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India

नागपूर जिल्ह्यात ई-वाहनांचा ‘सुसाट’ प्रवास!

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49 हजार ई-वाहनांना मिळणार जलद चार्जिंगची सुरक्षा

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नागपूर: वाढते प्रदूषण आणि सातत्याने वाढणाऱ्या इंधनाच्या दरामुळे सर्वसामान्यांचा ओढा आता ‘इलेक्ट्रिक वाहनांकडे’ (EV) वाढला आहे. नागपूर जिल्ह्यात ई-वाहनांच्या वाढत्या संख्येला बळ देण्यासाठी महावितरणने कंबर कसली असून, संपूर्ण जिल्ह्यात 307 सार्वजनिक ई-चार्जिंग स्टेशन्सचे सक्षम जाळे निर्माण केले आहे. यामुळे आता वाहनधारकांना चार्जिंग संपण्याच्या चिंतेपासून मोठी सुटका मिळाली असून जिल्ह्याचा ई-प्रवास अधिक सुखकर झाला आहे.

49 हजारांहून अधिक वाहने रस्त्यावर:

पर्यावरणपूरक वाहतूक व्यवस्थेला नागपूरकरांनी मोठी पसंती दिली आहे. सध्याच्या आकडेवारीनुसार, जिल्ह्यात एकूण 49 हजार 565 इलेक्ट्रिक वाहने धावत आहेत. ही वाढती संख्या विचारात घेऊन महावितरणने नागपूर जिल्ह्यात पायाभूत सुविधांचा वेग वाढवला आहे. घरगुती विजेवर चार्जिंग शक्य असले तरी, प्रवासादरम्यान किंवा तातडीच्या वेळी ‘फास्ट चार्जिंग’ची गरज असते. हीच गरज ओळखून जिल्ह्याच्या कानाकोपऱ्यात चार्जिंग पॉइंट्स उपलब्ध करून देण्यात आले आहेत.

महावितरणची ‘नोडल एजन्सी’ म्हणून महत्त्वाची भूमिका:

राज्य सरकारने इलेक्ट्रिक वाहन धोरणांतर्गत महावितरणला ‘नोडल एजन्सी’ म्हणून जबाबदारी दिली आहे. नागपूरसह राज्यातील सहा प्रमुख शहरांमध्ये प्रदूषण कमी करण्यासाठी ई-वाहनांचा वापर वाढवणे हे सरकारचे मुख्य उद्दिष्ट आहे. त्यानुसार, महावितरणकडून चार्जिंग स्टेशन्ससाठी प्राधान्याने वीज जोडणी दिली जात आहे. केवळ स्वतःची स्टेशन्स उभारणेच नव्हे, तर खासगी उद्योजकांनाही या क्षेत्रात उतरण्यासाठी महावितरण तांत्रिक सहकार्य करत आहे.

विभागावार चार्जिंग स्टेशन्सची उपलब्धता:

जिल्ह्यातील 307 स्टेशन्सचे जाळे अत्यंत नियोजनबद्ध पद्धतीने पसरलेले आहे यात नागपूर शहर मंडलातील महाल विभागात 84, काँग्रेस नगर विभागात 66, सिव्हील लाईन्स विभागात 45, बुटीबोरी विभागात 40 आणि गांधीबाग विभागातील 17 चार्जिंग स्टेशन्ससह  नागपूर ग्रामीण मंडलातील मौदा विभागात 26, सावनेर विभागात 16, काटोल विभागात 7 आणि उमरेड विभागात 6 चार्जिंग स्टेशन्स कार्यरत आहेत.

‘पॉवरअप ईव्ही’ ॲप ठरणार सोबती:

वाहनचालकांना त्यांच्या जवळचे चार्जिंग स्टेशन कुठे आहे, हे शोधण्यासाठी आता वणवण करण्याची गरज नाही. महावितरणच्या ‘पॉवरअप ईव्ही’ (PowerUp EV) या मोबाईल ॲपमुळे चालक नकाशावर आपल्या जवळचे स्टेशन शोधू शकतात, स्लॉट बुक करू शकतात आणि सुलभपणे चार्जिंग करू शकतात.

