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प्रधानमंत्री ने आरोप लगाये लोग उंचे पदों पर !

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  • स्लग- पहले भ्रष्टाचार करों, फिर सीएम बनो

मुंबई – आज देश के अधिकतर राज्यों में भाजपा की सरकारे है. जिन लोगों पर प्रधानमंत्री ने आरोप लगाये वे लोग पहले कांग्रेस में थे. परंतु, जैसे ही वे भजपा में शामिल हुए उन्हें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. देखते है वे लोग कौन है.महाराष्ट्र- मोदी ने अजीत दादा पर सिंचाई घोटाले में 7 ह० हजार करोड़ रुपये का आरोप लगाया. मोदी ने उन्हें एक सप्ताह के भीतर उपमुख्यमंत्री बना दिया. आज उनकी पत्नी उपमुख्यमंत्री हैं.

असम- मोदी ने लुई बर्गर भ्रष्टाचार मामले में हिमंत बिस्वा सरमा पर आरोप लगाया – मोदी ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बना दिया.

बंगाल- सुवेंदु अधिकारी पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए, मोदी ने सिर्फ उन पर आरोप ही नहीं लगाया, उन्होंने बैठक में उनके रंगे हाथों पकड़े जाने का वीडियो भी दिखाया. आज मोदी ने सुवेंदु को बंगाल का मुख्यमंत्री बना दिया है.

बिहार– जब सम्राट चौधरी आरजेडी में थे, तब मोदी ने उन पर अपनी उम्र छिपाने और अन्य घोटालों का आरोप लगाया था. आज मोदी ने सम्राट चौधरी को भाजपा से बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया है.

उत्तरांचल- विजय बहुगुणा कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे. भाजपा ने उन पर बिल्डर लॉबी के साथ मिलीभगत करने और करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था. उन पर पुनर्वास में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया था. मोदी जी ने अब उन्हें उत्तरांचल का मुख्यमंत्री बना दिया है.

अरुणाचल प्रदेश- पेमा खांडू कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे. मोदी जी ने एक जनसभा में उन पर आरोप लगाए थे. बाद में मोदी जी ने उन्हें सभी विधायकों के साथ भाजपा में शामिल कर लिया. आज वे भाजपा के अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं.

त्रिपुरा- माणिक साहा त्रिपुरा में कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे. मोदी जी ने उन पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. आज माणिक साहा त्रिपुरा में भाजपा के मुख्यमंत्री हैं. मणिपुर- एन बीरेन सिंह मणिपुर में कांग्रेस के मुख्यमंत्री थ.।

भाजपा ने उन पर भी आरोप लगाए थे. आज मोदी जी ने उन्हें मणिपुर का मुख्यमंत्री बना दिया है. इसके अलावा, इस तरह से राज्य में आयात किए गए मंत्रियों की सूची इतनी लंबी है कि उसे लिखते-लिखते हाथ ही टूट जाएगा.

इसका मतलब यह है कि जो भी मुख्यमंत्री बनना चाहता है, उसे पहले मोदीजी से यह आरोप लगवाना चाहिए कि वह दूसरी पार्टियों से जमकर पैसा ले रहा है. फिर ‘मैं न खाऊंगा न दूंगा’ कहने वाले मोदीजी बाकी सब संभाल लेंगे.

आज, भारत के अस्सी प्रतिशत हिस्से पर शासन करने का दावा करने वाली भाजपा की कुल सोलह राज्यों में सरकार है और उनमें से सात राज्यों में उसने अपनी पार्टी के किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री पद पर नहीं बिठाया है. नतीजतन, आज आठ राज्यों में पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री

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AI क्षमता हासिल करने का नया फॉर्मूला, 4 रास्ते तय करेंगे कंपनी की रणनीति

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  • BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला

नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।

इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।

फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –

01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।

02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।

03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।

04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।

रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।

अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।

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विधान परिषद पदवीधर चुनाव की कल मतगणना,समर्थकों का उत्साह चरम पर

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  • मौदा तहसील में शांतिपूर्ण मतदान संपन्न, अरोली में 70.54%, खात में 76.70% वोटिंग

कोदामंडी – 26 October

विधान परिषद के पदवीधर मतदारसंघ के लिए हुए चुनाव की मतगणना कल मंगलवार 27 अक्टूबर को होंगी।

इससे पहले 23 अक्टूबर को हुए मतदान में मौदा तहसील में शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से वोटिंग हुई। अरोली स्थित बूथ क्रमांक 43 पर 370 में से 261 मतदाताओं ने मतदान किया। अरोली में 70.54%, खात में 76.70%, मौदा के दो मतदान केंद्रों पर क्रमशः 78.98% और 72.37% मतदान दर्ज किया गया। मौदा तहसील में कुल 1910 पदवीधर मतदाता हैं।

