर्ग टहल सकें और ठेले वाले अपना गुज़ारा कर सकें।
जब शहर बेजान लगने लगें
सबसे बड़ा दर्द यह है कि हमारे शहर सुविधाजनक तो हो रहे हैं, पर सुखद नहीं रहे। वंश सिंह लिखते हैं कि पहले गर्मियों की दोपहर में बाज़ारों से गुज़रते हुए एक अजीब सी ठंडक मिलती थी। ऊँची-ऊँची इमारतें, तंग गलियाँ और दुकानों की छाँव मिलकर एक प्राकृतिक कूलर बना देती थीं। आज ‘ब्यूटीफिकेशन’ के नाम पर उन बाज़ारों को टाइल्स से पाट दिया गया है। नतीजा? तापमान चार डिग्री ज़्यादा और आत्मीयता चार गुना कम।
हम कहाँ मिलते हैं अब? पहले मोहल्ले में एक चौपाल होती थी, एक मंदिर का चबूतरा होता था, एक नुक्कड़ की चाय की दुकान होती थी। वहाँ लोग सिर्फ़ चाय नहीं पीते थे, सुख-दुख बाँटते थे। त्यौहार मनाते थे, झगड़े सुलझाते थे। आज की ‘स्मार्ट सिटी’ में सब कुछ है, पर वो ‘अड्डा’ गायब है। हम ऊँची इमारतों में रहते हैं, पर पड़ोसी का नाम नहीं जानते। मृणाल RK का नागपुर का उदाहरण देखिए। सिविल लाइंस और धरमपेठ जैसे इलाके अपनी हरियाली और शांति के लिए जाने जाते थे। आज वहाँ भी कंक्रीट का जंगल उग रहा है। शहर का पारा चढ़ रहा है, और उसके साथ चिड़चिड़ापन भी।
तो रास्ता क्या है? जड़ों से जुड़ी उड़ान
इसका यह मतलब नहीं कि हम बैलगाड़ी के युग में लौट जाएँ। इसका मतलब सिर्फ़ इतना है कि तरक्की को थोड़ा ठहरकर, सोचकर किया जाए। प्रदीप पाली कहते हैं कि जब कोई नया कॉम्प्लेक्स बनता है, तो उसमें पुराने रेहड़ी-पटरी वालों के लिए भी जगह तय हो। वे भी शहर का हिस्सा हैं। निशंक RK का सुझाव है कि हर नई इमारत का डिज़ाइन उस शहर की जलवायु और संस्कृति को देखकर बने। राजस्थान में जो डिज़ाइन चलेगा, वो केरल में नहीं चल सकता।
असली स्मार्ट सिटी वो नहीं जहाँ सिर्फ़ वाई-फाई हो। असली स्मार्ट सिटी वो है जहाँ एक बच्चा सुरक्षित साइकिल चला सके, जहाँ एक बुज़ुर्ग शाम को पेड़ के नीचे बैठ सके, जहाँ बारिश का पानी ज़मीन में उतर सके। तस्नीम RK ठीक कहती हैं कि हमें ‘इंटीग्रेटेड प्लानिंग’ चाहिए। मेट्रो के साथ-साथ साइकिल ट्रैक भी बनें। शॉपिंग मॉल के साथ-साथ सार्वजनिक पार्क भी बनें।
भूमिका तिरपुड़े आने वाली पीढ़ियों की बात करती हैं। हम जो आज बना रहे हैं, क्या वो तीस साल बाद रहने लायक होगा? या हम सिर्फ़ अगली तिमाही का मुनाफ़ा देख रहे हैं? निहार शैख बहुत गहरी बात कहते हैं कि सड़कें और इमारतें सिर्फ़ ईंट-सीमेंट नहीं होतीं। वे हमारी कहानियों का घर होती हैं। किसी इमारत को गिराना सिर्फ़ मलवा गिराना नहीं होता, किसी की बचपन की यादें गिराना होता है।
आख़िरी बात: शहर नक्शे पर नहीं, दिल में बसते हैं
विकास एक नदी की तरह है। उसे बहना चाहिए, पर अपने किनारे तोड़कर नहीं। एक शहर की असली दौलत उसके मॉल या मेट्रो नहीं होते। उसकी असली दौलत उसके घाट, उसके पुराने बाज़ार, उसकी बोलियाँ, उसके त्यौहार और उसके पेड़ होते हैं।
हमें ऐसे शहर चाहिए जो सिर्फ़ ‘रहने लायक’ न हों, ‘जीने लायक’ हों। जहाँ तरक्की की चमक हो, पर अतीत की गर्माहट भी बनी रहे। क्योंकि घर सिर्फ़ दीवारों से नहीं बनते, यादों से बनते हैं। और शहर सिर्फ़ पते नहीं होते, पहचान होते हैं। अगर विकास की दौड़ में हमने अपनी पहचान ही खो दी, तो उस तरक्की का करेंगे क्या? असली तरक्की वही है जो हमें आगे ले जाए, मगर हमारी जड़ों से दूर न करे।