उद्योजकांसाठी मोठी संधी:

इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन सुरू करू इच्छिणाऱ्यांसाठी महावितरणने प्रक्रिया अत्यंत सुलभ केली आहे. स्वतंत्र वेबसाईटच्या माध्यमातून अर्ज करण्याची सोय उपलब्ध असून खासगी कंपन्या, पेट्रोलियम कंपन्या, गृहनिर्माण संस्था (Housing Societies) आणि वैयक्तिक ग्राहकही यामध्ये सहभाग घेऊ शकतात. महावितरण यासाठी लागणारी सर्व तांत्रिक मदत पुरवण्यास तत्पर असल्याची माहिती महावितरणतर्फे देण्यात आली आहे.

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AI क्षमता हासिल करने का नया फॉर्मूला, 4 रास्ते तय करेंगे कंपनी की रणनीति

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  • BCG फ्रेमवर्क पर आधारित रिपोर्ट में बताया – कम या ज्यादा डिफरेंशिएशन और उपलब्धता के आधार पर तय करें ADOPT, PARTNER, BUILD या BUY का रास्ता, छह सिग्नलों से परखें फैसला

नागपुर / नई दिल्ली, 26 अक्टूबर :

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को कंपनियां कैसे सुरक्षित करें, इसे लेकर एक नया स्ट्रैटेजिक मैप सामने आया है। रिपोर्ट का शीर्षक है – Differentiation and Availability Decide How to Secure AI Capabilities।

इसमें कहा गया है कि हर AI जरूरत को एक ही मैप पर प्लॉट करें और फिर छह सिग्नलों से उसके रास्ते को परखें।

फ्रेमवर्क में चार मॉडल बताए गए हैं –

01 ADOPT (लो डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : तैयार टूल को सीधे अपनाएं, जैसे एम्प्लॉई को-पायलट या डॉक्यूमेंट हैंडलिंग। इसमें स्टैंडर्ड इंटीग्रेशन, कम संवेदनशीलता और सस्ती सर्विस होती है। मैसेज है – कमोडिटी को ओन करने से लागत बढ़ती है, फायदा नहीं।

02 PARTNER (लो डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : एक्सेस लेकर साथ मिलकर टेलर करें, जैसे वेंडर को-डेवलपमेंट। पार्टनर की विशेषज्ञता मजबूत होती है और गवर्नेंस की जरूरत पूरी होती है। मैसेज – टेलर्ड एक्सेस ओन करने से बेहतर हो सकता है।

03 BUILD (हाई डिफरेंशिएशन, वाइडली अवेलेबल) : अपनी टीम और संसाधन से खुद बनाएं, जैसे प्रोपराइटरी डेटा पर फोरकास्टिंग या कंपनी-IP को-पायलट। इसमें टाइट इंटीग्रेशन से वैल्यू बनती है। मैसेज – कस्टम काम को अपनी कीमत वसूलनी चाहिए।

04 BUY (हाई डिफरेंशिएशन, लिमिटेड अवेलेबल) : दुर्लभ एसेट को ही खरीद लें, जैसे प्रोपराइटरी एक्सटर्नल डेटा या स्पेशलिस्ट टीम। जब एक ही टारगेट यूनिक परफॉर्म करे तो कंट्रोल IP और सिस्टम से जुड़ा होता है। मैसेज – ओन करने का फायदा किराए पर लेने से ज्यादा होना चाहिए।

रिपोर्ट में हर रास्ते को परखने के लिए छह सिग्नल – Differentiation, Integration, Urgency, Economics, Market और ऑप्शनालिटी बताए गए हैं।

अंत में लीडर रूल दिया गया है – सबसे हल्का कमिटमेंट चुनें जो फिर भी क्षमता को सुरक्षित करे। यहां BUY का मतलब एक्विजिशन है, सब्सक्रिप्शन नहीं।

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क्या गडकरी की पाठशाला के शिष्यों को फडणवीस दे रहे हैं राजनीतिक वनवास ?