तहसील में पदवीधर मतदाताओं के बढ़-चढ़कर मतदान करने से उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह चरम पर है।

अरोली में महायुति के उम्मीदवार सुधाकर कोहळे के समर्थन में लगाए गए बूथ पर महायुति के कई नेताओं ने भेंट दी। इनमें राज्यमंत्री आशीष जयसवाल, पूर्व विधायक टेकचंद सावरकर, भाजपा तहसील मौदा मंडल अध्यक्ष भगवान बावनकुळे, चाचेर मंडल अध्यक्ष रवी चव्हाण, शिवसेना तालुकाध्यक्ष प्रशांत भुरे, मौदा नगरपंचायत नगराध्यक्ष प्रसन्ना (राजा) तिडके,भाजयुमो जिल्हा उपाध्यक्ष संजू वाघमारे, पंचायत समिति के पूर्व उपसभापति खेमराज चाफले,पंढरी कडू, अरोली सर्कल के भाजपा नेता सदानंद निमकर, विष्णू देशमुख, रोशन उमप, कैलास समरीत, कोदामेंढी उपसरपंच गोपाल गिरमेकर सहित महायुति के अनेक पदाधिकारियों का समावेश था।

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धोबी-परीट समाज का संविधान चौक में अनशन का ऐलान, SC जैसी सुविधाओं की मांग

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  • डॉ. भांडे समिति की सिफारिश के बावजूद आरक्षण से वंचित होने का आरोप, 27 अक्टूबर से उपोषण और श्रृंखला उपोषण शुरू करने की घोषणा, विशेष जीआर निकालने की मांग

नागपुर, 26 अक्टूबर :

महाराष्ट्र के धोबी (परीट) समाज को आरक्षण संबंधी सुविधाएं देने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से नागपुर के संविधान चौक में उपोषण और साखळी उपोषण शुरू करने का ऐलान किया गया है। समाज की प्रमुख मांग है कि जब तक अनुसूचित जाति की सूची में समावेश नहीं होता, तब तक राज्य सरकार विशेष बाब के तौर पर SC को मिलने वाली सभी आरक्षण सुविधाएं धोबी समाज को भी दे।

मांग : राज्य शासन द्वारा गठित डॉ. भांडे समिति की सिफारिश क्रमांक 3 के अनुसार महाराष्ट्र में धोबी, परीट जाति का अनुसूचित जाति में समावेश नहीं होता, तब तक अनु. जाति को मिलने वाली सभी आरक्षण की सुविधाएं खास बाब के तौर पर राज्य शासन तुरंत जीआर निकालकर दे।

आंदोलनकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र शासन ने 5 सितंबर 2001 को पूर्व मंत्री डॉ. डी.एम. भांडे की अध्यक्षता में अभ्यास समिति बनाई थी। समिति ने धोबी समाज की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन कर धोबी के साथ ही परीट, वरठी, रजक, वढ्ढी, मडवळ, मडलेवार और धोबा जैसी तत्सम जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की थी। साथ ही समावेश होने तक विशेष तरतूद के तहत समान सुविधा देने की भी सिफारिश की थी।

समाज का दावा है कि महाराष्ट्र राज्य निर्माण से पहले भंडारा और बुलढाणा जिलों में धोबी समाज को SC की सुविधाएं मिलती थीं, जो 1 मई 1960 को राज्य बनने के बाद बंद कर दी गईं। समाज की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय में कोई मूलभूत बदलाव नहीं होने के बावजूद सुविधाएं बंद हुईं। 1976 में SC-ST के लिए क्षेत्रीय बंधन हटने के बाद भी धोबी समाज का मुद्दा लंबित रहा।

समाज ने मांग की है कि मराठा और धनगर समाज के लिए लागू समकक्ष सुविधाओं की तर्ज पर धोबी-परीट समाज के लिए भी स्वतंत्र शासन निर्णय (जीआर) निकाला जाए।

ऐतिहासिक दस्तावेजों और भांडे समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन तुरंत निर्णय ले, ताकि शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में समान अवसर मिल सके।

नेतृत्व : समिति प्रमुख आशिषभाऊ कदम, समिति अध्यक्ष डी.डी. सोनटक्के, कार्याध्यक्ष राजेंद्र खैरनार, सुधीर खैरनार, मुरलीधर शिंदे, संतोष सवतीरकर, राहुल वरणकर।

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