सिलवासा फैक्ट्री पर छापा, 6.26 लाख का माल जब्त, एसपी हर्ष पोद्दार की टीम को कोर्ट ने बताया कौतुकास्पद, जिले में 662 हिस्ट्रीशीटरों की परेड, साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर सुरक्षा उपाय, अवैध शराब पर 15 केस
नागपुर ग्रामीण, 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) :
माननीय मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ ने प्रतिबंधित नायलॉन मांझे के उत्पादन और आपूर्ति के मूल स्रोत का पता लगाने पर नागपुर ग्रामीण पुलिस की खुलकर प्रशंसा की है। कोर्ट ने 23/10/2026 के आदेश में कहा कि पुलिस की जांच कौतुकास्पद है और अन्य जिलों को भी ऐसी कार्रवाई कर 29/10/2026 तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला – दिनांक 08/12/2025 को कलमेश्वर पुलिस स्टेशन अंतर्गत मौजा गोडखेरी में VR लॉजिस्टिक वेयरहाउस कंटेनर क्रमांक GJ-21-V-3238 से नायलॉन मांझा ले जाते आरोपी छविनाथ मोहन निषाद, उम्र 30, उत्तर प्रदेश को पकड़ा गया था। 9,200 नग नायलॉन मांझा प्लास्टिक चक्री कीमत 14,40,000 रुपये और कंटेनर कीमत 20,00,000 रुपये, कुल 34,40,000 रुपये का माल जब्त किया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हर्ष ए. पोद्दार और अपर अधीक्षक अनिल मस्के के मार्गदर्शन में स्थानीय गुन्हे शाखा के निरीक्षक अंकुश माने और निरीक्षक स्नेहल राऊत की टीम ने गोपनीय जानकारी, तकनीकी पुरावे और बैंक लिंकेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
कलमेश्वर में दर्ज गुनाह के संबंध में दमन के औद्योगिक परिसर, डेमनी रोड दादरा और नगर हवेली के सिलवासा में मांझा निर्माता की फैक्ट्री पर छापा मारकर कुल 6 करोड़ 26 लाख 43 हजार 840 रुपये का प्रतिबंधित नायलॉन मांझा, उसे बनाने का कच्चा माल और मशीनरी जब्त की गई।
इसी जांच के लिए मुंबई हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) दाखिल हुई थी। कोर्ट में एसपी द्वारा दाखिल प्रतिज्ञापत्र पर यह प्रशंसा हुई।
अन्य बड़ी कार्रवाईयां –
1. साबनेर में सड़क के बीच खतरनाक पेड़ पर प्रतिबंधक उपाय – साबनेर शहर से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच मौजूद पेड़ से हादसे का खतरा था। विशेषकर रात में अंधेरा होने से या सामने से तेज रोशनी से चालक का ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका थी। एसपी हर्ष पोद्दार के निर्देश पर साबनेर पुलिस ने पेड़ के चारों ओर रिफ्लेक्टर और रेडियम पट्टी लगाई, ‘सावधान, काम शुरू है’ के सूचना फलक लगाए और वेग मर्यादित रखने की अपील की। PWD और वन विभाग से समन्वय कर पेड़ को स्थायी रूप से हटाने की कार्रवाई शुरू है।