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  • राजनीतिक विश्लेषक किशोर तिवारी का बड़ा सवाल – मुनगंटीवार का मंत्रिमंडल से बाहर रहना संयोग या सत्ता के केंद्रीकरण का पैटर्न, खडसे-तावडे से लेकर खोपडे तक पुराने कार्यकर्ताओं में बेचैनी, संघ की सामूहिक नेतृत्व परंपरा पर उठे सवाल

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

महाराष्ट्र भाजपा के अंदर चल रही असहज खामोशी पर वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक किशोर तिवारी ने एक तीखा विश्लेषणात्मक लेख लिखकर सत्तारूढ़ नेतृत्व से सात सीधे सवाल पूछे हैं। लेख का मूल प्रश्न है – नितीन गडकरी ने जिन्हें गढ़ा, क्या उन्हीं को देवेंद्र फडणवीस राजनीतिक वनवास में भेज रहे हैं ?

तिवारी लिखते हैं, यह सवाल सिर्फ सात बार विधायक रहे सुधीर मुनगंटीवार तक सीमित नहीं है। यह जनसंघ, ABVP, संघ और भाजपा को खून-पसीने से सींचने वाले हजारों निष्ठावान कार्यकर्ताओं के राजनीतिक अस्तित्व का सवाल है। ‘सुपर भारत’ में छपी खबर ‘सुधीर मुनगंटीवार कितने दिन राजनीतिक वनवास भुगतेंगे ?’ इसी बेचैनी को आवाज देती है।

गडकरी की पाठशाला और फडणवीस का उदय –
लेख में तिवारी याद दिलाते हैं कि नितीन गडकरी सिर्फ नेता नहीं, कार्यकर्ता गढ़ने वाले व्यक्तित्व थे। देवेंद्र फडणवीस का नागपुर महापौर से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर गडकरी के राजनीतिक समर्थन के बिना नहीं समझा जा सकता। उस दौर में एकनाथ खडसे, मुनगंटीवार, विनोद तावडे जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे, फिर भी गडकरी ने नई पीढ़ी को आगे लाने की उदारता दिखाई।

तिवारी का सवाल है – जिन्होंने आपके लिए राजनीतिक रास्ता खोला, क्या आज उन्हीं के साथियों के लिए दरवाजे बंद हो रहे हैं ?

खडसे, तावडे, मुनगंटीवार से खोपडे तक – संयोग या पैटर्न ?
लेखक सवालों की झड़ी लगाते हैं –
एकनाथ खडसे को भाजपा क्यों छोड़नी पड़ी ?
विनोद तावडे को महाराष्ट्र की सत्ता से दूर राष्ट्रीय संगठन में क्यों जाना पड़ा ?
मुनगंटीवार को मंत्रिमंडल के बाहर क्यों रखा गया ?
चंद्रशेखर बावनकुले के उतार-चढ़ाव, कृष्णा खोपडे, गिरीश व्यास, माधव भंडारी, केशव उपाध्ये, डॉ. उपेंद्र कोठेकर, गिरीश देशमुख जैसे संगठन की परंपरा से जुड़े नामों की वर्तमान स्थिति क्या इत्तेफाक है ?

तिवारी कहते हैं, पद सबको मिले हैं, लेकिन मूल प्रश्न है – क्या गडकरी के करीबी माने जाने वाले कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में न्यायोचित स्थान मिल रहा है ? महाराष्ट्र के हर जिले में जनसंघ के कठिन दिनों में, आपातकाल में जेल भुगतने वाले, घर-परिवार दांव पर लगाकर संगठन खड़ा करने वाले पुराने स्वयंसेवक आज उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

मोदी-शाह के समर्थन से एक नेतृत्व की मोनोपॉली ?
तिवारी लिखते हैं, फडणवीस के पास आज सत्ता और संगठन दोनों की ताकत है, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का खुला समर्थन प्राप्त है। लेकिन क्या इस समर्थन का इस्तेमाल पुरानों को जोड़ने के लिए हो रहा है या वैकल्पिक नेतृत्व को कमजोर करने के लिए ?

कभी सामूहिक नेतृत्व, कार्यकर्ता का सम्मान और वैचारिक निष्ठा का आग्रह करने वाली भाजपा में आज निष्ठा का पैमाना क्या है – पार्टी के लिए किया गया त्याग या मौजूदा सत्ता केंद्र से निकटता ?

संघ संस्कार या सत्ता का अहंकार ?
संघ में व्यक्ति से बड़ा संगठन, पद से बड़ा कार्य माना जाता है। फिर संघ के संस्कारों से निकले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा क्यो?