2. घरफोड़ी के 2 गुनाह उजागर, 4.16 लाख का माल जब्त – स्थानीय गुन्हे शाखा ने दिनांक 23/10/2026 को आरोपी प्रवीण अशोक डेकाटे, उम्र 30, तिलक वार्ड मोहाड़ी, ता. मोहाड़ी, जि. भंडारा को गिरफ्तार किया। गोपनीय जानकारी मिली थी कि वह मीठा माधनी परिसर में चोरी के सोने के दागिने बेचने घूम रहा है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ में उसने मीठा परिसर में 12 दिन पहले और उमरेड में 1 महीने पहले घरफोड़ी करने की कबूली दी। पंचनामे में उसके पैंट की जेब से सोने के दागिने मिले, कुल 4,16,000 रुपये का माल जब्त। उसके खिलाफ मौदा अप.क्र. 693/2026 कलम 305(अ),331(3) और उमरेड अप.क्र. 934/2026 में केस दर्ज है।
3. खाने के अयोग्य सुपारी की 40 टन खेप जब्त – वडोदा पुलिस की कार्रवाई – वडोदा पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि वडोदा हद के महालगाव-लिंगगाव के नवकार वेयरहाउस में बिना परवाना मानव सेवन के अयोग्य सुपारी चार वाहनों से लाई जा रही है। पुलिस ने जाल बिछाकर चारों वाहनों की तलाशी में करीब 40 टन सुपारी जब्त की। चारों वाहन सीज कर अन्न व औषध प्रशासन विभाग को पत्र व्यवहार किया गया है। विभाग की जांच के बाद आगे कार्रवाई होगी।
4. अवैध शराब पर 15 गुनाह – एसपी के मार्गदर्शन में 23/10/2026 को जिले भर में अवैध शराब निर्माण, बिक्री और सेवन पर कार्रवाई कर कुल 15 गुनाह दर्ज किए। खापा में 4, कळंब में 1, साबनेर में 2, उमरेड, रामटेक, बोरी, नरखेड, जलालखेड़ा में 1-1 और भिवापुर में 2 गुनाह। कार्रवाई में 32,230 मिली देशी दारू, 360 मिली विदेशी दारू, 24 लीटर मोहफूल दारू कुल 8,060 रुपये का माल जब्त कर मौके पर पंचनामा कर नष्ट किया गया।
5. अस्तित्व छुपाकर घूमने वाले पर गुनाह – अरोली पुलिस ने 23/10/2026 को पेट्रोलिंग के दौरान आरोपी तुषार उर्फ नांदूजी तुलसीदास वानखेडे, 30 वर्ष, संताजी नगर कन्हान, ता. पारशिवनी को मौजा रोंगली बार में अपना अस्तित्व छुपाकर सूर्यास्त के बाद संदिग्ध रूप से घूमते पकड़ा। नाम-पता पूछने पर उड़वा-जवाब देने पर धारा 122 महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत गुनाह दर्ज किया।
6. 662 रिकॉर्डेड अपराधियों की परेड – जिले के सभी 24 पुलिस थानों में शरीर और संपत्ति के विरुद्ध अपराध, महिला-बाल अत्याचार, अवैध शराब, जुआ आदि के 662 रेकॉर्डवरील आरोपियों की परेड ली गई। इसमें नागपुर उपविभाग में 68, उमरेड में 124, साबनेर में 136, कन्हान में 69, रामटेक में 119, काटोल में 127 आरोपियों को बुलाकर चेक किया गया और हिदायत दी गई।
कुल 2.55 लाख में से 1.65 लाख ने किया मतदान, पुरुष 69% – महिला 59%, पहले 65% का अनुमान था, सहायक निर्वाचन अधिकारी प्रदीप कुलकर्णी ने जारी किया आंकड़ा
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
नागपुर विभाग पदवीधर मतदारसंघ द्विवार्षिक चुनाव 2026 के लिए सुबह 8 से शाम 4 बजे तक हुए मतदान की अंतिम टक्केवारी जारी हो गई है। सहायक निर्वाचन निर्णय अधिकारी तथा अपर आयुक्त (सा.प्र.) नागपुर विभाग, प्रदीप कुलकर्णी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल 64.82 प्रतिशत मतदान हुआ है।
कुल 2,55,603 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,65,672 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसमें पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत महिलाओं से अधिक रहा।