“पार्टी में अनुशासन होना चाहिए, लेकिन अनुशासन का मतलब मौन नहीं। निष्ठा होनी चाहिए, लेकिन निष्ठा का मतलब व्यक्तिपूजा नहीं। और नेतृत्व होना चाहिए, लेकिन नेतृत्व का मतलब एकाधिकार नहीं!” – तिवारी लिखते हैं।

फडणवीस से अपील और सात सीधे सवाल –
लेखक स्पष्ट करते हैं कि फडणवीस के कर्तृत्व को कम आंकना मकसद नहीं। लेकिन कोई भी नेतृत्व शून्य से नहीं बनता। गडकरी ने कई लोगों को मौका दिया, वही उदारता अब फडणवीस से अपेक्षित है।

अंत में तिवारी ने सात सवाल पूछे हैं :

  1. सात बार चुने गए मुनगंटीवार को मंत्रिमंडल से बाहर रखने का राजनीतिक कारण क्या है ?
  2. क्या गडकरी के करीबी कार्यकर्ताओं के लिए अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं ?
  3. खडसे, तावडे जैसे वरिष्ठों के राजनीतिक मोड़ में संगठन का निर्णय कितना और आंतरिक सत्ता संघर्ष कितना ?
  4. नागपुर-विदर्भ के पुराने संघनिष्ठ कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिल रहा है क्या ?
  5. क्या वरिष्ठ नेताओं को मतभिन्नता रखने की स्वतंत्रता बची है ?
  6. मोदी-शाह नेतृत्व में महाराष्ट्र में सामूहिक नेतृत्व की परंपरा टिकेगी क्या ?
  7. जिन्होंने फडणवीस को गढ़ने में मदद की, उन्हीं के साथियों को आज अस्तित्व के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है ?

तिवारी का निष्कर्ष है – “यह सिर्फ मुनगंटीवार की पीड़ा नहीं, यह भाजपा की पुरानी पीढ़ी के सम्मान का सवाल है। सत्ता स्थायी नहीं होती, पर संघर्ष से खड़े हुए कार्यकर्ता ही किसी भी दल की असली नींव होते हैं। इतिहास में सत्ता के साल नहीं गिने जाते, सत्ता में रहते हुए आपने साथियों से कैसा व्यवहार किया, यह दर्ज होता है।”

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वेकोलि में ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ के संदेश के साथ सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ

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  • सीएमडी डॉ. हेमंत शरद पांडे ने दिलाई शपथ, डिजिटल पारदर्शिता और नैतिक कार्यसंस्कृति पर जोर, मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में होंगे विविध कार्यक्रम

नागपुर, 26 अक्टूबर 2026 :

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 का शुभारंभ आज दिनांक 26.10.2026 को ‘सत्यनिष्ठा से समृद्धि’ की थीम के साथ किया गया।

वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत शरद पांडे ने कंपनी मुख्यालय में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता जागरूकता की शपथ दिलाकर सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक (वित्त एवं मानव संसाधन) श्री बिक्रम घोष, निदेशक (तकनीकी/परिचालन एवं योजना) डॉ. अंजनी कुमार तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सीएमडी ने दिया पारदर्शिता और नैतिकता का संदेश –
अपने संबोधन में डॉ. हेमंत शरद पांडे ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को अपने कार्यों का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर सतर्कता के प्रति सदैव सजग रहना और प्रत्येक दायित्व का निर्वहन सकारात्मक दृष्टिकोण, पारदर्शिता एवं जिम्मेदारी के साथ करना आवश्यक है। सभी को अपने आचरण एवं कार्यप्रणाली में उच्च नैतिक मानदंडों का पालन करते हुए सत्यनिष्ठा को कार्यसंस्कृति का अभिन्न अंग बनाना चाहिए।

डिजिटल प्रयासों से बढ़ी पारदर्शिता –
मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री अजय मधुकर म्हेत्रे ने अपने संबोधन में वेकोलि द्वारा पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे डिजिटल प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल पोर्टल्स के माध्यम से कार्यों में मैन्युअल हस्तक्षेप कम हुआ है तथा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है। डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग सुशासन एवं भ्रष्टाचार-मुक्त कार्यप्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत वेकोलि मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिनके माध्यम से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सतर्कता, नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

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