जिलावार फाइनल आंकड़ा – जिला कुल मतदाता मतदान प्रतिशत नागपुर 1,44,466 87,187 60.35% – सबसे कम भंडारा 21,349 14,319 67.07% गोंदिया 22,176 15,810 71.29% वर्धा 21,742 14,861 68.35% चंद्रपुर 32,262 23,568 73.05% – सबसे ज्यादा गड़चिरोली 13,608 9,927 72.95% कुल2,55,6031,65,67264.82% जेंडर वाइज विश्लेषण –
पुरुष मतदाता : 1,47,280 में से 1,01,672 ने किया मतदान – 69.03%
महिला मतदाता : 1,08,301 में से 63,999 ने किया मतदान – 59.09%
अन्य : 22 में से 1 – 4.55%
पहले अनौपचारिक तौर पर 65% मतदान का अनुमान लगाया जा रहा था, जो फाइनल आंकड़े में 64.82% पर आकर स्थिर हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य 50-55% के औसत से काफी अधिक है।
सबसे कम मतदान नागपुर जिले में 60.35% रहा, जबकि सबसे ज्यादा मतदान चंद्रपुर में 73.05% दर्ज किया गया। गोंदिया 71.29% और गड़चिरोली 72.95% के साथ दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे।
अब सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जहां इस बढ़े हुए मतदान का असर भाजपा-कांग्रेस दोनों के भाग्य पर तय होगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया उद्घाटन, रोबोटिक सर्जरी, AI-आधारित MRI-CT और भारत का पहला सिंगल-पोर्ट रोबोट उपलब्ध
नागपुर, 24 अक्टूबर 2026 :
स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए न्यूएरा हॉस्पिटल्स ने गुरुवार को नागपुर के वर्धमान नगर में 300 बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा विशेषज्ञ और सम्मानित अतिथि शामिल हुए।
2016 में 50 बेड के अस्पताल से शुरू हुआ न्यूएरा हॉस्पिटल्स का सफर अब मध्य भारत का एक प्रमुख हेल्थकेयर समूह बन चुका है। नए अस्पताल का उद्देश्य नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के मरीजों को आधुनिक, सुलभ और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराना है।
अत्याधुनिक सुविधाएं अस्पताल में भारत का पहला सिंगल-पोर्ट सर्जिकल रोबोट और मल्टी-पोर्ट रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाया गया है। इसके साथ AI आधारित 3T डिजिटल MRI, 256-स्लाइस CT स्कैनर और होलॉजिक 3D मैमोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ऑपरेशन थिएटर और ICU में AI आधारित मरीज निगरानी प्रणाली, रोबोटिक फिजियोथेरेपी और आधुनिक पुनर्वास सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
प्रबंधन का बयान प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद संचेती ने कहा कि यह अस्पताल नई तकनीक, डॉक्टरों के अनुभव और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के तालमेल का प्रतीक है। निदेशकडॉ. निलेश अग्रवाल ने कहा कि अत्याधुनिक सुविधाओं से मरीजों को पास में ही बेहतर इलाज के विकल्प मिलेंगे। निदेशक डॉ. निधीश मिश्रा ने बताया कि हृदय रोग सहित सभी विभागों में एक ही छत के नीचे समग्र इलाज की व्यवस्था की गई है।
अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए घर जैसा आरामदायक माहौल, गुणवत्तापूर्ण भोजन और ठहरने की सुविधा भी दी गई है।
न्यूएरा हॉस्पिटल्स का यह नया अस्पताल मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।